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एथिकल हैकिंग की दुनिया में शुभम गुप्ता बने जाना-पहचाना नाम, बताया कहां से मिली प्रेरणा

भारत के एक छोटे से शहर में जन्मे शुभम गुप्ता एथिकल हैकिंग की दुनिया में जाना-पहचाना नाम हैं। हालांकि आज के दौर में भी एथिकल हैकिंग को लोग करीब से नहीं...

20 जुलाई 2020

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Digital Edition

21 अक्तूबर से सड़कों पर दिखेगा रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान, पूरी दिल्ली में तैनात होंगे 2500 मार्शल

दिल्ली सरकार रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान को जमीनी स्तर पर ले जा रही है। 21 अक्तूबर से 15 नवंबर के बीच दिल्ली के व्यस्ततम ट्रैफिक सिग्नल पर वाहन बंद करने के लिए लाल गुलाब देकर गांधीगिरी की जाएगी। इसके लिए 100 चौराहों की पहचान की गई है। सुबह 8 से रात 8 बजे के बीच यहां तैनात पर्यावरण मार्शल अभियान का आगे बढ़ाएंगे। पूरी दिल्ली के लिए 2,500 मार्शल की नियुक्त होगी।

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बताया कि अभियान के तहत चालान काटने की कार्रवाई नहीं होगी। पहले तीन दिन सिग्नल पर वाहन चालकों को लाल गुलाब का फूल देकर गांधीगिरी के माध्यम से वाहन बंद करने की अपील करेंगे। अभियान के केंद्र में ट्रैफिक पुलिस की तरफ से पहचान किए गए 100 व्यस्त चौराहे होंगे। मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए सरकार 2500 पर्यावरण मार्शल नियुक्त कर रही है।

गोपाल राय के मुताबिक, दो शिफ्ट में चलने वाले अभियान के दौरान हर चौराहे पर 10-10 मार्शल तैनात होंगे। जबकि आईटीओ समेत 10 सबसे व्यस्त चौराहों पर इनकी संख्या दोगुनी होगी। स्थानीय एसडीएम, ट्रैफिक पुलिस के एसीपी और परिवहन विभाग के डीसी (प्रवर्तन) मॉर्शलों पर नजर रखेंगे।

गोपाल राय ने बताया कि मुहिम पूरी तरह अराजनीतिक होगी। इसके लिए सरकार दिल्ली के सभी सांसद, विधायक, पार्षद, राजनीतिक दल, आरडब्ल्यूए, औद्योगिक व सामाजिक संगठनों और एनजीओं को पत्र लिख कर अभियान में शामिल होने की अपील करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह देश में एक नया रोल मॉडल खड़ा करेगा।
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पर्यावरण मंत्री गोपाल राय पर्यावरण मंत्री गोपाल राय

दिल्ली-एनसीआर में हवा की गति बढ़ने से हवा थोड़ी सुधरी, पर खराब श्रेणी से बाहर नहीं निकल पाई

दिल्ली-एनसीआर में हवा की गति बढ़ने से सोमवार को हवा में प्रदूषण के स्तर में मामूली कमी दर्ज की गई है। दस अंकों के सुधार के साथ 24 घंटे में वायु गुणवता सूचकांक 254 से 244 पर पहुंच गया। हालांकि, सूचकांक अभी भी खराब स्तर में बना हुआ है। सफर का पूर्वानुमान है कि मौसमी बदलावों से बुधवार व बृहस्पतिवार को सूचकांक बेहद खराब स्तर चले जाने का अंदेशा है।

सफर का आकलन है कि सोमवार सुबह सतह पर चलने वाली हवा की चाल में तेजी आई। इससे प्रदूषण में कमी का संयोग बना, लेकिन रविवार को पंजाब, हरियाणा व पड़ोसी इलाकों में पराली जलाने की 1090 मामले दर्ज हुए थे। हरियाणा की तरफ से भी हवा दिल्ली पहुंच रही थी।

इससे दिल्ली के प्रदूषण में पराली के धुएं के बढने का अंदेशा था, लेकिन ऊपरी सतह पर चलने वाली हवा की चाल तेज होने से यह संभव नहीं हुआ। ऐसे में पराली के धुएं का हिस्सा रविवार के 17 फीसदी की तुलना में सोमवार को दस फीसदी ही रह गया। नतीजतन हवा की गुणवत्ता में मामूली सुधार हुआ। सफर का पूर्वानुमान है कि मंगलवार को भी हवा की गुणवता में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। सतह पर चलने वाली हवाओं की दिशा बदलने से बुधवार से वायु गुणवत्ता ज्यादा खराब हो सकती।

कहां कितना रहा एक्युआई
फरीदाबाद 254
गाजियाबाद 253
गुरुग्राम 245
दिल्ली 244
ग्रेटर नोएडा 238
नोएडा 236
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खास खबर : खेल के मैदान में लौटे खिलाड़ी तो खुला सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी का रास्ता

कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। अनगिनत लोग इस वैश्विक महामारी से प्रभावित हुए हैं। इस बीच ना जाने कितने लोगों की रोजी रोटी का जरिया बंद हो गया। लॉकडाउन के दौरान लगभग 6 महीने मैदान पर खेल पूरी तरह बंद था। इस कारण खिलाड़ियों को विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है।

क्रिकेट के मैदान पर अंपायरिंग करने वाले, स्कोरर, ग्राउंड मैन, किराए पर खेल का मैदान मुहैया कराने वाले, बॉल बनाने वाले, खिलाड़ियों के लिए ड्रेस बनाने वाले ऐसे तमाम लोगों के सामने दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने का संकट पैदा हो गया था। अब अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद खिलाड़ी फिर से मैदान पर लौटने लगे हैं तो मैदान से जुड़े इन लोगों की रोजी रोटी का रास्ता भी फिर से खुलने लगा है।

लॉकडाउन में परिवार चलाने के लिए बेचनी पड़ी कार
मौजूदा समय राजोकरी के एक क्रिकेट मैदान पर अंपायरिंग कर रहे के. के. तिवारी 1985 से खेल के मैदान पर काम कर रहे हैं। खास बातचीत के दौरान के. के. तिवारी ने लॉकडाउन के दौरान के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि 19 मार्च को उन्होंने लीग मैच के लिए अंपायरिंग की थी। जिसके बाद वह लगभग 6 महीना बैठे रहे। लेकिन सरकार की ओर से मैदान पर खेल शुरू करने का आदेश मिलने के बाद सितंबर में उन्हें 16 दिन काम मिला था। लेकिन अक्तूबर में उनके पास अब तक कोई काम नहीं है। जबकि कोरोना महामारी से पहले दिल्ली भर में रोजाना दो सौ से ढाई सौ मैच होते थे। रविवार, शनिवार और छुट्टियों के दिन तो करीब 400 मैच तक होते थे। ऐसे में महीने के 30 दिन उनके हाथ में काम रहता था। कई बार तो उन्हें एक दिन में 3-3 मैच में अंपायरिंग करने का मौका मिल जाता था। जिससे महीने में अच्छी आमदनी हो जाती थी। लेकिन लॉकडाउन के दौरान 24 वर्षीय बेटी की भी नौकरी चली गई। इस दौरान उन्होंने किसी तरह चार महीना घर चलाने की कोशिश की। लेकिन बाद में मजबूरन उन्हें अपनी कार बेचनी पड़ी।

फिर से खुल रहा है रोजी रोटी का रास्ता
लल्लन प्रसाद दिल्ली में छोटे बड़े खेल के मैदानों और स्कूल के मैदानों पर क्रिकेट की पिच और विकेट बनाते हैं। लॉकडाउन से पहले उन्हें इस काम के लिए लगभग 20 हजार रुपये महीने आमदनी हो जाती थी। लेकिन कोरोना महामारी काल में उनके हाथ से काम छिन गया। फिर से खेल शुरू होने के बाद उन्हें दक्षिण दिल्ली के ओम साईं क्रिकेट अकादमी में फिर से पिच बनाने का काम मिला है।

एस. के. तिवारी भी दिल्ली में क्रिकेट के मैदान पर स्कोरर का काम करते हैं। कोरोना महामारी में उनके हाथ से भी काम छिना तो अब तक नहीं मिला है। राजोकरी में किराए पर क्रिकेट का मैदान मुहैया कराने वाले संजय सिंह का लॉकडाउन में आमदनी के सभी रास्ते बंद हो गए। अब फिर से मैदान पर खेल शुरू हुए तो सितंबर में उनके मैदान पर चार मैच हुए थे। जबकि इस महीने अक्तूबर में अब तक केवल दो मैच हुए हैं। उन्होंने बताया कि पहले एक महीने में उनके मैदान पर लगभग 25 मैच होते थे। लेकिन अभी खिलाड़ी मैदान पर खेलने से कतरा रहे हैं। फिर भी रोजी रोटी का रास्ता फिर से खुलता नजर आ रहा है।
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कांटेक्ट ट्रेसिंग में 5 फीसदी ही मिले संक्रमित, दिल्ली में संक्रमण का प्रसार हुआ धीमा

राजधानी में कोरोना की एक और लहर आने के कयासों के बीच कोरोना संक्रमितों के संपर्क में आए 2 लाख लोगों की पहचान कर की गई जांच में महज पांच फीसदी यानी दस हजार लोगों में ही संक्रमण की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने कम लोगों में संक्रमण फैलना राहत की बात है। इससे पता चलता है कि वायरस का प्रसार तेज गति से नहीं हो रहा है।

स्वास्थ्य विभाग संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान के लिए कांटेक्ट ट्रेसिंग अभियान चला रहा है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ दिन पहले विभाग ने आदेश जारी कर सभी रेड जोन में दोगुना जांच करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद कोरोना संक्रमितों के संपर्क में आए दो लाख लोगों की पहचान की गई। इन सभी के एंटीजन और आरटी-पीसीआर प्रणालियों से टेस्ट किए गए। जांच में कोरोना के लक्षण और बिना लक्षण वाले सभी लोगों को शामिल किया गया था। इनमें दस हजार में संक्रमण की पुष्टि हुई है।

एम्स के डॉक्टर विक्रम बताते हैं महज 5 फीसदी लोगों में वायरस का फैलना यह दर्शाता है कि अब संक्रमण का प्रसार तेज गति से नहीं हो रहा है। इसका एक बड़ा कारण यह भी अधिकतर संक्रमित बेहद कम लक्षण वाले हैं। उनमें वायरल लोड काफी कम है।

मौत की संख्या कम करने के लिए हाई रिस्क ग्रुप पर विशेष नजर
विभाग के अधिकारी ने बताया कि कंटेनमेंट जोन में रहने वाले वरिष्ठ नागरिक और जो लोग पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, उनका विशेष रूप से ख्याल रखा जा रहा है। इन रोगियों को कुछ समस्या होती है तो तत्काल उन्हें अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता है।

फोन करके अपने इलाके में लगवा सकते हैं जांच शिविर
राजधानी में सभी जिलों में कोरोना जांच के लिए शिविर लगाए गए हैं। शिविर में कोई भी व्यक्ति अपनी जांच करा सकता है। इनमें दक्षिणी जिला प्रशासन ने खास व्यवस्था शुरू की है। प्रशासन की वेबसाइट पर दिए गए फोन नंबर पर संपर्क करके कोई भी व्यक्ति अपने इलाके में जांच शिविर की व्यवस्था करा सकता है।
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उमर खालिद को पर्याप्त सुरक्षा देने का तिहाड़ जेल को निर्देश

कोरोना वायरसः जांच के नमूने लेते कर्मचारी
जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को जेल में पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश सोमवार को अदालत ने तिहाड़ जेल प्रशासन को दिया। उमर खालिद को दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उमर खालिद को गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (यूएपीए) में गिरफ्तार किया है। वह 22 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में है।

कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि जेल के नियमों के तहत बिना भेदभाव के खालिद को पर्याप्त सुरक्षा देने के लिए कदम उठाए जाएं। अदालत ने आरोपी के आवेदन पर सुनवाई के बाद यह निर्देश दिया। उमर ने अपने आवेदन में जेल में पर्याप्त सुरक्षा देने की मांग की है, ताकि न्यायिक हिरासत में उन्हें कोई नुकसान न पहुंचाया जाए।

अदालत ने 17 अक्तूबर को अपने आदेश में कहा कि जेल नियमों के तहत खालिद को रोजाना की दिनचर्या का पालन करने दिया जाए। अदालत ने कहा चूंकि आरोपी न्यायिक हिरासत में है। इसलिए नियम संख्या 1401 सहित जेल के नियम जो अन्य कैदियों पर लागू हैं, वे आवेदक (खालिद) पर भी लागू होते हैं।

नियम के मुताबिक विचाराधीन कैदी को अल सुबह अपना प्रकोष्ठ छोड़ने, स्वैच्छिक आधार पर काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए और अखबार, पुस्तकालय की पुस्तकें आदि उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उमर के वकील त्रिदीप पाइस ने पहले अदालत से कहा था कि उनके मुवक्किल पर कई बार हमले हो चुके हैं और जेल में उसकी सुरक्षा को खतरा है।
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केस डायरी के तथ्यों को प्रसारित नहीं कर सकता न्यूज चैनल: हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगे से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा के इकबालिया बयान को प्रसारित करने के मामले में निजी न्यूज चैनल (जी न्यूज) को खबर का स्रोत बताने के लिए एक और मौका दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टीवी चैनल के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए एक बार फिर खबर का स्रोत चैनल से पूछा।

न्यायमूर्ति विभु बाखरू की एकल पीठ ने तन्हा की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यूज चैनल से कहा कि अभियुक्त का बयान जो पब्लिक के लिए नहीं है, उसे प्रसारित नहीं किया जा सकता। पीठ ने पूछा कि आरोपी का इकबालिया बयान उनके रिपोर्टर को कहां से मिला। पीठ ने यह भी कहा कि पत्रकारों को केस डायरी को बाहर निकालने और उसे प्रकाशित करने का अधिकार नहीं है।

इस पर चैनल की ओर से अपील की गई कि उन्हें रिपोर्टर का नाम बंद लिफाफे में देने की अनुमति दी जाए क्योंकि खुलेआम रिपोर्टर का नाम बताने से उसे या उसके परिवार को जान का खतरा हो सकता है। इसे कोर्ट ने खारिज करते हुए सुनवाई के लिए 23 अक्तूबर की तारीख तय कर दी।

तन्हा की ओर से दायर याचिका में जानकारी लीक करने का आरोप पुलिस पर लगाया गया है। वहीं पुलिस का कहना है कि उसकी ओर से कोई जानकारी लीक नहीं की गई। पुलिस मामले में विजिलेंस जांच भी शुरू कर चुकी है।

केस की पूछताछ से जुड़े बयान के मीडिया में प्रसारित होने से परेशान तन्हा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उसने दावा किया कि मीडिया में जानकारी लीक होने से निष्पक्ष जांच के अधिकार का हनन हो रहा है। हाईकोर्ट न्यूज चैनल समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म को मामले से जुड़ी जानकारी प्रकाशित या प्रसारित न करने का निर्देश दे चुकी है।
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जेल प्रशासन ने कहा गुलफिशा फातिमा के साथ नहीं किया गया दुर्व्यवहार

दिल्ली दंगा मामले में गिरफ्तार आरोपी एवं जेएनयू की छात्रा गुलफिशा फातिमा के आरोपों पर तिहाड़ जेल प्रशासन ने सोमवार को कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया। तिहाड़ जेल प्रशासन ने कहा गुलफिशा द्वारा लगाए गए प्रताड़ना के सभी आरोप गलत हैं।

कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने फातिमा की याचिका पर जेल प्रशासन से जवाब मांगा था। जेल प्रशासन ने कहा कि आरोपी छात्रा से किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया गया। याचिका में फातिमा ने आरोप लगाया था कि जेल में उनके साथ धर्म के आधार पर और मानसिक तौर प्रताड़ित किया जाता है। इस बाबत उन्होंने जेल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

जेल प्रशासन ने दावा किया कि फातिमा स्वयं जेल के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करती हैं। उनसे कई बार कहा गया कि वह कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार न करें। व्यवहार में सुधार लाने के लिए उन्हें कई सुधारात्मक दंड दिए गए हैं, लेकिन उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। आरोपी छात्रा द्वारा लगातार की जा रही शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें अलग बैरक में रखा गया था।

प्रशासन ने कहा कि 15 अक्तूबर तक वह जिस बैरक में थी, उसमें 48 मुस्लिम महिला कैदी भी थीं। उनमें से किसी ने इस तरह की शिकायत नहीं की। याचिकाकर्ता ने दूध के ब्रांड बदलने की इच्छा जाहिर की थी, इस पर विचार करके ब्रांड को बदल दिया गया था। इससे पता चलता है उसके साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया।
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भाजपा पार्षदों ने जमकर किया भ्रष्टाचार, 2022 चुनाव में जनता लेगी हिसाब : दुर्गेश पाठक

आम आदमी पार्टी नेता व एमसीडी प्रभारी दुर्गेश पाठक ने भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों पर गंभीर आरोप लगाया है। सोमवार को उन्होंने एक प्रेस वार्ता कर कहा कि भाजपा के पूर्व पार्षदों ने जितना भ्रष्टाचार पिछले 10 वर्षों में किया था। उससे अधिक भाजपा के वर्तमान पार्षदों ने 4 साल में ही कर दिया। दिल्ली की जनता 2022 के एमसीडी चुनाव में इसका हिसाब भाजपा से लेगी।

दुर्गेश पाठक ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी दिल्ली नगर निगम में 14 सालों से है। भाजपा ने एमसीडी में भ्रष्टाचार के अलावा कोई भी काम नहीं किया है। भाजपा के पार्षद मालामाल और एमसीडी पूरी तरह से कंगाल होती रही है। इस बात को खुद भारतीय जनता पार्टी के सांसद और दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी ने माना है।

पाठक ने कहा कि तिवारी ने 2017 के एमसीडी चुनावों में अपने भ्रष्ट पार्षदों के टिकट काट कर नए चेहरों को मौका दिया था। लेकिन नए चेहरे भी भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा के पूर्व पार्षदों से आगे निकल गए। आदेश गुप्ता ने भी एक साक्षात्कार में स्वीकार किया है कि उनके पार्षद भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। अब दिल्ली की जनता एमसीडी के आने वाले 2022 के चुनाव में भाजपा से इसका हिसाब लेगी।
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कम समय में नियंत्रित किया जा सकता है पराली से होने वाला प्रदूषण, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी : केजरीवाल 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि मैं केंद्रीय पर्यावरण मंत्री की इस बात से सहमत हूं कि प्रदूषण एक दिन में ठीक नहीं हो सकता, इसके लिए कम से कम चार साल लगेंगे। अगर हम सारी सरकारें, सारी पार्टियां मिलकर राजनीति छोड़ के ईमानदारी के साथ लगे तो चार साल से काफी कम समय में प्रदूषण पर काबू पा सकते हैं।
 


उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि पराली से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को काफी कम समय में नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने समाधान दिए हैं। केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी नजर आ रही है।

केजरीवाल ने कहा कि मेरा निवेदन है कि हर महीने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के साथ केंद्रीय पर्यावरण मंत्री की बैठक होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पराली जलाने पर रोक और वायु प्रदूषण पर काबू के लिए प्रभावित राज्यों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका है।  केजरीवाल ने कहा कि फसल अवशेषों को जैव-अपघटित किया जा सकता है या उसे बायोगैस, कोयले और यहां तक कि कार्डबोर्ड में भी बदला जा सकता है।

उन्होंने कहा कि धान के पुआल को संपीडित (कंप्रेस) कर बायोगैस या कुकिंग कोल में बदला जा सकता है। हरियाणा के करनाल में कुछ कारखाने ऐसा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल अवशेषों को एक साल के भीतर अवसर में बदला जा सकता है, बशर्ते पराली जलाने पर रोक के लिए एक निश्चित समयसीमा हो। 
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