दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, पराली पर सुप्रीम कोर्ट काम कर रहा है अपना काम, केंद्र और राज्य भी करें

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Updated Fri, 23 Oct 2020 06:17 AM IST
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दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)
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दिल्ली हाईकोर्ट ने पंजाब व हरियाणा में पराली जलाने को लेकर कहा है कि इस पर सुप्रीम कोर्ट अपना काम कर रहा है, अब केंद्र और राज्य सरकारों को भी थोड़ा काम करना चाहिए। कोर्ट ने पराली जलाने के खिलाफ तुरंत कदम उठाने की मांगी वाली याचिका को सुनने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता का कहना था कि यदि इसे नहीं रोका गया तो कोरोना के मामले और बढ़ेंगे।
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चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने से रोकने पर राज्यों के कदम की निगरानी के लिए 16 अक्तूबर को अपने पूर्व न्यायाधीश एमबी लोकुर की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि यदि वह भी इस मामले पर सुनवाई करेगा तो विरोधाभासी आदेश पारित होने का खतरा हो सकता है।
केंद्र भी जलते कूड़े पर निगरानी रखे : हाई कोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और केंद्र सरकार को पराली व जलते कूड़े से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया है। इसलिए उनकी तरफ से इस मामले में नया निर्देश देना उचित नहीं होगा। अदालत ने पराली और कूड़ा जलने से हो रहे प्रदूषण के खिलाफ दायर की गई जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह बातें कहीं।

वकील सुधीर मिश्रा की ओर से साल 2015 में यह जनहित याचिका दायर की गई थी। जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश की मांग की गई थी। बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने 16 अक्टूबर को पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम. बी. लोकुर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। 

पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के कृषि क्षेत्रों में जलते हुए मल की निगरानी में सहायता के लिए राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) और भारत स्काउट्स एवं गाइड की तैनाती का भी आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि दिल्ली-एनसीआर के लोग बिना किसी प्रदूषण के ताजी हवा में सांस ले सकें। उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर वह भी इसी मुद्दे को सुनता है तो विरोधाभासी आदेश पारित होने का खतरा होगा।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने कहा कि गुरुवार को सूरज दिखाई नहीं दे रहा था। खराब हवा की गुणवत्ता के कारण राष्ट्रीय रा जधानी में आपातकाल जैसी स्थिति थी। उन्होंने एक समाचार रिपोर्ट का हवाला भी दिया। जिसमें कहा गया था कि कोविड संक्रमण से उबरने वाले लोगों के फेफड़े बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसे लोगों को सांस की समस्या हो रही है।

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