लिफ्ट देने और लेने के सिलसिले पर लगी ब्रेक

Noida Bureauनोएडा ब्यूरो Updated Wed, 01 Jul 2020 10:58 PM IST
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गुरुगाम। ट्रैफिक जाम और आवागमन के खर्चे से बचते हुए सहकर्मी के साथ ही कार्यस्थल तक पहुंचना लोगों के लिए हमेशा आसान रहा है। इससे ऑफिस टाइम में एक साथ सड़कों पर वाहनों के एकत्रित होने से भी बचा जा सकता है, लेकिन कोरोना संक्रमण ने इस सिलसिले को एक तरह से खत्म कर दिया है। अब कोरोना के डर से सहकर्मी एक दूसरे को लिफ्ट देने से साफ इनकार कर रहे हैं। लिफ्ट के जरिये ही कार्यस्थल तक पहुंचने वाले लोगों के सामने बड़ी समस्या आ गई है। वहीं क्विक राइड के जरिये निजी कार चालकों ने दिल्ली व आसपास से गुरुग्राम पहुंच रहे लोगों को अपनी सेवाएं देना बंद कर दी हैं।
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अनलॉक-2 के बाद अधिकतर कार्यस्थलों में काम को फिर से पटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। गुरुग्राम की कंपनियों में फरीदाबाद, दिल्ली, मेवात जैसे शहरों से लोग सार्वजनिक बसों या लिफ्ट लेकर ही पहुंचते हैं। गुरुग्राम जैसे शहर के लिए बढ़ते हुए मामलों को देखकर लिफ्ट लेने की हिम्मत मुश्किल ही लोग जुटा पा रहे हैं। गुरुग्राम के सेक्टर में रहने वाले बहुत से लोग एक ही जगह काम करने पर वाहन शेयर करते रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। शहर में इफ्को चौक, शंकर चौक, एटलस चौक ऐसी जगह हैं जहां लोग लिफ्ट के लिए इशारा करते हुए नजर आते हैं। वहीं अब बहुत ही कम संख्या में लोग यहां लिफ्ट के लिए इशारा कर रहे हैं।
सार्वजनिक वाहनों की सवारी करने से बच रहे
शहर में अनलॉक से पहले ही ऑटो रिक्शा और निश्चित मापदंडों के आधार पर कैब चलना शुरू हो चुकी थीं। वहीं संक्रमण के बढ़ते फैलाव को देखते हुए लोगों को ऑटो रिक्शा, रिक्शा और कैब लेने में भी डर लग रहा है। कई लोग कैब में बैठने से पहले ही सिंगल सवारी की भी शर्त रख रहे हैं। सुरक्षा को देखते हुए वह ज्यादा किराया देने के लिए भी तैयार हो रहे हैं।
क्विक राइड सुविधा से लोग वंचित
कोरोना वायरस के फैलने से पहले हजारों लोग प्रतिदिन क्विक राइड के जरिये निजी कार चालकों के साथ गुरुग्राम आते थे। करीब 30 से 40 किलोमीटर के सफर के लिए वे मात्र 70 से 80 रुपये का ही भुगतान करते थे। इससे निजी कार चालकों का भी पेट्रोल खर्च निकल जाता था और साथी भी मिल जाता था। कोरोना के चलते अब निजी कार चालकों ने डर के कारण यह सेवा देनी बंद कर दी है।
पहले कार्यस्थल पर जाते समय अपने सहकर्मियों के साथ वाहन शेयर कर लेता था। अब ऐसा नहीं है। अब खुद का वाहन खरीदना पड़ा है। कोरोना के बाद बहुत से खर्चों में पेट्रोल का खर्चा बढ़ गया है।
-शुभव
सभी सहकर्मियों के पास अलग-अलग वाहन होने के बावजूद रूटीन से एक वाहन में जाना तय था। घर से ऑफिस तक का सबसे खास वक्त होता था, लेकिन अब सभी अलग अलग जाते हैं
- अजय कुमार
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