Eid 2020: अभी भी लोगों के दिलों में जिंदा है हामिद, इसे जानकार आप भी करेंगे सलाम

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Mon, 25 May 2020 08:23 PM IST
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सार

  • मुंशी प्रेमचंद की कहानी ईदगाह से प्रेरणा लेकर ईदी के पैसों से शहर के कुछ युवाओं ने ईद पर की मजदूरों की मदद
  • नमाज से पहले हाईवे पर पहुंच, प्रवासी मजदूरों को पहनाई चप्पलें, खाने-पीने के सामान भी दिए

विस्तार

मशहूर कथाकार मुंशी प्रेमचंद की रचना ईदगाह सभी को जरूर याद होगी और उस रचना का पात्र हामिद भी लोगों जहन में कहीं न कहीं जिंदा होगा। जो अपनी बुजुर्ग दादी के लिए ईदी के पैसे से चिमटा खरीदकर ले जाता है और खूब दुआएं पाता है।
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सोमवार को मुंशी प्रेमचंद वाली ईदगाह हजरत मुबारक खां शहीद पर न ईद-उल-फित्र की नमाज हुई, न ही मेला लगा और न ही कोई हामिद आया लेकिन इसी शहर के कुछ युवाओं ने हामिद का किरदार से प्रेरणा लेकर ईद के दिन लोगों की खूब मदद की।
उन्होंने ईद की नमाज बाद में पढ़ी पहले सैकड़ों मजदूरों की मदद कर दुआएं हासिल कीं। मजदूरों के कदमों को चूमा अपने हाथों से चप्पल पहनाई। ईद-उल-फित्र के दिन जमुनहियाबाग व जाफरा बाजार के युवा नूर मोहम्मद, इरशाद अहमद, आसिफ महमूद, सैयद फैसल हुसैन, मुस्तकीम, शालू, फैज, इलू, सैफ, सालिक, फुरकान खान आदि सुबह चार बजे कालेसर जीरो प्वांइट पहुंच गए।
 
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