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3 अक्टूबर 2019

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दिल्ली-एनसीआर

मंगलवार, 31 मार्च 2020

Coronavirus: सबसे बड़े क्वारंटीन सेंटर के डॉक्टरों की काफी बदल गई है जिंदगी

कोरोना वायरस को मात देने के लिए डॉक्टर दिन-रात जुटे हुए हैं। देश के सबसे बड़े क्वारंटीन सेंटर जो कि आईटीबीपी के छावला स्थित परिसर में तैयार किया गया था, वहां के डॉक्टरों की जिंदगी में अब कई बदलाव आ रहे हैं। ’क्वारंटीन', ये शब्द तो उनकी जिंदगी के साथ जुड़ गया लगता है।

पहले सेंटर पर क्वारंटीन और उसके बाद कमरे पर भी क्वारंटीन जैसा माहौल। कोई मिलने आ जाए तो वहां भी क्वारंटीन के नियमों का पालन करना पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि चाहे सेंटर हो या कमरा, कोरोना ही दिमाग में घूमता रहता है। कोरोना की इस लड़ाई में इन डॉक्टरों ने अपने परिवार को भी साथ नहीं रखा है।



इनका मकसद है कि सेंटर पर जो भी क्वारंटीन के लिए आए, वह 14 दिन बाद नेगेटिव रिपोर्ट लेकर अपने घर को निकले। आईटीबीपी का यह सेंटर फरवरी में शुरू हुआ था। यहां पर विदेश से आए एक हजार से अधिक लोग क्वारंटीन के लिए पहुंचे हैं। मौजूदा समय में भी यहां पर इटली से आए 481 लोगों को क्वारंटीन में रखा गया है।

सेंटर के नोडल अफसर डॉ. ए.पी. जोशी हैं। उनके साथ डॉक्टरों की एक टीम हैं। इसमें आईटीबीपी के छह-सात डॉक्टर हैं, बीएसएफ की एक महिला डॉक्टर भी शामिल है। ‘टीम के वरिष्ठ डॉक्टर राजकुमार का कहना है कि हम सभी बीएसएफ के ऑफिसर मैस में रहते हैं।

अधिकांश डॉक्टरों का परिवार साथ नहीं है। तीन अप्रैल को इन्हें यहां पर दो माह पूरे हो जाएंगे। सब स्वस्थ और नीरोगी रहकर रात-दिन सेवा कर पा रहे हैं। इसका बड़ा कारण है इन सभी का कड़ाई से सावधानियों का पालन करना।
 
डॉक्टर राजकुमार कहते हैं, जब हम अपने कमरे से बाहर निकलते हैं तो पूरी तरह सैनिटाइज हो जाते हैं। हमारा ड्राइवर, गाड़ी, कपड़े सभी सैनिटाइज प्रक्रिया से गुजरते हैं। ड्यूटी खत्म होने के बाद जब हम वापस अपने कमरे पर जाते हैं तो मोबाइल, पर्स, पेन, जूते और कपड़े सब बाहर रखने होते हैं।

इनमें मोबाइल और पर्स को दोबारा से सैनिटाइज किया जाता है। कपड़ों को बाहर ही रखा जाता है। उसकी वॉशिंग का एक अलग ही तरीका होता है। हमारे कमरे को रोजाना दो बार सैनिटाइज किया जाता है। हां, अगर कोई मिलने आ जाए तो उसके बाद दोबारा से सैनिटाइज करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
 
जैसे ही ये डॉक्टर और टीम के बाकी सदस्य सेंटर पर पहुंचते हैं, तो वहां व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों की मदद ली जाती है। क्वारंटीन सेंटर पर दिनभर विदेश से आए लोगों के बीच रहना है। उनके सेंपल लेने पड़ते हैं। लोगों का बुखार, रक्तचाप एवं दूसरी कई तरह की जांच करनी होती हैं।

इस दौरान उनके बातचीत होती है। जैसे ही इन्हें थोड़ी फुर्सत मिलती हैं, तो दुनिया में कोरोना वायरस को लेकर हो रही रिसर्च रिपोर्ट देखते हैं। इस बीच किसी न किसी व्यक्ति के बेड से कॉल आ जाती है कि वहां कोई दिक्कत है। कई बार तो ऐसा होता है कि परिवार से फोन पर बात करने का समय भी नहीं मिलता।

डॉक्टर राजकुमार कहते हैं, हमें अपनी चिंता नहीं होती, मगर परिजनों को हमारी फिक्र रहती है। वे कॉल करते हैं और हम सेंटर में होते हैं, ऐसे में बात नहीं हो पाती। हमारे सामने एक ही मकसद होता है कि जो लोग क्वारंटीन के लिए आए हैं, उनकी रिपोर्ट निगेटिव आए।

सभी डॉक्टर रोजाना सेंटर से बाहर दूसरे भवन में एक बैठक करते हैं। पर्याप्त दूरी बनाकर और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण साथ रखकर बातचीत होती है। एक सवाल के जवाब में डॉ. राजकुमार ने कहा, डॉक्टरों को कोरोना के संक्रमण का खतरा बना रहता है।

हम पूरी सतर्कता बरतते हैं, लेकिन लंबे समय तक हमें संदिग्ध और पॉजिटिव रिपोर्ट वाले लोगों के बीच रहना है, इसलिए गलती या लापरवाही की गुंजाइश बनी रहती है।
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सावधान, सेनिटाइजर का इस्तेमाल हो सकता है जानलेवा, रेवाड़ी के एक व्यक्ति का 35 फीसदी शरीर जला

कोरोना वायरस से बचाव के लिए जहां हर कोई सैनिटाइजर का बेहिसाब इस्तेमाल कर रहा है। वहीं इसके दुष्प्रभाव अत्यंत घातक भी हो सकते हैं। सैनिटाइजर में एल्कोहल होने के कारण ये आग की चपेट में भी ले जा सकता है। हरियाणा के रेवाड़ी में ऐसी एक घटना सामने आई है जिसमें एक व्यक्ति रसोईघर में खड़ा होकर सैनिटाइजर से मोबाइल की स्क्रीन साफ कर रहा था।

इसी बीच चूल्हे पर पत्नी खाना बना रही थीं और अचानक से सैनिटाइजर ने आग पकड़ ली। इस घटना में रेवाड़ी निवासी व्यक्ति का शरीर 35 फीसदी तक जल गया। रविवार रात परिजन आनन फानन में घायल को लेकर दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल पहुंचे जहां मरीज का उपचार चल रहा है। सोमवार को गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि 44 साल घायल की लापरवाही के चलते ये घटना हुई है। हालांकि गनीमत रही कि उनकी जान बच गई अन्यथा सैनिटाइजर की वजह से उसका पूरा शरीर आग की चपेट में आ सकता था। 

वरिष्ठ डॉक्टर महेश मंगल ने बताया कि कोरोना वायरस के चलते आजकल हर कोई जेब में सैनिटाइजर लेकर घूम रहा है लेकिन वे शायद इसके घातक परिणाम नहीं जानते हैं। सैनिटाइजर में एल्कोहल मिश्रित होने के चलते ये बड़ा नुकसान भी दे सकता है।

उन्होंने बताया कि रेवाड़ी निवासी घायल भी रसोई घर में खड़ा होकर सैनिटाइजर से चाबी, मोबाइल की स्क्रीन इत्यादि को साफ कर रहा था। ताकि उसे और उसके परिवार को संक्रमण का खतरा न रहे लेकिन इसी बीच सैनिटाइजर उसके कुर्ते पर गिर गया। ज्यादा मात्रा में गिरने की वजह से आसपास सेनिटाइजर में पाए जाने वाले एल्कोहल की वजह से फ्यूम बन गया और किचन में जल रहे चूल्हे की वजह से आग लग गई। उसका चेहरा, चेस्ट, पेट, हाथ सब थोड़ा थोड़ा जल गया है।

डॉक्टरों का कहना है कि सैनिटाइजर में 75 फीसदी तक एल्कोहल होता है। एल्कोहल ज्वलनशील होता है। इसलिए इस्तेमाल के दौरान सावधानी जरूर बरतें। लोगों को बहुत ज्यादा सेनिटाइजर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हर चीज को सैनिटाइज की जरूरत नहीं है। हाथ को सेनिटाइज करें, क्योंकि हाथ से ही नाक और मुंह छुआ जाता है। इसे बच्चों से दूर रखें, मुंह में लिए जाने से यह जहर भी हो सकता है। आग के पास खड़ा होकर इसका इस्तेमाल करना सही नहीं है। घर में रहते हुए इसका इस्तेमाल से बचें, इसके जगह पानी और साबुन का इस्तेमाल करें। 
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राशन कार्ड के बिना भी मिल सकेगा अनाज, घपला करने पर एक डीलर पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश

दिल्ली सरकार गरीबों को बिना राशन कार्ड के भी राशन देने का इंतजाम कर रही है। इसी हफ्ते इसकी व्यवस्था कर ली जाएगी। दूसरी तरफ राशन में हेराफेरी करने वाले जनकपुरी के एक डीलर पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी के आदेश जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर अपील की है कि इस वक्त सबसे बड़ी देश सेवा घर बैठकर की जा सकती है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को बताया कि राशन की दुकानों पर अप्रैल का राशन मिलना शुरू हो गया है। अब जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, वह लोग भी राशन देने की मांग कर रहे हैं। 

दिल्ली सरकार इस पर काम कर रही है। अगले तीन-चार दिन में इसका पूरा सिस्टम तैयार कर लिया जाएगा। केजरीवाल ने सलाह दी कि इस बीच जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, वह नजदीक के स्कूल या रैन बसेरे में जाकर खाना खाएं।

दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल ने बताया कि जनकपुरी में सरकारी दुकान पर राशन आया था, लेकिन दुकानदार ने 24 घंटे में सारा राशन बाहर भेज दिया और खुद दुकान बंद कर फरार हो गया। इसकी जानकारी दिल्ली सरकार के मंत्री इमरान हुसैन के औचक निरीक्षण से मिली। 

इस पर तुरत कार्रवाई करते हुए गृह विभाग को आदेश दिया गया है कि वह मामले में एफआईआर दर्ज करवाकर उसे  गिरफ्तार कर लें। इसी तरह एक रविवार को एक राशन वाले ने
ट्रक बाहर भेजने की कोशिश की थी, उसकी गिरफ्तारी के आदेश भी जारी किए गए हैं।
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तब्लीगी जमात का केंद्र है निजामुद्दीन मरकज, चीन से लेकर इंग्लैंड तक के लोग हुए थे शामिल,छह की मौत

दुनिया जहां कोरोना वायरस से जंग लड़ रही है, वहीं दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मरकज (केंद्र) में लापरवाही की सारी हदें पार कर दी गईं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अन्य विदेशियों के अलावा यहां पर चीन के भी कुछ जमाती मौजूद थे। वहीं इस जमात में शामिल होकर तेलंगाना लौटे छह लोगों की सोमवार मौत हो गई। 

सूत्रों का कहना है कि 14-15 मार्च के बाद भी यहां लगातार विदेशी जमातियों का आना-जाना लगा रहा। कोरोना की वजह से जब देश को लॉकडाउन किया गया तो मरकज में चीन, यमन, बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, सऊदी अरब और इंग्लैंड के 100 से अधिक लोग यहां मौजूद थे। इन विदेशी जमातियों के अलावा करीब 1400-1500 जमाती यहां मौजूद थे। 

स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस के साथ मिलकर रविवार और सोमवार को यहां से 200 से अधिक कोरोना संदिग्धों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया। बाकी लोगों को भी देर रात तक विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। निजामुद्दीन के कुछ लोगों का दावा है कि मरकज में मौजूद कुछ लोगों को बुखार और जुकाम भी था।

बताया जा रहा है कि भारत में तब्लीगी जमात का केंद्र निजामुद्दीन मरकज है। देश ही नहीं, दुनियाभर से जमात (धार्मिक लोगों की टोली, जो इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने अपने-अपने घरों से निकलते हैं) निजामुद्दीन मरकज पहुंचती हैं। यहां तय किया जाता है कि देशी या विदेशी जमात को भारत के किस क्षेत्र में जाकर प्रचार-प्रसार करना है। विदेशों से आने वाली ज्यादातर जमात चार माह के लिए आती हैं, जबकि अपने देश की जमात, चार माह, 40 दिन, 10 दिन या तीन दिन के लिए निकलती हैं। इसमें तीन दिन या 10 दिन की जमात को लोगों के घरों के आसपास ही रखा जाता है, जबकि 40 दिन या चार माह की जमात को निजामुद्दीन मरकज से आगे रवाना किया जाता है। पूरे साल निजामुद्दीन मरकज में लाखों विदेशी और भारतीय जमातें पहुंचती हैं। एक-दो दिन या उससे ज्यादा के लिए उनके खाने-पीने और रहने का इंतजाम मरकज में किया जाता है।

पूरा इलाका सील
निजामुद्दीन इलाके में मरकज में भारी संख्या में लोगों के मिलने से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। बताया जा रहा है कि मरकज में जमात के लिए जो लोग आए थे उनमें से काफी बीमार थे और कोरोना से संक्रमित होने की पूरी आशंका है। इसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पूरे निजामुद्दीन इलाके को सील कर दिया है। मरकज को बंद कर दिया गया है और किसी को उसके पास नहीं जाने दिया जा रहा है। आसपास के इलाके को भी सील कर दिया गया है। निजामुद्दीन इलाके में कई डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है।
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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

निजामुद्दीन मरकज में कैसे इतनी बड़ी संख्या में लोग हुए एकत्रित? उठ रहे ये 5 सवाल

निजामुद्दीन इलाके में थाने के पीछे स्थित मरकज में बड़ी संख्या में लोगों के एकत्रित होने की सूचना दिल्ली पुलिस को करीब एक सप्ताह पूर्व 23 मार्च को ही मिल गई थी। इसके बाद पुलिस ने आयोजकों से कहा कि लोगों के बीच दूरी बनाकर रखी जाए। पुलिस ने आयोजकों को थाने में बुलाकर उन्हें समझाया और नोटिस भी दिया। इसके बाद 27 मार्च को डब्ल्यूएचओ की टीम पुलिस को लेकर मरकज गई थी, लेकिन काफी देर समझाइश के बाद दरवाजा खोला। इस दौरान वहां जांच में कोरोना संदिग्ध पाए गए 204 लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती करवाया, जिनमें से 6 लोगों में रविवार को संक्रमण में पुष्टि हुई। इसके बाद 28 मार्च को एसीपी लाजपतनगर ने आयोजकों को फिर से नोटिस भेजा। दिल्ली सरकार को भी जानकारी दी गई। इसके बावजूद दिल्ली सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

दक्षिण-पूर्व जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी का दावा है कि यह सूचना तभी दिल्ली सरकार और एसडीएम को दे दी गई थी। बताया जा रहा है कि संबंधित एजेंसियों की टीमों ने मौका मुआयना भी किया और डॉक्टरों की टीम भी भेजी गई थीं, परंतु सब खानापूर्ति की गई थी। यहां से लोगों को निकालने के लिए कुछ नहीं किया गया। क्वारंटीन करने के नाम पर लोगों को मरकज में ही बंद कर दिया गया था। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि मेडिकल सुविधाएं दी गई थीं। एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जब यहां के लोगों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ये लोगों को धर्म से अलग करने की साजिश है। कोरोना कुछ भी नहीं है। ये भी कहा जा रहा है कि यहां के एक वरिष्ठ मौलाना कुछ दिन पहले यहां से चले गए थे और वह जाकिर नगर में रहने लगे थे।
 
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डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों को भोजन करा रही है दिल्ली पुलिस, DMRC 14500 कर्मचारियों का एक दिन का वेतन करेगी दान

आज देशव्यापी लॉकडाउन का छठा दिन है। दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में लॉकडाउन के बावजूद कोरोना के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर में कुल 127 मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं। हालांकि दिल्ली में कोरोना वायरस से अब तक 49 लोग संक्रमित हो चुके हैं, बावजूद इसके सामुदायिक फैलाव का एक भी केस सामने नहीं आया है। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों में 17 से 82 साल आयु तक के लोग शामिल हैं। इनमें 24 पुरुष और 15 महिला मरीज है। जहां लॉकडाउन सफल बनाने के लिए दिल्ली की सभी सीमाएं सील कर दी गई हैं, वहीं नोएडा-ग्रेटर नोएडा में भी आदेश जारी किया गया है कि अब शाम चार बजे के बाद कोई अपने घर से न निकले। पढ़ें दिल्ली-एनसीआर की दिनभर की अपडेट...




दिल्ली पुलिस डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों को करा रही है भोजन

दिल्ली पुलिस पीआरओ ने जानकारी दी कि कोरोना वायरस लॉकडाउन में पुलिस 1.5 लाख से अधिक लोगों को भोजन उपलब्ध करा रहा है।  उन्होंने कहा अगर कोई आपात स्थिति मेंं है या किसी भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो वे हमें हमारे हेल्पलाइन नंबर 112 या 23469526 पर कॉल कर सकते हैं।


डीएमआरसी 14500 कर्मचारियों का एक दिन का वेतन करेगा दान 

डीएमआरसी ने कोरोना वायरस के चलते प्रधानमंत्री राहत कोष (PM CARES) में अपने 14500 कर्मचारियों की एक दिन का मूल वेतन दान करने का फैसला लिया है। 

फरीदाबाद की नई मरीज का पति नोएडा की उसी कंपनी में काम करता है जिसके खिलाफ एफआईआर दर्ज है
यह मरीज फरीदाबाद के सूरजकुंड की एक महिला है। महिला का पति नोएडा की सीजफायर कंपनी में काम करता है, पति की रिपोर्ट आनी बाकी है।

फरीदाबाद में सामने आया एक और पॉजिटिव मरीज
दिल्ली से सटे फरीदाबाद में एक और पॉजिटिव मरीज सामने आया है। इसके बाद यहां संक्रमितों की संख्या बढ़कर 4 चार हो गई है। 

नोएडा में एक व्यक्ति ने अपने 50 किराएदारों का किराया माफ किया
नोएडा के बरोला के निवासी कुशल पाल ने अपने 50 किराएदारों का किराया माफ कर दिया है और उनसे विनती की है कि वह घर छोड़कर न जाएं। उन्होंने अपने किराएदारों, ड्राइवर और सिक्योरिटी गार्ड को आटे के पैकेट भी बांटे हैं।

लोकनायक अस्पताल में देर रात 50-70 संदिग्ध मरीज हुए भर्ती
लोकनायक अस्पताल में देर रात डीटीसी बस में लगभग 50 से 70 संदिग्ध मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया। वहीं एक डॉक्टर का कहना है कि निजामुद्दीन इलाके के किसी मस्जिद में यह लोग रुके हुए थे। ये सभी जमात के लिए आए हुए थे। इसमें से कई लोग सऊदी अरब आदि देशों से भी थे। पुलिस इन्हें सबसे पहले आरएमएल अस्पताल लेकर गई थी लेकिन आरएमएल में सीट फूल होने के कारण इन्हें लोकनायक अस्पताल भेज दिया गया। अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि अब तक करीब 106 कोरोना संक्रमित संदिग्धों को यहां भर्ती कराया जा चुका है।

नोएडा-ग्रेटर में शाम 4 बजे के बाद घर से नहीं निकल सकेगा कोई
गौतम बुद्ध नगर में शाम 4:00 बजे के बाद घर से निकलने पर पाबंदी, शाम 4:00 बजे के बाद घर से नहीं निकल सकते लोग, नोएडा में आरएएफ और पीएसी की तैनाती की गई।

गाजीपुर सर्वोदय विद्यालय में रह रहे 400 बेघर और प्रवासी मजदूर
दिल्ली के गाजीपुर में सर्वोदय कन्या विद्यालय को बेघर और प्रवासी मजदूरों के लिए सरकार द्वारा एक अस्थायी होम शेल्टर में बदला गया है। दिल्ली सिविल डिफेंस कर्मी शैलेंद्र के. निराला यहां यूपी, बिहार और हरियाणा से लगभग 400 लोग हैं। ये लोग आनंद विहार बस टर्मिनल पर बस का इंतजार कर रहे थे।

एम्स सफदरजंग रोड पर स्थित आश्रय गृह में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया हाल
एम्स सफदरगंज रोड पर स्थित आश्रय गृह में रहने वाले एक व्यक्ति से जब न्यूज एजेंसी एएनआई ने इंतजामों को लेकर बात की तो उसने बताया कि सरकार की तरफ से दो वक्त का खाना और सेनिटाइजर दिया जा रहा है। डॉक्टर हफ्ते में दो बार जांच के लिए आते हैं। इसके अलावा हमें कोरोना से बचाव के सारे निर्देश दिए गए हैं।

दिल्ली-एनसीआर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या
दिल्ली- 72 संक्रमित
गाजियाबाद- 7 संक्रमित
गुरुग्राम- 10 संक्रमित
फरीदाबाद- 4 संक्रमित
पलवल- 1 संक्रमित
बुलंदशहर- 1 संक्रमित
नोएडा-ग्रेटर नोएडा- 32 संक्रमित
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ग्रेटर नोएडा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने की समीक्षा बैठक, अधिकारियों को लगाई फटकार

नोएडा में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से लेते हुए सोमवार को यहां का दौरा किया। वह विशेष विमान से सोमवार दोपहर करीब दो बजे हिंडन एयरपोर्ट पहुंचे, और वहां से हेलिकॉप्टर से गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी पहुंचे।

सीएम योगी ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी की बैठक में डीएम बीएन सिंह, कमिश्नर आलोक सिंह, नोएडा अथॉरिटी की सीईओ रितु माहेश्वरी, ग्रेटर नोएडा ओर यमुना अथॉरिटी के सीईओ मौजूद रहे। नोएडा में अब तक 36 पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं जो प्रदेशभर में सबसे ज्यादा हैं। मुख्यमंत्री मंगलवार को मेरठ, गाजियाबाद और आगरा जाएंगे। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे को पहले ही नोएडा भेज दिया गया था।

नोएडा में कोरोना के संक्रमण के फैलाव के लिए यहां की सीजफायर कंपनी को जिम्मेदार बताया जा रहा है। इस कंपनी में ब्रिटेन का एक अधिकारी आया था। वह मीटिंग के बाद लौट गया लेकिन उसके संपर्क में आकर कंपनी के कई कर्मचारी और उनके परिवारवालों समेत 13 लोग संक्रमित हो चुके हैं।
 
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दिल्ली एम्स का बड़ा फैसला, कोविड-19 अस्पताल में तब्दील होगा ट्रॉमा सेंटर

ग्रेटर नोएडा में सीएम ले रहे समीक्षा बैठक
कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए और उसके खिलाफ लड़ाई तेज करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने अपनी ट्रॉमा सेंटर इमारत को कोविड-19 के अस्पताल में तब्दील करने का निर्णय किया है।

ट्रॉमा सेंटर में ज्यादातर सड़क दुर्घटना का शिकार होने वाले लोगों का इलाज होता है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अब इसे कोविड-19 अस्पताल के रूप में तैयार किया जा रहा है। शुरुआत में इसमें 260 बिस्तर होंगे। एम्स प्रशासन जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक घोषणा करेगा।
 

एक सूत्र ने बताया, ‘पूरे ट्रॉमा सेंटर की हताहत और आपात सेवा को एम्स मुख्य आपात विभाग में स्थानांतरित किया जा रहा है। इसमें से ज्यादातर मरीजों को पहले ही मुख्य एम्स अस्पताल के विभिन्न वॉर्डों में भेजा जा चुका है।’

ट्रॉमा सेंटर में अभी 242 बिस्तर हैं तथा इसमें 18 और जोड़े जाएंगे। कुल बिस्तरों में से 50 आईसीयू के बिस्तर हैं और 30-40 उच्च निर्भरता वाली इकाई के हैं। सेंटर के पास करीब 70 वेंटिलेटर है। सूत्र ने बताया कि जरूरत के हिसाब से इस क्षमता को और भी बढ़ाया जा सकता है।

एम्स ने कोविड-19 के प्रबंधन प्रोटोकॉल के लिए एक कार्यबल गठित किया है और कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए आने वाले दिनों में पेश होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए कई समितियां भी गठित की हैं । अस्पताल पहले ही अपनी ओपीडी बंद कर चुका है।
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सख्ती बरतने के बाद भी टूटा लॉकडाउन, पुलिस करती रही गुहार पर नहीं माने लोग

आनंद विहार और कौशांबी बस अड्डे पर शनिवार देर रात जमा लोगों की भारी भीड़ रविवार सुबह खत्म हो गई लेकिन लॉकडाउन तोड़कर लोगों का पलायन जारी रहा।  शनिवार रात यहां करीब 15,000 लोग मौजूद थे।

इन सभी को उत्तर प्रदेश और बिहार में अपने गांव जाना था। इन लोगों को यूपी रोडवेज की बसों के माध्यम से इनके गांव भेज दिया गया है। इनमें से काफी लोगों को गाजियाबाद के लाल कुआं भेज दिया गया था। वहां से बसें इन्हें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पहुंचा रही हैं।

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक एके सिंह ने बताया कि शनिवार रात तक जो लोग कौशांबी बस डिपो में मौजूद थे, उन्हें रोडवेज की करीब 800 बसों से विभिन्न जिलों में भेजा गया है। उन्होंने बताया कि शनिवार देर रात कौशांबी बस अड्डे से बसों का संचालन रोक दिया गया था।

इसके बाद यहां से लोगों को गाजियाबाद के लाल कुआं भेजा गया था। गौरतलब है कि शनिवार को आनंद विहार बस अड्डे से लेकर कौशांबी बस अड्डे तक कई किलोमीटर तक लोगों की लाइन लग गई थी। ये सभी उत्तर प्रदेश में अपने-अपने गांव जाना चाहते थे।

अब लाल कुआं से भेजा जा रहा उनके गांव
गाजियाबाद के लाल कुआं से दिल्ली के प्रवासी कामगारों को बसों में बैठाकर उनके गांव की ओर रवाना किया जा रहा है। लाल कुआं पर मौजूद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कौशांबी बस अड्डे से रात के बाद बसों का संचालन रोक दिया गया था। रविवार सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक 600 बसों के माध्यम से करीब 40,000 लोगों को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों की ओर रवाना कर दिया गया है।
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लंदन से आए ऑडिटर ने पांच को दी बीमारी, गौतमबुद्ध नगर में अब 32 कोरोना संक्रमित

नोएडा में रविवार को दो महिलाओं समेत छह और लोग संक्रमित पाए गए। इनमें से पांच प्रत्यक्ष या परोक्ष, सीजफायर कंपनी में लंदन से आए ऑडिटर के संपर्क में आने से संक्रमित हुए हैं। 

बुलंदशहर में मिला संक्रमित भी इसी कंपनी से जुड़ा है। इस ब्रिटिश नागरिक से अब तक 19 लोग संक्रमित हो चुके हैं। इसके साथ, गौतमबुद्ध नगर में 32 संक्रमित हो गए, जबकि राज्य का आंकड़ा 81 है। 

यूपी सरकार ने फैसला किया है कि पलायन कर लौटे कामगारों को घरों में ही क्वारंटीन किया जाएगा। रविवार रात तक गौतमबुद्ध नगर में 31, मेरठ 13, आगरा 10, लखनऊ 8, गाजियाबाद 7, वाराणसी व पीलीभीत में 2-2, लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद, बरेली, कानपुर, जौनपुर, शामली, बागपत में एक-एक मरीज आ चुके हैं। गौतमबुद्ध नगर प्रशासन हर मरीज कोे इलाज के लिए 28 दिन का वेतन, छुट्टी  देगा। 

कनिका कपूर की चौथी रिपोर्ट भी पॉजिटिव
एसजीपीजीआई में भर्ती बॉलीवुड गायिका कनिका कपूर की चौथी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक रिपोर्ट निगेटिव नहीं आती उन्हें भर्ती रखा जाएगा। 

रामनवमी के दिन दो  घंटे खुले रहेंगे बैंक 
सरकार ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि रामनवमी के दिन दो अप्रैल को दो घंटे के लिए शाखाएं खुली रखें। बैंकों की वार्षिक लेखाबंदी के कारण एक अप्रैल व रामनवमी के कारण दो अप्रैल को अवकाश घोषित है। 

नोएडा-गाजियाबाद की सीमाएं सील  आनंद विहार बस अड्डा खाली
केंद्र के निर्देश पर यूपी में भी नोएडा-गाजियाबाद समेत सभी जिलों की सीमाएं सील कर दी गईं। आनंद विहार व कौशांबी बस अड्डे पर दो दिन से जमा भीड़ भी रोडवेज की 800 बसों से रविवार तड़्के तक रवाना कर दी गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  व्यवस्थाएं देखने खुद सड़क पर उतरे और आगरा एक्सप्रेसवे पर बाहर से आ रहे लोगों से बात कर मदद का भरोसा दिया। सरकार ने कामगारों व मजदूरों से एक महीने का किराया नहीं लेने के आदेश भी जारी कर दिए हैं। 
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दिल्ली में 17 से 82 साल तक के मरीज कोरोना संक्रमित, अभी सामुदायिक फैलाव नहीं

दिल्ली में कोरोना वायरस से अब तक 49 लोग संक्रमित हो चुके हैं, बावजूद इसके सामुदायिक फैलाव का एक भी केस सामने नहीं आया है। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों में 17 से 82 साल आयु तक के लोग शामिल हैं। इनमें 24 पुरुष और 15 महिला मरीज है।  

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 28 मार्च तक 13 हजार से ज्यादा लोग क्वारंटीन फेज भी पूरा कर चुके हैं। इनमें न सर्दी के लक्षण मिले हैं और न कोरोना संक्रमण के। फिर भी इन्हें लॉकडाउन तक घरों में ही रहने की सलाह दी गई है। ताकि फिर से ये संक्रमित न हो सकें। 60 वर्ष से ऊपर के  आठ संक्रमित मरीज हैं, जिनमें से दो की मौत भी हो चुकी है। इनमें एक विदेशी है। 

कोरोना वायरस को लेकर सामुदायिक फैलाव पर चिंता जताई जा रही है, लेकिन दिल्ली में अब तक  एक भी ऐसा केस सामने नहीं आया है, जिसकी ट्रेवल हिस्ट्री न हो। विदेश आने वालों से 13 लोग संक्रमित हुए हैं, जो उनके परिजन या करीबी हैं।

सबसे ज्यादा संक्रमित मरीज युवा
दिल्ली में सबसे ज्यादा संक्रमित मरीज युवा हैं। इनकी आयु 20 से 39 वर्ष के बीच है। इनमें से अधिकतर विदेश यात्रा से लौटकर आए हैं। कोई इरान तो कोई फ्रांस से आया है। 49 में से इन 23 मरीजों में 15 छात्र हैं, जो विदेशों में पढ़ाई कर रहे हैं। 

कहां-कहां मिले मरीज 
मयूर विहार, उत्तम नगर, त्रिनगर, जनकपुरी, साकेत, दिलशाद गार्डन, शिवाजी एन्क्लेव, डीयू, अशोक विहार, गौतम पुरी, जहांगीर पुरी, सर्वोदय एन्क्लेव, आनंद विहार, बाहुबली एन्क्लेव, कड़कडड़ूमा, राना प्रताप बाग, घिटौरनी, सैनिक फॉर्म, जामिया नगर, हरी नगर, सुखदेव विहार, निजामुद्दीन वेस्ट, कल्याणपुरी, टोडरमल चौराहा और वसंतकुंज। राजस्थान, कोलकाता, आंध्र प्रदेश, पंजाब, जम्मू, कारगिल (जम्मू), कुरुक्षेत्र, बंगलूरू व यमन निवासी भी दिल्ली में संक्रमित मिले। इनमें से यमन निवासी की मौत हो चुकी है। 
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लॉकडाउन में सोसाइटी-मोहल्ले की गलियों के बाहर जुटने वालों पर भी रिपोर्ट

लॉकडाउन के दौरान अपनी सोसाइटी और मोहल्ले की गलियों के बाहर जुटने वाले लोगों के खिलाफ सख्ती शुरू हो गई है। पुलिस के आने पर मौके पर पकड़े जाने वालों के साथ ही भागने वालों के खिलाफ भी सामाजिक दूरी का ध्यान नहीं रखने के लिए सरकारी आदेश के उल्लंघन की रिपोर्ट दर्ज की जा रही है।

लॉकडाउन के दौरान किसी को भी बिना वजह घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं है। इसके बावजूद सोसाइटियों और मोहल्लों में रहने वाले लोग अपने घर के बाहर झुंड में एकत्र होकर वार्ता में मशगूल हो रहे हैं। इस दौरान सामाजिक दूरी का ख्याल भी नहीं रखा जा रहा है।

 हालांकि पुलिस को देखकर वे अपने घरों में भाग जाते हैं। अब पुलिस इनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। मौके पर पकड़े जाने वाले लोगों के खिलाफ सरकारी आदेश के उल्लंघन का मामला दर्ज किया जा रहा है। 

उनसे पूछताछ के बाद भागने वालों को भी नामजद किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लोगों को कानून का पालन कर घरों के भीतर रहना चाहिए।
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लॉकडाउन में खूंखार हुए कुत्ते, लोगों को बना रहे शिकार

लॉकडाउन के दौरान खाना न मिलने से भूख से बेहाल हुए कुते खूंखार हो गए हैं। जरूरत पर घर से बाहर निकले लोगों को ऐसे आवारा कुते दौड़ाकर काट रहे हैं। वहीं जिन लोगों को आवारा कुतों ने काटा है, उनके लिए एंटी रैबीज इंजेक्शन का न मिलना भी बड़ी मुसीबत बनी हुई है। होटल रेस्टोरेंट आदि बंद होने से कुतों को खाना नहीं मिल रहा है नतीजा सामने है।

गलियों में झुंड में घूम रहे कुते हमलावर होकर लोगों को काट रहे हैं। नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुतों की संख्या 5000 से अधिक आंकी गई है। गायों को चारा खिलाने और उन्हें सुरक्षित रखने के प्रयास में नगर निगम का पशुधन विभाग, आवारा कुतों को इंजेक्शन लगवाने और उनको हटाने के  प्रति लापरवाह बना हुआ है।

जानकारों का मानना है कि भूख से कुते हमलावर हुए हैं। यदि इन्हें खाना खिलाया जाए तो वे शांत हो सकते हैं। बैरहना की नीरू सलोरी के चंदू और राजरूपपुर के राजेश सिंह के साथ करेलाबाग के इरशाद अली को कुतों ने तब काटा जब वह अस्पताल ही जा रहे थे। ऐसे लोगों ने निजी अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाया है। 

आठ दिन में दोगुने हुए कुते काटने के मामले  

बेली और काल्विन अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाने की नि:शुल्क व्यवस्था है। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और उसके बाद लॉक डाउन यानी तकरीबन आठ दिनों के दौरान कुते काटने की घटनाएं दोगुनी हो गई है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या से इसकी पुष्टि होती है।

अस्पताल सूत्रों के मुताबिक पहले सौ से डेढ़ सौ लोग आते थे, अब कुता काटने का इंजेक्शन लगवाने के लिए 300 से अधिक लोग पहुंचते हैं।अस्पतालों में अब इसकी मांग करने वाले 300 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि इंजेक्शन की कमी नहीं है जबकि लोगों को इंजेक्शन नहीं लगाए जा रहे हैं। ओपीडी बंद होने की बात कहकर लोगों को लौटाया जा रहा है। बेली अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक सुषमा श्रीवास्तव का कहना है कि कुते काटे जाने के मामले बढ़े हैं। 

खाना खिलाएं तभी होंगे शांत

आवारा कुतों को खाना खिलाए जाने के बारे में मुख्य सचिव ने निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद भी नगर निगम और अन्य किसी विभाग ने इसकी पहल नहीं की है। वहीं कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने आवारा कुतों को खाना खिलाने का काम शुरू किया है। इस संबंध में सोशल मीडिया में कई तस्वीरें भी वायरल की गई हैं। पशुपालकों का मानना है कि भूखे कुतों को खाना खिलाएंगे तभी वे शांत होंगे।
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