क्या घर-घर जाकर सर्वे करने से दिल्ली में रुक पाएगी संक्रमण की रफ्तार, विशेषज्ञों ने उठाए सवाल?

अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 25 Jun 2020 08:24 PM IST
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कोरोना वायरस की जांच के लिए सैंपल लेता स्वास्थ्य कर्मी।
कोरोना वायरस की जांच के लिए सैंपल लेता स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : PTI (File)

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सार

  • हर घर की ट्रेसिंग से मौजूदा समय में सभी कोरोना मरीजों के सामने आ जाने की संभावना
  • हर जिले में एक हजार से 1500 लोगों की टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच करेंगी

विस्तार

सरकार ने 27 जून से 6 जुलाई के बीच दिल्ली के हर घर का सर्वे करने का निर्णय किया है, जिससे इस समय कोरोना के सभी मरीज सामने आ सकें। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद राजधानी में कोरोना के सभी मरीज सामने आ जाएंगे और यह दिल्ली में कोरोना का सर्वोच्च पॉइंट हो सकता है।
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लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि घरों की ट्रेसिंग के बाद भी कोरोना का सर्वोच्च बिंदु सामने नहीं आ सकता है। इससे केवल इस समय संक्रमण की स्थिति का पता चल सकता है। इस प्रक्रिया से कम्युनिटी ट्रांसमिशन और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की स्थिति की सही जानकारी भी मिल जायेगी।
 
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉक्टर एनएन माथुर ने अमर उजाला से कहा कि हर घर तक कोरोना संक्रमित लोगों की ट्रेसिंग करने के बाद हम और अधिक लोगों तक संक्रमण पहुंचने की स्पीड कम कर पाएंगे, लेकिन इसके बाद भी कोरोना का सर्वोच्च बिंदु सामने नहीं आ सकता है।

कोरोना के सर्वोच्च बिंदु की जानकारी केवल तभी मिल पाएगी, जब एक न्यूनतम निश्चित समय तक कोरोना की संख्या बढ़ने की बजाय लगातार कमी की ओर जाती दिखे। फिलहाल, यह तीन से चार हजार के बीच में लगातार बढ़ रही है।

घर-घर ट्रेसिंग का लक्ष्य

अनुमान है कि दिल्ली की आबादी लगभग दो करोड़ तक पहुंच चुकी है। वैध-अवैध कुल मिलाकर 45 लाख से अधिक मकानों में ये लोग रहते हैं। दिल्ली सरकार के निर्णय के मुताबिक इनकी स्क्रीनिंग के लिए 15 हजार टीमें बनाई जाएंगी, जिनमें कुल मिलाकर 55 हजार से अधिक लोगों को लगाया जाएगा।

हर जिले में एक हजार से 1500 लोगों की टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच करेंगी। शनिवार 27 जून से 6 जुलाई के बीच यह स्क्रीनिंग प्रोसेस पूरा किया जाना है। समय की कमी को देखते हुए इसे कठिन काम माना जा रहा है।
 
इसके पहले ही कोरोना कंटेनमेंट जोन के हर घर के सर्वे को 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसका काम इस समय चल रहा है। इसके लिए रोजाना 18-20 हजार एंटीजन-आरटी-पीसीआर टेस्ट किए जा रहे हैं।

बहुत बड़ा चैलेंज

दिल्ली सरकार के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक, कोरोना संक्रमण फैलने में लोगों की आवाजाही पर लगाम न लग पाना सबसे बड़ा कारक साबित हुआ था। अब झुग्गी-झोपड़ी की संकरी गलियों तक पहुंचकर हर घर का सर्वे करना बड़ा चैलेंज साबित होने जा रहा है।

लेकिन तीन से चार लोगों की टीम बनाकर इन्हें लोगों के घर-घर में भेजा जाएगा। इसके लिए स्वयं सेवकों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है जो इस काम को अंजाम तक पहुंचाएंगे।
 
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