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दिल्लीः ऑनलाइन क्लास न कर पाने वाले बच्चों के लिए कांस्टेबल बने सहारा, मंदिर में ले रहे क्लास

दिल्ली पुलिस का एक कांस्टेबल कोरोना काल में जरूरतमंद बच्चों के लिए मदद का बड़ा हाथ बनकर सामने आया है। कांस्टेबल ने कोरोनाकाल के दौरान गरीब और जरूरतमंद...

20 अक्टूबर 2020

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Digital Edition

हिंसक झड़प के बाद मिली दिल्ली में प्रवेश और प्रदर्शन की अनुमति, किसानों ने जाने से किया इनकार

केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच करने वाले किसानों को आखिरकार राष्ट्रीय राजधानी में घुसने और बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की इजाजत दे दी गई। दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर पुलिस और किसानों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद केंद्र सरकार ने यह फैसला किया। हालांकि किसानों ने रामलीला मैदान में प्रदर्शन करने की इजाजत मांगी थी, जिसे सरकार ने देने से इनकार कर दिया। 

 इससे पहले, ‘दिल्ली चलो’ मार्च के तहत पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर इकट्ठा हुए। किसानों को दिल्ली में घुसने से रोकने दिल्ली पुलिस ने हरियाणा सीमा पर भारी संख्या में जवानों को तैनात किया था। सिंघु बॉर्डर पर किसानों को तितरबितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। इससे गुस्साए किसानों ने पुलिस पर पथराव किया और बैरीकेड तोड़ दिए। वहीं टीकरी बॉर्डर पर भी पुलिस और किसानों के बीच झड़प हुई। किसानों ने वहां अवरोधक के तौर पर खड़े ट्रकों को जंजीरों से ट्रैक्टर से बांधकर हटाने की कोशिश की। 

प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद गृहमंत्रालय के अधिकारियों ने किसान नेताओं से बात की। इसके बाद, दिल्ली पुलिस के पीआरओ ईश सिंघल ने बताया, किसान नेताओं से चर्चा के बाद आंदोलन कर रहे किसानों को बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति दी गई है। इसके बाद दोपहर करीब तीन बजे टीकरी बॉर्डर से किसानों को निरंकारी ग्राउंड ले जाया गया। हालांकि सिंघु बॉर्डर पर किसान देर शाम तक डटे रहे। 
 
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किसान बिल के खिलाफ प्रदर्शन किसान बिल के खिलाफ प्रदर्शन

पड़ोसी राज्यों की बारिश ने धोया दिल्ली-एनसीआर का प्रदूषण, 'औसत' श्रेणी में रहा वायु गुणवत्ता सूचकांक

पिछले कई दिनों से गंभीर से लेकर बहुत खराब श्रेणी में सांस ले रहे दिल्ली-एनसीआर के निवासियों ने पड़ोसी राज्यों में हुई बारिश की वजह से शुक्रवार को साफ हवा में सांस ली। पिछले 10 दिन में दूसरी बार दिल्ली की हवा का स्तर 137 के वायु गुणवत्ता सूचकांक के साथ औसत श्रेणी में रहा। साथ ही दिल्ली एनसीआर के शहरों में भी हवा का स्तर बहुत खराब श्रेणी से औसत श्रेणी में दर्ज किया गया।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, शुक्रवार को राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक 65 अंक लुढ़क कर 137 दर्ज किया गया। इससे एक दिन पहले यह आंकड़ा 302 रहा था, जबकि बुधवार को हवा का स्तर 413 के आंकड़े के साथ गंभीर श्रेणी में पहुंच गया था। यह 10 दिन में दूसरी बार है जब हवा का स्तर औसत श्रेणी में पहुंचा है। इससे पहले गत 17 नवंबर को दिल्ली की साफ हवा में लोगों ने सांस ली थी, जबकि 17 नवंबर से 42 दिन पहले 6 अक्तूबर को दिल्ली की हवा इतनी साफ रही थी। 

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु मानक संस्था सफर के अनुसार, प्रदूषण के लिए जिम्मेदार तत्व पीएम के स्तर में भी गिरावट दर्ज की गई है। इस कड़ी में पीएम 10 का स्तर 105 और पीएम 2.5 का स्तर 54 रहा। दोनों ही औसत श्रेणी में दर्ज किए गए हैं।

वहीं, पिछले 24 घंटों में दिल्ली के पड़ोसी राज्य हरियाणा, पंजाब और उतर प्रदेश में कुल 136 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसकी प्रदूषण में हिस्सेदारी महज 2 फीसदी रही। पिछले 24 घंटों की बात करें तो पीएम 10 का स्तर 251 और पीएम 2.5 का स्तर 150 रहा था। वहीं, पराली के धुएं की हिस्सेदारी भी सिर्फ 1 फीसदी दर्ज की गई थी, जबकि बुधवार कोई यह 2 फीसदी रही थी।

सफर के अनुसार, दिल्ली के पड़ोसी राज्य हरियाणा और पंजाब में हुई बारिश की वजह से दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को कम होने में मदद मिली है। यही वजह है हवा का स्तर गंभीर व बहुत खराब श्रेणी से सीधे औसत श्रेणी में पहुंचा है। साथ ही वेंटिलेशन इंडेक्स और हवा की तेज रफ्तार ने आसमान से प्रदूषण के तत्वों को कम करने में सहायता प्रदान की है। आगामी 2 दिनों के भीतर भी दिल्ली की हवा औसत से खराब श्रेणी के बीच बने रहने की संभावना बनी हुई है हालांकि, 2 दिन के बाद फिर से हवा का स्तर बिगड़ सकता है। 

दिल्ली- एनसीआर के आंकड़े
फरीदाबाद     134 
गाजियाबाद    166 
ग्रेटर नोएडा   129 
गुरुग्राम        107 
नोएडा         125
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15 तस्वीरों में देखें कैसा रहा किसानों और पुलिस के बीच संघर्ष का दूसरा पूरा दिन

नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब व हरियाणा से दिल्ली की तरफ कूच करने वाले किसानों का काफिला शुक्रवार सुबह सिंघु व बहादुरगढ़ बॉर्डर पर आ धमका। वहीं, किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस भी अपने लाव-लश्कर के तैनात थी। किसानों की बड़ी संख्या को देखते हुए पुलिस ने दोनों बार्डर सील कर दिए, लेकिन किसान जंतर मंतर पहुंचने से पहले रूकने को तैयार नहीं थे। इससे दोनों बार्डर पर पुलिस व किसानों के बीच टकराव हुआ। किसानों पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़ेने और पानी की बौछारें करने के साथ हल्का बल प्रयोग किया। जबकि किसानों की तरफ से पुलिस पर पत्थर फेंके गए। आगे तस्वीरों में देखें कैसा रहा किसानों का आंदोलन और किस तरह जाम से जूझे दिल्ली और आसपास के लोग..... 
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दिल्ली में कोरोना का कहरः नवंबर में अब तक 2364 मौतें, कोर्ट ने कहा- ये आंकड़े खतरनाक

हाईकोर्ट ने नवंबर माह में राजधानी में कोरोना से दो हजार से अधिक मरीजों की मौत पर बृहस्पतिवार को चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यह आंकड़ा खतरनाक है। हाईकोर्ट ने कोरोना से मौतों के लिए दिल्ली सरकार को बृहस्पतिवार को एक बार फिर आड़े हाथों लिया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में 2364 कोरोना मरीजों की मौत अब तक हो चुकी है। 
हाईकोर्ट ने राजधानी में बढ़ते कोरोना मरीजों तथा मौतों पर दिल्ली सरकार को 19 नवंबर को फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि हालात खराब हो रहे हैं और सरकार कछुआ चाल से चल रही है। 

न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने कहा राजधानी में नवंबर माह में ही दो हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा अपने आप में खतरनाक है। हाईकोर्ट ने कहा कई बार कहने और कई मौतों के बाद दिल्ली सरकार ने आरटी-पीसीआर जांच की संख्या बढ़ाई। दिल्ली सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि यह जांच बढ़ाकर 40 हजार प्रतिदिन कर दी गई हैं। 

शादियों में 50 लोगों के नियम को कैसे किया जा रहा लागू
हाईकोर्ट ने यह सवाल शादियों में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 50 करने पर दिल्ली सरकार से पूछा कि इस नियम को कैसे लागू करवाया जा रहा है? क्या इसके लिए कोई प्रोटोकोल निर्धारित किया गया है क्योंकि इस समय बहुत शादियां होती हैं। सरकार को कैसे पता होगा कि कौन उल्लंघन कर रहा है। यह जगह संक्रमण प्रसार न करें इसके लिए सरकार शादियों का औचक निरीक्षण करे और जुर्माना राशि के भुगतान के लिए सरकार एक पोर्टल बनाए। 

नकद जुर्माना लेने से बचे पुलिस व एजेंसियां
खंडपीठ ने कहा उल्लंघन करने वालों से नकद जुर्माना वसूली पर कहा कि मौजूदा समय में इससे बचना चाहिए और इसके लिए ई भुगतान की व्यवस्था होनी चाहिए। क्या सरकार के लिए इसके लिए कोई व्यवस्था की है और फिर लोगों को बेहद नजदीक जाकर ही नकद भुगतान करना होगा। महामारी के समय में लोगों से इसकी उम्मीद करना अनुचित है। 
हाईकोर्ट ने वहीं दिल्ली पुलिस व दूसरी एजेंसियों से कहा कि वह कोरोना नियमों का उल्लंघन करने वालों से नकद जुर्माना लेने से बचें। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से यह भी पूछा कि वह महामारी में शादियों में नियमों का उल्लंघन करने वालों से जुर्माना वसूलने और उसे उपयोग करने के लिए क्या कदम उठा रही है। 

जुर्माना भुगतान के लिए पोर्टल बनाए सरकार
खंडपीठ ने कहा कि अगर कोई कोरोना संबंधी नियमों का उल्लंघन करता है तो तय समय में जुर्माना भरने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था होनी चाहिए। अगर सरकार ने पोर्टल नहीं बनाया है तो उसे बनाना चाहिए। दिल्ली पुलिस से पता कीजिए शायद उन्होंने ऐसी कोई व्यवस्था की हो। इसके अलावा दिल्ली सरकार जो मोटा जुर्माना वसूल रही है, उस राशि का क्या कर रही है। क्या उसका प्रयोग सही दिशा में हो रहा है?

जुर्माना राशि का कैसे उपयोग कर रही पुलिस और सरकार
खंडपीठ ने पूछा कि क्या सरकार जुर्माना राशि का प्रयोग कोविड सुविधाओं या उससे जुड़ी चीजों पर खर्च किया जा रहा है या ये राशि सरकारी खजाने में ही पड़ी है। दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस इसका जवाब दें। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार के वकील सत्यकाम के अनुसार सरकार के पास फंड की कमी है, अगर ऐसा है तो कोविड संबंधी सुविधाएं बढ़ाने के लिए इस राशि का प्रयोग कर सकती है ताकि यह राशि एक अच्छे कार्य के लिए प्रयोग हो। 

राजधानी में एक माह में 2364 की मौत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 28 अक्तूबर से अब तक दिल्ली में 2364 कोरोना मरीजों की मौत हो चुकी है जबकि प्रतिदिन मिलने वाले मरीजों का आंकड़ा पांच हजार के पार चला गया। इस बीच बुधवार को 99 लोगों की कोरोना से मौत हुई जिससे कुल आंकड़ा 8720 हो गया। 
दिल्ली में 19 नवंबर को 98, 20 को 118, 21 को 111, वहीं 22 व 23 नवंबर को 121-121 लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा 24 नवंबर को 109 लोगों की मौत कोरोना से हुई। 18 नवंबर को कोरोना से 131 लोगों की मौत का आंकड़ा है जो अब तक एक दिन में सबसे अधिक है। वहीं दिल्ली में 11 नवंबर को सबसे अधिक 8593 मामले सामने आए थे। 
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सिख विरोधी दंगा: गवाह अभिषेक वर्मा की सुरक्षा जारी रखने के लिए हाईकोर्ट ने पुलिस को दिए निर्देश

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हाईकोर्ट ने 1984 सिख विरोधी दंगा मामले में सीबीआई के गवाह व विवादित हथियार डीलर अभिषेक वर्मा की सुरक्षा जारी रखने का निर्देश दिल्ली पुलिस को दिया है। हाईकोर्ट ने कहा जब तक सीबीआई इस मामले में कुछ नहीं कहती, तब तक वर्मा को सुरक्षा मुहैया करवाई जाए। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि केस की जांच चल रही है और फिलहाल ये नहीं बताया जा सकता कि वर्मा की गवाह के तौर पर जरूरत है या नहीं। 

न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने बृहस्पतिवार के अपने आदेश में कहा अभिषेक वर्मा को लेकर सीबीआई का रुख साफ होने तक उसे दिल्ली पुलिस सुरक्षा मुहैया करवाए। अदालत ने इससे पहले 28 सितंबर को वर्मा पर संभावित खतरे का आकलन व जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया था। कोर्ट के आदेश पर वर्मा व उसके परिवार को सुरक्षा मुहैया करवाई जा रही है। 

कोर्ट के समक्ष वर्मा की ओर से अधिवक्ता मनिंदर सिंह व दिनहार टकियार ने कहा कि अभिषेक वर्मा का बयान दर्ज होने तक उसे सुरक्षा मुहैया करवाई जाए। वहीं दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा व चेतन्य गोसाईं ने सरकार के उस हलफनामे का जिक्र किया जिसमें अभिषेक वर्मा का पॉलीग्राफ टेस्ट होने तक उसे सुरक्षा मुहैया कराने की जरूरत बताई गई है। उसका पॉलीग्राफ टेस्ट दिसंबर 2008 में हो चुका है।
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एनसीआर के शहरों से दिल्ली में आज भी प्रवेश नहीं करेगी मेट्रो, शाम को हो सकते हैं हालात सामान्य

दिल्ली चलो मार्च के कारण लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को मेट्रो ट्रेन एनसीआर के शहरों से दिल्ली में प्रवेश नहीं करेंगी। हालांकि, दिल्ली से एनसीआर जाने वाली ट्रेनें चलती रहेंगी। उधर, बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे तक बॉर्डर स्थित दिल्ली-एनसीआर के स्टेशनों के बंद होने से यात्रियों का खासी परेशानी हुई। दो बजे के बाद भी सिर्फ दिल्ली से एनसीआर जाने वाली मेट्रो चलाई गई। एनसीआर के शहरों से दिल्ली की तरफ संचालन पांच बजे ही सामान्य हो सका।

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) की ओर से किसान आंदोलन के मद्देनजर सीमावर्ती क्षेत्रों से एनसीआर के शहरों के लिए मेट्रो सेवाएं दो बजे तक के लिए बंद कर दी गई थीं। हालांकि, एनसीआर के शहरों से दिल्ली के लिए यात्रियों को शाम पांच बजे के बाद सेवाएं फिर बहाल कर दी गई। शाम के वक्त एनसीआर के शहरों से दिल्ली के लिए मेट्रो सेवा की शुरुआत होने पर एक बार फिर यात्रियों की काफी भीड़ रही। शाम के वक्त दफ्तरों या जरूरी काम से दिल्ली लौटने वालों की मुश्किलें कम हुईं।

दूसरी तरफ सुरक्षा के लिहाज से कोविड-19 महामारी के दौरान एनसीआर के सभी शहरों से शुक्रवार सुबह से ही दिल्ली के लिए मेट्रो सेवाएं उपलब्ध नहीं रहेंगी। डीएमआरसी की ओर से किए गए ट्वीट में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस आदेश को लागू किया गया है। इस दौरान मेजर मोहित शर्मा राजेन्द्र नगर से दिलशाद गार्डन, गुरु द्रोणाचार्य से सुल्तानपुर, वैशाली से आनंद विहार, नोएडा सिटी सेंटर से न्यू अशोक नगर, ब्रिगेडियर होशियार सिंह से टिकरी कलां के बीच मेट्रो सेवाएं सुबह से ही बंद रहेंगी। मेवला महाराजपुर से बदरपुर के बीच भी मेट्रो सेवाएं अगले आदेश तक उपलब्ध नहीं रहेंगी।

कहीं वापस लौटे यात्री तो कहीं ऑटो टैक्सी का लिया यात्रियों ने सहारा
  • बॉर्डर पर पहुंचते ही दिल्ली मेट्रो का संचालन बंद होने से यात्रियों का परेशानी का सामना करना पड़ा। इससे परेशान कई यात्री वापस लौट गए, जबकि आफिस समेत दूसरे जरूरी कामों के लिए यात्रियों को मेट्रो छोड़ ऑटो, ई-रिक्शा व कैब का सहारा लेना पड़ा, लेकिन बार्डर सील होने से लोगों का जाम में फंसकर काफी समय बर्बाद हुआ।
  • सुबह सेक्टर-62 मेट्रो स्टेशन पहुंचा तो पता चला वहां से मेट्रो नहीं मिलेगी। जानकारी मिली कि न्यू अशोक नगर से मेट्रो मिलेगी, जिसके बाद 250 रुपये में ऑटो करके यहां आना पड़ा। - अंकित, नोएडा सेक्टर-62
  • रोजाना ऑफिस जाने के लिए बॉटेनिकल गार्डन से मेट्रो पकड़ता हूं, लेकिन आज मेट्रो पकड़ने के लिए बॉटैनिकल गार्डन से न्यू अशोक नगर तक ई-रिक्शा लेना पड़ा। - रवी, नोएडा सेक्टर-128
  • बॉटैनिकल गार्डन से वायलेट लाइन मेट्रो पकड़ कर कालकाजी जाना था, लेकिन अब अशोक नगर से बोटैनिकल गार्डन जाने का फायदा नहीं है, बोटैनिकल गार्डन से आज मेट्रो नहीं चल रही है। - मुकेश राणा, मयूर विहार एक्सटेंशन
  • अचानक न्यू अशोक नगर मेट्रो स्टेशन पर इतनी भीड़ हो गई है कि ई-रिक्शा भी नहीं मिला। इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। - कमल रोहिदास, न्यू अशोक नगर
पूरे दिन एनसीआर से दिल्ली पहुंचने का इंतजार करते रहे यात्री 
दिल्ली की सभी सीमाएं सील होने के कारण यात्रियों को दिल्ली पहुंचने के लिए काफी मशक्कतों का सामना करना पड़ा। सोनीपत, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम से सड़क के रास्ते दिल्ली की ओर रुख करने वाले यात्रियों को देरी के साथ-साथ अधिक खर्च करना पड़ा। अधिकतर लोगों को काम का नुकसान हुआ।

डीएमआरसी को आर्थिक नुकसान
कोरोना काल में पहले ही लॉकडाउन में बंद मेट्रो सेवाएं एक बार फिर बृहस्पतिवार को एनसीआर के शहरों से नहीं उपलब्ध होने से डीएमआरसी को आर्थिक नुकसान भी हुआ है। रोजाना एनसीआर के शहरों से दिल्ली के लिए रोजाना 20-30 फीसदी यात्री आते हैं, लेकिन मेट्रो सेवा न होने की वजह से नुकसान भी लाखों का हुआ।

 
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दिल्ली हिंसाः पुलिस ने जारी कीं 20 आरोपियों की तस्वीरें, सूचना देने वाले को मिलेगा ईनाम

दिल्ली में रात्रि कर्फ्यू पर फैसला तीन से चार दिन में, अदालत ने सरकार की गंभीरता पर उठाए सवाल

कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण के लिए रात्रि कर्फ्यू लगाने पर दिल्ली सरकार तीन-चार दिनों में निर्णय ले सकती है। हालांकि अभी इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। यह जानकारी बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दी गई।

न्यायमूर्ति हिमा कोहली तथा न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी तथा वकील सत्यकाम ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। दिल्ली सरकार की ओर से यह जवाब कोर्ट की ओर से पूछे गए उस सवाल पर दिया है कि क्या दिल्ली सरकार रात्रि कर्फ्यू लगाने पर विचार कर रही है। इसकी अनुमति 25 नवंबर को जारी केंद्र के ताजा दिशा-निर्देशों में भी दी गई है।

खंडपीठ के समक्ष दिल्ली सरकार के वकीलों ने कहा कि सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। हालांकि अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। खंडपीठ ने पूछा कि क्या उतनी ही गंभीरता से विचार कर रहे हैं जितनी गंभीर कोविड-19 है? कोर्ट ने पूछा कि यह फैसला कितने दिनों में हो जाएगा। इस पर दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि तीन-चार दिनों में फैसला कर लिया जाएगा।  

हाईकोर्ट ने यह सवाल अधिवक्ता राकेश मल्होत्रा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने कहा ताजा दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश हालात के अनुरूप निर्णय लेकर रात्रि कफ्यू समेत दूसरे प्रतिबंध लगा सकती हैं। केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता अनुराग अहलूवालिया ने कहा कि कंटनेमेंट जोन के बाहर लॉकडाउन करने के लिए केंद्र सरकार की अनुमति लेनी होगी।

वहीं बाजारों को नियंत्रित तरीके से खोलने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार ने कहा कि यह मुद्दा केंद्र सरकार के समक्ष विचाराधीन है और उसके निर्णय का इंतजार है। बाजार संगठनों व स्थानीय निवासियों से बैठक कर कोरोना संक्रमण रोकने के लिए सुझाव मांगे गए हैं। खंडपीठ ने इस पर कहा कि बैठक करने से गेंद इधर से उधर होती रहेगी जबकि दिल्ली सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। 
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दिल्ली : पिछले 24 घंटों में 5475 कोरोना संक्रमितों की पुष्टि, 91 लोगों की मौत 

दिल्ली में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के 5475 कोरोना संक्रमितों की पुष्टि हुई है। जबकि 91 लोगों की मौत हुई है। राजधानी में गुरुवार को 4937 लोगों को डिस्चार्ज किया गया है। दिल्ली में अभी पॉजिटिविटी रेट 8.65 प्रतिशत है। दिल्ली में पिछले 10 दिनों में मृत्यु दर 1.77 प्रतिशत दर्ज किया गया है। 
 


दिल्ली में गुरुवार को 63266 कोरोना जांच की गई हैं। इसमें 28897 आरटी-पीसीआर जांच और 34369 रैपिड एंटीजन जांच शामिल हैं। राजधानी में अब तक कुल 60,39,703 कोरोना जांच की गई हैं। 

राजधानी में अब तक कुल 5,51,262 कोरोना संक्रमितों की पुष्टि हुई है। इसमें से कुल 5,03,717 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। कोरोना वायरस से अब तक कुल 8811 मरीजों की मौत हो चुकी है। दिल्ली में अभी कुल 38734 सक्रिय मरीज हैं। इसमें से 23,479 मरीज होम आइसोलेशन में हैं। राजधानी में अभी कुल 5156 कंटेनमेंट जोन हैं। 

दिल्ली में अब तक 35 स्वास्थ्य कर्मचारियों की हो चुकी है मौत 
कोरोना वायरस की चपेट में आने के बाद स्वास्थ्य कर्मचारियों की मौत का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो चुका है। पिछले दो सप्ताह में राजधानी में तीन स्वास्थ्य कर्मचारियों की मौत हो चुकी है जिनमें से एक डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर भी हैं। जबकि अन्य दो स्वास्थ्य कर्मचारी दिल्ली के निजी अस्पतालों में तैनात थे। 

जानकारी के अनुसार बीते बुधवार को आरएमएल अस्पताल के डॉ. श्रीमंत साहू मेडिसिन विभाग में तैनात थे। कुछ ही दिन पहले संक्रमित होने के चलते वह होम आइसोलेशन में थे लेकिन अचानक तबियत बिगडने के बाद उन्हें द्वारका स्थित मणिपाल अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार गंभीर हालत होने के चलते मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। हालांकि संक्रमण का स्तर अत्यधिक होने के चलते उनकी रिकवरी की संभावना बेहद कम होने लगी थी जिसके चलते बुधवार सुबह डॉ. साहू ने अंतिम सांस ली। 

45 वर्षीय डॉ. साहू के निधन पर बृहस्पतिवार को आरएमएल अस्पताल में शोक सभा भी आयोजित की गई। आरएमएल अस्पताल में अब तक तीन स्वाथ्स्य कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। जबकि एम्स, सफदरजंग, लोकनायक अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मचारी भी कोरोना वायरस की चपेट में आने के बाद मौत के शिकार हुए। 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अनुसार देश भर में अब तक कोरोना वायरस की वजह से दो हजार से भी अधिक स्वास्थ्य कर्मचारियों की मौत हो चुकी है जिनमें से अगर डॉक्टरों की बात करें तो अब तक 600 से अधिक डॉक्टरों की मौत हुई है। दिल्ली में कोरोना वायरस के चलते 8811 लोगों की मौत हुई है जिनमें से 35 स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल हैं। इनमें अगर वरिष्ठ डॉक्टरों की बात करें तो दिल्ली में अब तक 11 वरिष्ठ डॉक्टरों की कोविड संक्रमित होने के बाद मौत हुई है। 
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