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विनायक चतुर्थी पर सिद्धिविनायक मंदिर(मुंबई ) में भगवान गणेश की पूजा से खत्म होगी पैसों की किल्लत 30-नवंबर-2019
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विनायक चतुर्थी पर सिद्धिविनायक मंदिर(मुंबई ) में भगवान गणेश की पूजा से खत्म होगी पैसों की किल्लत 30-नवंबर-2019

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नौकरी न कर शुरू की खुद की कंपनी, 26 साल की उम्र में बन गए बड़े उद्योगपति

गाजियाबाद के तुषार अग्रवाल, ये वो नाम है जिसने मात्र 26 साल की उम्र में उद्यम के क्षेत्र में अपना लोहा मनवा लिया है। आज तुषार दो इंडस्ट्री के मालिक है...

3 अक्टूबर 2019

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दिल्ली-एनसीआर

शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

बिहार की संस्कृति के रंग में रंगा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला, लोकगीतों से गुंजा परिसर

प्रगति मैदान में चल रहे भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला में बिहार की मिथिला पेंटिंग, टिकुली आर्ट, सुजनी कला की धूम मची है। गुरुवार को बिहार के कलाकारों के गीत संगीत से अंतरराष्ट्रीय मेला परिसर गुंजित हुआ। मेले में बिहार दिवस समारोह का आयोजन किया गया जिसका विधिवत उद्घाटन बिहार के उद्योग मंत्री श्याम रजक ने किया। 

हंसध्वनि थियेटर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में नीतू कुमारी नवगीत, सत्येंद्र कुमार संगीत अमर आनंद तथा उषा कुमारी ने बिहार की संस्कृति से जुड़े पारंपरिक लोक गीतों की प्रस्तुति करते हुए उपस्थित श्रोताओं को खूब झुमाया। नीतू कुमारी नवगीत ने गंगा मैया की स्तुति करते हुए मांगी ला हम वरदान है गंगा मैया मांगी ला हम वरदान, कौने रंग वृंदावनवां, कौने रंगे यमुना, कौन है रंगे बृजबाला कन्हैया खेलत हो अंगना, राजा जनक जी के बाग में अलबेला रघुवर आयो जी, पटना से बैदा बुलाई द नजरा गईली गुईंया, राम जी से पूछे जनकपुर के नारी बता द बबुआ लोगवा देत काहे गारी बता द बबुआ जैसे पारंपरिक लोक गीतों को प्रस्तुत किया। 

बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से ओतप्रोत गीत जिस धरा पर हमने जन्म लिया वही हमारा महान है ए बिहार की धरती पर जीवन कुर्बान है हर दिल में बसता प्यार यहां पर गंगा प्यार की बहती है देव अतिथि कहलाते हैं मिस्त्री बोली में रहती है गीत पेश किया जिसे खूब पसंद किया गया।

भोजपुरी रॉकस्टार सत्येंद्र कुमार संगीत ने बाल्मीकि ने रची रामायण लव कुश को जाने संसार यह है मेरा बिहार,बिदेसीया गीत चर्हती जवनिया बैरन भईले हमरो से के मोरा हरिहे कलेस रे बिदेसीया, अंगुरी मे दसले बिया नगीनिया रे ए ननदी दियरा जरा द जैसे गीत पेश किए। दर्शकों की मांग पर उन्होंने गोरिया चांद के अंजोरिया नियन गोर बारू हो तोहार जोड़ केहू नइखे तू बेजोड़ बारू हो, तलवा तलैया हिलोर मारे नया लहरे फसलिया ठावे ठाव गीत पेश किया। 

कार्यक्रम के दौरान हरि भूषण झा ने तबला पर शशि भूषण झा ने ऑर्गन पर, कुमार पारस ने बैंजो पर, पंकज बिष्ट ने पैड पर और प्रीतम बग्गा ने ढोलक पर सतेंद्र कुमार संगीत और नीतू कुमारी नवगीत के साथ संगत किया। लोकप्रिय गायक अमर आनंद और उषा कुमारी ने भी बिहार के कई पारंपरिक गीतों को पेश कर श्रोताओं को झुमाया। प्रांगण में कलाकारों द्वारा शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया गया।
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फीस बढ़ोतरी विवाद में जेएनयू को मिला डीयू का साथ, एबीवीपी छात्रों को पुलिस ने रोका

जेएनयू में फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्रों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को एक बार फिर जेएनयू के छात्रों ने दिल्ली सड़कों पर मार्च निकाला, जिसमें उन्हें डीयू के छात्रों का भी साथ मिला।
 

आज डीयू के छात्रों ने जेएनूय के छात्रों के साथ में पैदल मार्च निकालकर फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन किया। डीयू के छात्रों का भी कहना है कि जेएनयू की बढ़ी हुई फीस वापस होनी चाहिए। वहीं पुलिस ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के पास अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्रों को रोका दिया है। ये सभी जेएनयू में फीस वृद्धि के विरोध में मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर मार्च कर रहे थे। 
 




बुधवार को दिव्यांग छात्रों ने पुलिस मुख्यालय पर किया था प्रदर्शन 

बता दें कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्रावास फीस बढ़ोतरी के खिलाफ सोमवार को पैदल मार्च के दौरान विद्यार्थियों की पिटाई के विरोध में बुधवार को दिव्यांग छात्रों ने पुराने पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन किया था। कई घंटे चले प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पूरे मामले की जांच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की मांग की। दोपहर को छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मिलकर मांगों का ज्ञापन सौंपा। 

इसी दौरान छात्रों ने पुलिस लाठीचार्ज के कुछ वीडियो भी अधिकारियों को सौंपे। अधिकारियों ने छात्रों को आश्वासन दिया  कि वे पूरे मामले की जांच करवाएंगे। साथ ही एक सप्ताह के भीतर छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली पुलिस आयुक्त से भी मिलवाया जाएगा। इसके बाद छात्रों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।

सुबह करीब 9.30 बजे 40-45 दिव्यांग छात्र बस में सवार होकर पुलिस मुख्यालय के लिए निकले तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया। दिव्यांग छात्र पंकज सिंह कुशवाहा ने बताया कि पुलिस जबरन उनको वसंत कुंज थाने ले गई। वहां पुलिस छात्रों को गुमराह करती रही। छात्रों की योजना थी कि वह नए पुलिस मुख्यालय पर जाकर प्रदर्शन करेंगे। 

करीब डेढ़ घंटे छात्रों को वसंत कुंज थाने में रखने के बाद उनसे कहा गया कि वे पुराने मुख्यालय पर प्रदर्शन कर सकते हैं। बाद में करीब 11.30 बजे छात्रों को बस में बिठाकर पुलिस आईटीओ स्थित मुख्यालय ले आई। दोपहर करीब 12.45 बजे छात्र पुलिस मुख्यालय के बाहर पहुंचे और नारेबाजी शुरू कर दी।  

दोपहर करीब 1.30 बजे सात छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस मुख्यालय में पहुंचा। वहां दिल्ली पुलिस प्रवक्ता और मध्य जिला पुलिस उपायुक्त मंदीप सिंह रंधावा ने छात्रों से बातचीत की। छात्रों ने उनको अपना ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से छात्रों ने मांग की कि दिल्ली पुलिस अपने जवानों को दिव्यांग छात्रों के प्रति जागरूक करेगी। इसके अलावा मार्च में दिव्यांग छात्रों पर भी लाठीचार्ज करवाने के मामले की जांच कराई जाए और दोषी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जाए। 

एक सप्ताह के भीतर दिव्यांग छात्रों को पुलिस आयुक्त से मिलवाया जाए। इसके अलावा दिव्यांग छात्रों पर इस तरह की कार्रवाई आइंदा अपराध की श्रेणी में आएगी। ज्ञापन देने के बाद दिल्ली पुलिस प्रवक्ता मंदीप सिंह रंधावा ने बताया कि छात्रों के आरोपों की जांच कराई जाएगी। इसके अलावा एक सप्ताह के भीतर छात्रों को पुलिस आयुक्त से मिलवाया भी जाएगा। 
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व्यापार मेले तक पहुंचीं आदिवासी क्षेत्र की दुर्लभ जड़ी-बूटियां, खरीदने वालों की लगी है भीड़

सूरत-ए-हालः फिर गैस चैंबर बनने की ओर दिल्ली-एनसीआर, गाजियाबाद सबसे प्रदूषित

कमजोर पड़ी हवाओं से एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर स्मॉग का चैंबर बनता जा रहा है। तीन दिनों से हवा की गुणवत्ता में गिरावट के साथ ही बृहस्पतिवार को गाजियाबाद और नोएडा की हवा ‘गंभीर’ स्तर तक खराब हो गई। गाजियाबाद तीसरे दिन देश का सबसे प्रदूषित शहर है। वहीं, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘बेहद खराब’ और ‘गंभीर’ की सीमा रेखा पर है।

मौसम विभाग के मुताबिक बृहस्पतिवार को हवा की पांच किमी प्रति घंटा रही। वहीं, मिक्सिंग हाइट तीन से चार किमी के बीच रही। हालांकि, हवाओं की दिशा ने थोड़ी राहत दी। पूर्वी व उत्तर पूर्वी दिशा से दिल्ली पहुंच रही हवाओं के साथ पराली का धुआं नहीं पहुंच सका। 

इससे प्रदूषण में धुएं का हिस्सा बुधवार के 14 फीसदी की तुलना में पांच फीसदी ही रह गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, लगातार तीसरे दिन गाजियाबाद देश में सबसे प्रदूषित है। यहां वायु गुणवत्ता सूचंकाक 416 रिकार्ड किया गया, जबकि नोएडा का आंकड़ा 402 रहा।

कल से राहत मिलने की उम्मीद
‘सफर’ का कहना है कि शुक्रवार को भी मौसम में बड़ा फेरदबल नहीं होगा। हवा की गुणवत्ता और खराब होगी। दिल्ली-एनसीआर में हवा गंभीर स्तर पर रहेगी। हालांकि शनिवार दोपहर बाद पश्चिमी विक्षोभ से हवा की चाल तेज होगी। इससे वायु गुणवत्ता सुधरेगी। फिर भी हवा बेहद खराब रहेगी। रविवार को यह खराब स्तर में पहुंच सकती है।

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक
शहर 18 नवंबर 19 नवंबर 20 नवंबर 21 नवंबर
गाजियाबाद 256 330 366 416
दिल्ली 214 242 301 366
नोएडा 227 256 320 402
ग्रेटर नोएडा 212 218 340 400
गुरूग्राम 138 125 221 280
फरीदाबाद  -192 273 390
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pollution in delhi ncr pollution in delhi ncr

कैश वैन चालक व गनमैन को अगवा कर 80 लाख की लूट, दोनों पर शक

द्वारका इलाके में बृहस्पतिवार दोपहर बाइक सवार बदमाशों ने कैश वैन चालक और गनमैन को अगवा कर 80 लाख रुपये लूट लिए। सूचना पर आनन-फानन में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस जांच कर ही रही थी कि द्वारका सेक्टर-11 में वैन मिल गई। उसके पास ही चालक और गनमैन घायल अवस्था में पड़े मिले। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। द्वारका साउथ थाना पुलिस मुकदमा दर्ज कर जांच में जुट गई है।

जानकारी के मुताबिक एटीएम में रुपये डालने वाली कंपनी एसआईपीएल के चार कर्मचारी बृहस्पतिवार दोपहर नारायणा से कैश वैन लेकर निकले थे। वैन में दो कैशियर विकास व नरेंद्र, गनमैन विजय कांत मिश्रा और चालक धीरज मौजूद थे। चार जगह रुपये डालने के बाद वह द्वारका सेक्टर 6 स्थित मनीपाल अस्पताल में स्थित यस बैंक के एटीएम में पहुंचे।

अस्पताल के दूसरी तरफ वैन लगाने के बाद दोनों कैशियर एटीएम में रुपये डालने चले गए। जब दोनों कैशियर बाहर आए तो उन्हें वैन वहां नहीं मिली।

कैशियरों ने तुरंत इसकी जानकारी कंपनी के अधिकारियों और पुलिस को दी। कैश वैन के गायब होने की जानकारी मिलते ही अफरा-तफरी मच गई। तुरंत पुलिस की कई टीमें बनाकर छानबीन शुरू कर दी। घायल अवस्था में मिले चालक और गनमैन ने पुलिस को बताया कि दो बाइक सवार बदमाशों ने चाकू दिखाकर उन्हें अगवा कर लिया था।

सेक्टर 11 के पास सुनसान जगह पर दोनों की पिटाई कर बदमाश रुपये लेकर फरार हो गए। पुलिस ने दोनों का मेडिकल कराया और उनके बयान पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जिला पुलिस उपायुक्त ऐंटो अल्फोंस का कहना है कि शुरुआती जांच में वैन में 80 लाख रुपये होने की जानकारी मिली है।

चालक और गनमैन पर शक , पूछताछ जारी
पुलिस को चालक और गनमैन के बयान पर भरोसा नहीं है। कई अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। अस्पताल से लेकर जहां वैन मिली, वहां तक के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गनमैन के पास हथियार था। ऐसे में बदमाश उसे चाकू लगाकर कैसे अगवा कर सकते हैं।

वैन को सड़क पर दूसरी ओर लगाने से शक गहराया
शुरुआती जांच में पता चला है कि अस्पताल के अंदर ले जाने की बजाए वैन को सड़क पर दूसरी ओर लगाया गया था। ऐसा क्यों किया गया, इस संबंध में चालक से पूछताछ की जा रही है। चालक और गनमैन के फोन की कॉल डिटेल भी खंगाली जा रही हैं। वारदात से पहले जिन एटीएम मेें रुपये डाले गए थे, उनकी फुटेज भी देखी जा रही है। पुलिस को आशंका है कि बदमाश उनका पीछा कर रहे थे या फिर उन्हें बुलाकर वारदात को अंजाम दिया गया है।

पूर्व में हुईं कैश वैन से संबंधित वारदात
10 मई 2019 : पुल प्रहलादपुर में कैश वैन लूट के प्रयास के दौरान गार्ड ने चलाई गोली। एक बदमाश की मौत, बाद में दूसरे को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
08 अक्तूबर 2018 : मयूर विहार इलाके में डीएनडी फ्लाईओवर पर दो कार सवार बदमाशों ने कैश वैन लूटी। सिर में गोली लगने से गनमैन की मौत। कैश लूटने में सफल नहीं हुए बदमाश, छोड़कर भागे।
26 अप्रैल 2018: रोहिणी जिले के नरेला में सिस कंपनी की कैश वैन में कैशियर और गार्ड की हत्या कर बदमाशों ने 12 लाख रुपये लूटे।
24 अप्रैल 2018: रोहिणी जिले के शाहबाद डेयरी इलाके में बदमाशों ने सीएमएस कंपनी की कैश वैन में लूटपाट के दौरान गार्ड और कैश लोडर को गोली मारी, पर कैशवैन नहीं लूट सके।
04 फरवरी 2018 : रोहिणी जिले के विजय विहार में पारस दूध कारोबारी के यहां कैश लेने गई वैन से बदमाशों ने 11 लाख रुपये लूट। कैशियर को गोली मारकर किया घायल।
24 जून 2017 : उत्तर-पश्चिम जिले के भलस्वा डेयरी इलाके में बदमाशों ने कैश वैन से 12 लाख रुपये लूटे। गार्ड को गोली मारकर किया जख्मी।
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अमर उजाला पड़तालः सब्जी की जगह रेहड़ियों पर बिकता है पानी

पानी ले लो...पानी...आरओ से ट्रीट किया हुआ पानी ले लो...सब्जी बेचने वाले की तरह जामिया नगर के अबुल फजल एंक्लेव की गलियों में ऐसी आवाजें रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ चुकी हैं। 

अमर उजाला टीम ने दिल्ली में पानी की समस्याओं पर अपनी पड़ताल सीरीज में बृहस्पतिवार को जामिया नगर का दौरा किया। लोगों ने बताया कि ट्यूबवेल से मिलने वाला पानी अभी भी इलाके के लोगों की जरूरतें पूरी करने में नाकाफी है। यही वजह है कि प्यास बुझाने के लिए पानी खरीदना पड़ता है। 

जामिया नगर के अबुल फजल एंक्लेव की आबादी करीब डेढ़ लाख है। एक परिवार का पीने के पानी के मद में औसतन 2200 हजार रुपये प्रतिमाह खर्च है। ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति तो नियमित होती है, लेकिन पानी पीना तो दूर, इससे स्नान करने पर भी त्वचा रोग का शिकार होने का खतरा बना रहता है। पीने का पानी आरओ वाटर के नाम पर रेहड़ियों पर बिकता है, लेकिन इससे बच्चे टायफायड और पीलिया जैसी बीमारियों का शिकार होते रहे हैं। 

रेहड़ी पर पानी बेचने वाले एक व्यक्ति से जब पूछा गया कि एक बोतल की कीमत क्या है तो उसने बताने से पहले ही बोतल आगे बढ़ाते हुए कहा 20 रुपये। 15 लीटर पानी की कीमत 20 रुपये है जबकि पूरे परिवार के लिए हर दिन 60 रुपये खर्च होता है। ब्रांडेड पानी का इस्तेमाल करने वालों को रोजाना पानी के मद में करीब 150 रुपये खर्च करना पड़ रहा है। 

रेहड़ियों पर बिकता है पानी, बढ़ा खर्च 
मो. तारिक के मुताबिक पहले पेयजल ओखला से लाना पड़ता था, लेकिन अब गलियों में रेहड़ी पर बिकता है। पानी के लिए मशक्कत तो खत्म हुई, लेकिन इस मद में खर्च जरूर बढ़ गया है। ऐसे में कई परिवार, अपने घरों में ही फिल्टर या आरओ का इस्तेमाल करते हैं जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। अब तक इलाके में घरों तक पाइपलाइन के जरिये पानी की आपूर्ति नहीं होती है। 

किसी इस्तेमाल के लायक नहीं है ट्यूबवेल का पानी 
अब्दुल वाहिद का कहना है कि पूरे इलाके में जिस पानी की आपूर्ति होती है, वह पीने लायक तो नहीं है। किसी और इस्तेमाल के लिए भी माकूल नहीं है। उन्होंने बताया कि चंद दिन पहले उनकी बेटियों को त्वचा संबंधी परेशानियां हुईं। वाहिद ने बताया कि पानी में टीडीएस की मात्रा मानकों से आठ से 10 गुना अधिक है। ऐसे में अगर उस पानी का इस्तेमाल किया जाए तो बीमारियों को दावत देना है। 

...सेहत के लिए हानिकारक है गलियों में बिकने वाला पानी 
मो. आरिफ ने बताया कि उनके घरों तक पानी की पाइपलाइन बिछ चुकी है, लेकिन पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं है। अबुल फजल एंक्लेव में उनके कई रिश्तेदार रहते हैं, जहां पानी की वजह से बीमारी का खतरा हमेशा बना रहता है। उन्होंने कहा कि वर्षों बाद भी क्षेत्रवासियों को पाइपलाइन से पानी न मिलने की वजह से न केवल उन्हें रोजाना मुश्किलों से जूझना पड़ता है बल्कि इस पर खर्च कर भी बीमारियों की सौगात मिल रही है। 

दूसरी जगह के पानी का इस्तेमाल करते हैं...
मोइन खान ने बताया कि आरओ के पानी को ट्रीट करने के बाद टीडीएस की मात्रा इतनी कम हो जाती है कि अक्सर जोड़ों में दर्द की शिकायत होती हैं। पानी में टीडीएस की मात्रा कम होने से भी कई तरह की बीमारी होती है। इस तकलीफ से गुजरने के बाद मैं दिल्ली जल बोर्ड की तरफ से आपूर्ति किए जाने वाले पानी को दूसरी जगह से मंगवाकर इस्तेमाल कर रहा हूं। 
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यात्रियों को मोबाइल पर मिलेगी ट्रेन लेट होने की सूचना, एक्शन प्लान तैयार

सर्दी में कोहरे की वजह से होने वाली समस्याओं से निपटने के लिए रेलवे ने एक्शन प्लान तैयार किया है। सुरक्षा-संरक्षा के साथ यात्रियों को हर समय जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। 

लोको पायलट को कम दृश्यता की स्थिति से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण देने के साथ जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। ज्यादा लेट चलने वाली ट्रेनों को निरस्त करने या परिवर्तित समय से चलाने का खाका भी तैयार किया जा रहा है। 

उत्तर भारत में घने कोहरे की वजह से ट्रेनों का संचालन प्रभावित होता है। ट्रेनों के लेट होने से प्लेटफार्म पर यात्रियों को परेशान नहीं होना पड़े, इसके लिए खान-पान के स्टॉल 24 घंटे खोलने के निर्देश दिए गए हैं। 

स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन के लिए रेल सुरक्षा बल की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी। ट्रेन के देरी से चलने पर इसकी सूचना यात्रियों के रजिस्टर मोबाइल नंबर पर दी जाएगी। रेल लाइनों पर गश्त बढ़ाने का फैसला लिया गया है। 

गश्त लगाने वालों को जीपीएस आधारित हैंड-हेल्ड उपकरण प्रदान किए गए हैं ताकि किसी भी आकस्मिक घटना की सूचना वह दोनों तरफ के निकटवर्ती स्टेशनों तक तुरंत पहुंचा सकें। उत्तर रेलवे अपने सभी इंजन में फॉग-सेफ्टी डिवाइस लगाकर ट्रेनों को संचालित करेगा। 

रेलवे अधिकारियों के अनुसार जीपीएस नेटवर्क से जुड़ी सभी मॉडिफाइड स्वचालित सिग्नल इकाइयों की प्रणाली को अपग्रेड किया जा रहा है। साइटिंग बोर्ड, लेवल क्रासिंग बोर्ड, फॉग सिग्नल चौकियों को चमकदार रंग से पेंट किया जा रहा है। लोको पायलटों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वह ट्रेन की गति सीमा को अपने विवेक और सूझ-बूझ के साथ नियंत्रित कर सकें। 
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दिल्ली पुलिस ने मेरठ में पकड़ी अवैध हथियार फैक्ट्री, आरोपी और सप्लायर गिरफ्तार

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दक्षिण पूर्व जिले की एसटीएफ ने मेरठ में अवैध हथियार बनाने वाली फैक्टरी का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने फैक्टरी से एक कट्टा, दो कारतूस, अवैध हथियार बनाने का काफी सामान व औजार बरामद किए हैं। पुलिस ने अवैध हथियार बनाने वाले मेरठ निवासी आरोपी व सप्लायर को गिरफ्तार किया है।

दक्षिण पूर्व जिला डीसीपी चिन्मय बिश्वाल के अनुसार एसटीएफ प्रभारी मुकेश मोंगा की टीम ने 22 सितंबर को गांव बंस कवखुर्द, मुरादाबाद यूपी निवासी मशरूर को गिरफ्तार किया था। उसके पास से पांच कट्टे व आठ कारतूस बरामद हुए थे। 

मशरूर ने बताया था कि वह अवैध हथियार अमरोहा, यूपी निवासी आसिफ अली से लेता था और आगे सप्लाई करता था। उसने दो कट्टे व दो कारतूस अपने दोस्त फहीम को बेचे हैं। इसके बाद न्यू सीलमपुर निवासी फहीम को दो कट्टा व चार कारतूस के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। 

आसिफ अली की गिरफ्तारी के लिए इंस्पेक्टर मुकेश मोंगा की देखरेख में एसआई रामकुमार व कृपाल की टीम बनाई गई। काफी दिनों की तफ्तीश के बाद सराय काले खां से आसिफ अली को गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी निशानदेही पर उसके गांव पिपलोटी खुर्द, तहसील हसनपुर, अमरोहा स्थित उसके घर से कट्टा व दो कारतूस बरामद किए गए।

पुलिस को आसिफ अली ने बताया कि वह अवैध हथियार गांव राधाना मेरठ यूपी निवासी इस्तकार से लेता था। इसके बाद इस्तकार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उसके गांव राधाना मेरठ स्थित दबिश दी। घर से भारी मात्रा में अवैध हथियार बनाने का सामान मिला। घर से 40 बैरल, 50 ट्रिगर स्प्रींग, तीन ड्रिल मशीन, तीन ग्रिपर मशीन, लोहे की राड व वेेल्डिंग मशीन बरामद की हैं। 

इस्तकार से आसिफ ढाई हजार रुपये में कट्टा लेता था। वह मशरूर को चार हजार रुपये में बेच देता था। मशरूर दिल्ली व एनसीआर में बदमाशों को सप्लाई करता था। इस्तकार ने बताया कि वह दिल्ली में दो हथियार तैयार करता था और कई सालों से अवैध हथियार बना रहा है। एक हथियार बनाने पर 500 रुपये का खर्च आता था। आसिफ अली अपने रिश्तेदार मशरूर के कहने से अवैध हथियार सप्लाई करने लगा था। 
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व्यापार मेल में आई ईरानी महिला के चेहरे पर पुलिस ने लौटाई मुस्कराहट 

दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे 39 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में आई ईरानी व्यवसायी महिला दिल्ली पुलिस को कभी भी नहीं भूल पाएगी। ईरानी महिला ने गलती से डिब्बे में रखे एक लाख 45 हजार रुपये कूड़े के साथ फेंक दिए थे। दिल्ली पुलिस ने कूड़े से पैसे वाले डिब्बे को ढूंढकर विदेशी महिला को दे दिया। खुशी से गदगद महिला पुलिस को धन्यवाद करते हुए नहीं थक रही है। 

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के डीसीपी अजय पाल तोमर ने बताया कि ईरान की रहने वाली सैय्यद हम्मीद 39 वें व्यापार मेले में ईरान के खजूर व ड्राई फूट बेचने आई हुई है। 

सैय्यद हम्मीद ने हाल नंबर 9 एल में स्टॉल लगा रखी है। महिला अपने बिक्री के पैसे खजूर के खाली डिब्बे में रख रही थी। शाम के समय महिला ने पैसों से भरा डिब्बा गलती से कूड़े में फेंक दिया। बाद में महिला को याद आया कि उसने पैसे वाला डिब्बा तो कूड़े में फेंक दिया है। ईरानी महिला ने इसकी सूचना डीसीपी अजयपाल तोमर व अन्य पुलिस स्टाफ को दी। 

स्टाफ ने पैसे वाले खजूर के डिब्बे को ढूंढना शुरू किया। कई घंटे की तलाशी के बाद आखिरकार पैसे वाला डिब्बा कूड़े में मिल गया। डिब्बे में पूरे एक लाख 45 हजार रुपये मिल गए। पुलिस पैसे तुरंत ईरानी महिला को दे दिए। पैसे मिलने से ईरानी महिला बहुत खुश है और उसने इसकी जानकारी ईरानी एंबेसी को दी है। 
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फिरोज खान ही नहीं उनके पूरे खानदान ने पढ़ी है संस्कृत, पिता करते हैं कीर्तन, बुआ का नाम है 'लक्ष्मी'

आज 14वां दिन है जब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत धर्म ज्ञान विभाग की कक्षा में पढ़ाई करने के लिए एक भी विद्यार्थी नहीं पहुंचा। धर्म ज्ञान विभाग के विद्यार्थी पिछले 14 दिनों से एक मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर विरोध पर बैठे हुए हैं। छात्रों का कहना है कि वो किसी गैर ब्राह्मण से संस्कृत भाषा तो पढ़ सकते हैं, लेकिन धर्म ज्ञान नहीं। 

दूसरी ओर इस विभाग के लिए नियुक्त प्रोफेसर फिरोज खान छात्रों के विरोध से दुखी होते हुए कहते हैं कि मैंने जीवन भर संस्कृत की पढ़ाई की, लेकिन पहली बार महसूस हुआ कि मैं मुस्लिम हूं। फिरोज खान की नियुक्ति पर छात्रों के विरोध से उनके पिता भी आहत हुए हैं। 

फिरोज खान कौन हैं, उनके पिता क्या करते हैं और उनके घर का रहन-सहन कैसा है, यह जानने के बाद उनकी नियुक्ति का विरोध करने वाले कई लोगों के मूंह पर ताला लग गया है। आपको बता रहे हैं प्रोफेसर फिरोज खान और उनके परिवार के बारे में सबकुछ।
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खौलते हुए चावल की कड़ाही पत्नी पर पलटी, पति गिरफ्तार, पहले हुई थी तकरार

जीटीबी एन्क्लेव में पहले खाने बनाने के मसले पर दंपती के बीच हुए तकरार के बाद पति ने खौलते हुए चावल की कड़ाही पत्नी के ऊपर पलट दी। हादसे में पत्नी बुरी तरह जल गई। महिला को जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। महिला के बयान पर पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। 

पीड़िता सपना (काल्पनिक नाम) बच्चों व पति के साथ डीडीए फ्लैट, जीटीबी एन्क्लेव में रहती है। सपना और उसके पति दोनों प्राइवेट नौकरी करते हैं। पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद रहता है। आरोप है कि सपना का पति छोटी-छोटी बातों पर उसे पीटता है। 

झगड़े के कारण आरोपी पति अपना खाना खुद ही बनाता है। बुधवार सुबह सपना रसोई में खाना बना रही थी। उसी दौरान उसका पति वहां पहुंचा और उसने चावल की कड़ाही उतारकर चाय बना ली। इसके बाद वह जबरन चूल्हे पर अपना खाना बनाने की तैयारी करने लगा। 

पत्नी ने बच्चों को लिए खाना बनाने की बात कही तो आरोपी आगबबूला हो गया। उसने चूल्हे पर चढ़ी चावल की कड़ाही को सपना पर पलट दिया। गर्म पानी से सपना का दाहिना हाथ बुरी तरह जल गया। शोर मचाने पर पड़ोसी आए तो आरोपी वहां से भाग गया। 
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दिल्लीः टाइट जींस पहन चला रहा था कार, आया हार्ट अटैक

टाइट जींस या पैंट पहनना बेशक इन दिनों युवा पीढ़ी की जीवनशैली में पसंदीदा हो, लेकिन इसके कई गंभीर दुष्प्रभाव भी हैं। दिल्ली के ही पीतमपुरा निवासी 30 वर्षीय सौरभ कुछ समय पहले टाइट जींस पहन अपनी नई कार से दोस्तों के साथ ऋषिकेश के लिए रवाना हुए थे। करीब चार से पांच घंटे की यात्रा करने के बाद उन्हें पैर सोने का एहसास हुआ, लेकिन दोस्तों का साथ होने की वजह से उन्होंने इस पर गौर नहीं किया। तीन दिन बाद वापस दिल्ली आने के बाद उन्हें सांस फूलने में तकलीफ हुई तो अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि उन्हें हार्ट अटैक आया है। शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल आने के बाद डॉक्टरों ने पल्मोनरी इम्बॉल्मिंग (पीई) की पुष्टि की। 

पल्मोनरी इम्बॉल्मिंग (पीई) एक ऐसी स्थिति है जिसमें टाइट कपड़े या लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहने से रक्त संचार शरीर में रुकता है और रक्त का थक्का जमने लगता है। ऐसा होने से इंसान को दिल या दिमाग का अटैक आ सकता है। फेफड़ों में जब रक्त संचार रुकने लगता है तो मरीज जानलेवा स्थिति में आ जाता है। भारत में हर साल करीब 10 लाख मामले ऐसे सामने आ रहे हैं। खुद मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि उनके यहां हर महीने एक या दो मामले आ ही जाते हैं। 

नीला पड़ गया था शरीर, नहीं मिला बीपी
मैक्स अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. नवीन भामरी बताते हैं कि जब सौरभ अस्पताल आए, उस वक्त उनका पल्स 10-12 प्रति मिनट था। बीपी तो पता ही नहीं चल रहा था। शरीर नीला पड़ गया था। 45 मिनट तक डॉक्टरों ने अपने दोनों हाथों से छाती दबाते हुए सीपीआर दिया था। इसके बाद ईको से पता चला कि दिल का दायां चैंबर फैल गया और वे पल्मोनरी इम्बॉल्मिंग की स्थिति में थे। टीम ने तत्काल थ्रोम्बोलाइटिक एजेंट देकर तेजी से पूरे शरीर में थ्रोम्बोलाइसिस किया, क्योंकि उस वक्त दिल की हालत को और बिगडने से रोकने का यही उपाय था। 24 घंटे तक डायलिसिस पर रखना पड़ा था। डॉ. भामरी ने बताया कि सौरभ टाइट जींस पहनकर 8 घंटे तक ड्राइव कर रहा था। इस पर जब बाद में अध्ययन किया तो वजह यही सामने आई।

लंबी अवधि तक निचले अंगों का न चलना
डॉक्टरों के अनुसार लंबी अवधि तक निचले अंगों का न चलना, डिहाइड्रेशन इत्यादि पल्मोनरी इम्बॉल्मिंग के संकेत हो सकते हैं। जो लोग बीड़ी-सिगरेट या एल्कोहल का सेवन करते हैं, उनमें इसकी आशंका ज्यादा होती है। इसलिए लंबी अवधि तक बैठे रहने से कतराएं, ज्यादा से ज्यादा दो घंटे तक बैठने के बाद व्यायाम के लिए थोड़ा बहुत चलना चाहिए। 

व्यापक शोध-जागरुकता की आवश्यकता
डॉक्टरों के अनुसार पल्मोनरी इम्बॉल्मिंग को लेकर देश में व्यापक शोध और जागरुकता का अभाव है। सरकार से लेकर आम लोगों तक हर किसी को इस स्थिति के लिए जागरूक  रहने की आवश्यकता है,क्योंकि अगर ये स्थिति आती है तो बड़े अस्पताल में ही उपचार संभव है। 
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जेएनयू में बढ़ाई गई फीस हो सकती है वापस, विवाद खत्म होने की संभावना 

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में हॉस्टल मैनुअल पर पिछले 28 अक्तूबर से मचा विवाद जल्द खत्म होने की संभावना है। जेएनयू के आंदोलनरत छात्रों को शांत करने के लिए सरकार बढ़ाई गई फीस में आंशिक रोलबैक कर सकती है। 

सरकार की ओर से छात्रों की दिक्कतों को समझते हुए सोमवार या मंगलवार तक राहत देने की संभावना है। वहीं, जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईषी घोष का कहना है कि शुक्रवार को कैंपस में केंद्र सरकार की समिति के समक्ष पहले हॉस्टल मैनुअल को पूरी तरह से रोलबैक की मांग की जाएगी। इसके बाद नया हॉस्टल मैनुअल बनाने पर सहमति दी जाएगी। हालांकि उसमें विश्वविद्यालय प्रबंधन को छात्रसंघ को भी शामिल करना होगा। 

जेएनयू कैंपस में शाम चार बजे मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा हॉस्टल मैनुअल पर गठित तीन सदस्यीय समिति और छात्रसंघ समेत आम छात्रों के साथ बैठक आयोजित होगी। इसी बैठक पर जेएनयू हॉस्टल मैनुअल पर उठा विवाद समाप्त होने की भी संभावना है। क्योंकि इसी बैठक में छात्रसंघ अपनी पूरी मांग रखेगा। 

सूत्रों के मुताबिक, कमेटी बैठक के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इसी पर आगामी पांच से छह दिनों में राहत का फैसला होने की संभावना है। दरअसल सरकार छात्रों को नाराज नहीं करना चाहती है पर इस प्रकार के आंदोलनों के माध्यम से किसी भी फैसले को वापस लेने की परंपरा शुरू करने के हक में भी नहीं है। 

कुलपति छात्रसंघ से बात करते तो नहीं होता विवाद: छात्रसंघ 
जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईषी घोष ने अमर उजाला को बताया कि कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार हॉस्टल मैनुअल पर छात्रसंघ से बात करते तो ऐसा विवाद नहीं होता। हम भी मानते हैं कि जेएनयू में हॉस्टल फीस बेहद कम है। दस रुपये में आज के दौर में कुछ नहीं आता है। हालांकि बात करने का एक ढंग होता है। 

हम शुक्रवार को सबसे पहले समिति से हॉस्टल मैनुअल रोलबैक की मांग करेंगे। इसके बाद हम चाहते हैं कि विश्वविद्यालय प्रबंधन, हॉस्टल कमेटी छात्रसंघ को शामिल करते हुए नया हॉस्टल मैनुअल तैयार करें, ताकि छात्रसंघ आम छात्रों को फीस बढ़ाने का सही तर्क दे सके। यह नहीं कि दस रुपये फीस को सीधे तीन सौ रुपये तक बढ़ा दिया जाए।  

घोष के मुताबिक, मानव संसाधन विकास मंत्रालय व यूजीसी की ओर से विश्वविद्यालय को मिलने वाले फंड में कोई कटौती नहीं की गई है। ऐसे में जेएनयू प्रशासन किस आधार पर पैसे की कमी की बात कह रहा है। पैसे की दिक्कत है तो उस समस्या का हल भी मिल बैठकर निकाला जा सकता है। छात्रों का विरोध फीस बढ़ाना नहीं, बल्कि एक साथ 999 फीसदी बढ़ोतरी था। 

ऐसे में कई छात्र पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हो जाते। विश्वविद्यालय प्रबंधन पैसे की कमी और हॉस्टल फीस बढ़ोतरी पर छात्रसंघ के साथ आम छात्रों से बात करता तो यह विवाद उत्पन्न ही नहीं होता। 

हॉस्टल मैनुअल रोलबैक के बगैर कैंपस नहीं होगा सामान्य: शिक्षक संघ 
जेएनयू शिक्षक संघ के 13 सदस्यों और तीन सदस्यीय समिति की बृहस्पतिवार को मंत्रालय में बैठक हुई। संघ ने बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठाते हुए जेएनयू एक्ट के तहत काम न करने का आरोप लगाया है। जेएनयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. डीके लोबियाल के मुताबिक, समिति के समक्ष तीन बिंदुओं पर फोकस किया गया। हॉस्टल मैनुअल को रोलबैक के बगैर किसी भी तरह कैंपस सामान्य नहीं हो सकता है। उन्होंने बताया कि प्रशासन की फिजुलखर्ची के चलते विश्वविद्यालय में पैसे की कमी आई है।
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