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मौनी अमावस्या पर गया में कराएं तर्पण, हर तरह के ऋण से मिलेगी मुक्ति : 24 जनवरी 2020
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नौकरी न कर शुरू की खुद की कंपनी, 26 साल की उम्र में बन गए बड़े उद्योगपति

गाजियाबाद के तुषार अग्रवाल, ये वो नाम है जिसने मात्र 26 साल की उम्र में उद्यम के क्षेत्र में अपना लोहा मनवा लिया है। आज तुषार दो इंडस्ट्री के मालिक है...

3 अक्टूबर 2019

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दिल्ली-एनसीआर

गुरूवार, 23 जनवरी 2020

दिल्ली विधानसभा चुनावः सियासी धुरंधरों के बीच फंसी शकूर बस्ती सीट

नई दिल्ली के बाद दूसरी सबसे हॉट मानी जा रही शकूर बस्ती विधानसभा सीट दिग्गजों के बीच सियासी जंग में फंसी है। हैट्रिक लगाने की कोशिश में मैदान में उतरे दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन का मुकाबला भाजपा से दो बार विधायक डॉ. सुरेश चंद्र वत्स से है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व निगम पार्षद व इलाके मे सियासी पकड़ रखने वाले देवराज अरोड़ा को उतारा है।

माना जा रहा है कि इस बार मुकाबला कांटे का होगा। यह इसलिए भी कि 2015 के विधानसभा चुनाव में आप की लहर होने के बावजूद जैन भाजपा प्रत्याशी डॉ. वत्स से बमुश्किल तीन हजार वोटों से जीत सके थी, जबकि लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा सीट पर हार-जीत का फासला लंबा था। शकूर बस्ती सीट पर भाजपा को 62.9 फीसदी वोट मिले थे, जबकि आप और कांग्रेस के खाते में सिर्फ 17.7 व 17.1 फीसदी वोट जा सके थे।

जातिगत आंकड़ा
1. सामान्य वर्ग : 40 फीसदी
-पंजाबी : 14
-वैश्य : 12
-ब्राह्मण : 6
-अन्य : 8 

2. ओबीसी वर्ग : 28 फीसदी
-गुर्जर : 7
-जाट : 6
-यादव : 4
-अन्य : 11 

3. अनुसूचित जाति : 12 फीसदी
-मुस्लिम : 5
-प्रवासी : 15
नोट : आंकड़े राजनीतिक पार्टियों द्वारा जुटाए गए हैं।

 
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दिल्ली विधानसभा चुनाव: धरे रह गए डूसू के कई धुरंधरों के अरमान

दिल के अरमान आसुंओं में बह गए...। इस गीत की पंक्तियां इन दिनों डूसू में डंका बजा चुके धुरंधरों पर सटीक बैठती हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) की राजनीति में अपना डंका बजाने वाले डूसू अध्यक्षों के अरमान टिकट बंटवारे में बह गए हैं। 

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कई पुराने डूसू अध्यक्ष व सहसचिव भाजपा और कांग्रेस से टिकट के लिए ताल ठोक रहे थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने से उनके हाथ मायूसी लगी है।

भाजपा से नकुल भारद्वाज, गौरव खारी, शक्ति सिंह व कांग्रेस से अमृता धवन ऐसे नाम हैं जो विधानसभा चुनाव के लिए टिकट के दावेदारों की दौड़ में शामिल थे। डूसू की शुरुआत वर्ष 1956 में हुई थी। तब से अब तक लगातार डूसू से नेता निकले और देश की मुख्यधारा की राजनीति में जुड़ते रहे। 

इस बार चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने के लिए वर्ष 2002-03 में डूसू अध्यक्ष रहे नकुल भारद्वाज भाजपा से पटपड़गंज विधानसभा सीट से टिकट मांग रहे थे, परंतु पार्टी ने इस बार उन पर भरोसा नहीं जताया। 2013 विधानसभा चुनाव में नकुल भारद्वाज को पटपड़गंज से टिकट मिला था, लेकिन वह आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया के सामने हार गए। इस बार भी इसी सीट से वह चुनाव लड़ना चाहते थे।

वर्तमान में दिल्ली भाजपा के पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष गौरव खारी बुराड़ी से सीट से दावेदारी कर रहे थे। उन्हें भी टिकट नहीं मिला। वह वर्ष 2004 में एबीवीपी से डूसू के सहसचिव बने थे। 

एबीवीपी के शक्ति सिंह का नाम तो बीते साल डीयू में सावरकर, भगत सिंह की मूर्ति लगाने के कारण काफी सुर्खियों में रहा है। 2018 में वह एबीवीपी से डूसू अध्यक्ष बने थे।

दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए वह जनवरी में ही भाजपा में शामिल हुए थे। वह तिमारपुर और बुराड़ी में से किसी एक सीट पर चुनाव लड़ना चाहते थे। एनएसयूआई से वर्ष 2006-07 में डूसू अध्यक्ष बनी तेजतर्रार अमृता धवन भी पश्चिमी दिल्ली की किसी भी सीट से चुनाव लड़ना चाहती थीं। इससे पहले वर्ष 2013 में वह तिलक नगर सीट से दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ी थी, लेकिन भाजपा के राजीव बब्बर से हार गई थीं।

इन डूसू पदाधिकारियों को मिटा टिकट
कांग्रेस और भाजपा ने इस बार तीन-तीन पूर्व डूसू अध्यक्षों पर भरोसा जताया है। कांग्रेस ने राजेंद्र नगर से रॉकी तुसीद, चांदनी चौक से अलका लांबा, मालवीय नगर से नीतू वर्मा को टिकट दिया है। इसी तरह भाजपा ने शालीमार बाग से रेखा गुप्ता, जनकपुरी से आशीष सूद और किराड़ी से अनिल झा पर दांव लगाया है।
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दिल्ली विधानसभा चुनावः श्रीनिवास का दावा, कांग्रेस के बिना दिल्ली में कोई सरकार नहीं बनेगी

भारतीय युवा कांग्रेस दिल्ली चुनाव को बेहद अहम मान रही है। इसको देखते हुए कांग्रेस की केंद्रीय इकाई ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। युवाओं को लामबंद करने के लिए भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बी. वी. भी दिल्ली की सड़कों पर पसीना बहा रहे हैं। चुनावी भागदौड़ के बीच उन्होंने अमर उजाला संवाददाता संतोष कुमार से कांग्रेस की रणनीति पर विस्तार से बात की।

त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस सबसे कमजोर मानी जा रही है?
पिछले एक महीने से दिल्ली की गलियों में जितना घूमा हूं, उससे यकीन है कि बगैर कांग्रेस के दिल्ली में इस बार किसी की सरकार नहीं बन रही है।

यह कैसे कह सकते हैं?
बीते पांच साल में अरविंद केजरीवाल की पोल खुल गई है। उनकी नाकामी दिल्ली वालों के सामने है। वहीं, केंद्र सरकार बेरोजगारी, महंगाई सरीखी बेहद बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकी है। इसके उलट सीएए, एनआरसी जैसे कानून से देश को बांटने का काम किया जा रहा है। दिल्ली चुनाव इन कानूनों का लिटमस टेस्ट होगा। भाजपा की सरकार को दिल्ली के लोग ही सबक सिखाएंगे।

लेकिन आप भी तो विकल्प नहीं बन पा रहे हैं?
ऐसा नहीं है। 2015 के बाद के बाद हुए एमसीडी व लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़ा है। लोकसभा चुनाव में तो छह विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का वोट शेयर भाजपा व आप से ज्यादा था, जबकि करीब 45 सीटें ऐसी थी, जहां पार्टी रनरअप रही है। आम आदमी पार्टी तो तीसरे नंबर पर खिसक गई थी। लोकसभा चुनाव के बाद भी आप की लोकप्रियता कम हुई है, जबकि भाजपा ने भी अपना जनाधार गंवाया है। दोनों दलों से नाराज वोटर कांग्रेस के साथ खड़ा है।

युवा कांग्रेस की क्या रणनीति है?
अलग-अलग प्रांतों से युवा कांग्रेस के करीब 500 कार्यकर्ता कम्यूनिटी स्तर पर दिल्ली मेें प्रचार अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। इनको वहीं लगाया गया है, जहां संबंधित प्रदेश के निवासी बहुतायत में हैं। चुनाव की तारीख नजदीक आने से यह संख्या बढ़ती जाएगी।

आपके मुद्दे क्या हैं?
आप की दिल्ली सरकार व भाजपा की केंद्र सरकार की पांच साल नाकामियां और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सरकार में दिल्ली का हुआ विकास।
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आखिर क्यों निर्भया के दोषियों को अलग-अलग नहीं हो सकती फांसी, ये है वजह

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दिल्ली के नारायणा में स्कूल बस की क्लस्टर बस से टक्कर, छह बच्चे घायल

दिल्ली के नरायणा में एक स्कूल बस की क्लस्टर बस से टक्कर हो गई है। इस दौरान बस में सवार छह छात्र घायल हो गए। घायल छात्रों को अस्पताल ले जाया गया है।  

जानकारी के मुताबिक राजेंदर नगर स्थित सलवान पब्लिक स्कूल की बस में 27 बच्चे सवार थे। जब हादसा हुआ तो बस स्कूल की ओर जा रही थी।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब स्कूल बस यू-टर्न ले रही थी तो दूसरी ओर से आ रही क्लस्टर बस उसमें जा भिड़ी। जिसके बाद स्कूल बस पूरी तरह से पलटकर सड़क पर गिर गई।

इस घटना के बाद छह बच्चों को चोटें आई हैं, हालांकि किसी को भी गंभीर चोट नहीं आई है। सभी घायलों को नारायणा के कपूर नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया।

छह में से चार बच्चों का उपचार कर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है। वहीं दो अन्य भी जल्द डिस्चार्ज कर दिए जाएंगे। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों बसों के ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है।

इसके साथ पुलिस गवाहों के बयान ले रही है और मामले की जांच में जुटी है। घायल होने वाले बच्चे कक्षा छह से कक्षा 12 के बीच में थे।



 
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दिल्ली विधानसभा चुनावः प्रचार में नेताओं के साथ अभिनेताओं का भी लगेगा तड़का

दिल्ली में दुर्घटना, छह बच्चे घायल
दिल्ली विधानसभा चुनाव में ना केवल नेता अपनी पूरी ताकत झोंकेंगे बल्कि अभिनेता भी रोड-शो करके वोट मांगने के लिए जुटेंगे। दिल्ली वालों से वोट मांगने के लिए बॉलीवुड के कलाकारों के साथ भोजपुरियां कलाकार भी वोट मांगते दिखेंगे। राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस व भाजपा के लिए दिल्ली चुनाव इतना अहम है कि प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री समेत केंद्रीय नेतृत्व भी प्रचार की कमान संभालने जा रहा है। स्टार प्रचारकों की सूची देखे तो दिग्गजों की फौज ही उतारी जा रही है।

बॉलीवुड कलाकारों में भाजपा के लिए हेमा मालिनी दिल्ली वालों से वोट मांगते हुए सड़कों पर दिखेंगी तो सन्नी देओल भी अपने चीर-परिचित डॉयलॉग से वोट मांगेंगे। भोजपुरिया कलाकार रवि किशन, निरहूआ, मनोज तिवारी भी भाजपा के स्टार कैंपेनर होंगे तो सूफियाना अंदाज में हंस राज हंस भी दिल्ली की गलियों में वोट मांगते दिखेंगे। क्रिकेटर से नेता बने गौतम गंभीर तो कांग्रेस की तरफ से अभर:नेता से नेता बने राज बब्बर, शत्रुघ्र सिन्हा, नगमा तो क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू व कीर्ति आजार को उतारा जाएगा। 

देश केप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी भाजपा के लिए दो रैली दिल्ली में प्रस्तावित है तो पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह कांग्रेस के लिए प्रचार करेंगे। इसी तरह सोनिया, प्रियंका, राहुल गांधी के साथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलौत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कांग्रेस के लिए प्रचार करेंगे तो भाजपा के लिए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत वोट मांगेंगे। 
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दिल्ली विधानसभा चुनावः आज दो रैलियां करेंगे अमित शाह

गृह मंत्री अमित शाह आज दिल्ली में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कई रैलियां करेंगे। शाह सबसे पहले शाम छह बजे मटियाला के महिला पार्क में लोगों से मिलेंगे। इसके बाद सात बजे उत्तम नगर में पदयात्रा करेंगे।




सूत्रों के मुताबिक अमित शाह रात आठ बजे नांगलोई जट में भी लोगों से मुलाकात करेंगे। 

भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद आज आगरा में गरजेंगे नड्डा
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद जगत प्रकाश नड्डा आज आगरा में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के समर्थन में आयोजित रैली से पूर्णकालिक अध्यक्ष के तौर पर अपनी सियासी पारी की शुरुआत करेंगे।
यहां पढ़ें पूरी खबर
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जब दुष्कर्म हुआ तब पीड़िता थी आरोपी की पत्नी, इसलिए नहीं बनता दुष्कर्म का मामला

आरोपी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता क्योंकि जिस दिन आरोपी ने पीड़िता से जबरन शारीरिक संबंध बनाए, उस दिन वह उसकी पत्नी थी। यह टिप्पणी अदालत ने वैवाहिक दुष्कर्म मामले में आरोपी को बरी करते हुए की है। 

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उमेद सिंह ग्रेवाल ने आरोपी को बरी करते हुए कहा महिला का आरोप है कि आरोपी ने उससे पांच जुलाई 2016 को दुष्कर्म किया लेकिन आरोपी से उसकी शादी दो नवंबर 2015 को हो चुकी थी। पीड़िता ने खुद अपने बयान में इस तथ्य को स्वीकार किया है। इस लिहाज से आरोपी पर दुष्कर्म का मामला नहीं बनता।

पीड़िता पंजाब में आरोपी के साथ रह रही थी लेकिन जब उसे पता चला कि आरोपी को चोरी के मामले में दोषी ठहराया गया है तो वह उसे बताए बिना दिल्ली आ गई थी। इसके बाद आरोपी ने दिल्ली आकर पत्नी को समझाया था कि वह अपना तौरतरीका बदल लेेगा। इसके बाद दोनों साथ रहने लगे थे लेकिन आरोपी ने पीड़िता के दो लाख रुपये चुरा लिये थे। 

तब पीड़िता ने उसके साथ रहने से मना कर दिया था। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर आरोपी को गिरफ्तार किया था लेकिन इसके बाद भी उसके घर आता-जाता रहा था। पीड़िता का आरोप था कि इस दौरान उसे पीड़िता से जबरन शारीरिक संबंध बनाया था। 

अदालत ने इस बात पर गौर किया कि दंपति जब  पंजाब में थी तो दोनों के बीच आपसी सहमति से शारीरिक संबंध थे। दिल्ली में भी दोनों के बीच शारीरिक रिश्ता था और केवल दो लाख चुराने के बाद दोनों का संबंध टूटा था। 
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गणतंत्र दिवसः फुल ड्रेस रिहर्सल के चलते आज बंद रहेंगी ये सड़कें, देख लें डायवर्जन प्लान

दिल्ली चुनाव: जब नेताजी ने अपनी पत्नी के पांव छूकर मांग लिया था वोट

चुनाव प्रचार के दौरान कई बार बड़े अजीब वाकये हो जाते हैं। 1989 चुनाव का एक मसला याद आता है। चांदनी चौक से चुनाव लड़ रहा था। कांग्रेस के लिए दुबारा सीट बचाने की चुनौती थी। उस वक्त प्रचार के आज जैसे साधन तो थे नहीं, तो सुबह-सुबह ही चुनाव प्रचार के लिए निकल पड़ता था।  गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले भागदौड़ चलती रहती थी।

वोटिंग के दो-तीन दिन पहले की बात है। प्रचार के आखिरी दिनों में ज्यादा से ज्यादा वोटर तक पहुंचने की कोशिश रहती थी। उस दिन हुआ यह कि देर शाम तक बैठकों का दौर चला। इसके बाद लोगों से मुलाकात का जो सिलसिला शुरू हुआ वो रात दो बजे तक चलता रहा। इसके बाद घर लौटने की बारी आई।

रात करीब ढाई बजे घर पहुंचा। एक-दो सहयोगी छोड़ने आए थे। उन्हें बाहर से विदा किया और डोर वेल बजाकर गेट खुलने का इंतजार करने लगा। इस बीच मैं भूल सा गया कि अपने घर पर खड़ा हूं। वोट मांगने की आदत ऐसी पड़ी, कि सामने खड़ी पत्नी भी वोटर नजर आईं। आव न देखा ताव, मैंने उनके पैर छुए और खुद को वोट देने की अपील की। हमारे इस व्यवहार से पत्नी हड़बड़ा गईं। 

उन्होंने सवाल किया कि अरे, यह क्या रहे हो आप? पत्नी की आवाज सुनकर समझ गया कि गड़बड़ हो गई है। फिर, हम दोनों मुसकराते हुए घर में दाखिल हुए। बहरहाल, इस सबके बीच दुबारा जीत हासिल करने में कामयाबी मिल गई। बाद में कभी-कभार पत्नी चुटकी लेती कि जब मेरा आशीर्वाद मिल गया था, तो कौन चुनाव हरा सकता था। 
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