तब्लीगी जमात मामले में 15 देशों के नागरिकों को कोर्ट ने जुर्माना लगाकर रिहा किया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 14 Jul 2020 12:44 AM IST
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तब्लीगी जमात
तब्लीगी जमात - फोटो : PTI

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साकेत कोर्ट ने निजामुद्दीन मरकज में तब्लीगी जमात में शामिल होने के लिए नियमों का उल्लंघन करने वाले 14 देशों के नागरिकों को सोमवार को जुर्माना लगाकर रिहा कर दिया। इन आरोपियों पर कोविड-19 महामारी अधिनियम, वीजा नियम और सरकारी दिशा निर्देशों के उल्लंघन का आरोप है। इनके खिलाफ पुलिस ने हाल ही में आरोप पत्र दायर किए थे। इन आरोपियों की ओर से दायर समझौता याचिका के आधार पर इन्हें रिहा किया गया है, हालांकि पांच देशों के विदेशियों ने अदालत के सामने मुकदमे का सामना करने की बात कही गई है।
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महानगर दंडाधिकारी हिमांशु ने अल्जीरिया, बेल्जियम, ब्रिटेन, मिस्र और फिलिपींस के विदेशी नागरिकों को 10-10 हजार रुपये जुर्माना भरने के बाद रिहा करने की अनुमति दे दी। 
वहीं महानगर दंडाधिकारी आशीष गुप्ता ने सूडान के पांच नागरिकों को पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना राशि भरने के आधार पर रिहा करने की अनुमति प्रदान की। उधर, महानगर दंडाधिकारी पारस दलाल ने चीन, मोरक्को, यूक्रेन, इथिओपिया, फिजी, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, अफगानिस्तान के नागरिकों को पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना भरने पर रिहा करने की अनुमति दे दी। 
इन आरोपियों को रिहा करने की अनुमति तब दी गई जब मामले में शिकायतकर्ता लाजपत नगर के डिविजनल मजिस्ट्रेट, लाजपत नगर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, निजामुद्दीन के निरीक्षक ने कहा कि उन्हें आरोपियों की याचिका पर कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद अदालत ने उन्हें जुर्माना लगाकर रिहा करने का निर्णय लिया।

इसके अलावा मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गुरमोहिना कौर ने किर्गिस्तान के 85 नागरिकों को 10-10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर इन लोगों को जमानत दी। अदालत ने अब तक इस मामले में 34 देशों के 532 विदेशी नागरिकों को जमानत दी है।

पुलिस ने जून में इस मामले में 36 विभिन्न देशों के 956 विदेशी नागरिकों के खिलाफ 59 आरेाप पत्र दायर किए थे। इन आरोपियों की ओर से वकीलों आशिमा मंडला, मंदाकिनी सिंह और फहीम खान ने पैरवी की। उन्होंने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता के तहत जिन मामलों में अधिकतम सजा सात वर्ष है, जो अपराध समाज की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को प्रभावित नहीं करते हों और जो अपराध महिला अथवा 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के खिलाफ न हों, उनमें समझौता आवदेन के तहत सजा कम करने का प्रावधान है।
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