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गोरखपुर

शनिवार, 22 फरवरी 2020

रेलवे के ड्राइवर और गार्ड को मिलेगा सातवें वेतन का लाभ, जल्द लागू होगा नियम

पूर्वोत्तर रेलवे के रनिंग स्टाफ (लोको पायलट और गार्ड) को अब सातवें वेतनमान का पूरा लाभ मिलेगा। प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी (पीसीपीओ) ने मंडल के संबंधित अधिकारियों को वेतनमान संशोधित करने का आदेश जारी कर दिया है। इस फैसले से गार्ड, ड्राइवर के वतन में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो जाएगी।

जानकारों के मुताबिक प्रारंभिक वेतन 13500 के आधार पर रनिंग फिटमेंट फैक्टर के रूप में 2.945 से गुणा करने पर बेसिक वेतनमान 39757 रुपये होना चाहिए था। जबकि पूर्वोत्तर रेलवे में बेसिक वेतनमान 35400 रुपये ही दिया जा रहा है।

वहीं रेलवे ने रनिंग स्टाफ (लोको पायलट, गार्ड, फायरमैन आदि) के भत्ते में दोगुना की वृद्धि की है। यह बढ़ोतरी एक जुलाई 2017 से अथवा रेल सेवा (संशोधित वेतन) नियमावली 2016 में शामिल करने की तिथि से, जो बाद में हो उसी आधार पर लागू की जाएगी। पूर्वोत्तर रेलवे में करीब पांच हजार रनिंग स्टाफ को इससे फायदा होगा। औसतन उन्हें करीब आठ से 20 हजार रुपये तक का लाभ होगा।
 
यात्रा भत्ता को बढ़ाने के लिए रेलकर्मी लंबे समय से मांग कर रहे थे। रेलवे बोर्ड के अधिकारियों और मान्यता प्राप्त रेल यूनियन संगठनों के बीच वार्ता के बाद स्वीकृति के लिए वित्त मंत्रालय के पास प्रस्ताव भेजा गया था। वित्त मंत्रालय ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस संबंध में रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक एनपी सिंह ने सभी रेलवे जोन के महाप्रबंधक को 28 मई 2019 को निर्देश जारी किए हैं। बढ़े भत्ते में किलोमीटरेज भत्ता (प्रति 100 किमी), एएलके भत्ता (प्रति 160 किमी), रनिंग रूम सुविधा के बदले भत्ता, शंटिंग ड्यूटी भत्ता, हाई स्पीड गाड़ियों में कार्यरत रनिंग स्टॉफ का ट्रिप भत्ता शामिल है।
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गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर एक घंटे लिफ्ट में बच्चे के साथ फंसी रही बुजुर्ग महिला, ट्रेन छूटी

गोरखपुर रेलवे स्टेशन के कैब-वे के पास लगी लिफ्ट में तकनीकी खराबी आने से एक बच्चा और बुजुर्ग महिला करीब एक घंटे तक फंसे रहे। घबरा कर बच्चा चिल्लाने लगा। रेलवे कर्मचारियों ने काफी मशक्कत के बाद सीढ़ी लगाकर बच्चे को निकाला। लिफ्ट को नीचे लाकर लॉक तोड़ा गया और महिला को बाहर लाया गया।

बृहस्पतिवार को करीब 12 बजे फुट ओवर ब्रिज से लिफ्ट में पांच यात्री सवार हुए और प्लेटफार्म पर आने के लिए बटन दबाया। लिफ्ट नीचे तो आई लेकिन जब तक तीन यात्री बाहर निकले, दरवाजा बंद हो गया। अंदर उमंग (4 वर्ष) और शांती देवी (70) फंस गईं। जबकि उमंग के पिता बाहर आ गए।

अंदर फंसी शांती देवी को कुछ समझ में नहीं आया और अंदर के सभी बटन एक-एक कर दबाने लगीं। इसी बीच एक बटन दबने से लिफ्ट बीच में चली गई और वहीं फंस गई। देखते ही देखते वहां यात्रियों की भीड़ भी जमा हो गई। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे कर्मचारियों ने सीढ़ी से लिफ्ट के पास जाकर लॉक को तोड़ा और बच्चे को उतारा गया। इसके बाद लिफ्ट नीचे उतारी गई और महिला को बाहर लाया गया।

सीपीआरओ एनईआर पंकज कुमार सिंह ने कहा कि  लिफ्ट में एक परिवार के कई लोग सवार थे। लिफ्ट को एक साथ कई बटन दबाकर खोलने की कोशिश की गई। चाबी से नहीं खुल पाई तो लिफ्ट लगाने वाली कंपनी के लोगों को बुलाना पड़ा। इससे थोड़ी देर हुई। लॉक तोड़कर सभी को सुरक्षित निकाला गया।
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"मां-बाप के ठुकराए हम नवजातों की कोई नहीं सुन रहा, योगी जी आप सुनेंगे?"

‘‘जब हमें मां के सीने की गर्मी चाहिए, पिता की भाव भरी गोद, उस वक्त हम गत्ते के डिब्बे में, कभी नाली तो कभी कपड़ों में लिपटे रेलवे प्लेटफार्म पर पड़े होते हैं। अपनों के ठुकराए। हम आपके शहर में जन्मे वे नवजात हैं, जो कभी लिंगभेद का तो कभी उन शारीरिक संबंधों का शिकार हो रहे हैं, जिन्हें सामाजिक मान्यता नहीं। पीपीगंज में मुझे शायद 28 जनवरी को इसलिए मार दिया गया कि मैं एक अविवाहित नाबालिग के यहां जन्मी। सबको पता चल जाता तो इज्जतदार बाप की इज्जत चली जाती।

इसी बुधवार को मैं एक अभागा मोहद्दीपुर विंध्यवासिनी पार्क के नाले में गत्ते के डिब्बे में पड़ा था। मृत। मैं मरा कैसे, अब 72 घंटे के बाद मेरा पोस्टमार्टम होगा। यह कैसा सिलसिला है, 18 नवंबर की बात है। चौरीचौरा में मेरे मां-बाप ने मुझे झाड़ियों में फेंक दिया। क्या बस इसलिए कि मैं बेटी हूं ? बेटियां बचेंगी नहीं तो बढ़ेंगी और पढ़ेंगी कैसे? चलो खैर वो तो बेटी थी, न जाने कब से फेंकी जा रही है।

18  सिंतबर के दिन रेलवे स्टेशन पर मुझ बेटे को क्यों फेंक दिया गया? यह मेरे मां-बाप बता सकते हैं। उनको आखिर कौन ढूंढेगा, वहीं पुलिस जो बच्चे को लावारिस छोड़ने वालों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करने से बचती है। आपको पता है, मेरे मां-बाप के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने के लिए वकील अमर उजाला वाले लेकर आए थे।

67 सीसीटीवी कैमरों के बीच से गुजर कर मुझे फेंका गया था। मुझे मरने के लिए छोड़ने वालों का पुलिस आज तक नहीं पता लगा पाई। सोचिए, कोई वहां विस्फोटक रख गया होता तो? हम लावारिसों के बहाने पुलिस को कसिए तो।

छह और आठ नवंबर को हम दो अभागे पीपीगंज और बड़हलगंज में मिले। कानून होने के बाद भी पुलिस ने एसएसपी की नहीं सुनी। जीडी में तस्करा डाला, काम खत्म। सिलसिला यहीं खत्म नहीं होता, 18 नवंबर को गोला और चौरीचौरा में फिर हम दो लावारिस मिले और एसएसपी ने जोर लगाया। 154 साल में पहली बार पुलिस 318 आईपीसी में खुद वादी बनी। मुकदमा दर्ज हुआ।

शायद वे सब खुशकिस्मत थे, जो इस दुनिया में नहीं रहे। हम जो बच गए बस इंतजार कर रहे हैं कि पुलिस हमारे मां-पिता का पता लगाए। चाइल्ड लाइन में हम इस उम्मीद से पल रहे हैं कि हमारे मां-पिता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो तो हमारे जैसे और नवजात चाइल्ड लाइन में आने से बच जाएं। बेरहमी से मारकर नालियों- झाड़ियों में फेंके जाने से बच जाएंगे।’’ हम अभागे नवजात
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103 वर्ष के नरमू महामंत्री केएल गुप्त की कूल्हे की हड्डी नहीं जुड़ी, जनवरी में लगी थी चोट

एनई रेलवे मजदूर यूनियन के 103 वर्षीय महामंत्री एवं ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (एआईआरएफ ) के सहायक महामंत्री केएल गुप्त के कूल्हे की हड्डी अभी भी नहीं जुड़ सकी है। शुक्रवार को एक्सरे रिपोर्ट में हड्डी के बीच गैप पाया गया है। रेलवे अस्पताल में उनका इलाज कर रहे डॉक्टर फहीम ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है। करीब एक महीने तक वह अस्पताल में ही रह सकते हैं।

रेलवे जीएम दफ्तर के सामने नरमू के केंद्रीय कार्यालय में सात जनवरी 2020 को बेड से उतरते समय केएल गुप्त नीचे गिर पड़े थे और उनके बाएं कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। उन्हें शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कूल्हे का ऑपरेशन किया गया। उसके बाद रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया। केएल गुप्त ने बताया कि उन्होंने भोजन में खुराक भी कम कर दिया है। डॉक्टर ने बताया कि डॉक्टर फहीम दो

अस्पताल से ही संगठन का काम
नरमू महामंत्री केएल गुप्त का यह काम के प्रति जुनून ही है कि रेलवे अस्पताल में बेड पर ही संगठन का काम निपटा रहे हैं। संगठन के लोगों के साथ रोजाना मीटिंग करते हैं। उसके लिखा-पढ़ी करते हैं। रेलवे बोर्ड व फेडरेशन से आने वाले ही निर्देश को पढ़ते हैं और फिर संगठन के पदाधिकारियों को पत्र भेजते हैं।

‘यूनियन की लड़ाई मेरे लिए नशे जैसा’
नरमू महामंत्री से मिलने वाले भी रोजाना पहुंचते हैं। शुक्रवार को उनके पास संगठन से जुड़े सेवानिवृत्त रेलकर्मी शिव बालक प्रसाद पहुंचे। केएल गुप्त का हालचाल पूछा। फिर कहा कि कब तक ठीक होंगे। केएल गुप्त बोले, बहुत जल्द ही। यूनियन की लड़ाई मेरे लिए नशे जैसा है।
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केएल गुप्त। (File) केएल गुप्त। (File)

गोरखपुर महोत्सव की फीस वापसी पर बोले सोनू निगम, 'रुपये लौटने की कोई गुंजाइश नहीं'

shiv barat
मशहूर पार्श्व गायक सोनू निगम ने एक बयान जारी कर गोरखपुर महोत्सव में प्रस्तुति ने दे पाने को लेकर उपजे विवाद पर शुक्रवार को अपना पक्ष रखा है। साथ ही समिति को दो टूक जवाब देते हुए पूरी फीस वापस करने से इंकार कर दिया है।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि महोत्सव समिति की ओर से कार्यक्रम स्थगित किया गया। ऐसे में प्रस्तुति देने वाले कलाकार के फीस वापस करने की कोई गुंजाइश नहीं बनती है। यह कोई विवाद नहीं है।

महोत्सव के तहत 13 जनवरी को आयोजित होने वाली बॉलीवुड नाइट को एक दिन बढ़ाकर 14 जनवरी कर दिया गया था। उस दिन दूसरी जगह कार्यक्रम प्रस्तावित था। ऐसे में प्रस्तुति देना उनके लिए संभव नहीं था। जहां तक रही फीस वापसी की बात तो प्रस्तुति में इंजीनियर, संगीतकार, टेक्निशियन आदि भी शामिल होते हैं।

कार्यक्रम टलने से उन्हें उस दिन कोई दूसरा कार्यक्रम नहीं मिल सका। बावजूद इसके समिति के सामने 50 फीसद फीस और अगली प्रस्तुति में धनराशि को समायोजित करने का विकल्प रखा गया था। समिति ने दोनों ही विकल्पों को ठुकरा दिया। यह मामला यहीं पर समाप्त होता है।

 दो दिन पहले जारी हुआ नोटिस
 
दो दिन पहले महोत्सव समिति के उपाध्यक्ष और जिलाधिकारी के विजयेंद्र पांडियन ने फीस वापसी के लिए सोनू निगम को नोटिस जारी किया है। ऐसा न करने पर विधिक कार्यवाही की चेतावनी भी दी गई है।
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गोरखपुर: कुशीनगर पहुंचीं थाईलैंड की राजकुमारी चुलाफन, ऐसे हुआ भव्य स्वागत

गोरखपुर: पीपीगंज में साड़ी से लिपटा मिला किशोरी का शव, इलाके में मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के पीपीगंज में एक किशोरी का शव बरामद हुआ है। शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। किशोरी  का शव साड़ी में लिपटा हुआ मिला है, हालांकि अभी मृतक की शिनाख्त नहीं हो पाई है। सूचना मिलने के बाद पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं।

वहीं स्थानीय लोग इस बात का अंदाजा लगा रहे हैं कि ये मृतक किशोरी कहीं नाबालिक मां तो नहीं थी? जिसकी तलाश पुलिस को कई दिनों से थी। गौरतलब है कि 31 जनवरी को एक नवजात बच्ची का शव पीपीगंज इलाके के एक गांव की झाड़ी में मिला था।

अज्ञात शव होने की वजह से चार फरवरी को पोस्टमार्टम हुआ था। पोस्टमार्टम के समय ही स्पष्ट हो गया था, करीब एक हफ्ते पहले उस शिशु को मारा गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, सिर पर तीन इंच से गहरा घाव था। बगल में कट के निशान भी थे, जिससे वह कोमा में चली गई थी और उसकी मौत हो गई थी।

थानेदार पीपीगंज की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था। थानेदार की तहरीर पर केस दर्ज होने का तर्क देते हुए सीओ ने कैंपियरगंज एसओ को विवेचना सौंपी है। वहीं पुलिस कई दिनों से नाबालिग मां की तलाश में जुटी हुई है।

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गोरखपुर में मौसम ने बदली करवट, छाए बादल, रुक-रुक कर होती रही बूंदाबांदी

पिछले कुछ दिनों से चटक धूप के बाद शुक्रवार को मौसम का मिजाज एकाएक बदल गया। सुबह से ही बादल छा गए और शाम तक रुक रुककर बूंदाबांदी होती रही। अगले एक दो दिन और मौसम का मिजाज यू ही बने रहने की संभावना है।

शुक्रवार को सुबह से ही घटाएं घिरने की वजह से मौसम सुहावना हो गया।  अधिकतम तापमान 24.0और न्यूनतम तापमान 15.2 डिग्री रहा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान और जम्मू कश्मीर के ऊपर बना पश्चिमी विक्षोभ हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड होते हुए तिब्बत की ओर जा रहा है।

इसके अलावा राजस्थान में करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर एक चक्रवाती हवा सक्रिय है। इसकी वजह से उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार और बंगाल तक बादल फैले हुए हैं।
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