जेएनयू हिंसाः एसआईटी का मतलब जांच लटक गई

आशीष तिवारी, नई दिल्ली Updated Fri, 28 Feb 2020 06:19 AM IST
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जेएनयू के बाहर पुलिस
जेएनयू के बाहर पुलिस - फोटो : अमर उजाला

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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुए बवाल की जांच क्राइम ब्रांच की एसआईटी कर रही है। डेढ़ महीना गुजरने के बाद भी इस टीम को अब तक यह नहीं पता चल सका है कि मुंह पर कपड़ा लपेटे हुए नकाबपोश लोग आखिर कौन थे। दो महीने पहले अनाज मंडी में आग लगने से 47 लोगों की मौत हो गई थी। मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एसआईटी बनाई गई थी। 
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एसआईटी अब तक फरार आरोपी इमरान को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। इसी तरह से कुछ महीने पहले पुलिस और वकीलों के बीच झड़प की जांच भी दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एसआईटी को दी गई थी। जो अब तक बेनतीजा ही है। अब दिल्ली में हुए दंगों की जांच की जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच की एसआईटी को दी गई है।
एसआईटी का मतलब स्पेशल इंस्वेटीगेशन टीम होता है। मगर एसआईटी का मतलब केस को ठंडे बस्ते में डाल देना बनता जा रहा है। एसआईटी केस की जांच में सालों में लगा देती है। दिल्ली पुलिस के पूर्व अफसर भी कहते हैं कि एअसाईटी का मतलब केस को लटका देना है। दिल्ली में किसी भी बड़ी घटना की जांच की ज्यादातर जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच को ही दी जाती हैं। जो स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम बनाकर मामले की जांच करती है। 
अगर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की इन एसआईटी को सौंपे गए हाल के कुछ मामलों को देखा जाए तो परिणाम शून्य ही रहा है। सीएए को लेकर जब दिल्ली में पहली बार बवाल शुरू हुआ और दरियागंज समेत दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में आगजनी और तोड़फोड़ हुई तो पुलिस ने तुरंत ही क्राइम ब्रांच की एसआईटी बना दी। 

डेढ़ महीने से ज्यादा का वक्त गुजर गया लेकिन अब तक एसआईटी के हाथ कुछ नहीं लगा। कुछ लोगों को गिरफ्तार कर खानापूर्ति कर ली है। ऐसे ही कुछ साल पहले बुराड़ी के एक घर में 11 लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस मामले में क्राइम ब्रांच की एसआईटी तो बना दी गई लेकिन अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है। 

दिल्ली पुलिस के रिटायर डीसीपी एलएन राव का कहना है कि एसआईटी बहुत विस्तार से जांच करती है। इससे लोगों का लगता है कि केस को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। एसआईटी का मायने केस को ठंडे बस्ते में डालना बनता जा रहा है। 
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