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गोरखपुर

मंगलवार, 31 मार्च 2020

कोरोना वायरस का छाया हुआ है खौफ, 53 बंदी आठ हफ्ते के पैरोल पर जेल से रिहा

कोरोना के बढ़ते प्रकोप की वजह से मंडलीय कारागार में बंद 53 बंदियों को रविवार को भी आठ हफ्ते के पेरोल पर रिहा कर दिया गया। जेल पहुंचकर मजिस्ट्रेट ने इन्हें अंतरिम जमानत दी। जिसके बाद देर शाम पुलिस उन्हें दो गाड़ियों में लेकर रवाना हुई। ये सभी ऐसे बंदी हैं जिनको अभी सजा नहीं हुई है और वे ऐसे अपराध में बंद थे जिसकी सजा सात साल या उससे कम की है।

शनिवार की देर रात भी पुलिस ने ऐसे ही 94 बंदियों को रिहा किया था। अबतक कुल 147 विचाराधीन बंदियों को रिहा किया जा चुका है। हालांकि अभी तक उन 27 सजायाफ्ता कैदियों को नहीं छोड़ा जा सका है, जिनको सात साल या उससे कम की सजा मिल चुकी है।

वहीं हत्या के आरोप में बंद आजीवन कारावास की सजा काट रहे साठ साल से अधिक उम्र के आदर्श कैदी सुदामा, वंशबहादुर और शेषनाथ की भी रिहाई नहीं हो सकी है। सोमवार को भी कुछ बंदियों व कैदियों की रिहाई हो सकती है।
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साइकिल लेकर दिल्ली से बिहार जाने की जद्दोजहद में मजदूर, इसकी दास्तां सुनकर भर आएंगी आंखें

खुद और परिवार का पेट भरने के साथ ही कई सारे कर्ज चुकाने और जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए बड़े शहरों में पसीना बहाने वाले यूपी, बिहार और बंगाल के मजदूरों ने कभी सोचा नहीं था कि लॉकडाउन के दौरान उन्हें ऐसी आफत का सामना करना पड़ेगा। संकट की घड़ी में इन्हें घर लौटने के लिए कई दुश्वारियों से जूझना पड़ रहा है।

दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से घर लौटने के लिए कई मजदूरों को जब कोई साधन नहीं मिला तो उन्होंने पास बची रकम से साइकिलों का इंतजाम किया और उन्हीं से निकल पड़े हैं। हाइवे पर अब पैदल कम, साइकिल से लौटने वाले ज्यादा लोग दिख रहे हैं। गोरखपुर-कुशीनगर फोरलेन हाईवे पर चौरीचौरा इलाके के सोनबरसा बाजार के पास थककर चूर कुछ साइकिल सवार मिले।

कुछ सो गए थे, कुछ चिंता में डूबे थे। कुल छह की तादाद में आए इन लोगों में से परमेश और रमेश ने बताया कि वे सभी पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के हरिपुर गांव के हैं। वे राजमिस्त्री हैं। बाढ़ की विभीषिका झेलने के बाद घर की माली हालत को संभालने के लिए पांच माह से नोएडा में काम कर रहे थे।

छह दिन पहले उन्हें बताया गया कि कई महीने तक कर्फ्यू जैसे हालात होंगे और खाने-पीने को कुछ नहीं मिलेगा। वे और उनके साथी घर भागने के लिए तैयार हुए तो पता चला कि गाड़ियां ही नहीं मिलेंगी। एक आदमी ने साइकिलों का इंतजाम कराया और वे निकल पड़े।
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लॉकडाउन के बीच DDU के छात्रों के लिए खास खबर, घर बैठे ऐसे करें पढ़ाई

गोरखपुर विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थी घर बैठे अपनी तैयारी कर सकते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने रविवार से ई-पाठशाला शुरू करा दी। वेबसाइट के विशेष पृष्ठ पर विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों द्वारा तैयार किये गए ई-कंटेंट विद्यार्थियों के लिए सुलभ कराए गए हैं। इसमें पाठ्य सामग्रियों के अलावा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन भी शामिल है।

यह जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के ई-पाठशाला एवं नेशनल मिशन ऑन एजुकेशन ट्रू आईसीटी के समन्वयक प्रो हर्ष कुमार सिन्हा ने बताया कि कुलपति प्रो विजय कृष्ण सिंह के आह्वान पर शिक्षकों ने 50 घंटे से कम समय में विद्यार्थियों के लिए उपयोगी पाठ्य सामग्री वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विश्वविद्यालय की वेबसाइट 222.ddugu.ac.in पर सूचना भी लगा दी गई है।

विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालय के विद्यार्थी सीधे इस  वेब लिंक http://ddugu.ac.in/epathshala_content.aspx पर क्लिक करके भी इस विशेष पृष्ठ पर जा सकते हैं । फिलहाल इस पृष्ठ पर स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर तथा चतुर्थ सेमेस्टर के साथ-साथ प्री पीएचडी कोर्स वर्क से संबंधित पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों द्वारा लगातार ऐसी सामग्री तैयार की जा रही है जिसे वेबसाइट पर नियमित तौर पर अपलोड किया जाता रहेगा।
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गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में भर्ती मरीज की मौत, जांच के लिए नूमना लिया

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में भर्ती मरीज की सोमवार को मौत हो गई। मौत के बाद डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ में हड़कंप मच गया है। डॉक्टरों की टीम ने आनन-फानन में मरीज के लार का नमूना लेकर जांच के लिए आरएमआरसी सेंटर में भेजा है। टीम को अब रिपोर्ट का इंतजार है। 

जानकारी के अनुसार, बस्ती के दरगहिया निवासी हसनैन अली (25) की तबीयत खराब होने पर रविवार को परिजन उसे बीआरडी मेडिकल कालेज लेकर आए थे। बताया जाता है कि उसको सांस लेने में तकलीफ थी। इसकी वजह से ट्रॉमा सेंटर से उसे मेडिसिन के वार्ड नंबर 14 में भर्ती किया गया था। 

विभागाध्यक्ष डॉ. महीम मित्तल की टीम इलाज कर रही थी। रविवार की रात में हालत बिगड़ी तो उसे कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए बने वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। वहां उसे वेंटीलेटर पर रखा गया था। सोमवार की सुबह तक उसके हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इस बीच उसकी मौत हो गई। 

मौत के बाद मचा वार्ड में हड़कंप
हसनैन अली की मौत के बाद कोरोना वार्ड में डॉक्टर और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। इसके बाद डॉक्टरों ने परिजनों से मरीज के विदेश यात्रा की जानकारी मांगी। लेकिन परिजन बताने को तैयार नहीं हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने मरीज के कोरोना संक्रमण की जांच कराने के लिए लार का नूमना ले लिया है। इसके बाद शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
 
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बीआरडी अस्पताल बीआरडी अस्पताल

#LadengeCoronaSe: बीआरडी में अब तक 20 की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव, चार का इंतजार

गोरखपुर समेत आसपास के जिलों से अब तक 24 लोगों के कोरोना वायरस की जांच के लिए नमूने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आरएमआरसी सेंटर में आ चुके हैं। इनमें 20 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। शेष चार लोगों की रिपोर्ट सोमवार को मिलने की उम्मीद है। निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है।

सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि केवल गोरखपुर जिले से 10 लोगों की रिपोर्ट जांच के लिए भेजी गई थी। इसमें सभी की रिपोर्ट निगेटिव है। अन्य 14 लोगों की रिपोर्ट अलग-अलग जिलों की है। बताया कि अब तक एक भी कोरोना पॉजिटिव जिले में नहीं मिले है।

विदेश और देश के अन्य हिस्सों से आए 5200 से अधिक लोगों के घर पहुंच कर 80 स्वास्थ्य टीमें लोगों को होम क्वारंटीन कर चुकी हैं। आइसोलेशन वार्ड, कोरोना समर्पित अस्पताल और क्वारंटीन वार्ड का मुकम्मल इंतजाम है।

वार्ड है बनकर तैयार
सीएमओ ने बताया कि जिले में 30 बेड का कोरोना समर्पित एक अस्पताल, जिला अस्पताल में 23 बेड का आइसोलेशन वार्ड, तीन बेड क्वारंटीन वार्ड, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 60 बेड का आइसोलेशन वार्ड, 100 शैय्या बेड के टीबी अस्पताल, 90 बेड का क्वारंटीन वार्ड तैयार किया गया है। बताया कि आवश्यकतानुसार अतिरिक्त इंतजाम भी किए गए हैं।

प्रशिक्षित किए जा चुके हैं डॉक्टर
सीएमओ ने कहा कि कोरोना वार्ड से जुड़े सभी अस्पतालों व वार्डों के चिकित्साधिकारी, चिकित्सक व स्टॉफ प्रशिक्षित किया जा चुके हैं। इनको एन-95 मॉस्क, ट्रिपल लेयर मॉस्क, पीपीई किट, 500 एमएल सैनिटाइजर, 25 किलोग्राम ब्लीचिंग पाउडर, 5 लीटर सोडियम हाइड्रोक्लोराइड, ग्लव्स, इंफ्रारेड थर्मामीटर, वीटीएम वायल, स्वाब स्टीक और स्प्रे मशीन प्रत्येक इकाई को उपलब्ध कराए गए हैं।
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संतकबीर नगर: सामान लेने के लिए बाजार जा रहे थे दो लोग, नहीं पता था ऐसे मिलेगी मौत

gorakhpur Lockdown
उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित टेमा चौराहे पर सोमवार को हुए हादसे में एक ही गांव के दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आसपास के कुछ लोग पहुंच गए। बाद में सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

कांटे चौकी प्रभारी जितेंद्र यादव ने बताया कि टेमा रहमत गांव निवासी 55 वर्षीय अब्दुल रहमान पुत्र गुलाम रसूल और 56 वर्षीय राजपत पुत्र भग्गल सोमवार को पौने दस बजे के करीब जरूरी सामान खरीदने गांव के चौराहे पर गए थे।

लोग सामान खरीद कर पैदल ही वापस घर लौट रहे थे। उसी दौरान बस्ती से गोरखपुर की ओर जा रही तेज गति की प्राइवेट बस ने दोनों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में मौके पर ही दोनों लोगों की मौत हो गई। सूचना के बाद मौके पर पुलिस पहुंच गई और दोनों शवों को कब्जे में ले लिया।

बाद में दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पीड़ित बेटे सद्दाम का आरोप है कि बस चालक ने तेज गति से लापरवाही पूर्वक वाहन चलाते हुए उसके पिता अब्दुल रहमान और गांव के राजपत को टक्कर मार दिया। जिससे उसके पिता और गांव के राजपत की मौके पर ही मौत हो गई। पीड़ित बेटे की तहरीर पर पुलिस ने बस चालक नाम पता अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया।


 
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Lockdown: भारत नेपाल सीमा पर फंसे 200 से अधिक नेपाली नागरिक, नहीं मिल रही एंट्री

भारत नेपाल सीमा सोनौली बॉर्डर पर दिल्ली, फरीदाबाद, नोएडा से नेपाल जाने के लिए पहुंचे नेपाली नागरिकों की संख्या दो सौ से अधिक पहुंच गई है। जिन्हें नेपाली प्रशासन ने प्रवेश देने से इंकार कर दिया है। स्थानीय प्रशासन उन सभी के रहने खाने की पूरी व्यवस्था कर रही है। कोरोना वायरस को लेकर भारत और नेपाल दोनों देशों की सरकार ने 21 दिन का लॉक डाउन किया है।

जिसको लेकर देश के महानगरों में काम कर रहे नेपाली नागरिक फैक्ट्री के बंद होने के बाद घरों के लिए पलायन करना शुरू कर दिया। जिससे रविवार और सोमवार दोनों दिनों को मिला कर सोनौली सीमा में दूर दूर से पहुंचे नेपाली नागरिकों की संख्या दो सौ से अधिक पहुंच गई है। यह सभी लोग सीमा के निकट दुकानों के सामने समय काट रहे हैं। जिसमे नेपाल के अर्धाखाची और झापा समेत नेपाल के पहाड़ों पर रहने वाले सबसे ज्यादा लोग हैं।

एसडीएम नौतनवां जसधीर सिह यादव ने बताया कि नेपाल के अधिकारियों से बातचीत हुई है। अभी तक इनके प्रवेश को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई है। तब तक बस डिपो के शेड में इनकी व्यवस्था की जा रही है।

संक्रमण को लेकर नगरवासी भयभीत
सोनौली कस्बे के मुख्य सड़क पर शनिवार की रात से ही डेरा जमाए नेपाली नागरिकों के कारण स्थानीय नगरवासी संक्रमण फैलने को लेकर भयभीत हैं। राजू कुमार, कन्हैया गुप्ता, विशाल, सुधीर कुमार समेत कई लोगो ने प्रशासन से मांग किया है कि सभी नागरिकों को या तो नेपाल भेज दें अन्यथा कहीं एकांत स्थान पर इनका रैन बसेरा बना दिया जाए।
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Lockdown: एक दुकान के ना खुलने से परेशान हैं लोग, जानकर आप भी नहीं रोक पाएंगे अपनी हंसी

कोरोना वायरस को लेकर पूरे देश में लॉकडाउन किया गया है। ऐसे में लोगों को जरूरत का सामान लेने के लिए थोड़ी छूट दी जा रही है। ऐसे में गोरखपुर के लोगों ने एक अलग ही मांग कर दी, जिसे जानकर आपकी हंसी निकल जाएगी।

यहां लोगों की मांग है कि आवश्यक सामानों की अगर दुकान खुल रही है तो ऐसे में शराब का ठेका भी खुलना चाहिए। आखिर ये तो लोगों की जरूरत का एक हिस्सा है। दरअसल, कोरोना वायरस के कारण के बहुत से लोग शराब नहीं पी पा रहे हैं। वे अंग्रेजी हो या देसी सभी दुकानों पर अपना जुगाड़ लगा रहे हैं।

वे मॉडल शॉप के दुकानदारों को फोनकर सिफारिश कर रहे हैं कि 'भाई कोई व्यवस्था कर दीजिए, कई दिन हो गया, अब तक पीने के लिए शराब नहीं मिली।' दुकानदार के मना करने पर सरकार को भलाबुरा बता रहे हैं।

उनका कहना है कि जिस तरह से आवश्यक सामग्री आटा, चावल, सब्जी और फल-फूल की दुकान खुली हैं, उसी तरह से आवश्यक सामग्री में भी शराब को भी शामिल कर उनकी भी दुकानें खोल दी जानी चाहिए।

इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी वीपी सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रदेश सरकार का है, हम लोग इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं। हरियाणा और मध्यप्रदेश में शराब की दुकानें खोली गई थी लेकिन बढ़ती भीड़ को देखते हुए, उसे बंद कर दी गई।
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गोरखपुर मंडल में सबसे ज्यादा यहां है 'होम क्वारंटीन', कई राज्यों से आए हैं लोग

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए विदेश और दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों की निगरानी स्वास्थ्य महकमा कर रहा है। चार दिनों के अंदर 6291 लोगों को स्वास्थ्य विभाग ने होम क्वारंटीन की सलाह दी है। इसमें सबसे अधिक लोग भटहट, कैंपियरगंज और खजनी के हैं। इन लोगों को यह भी निर्देश दिया गया है कि सेहत में अगर जरा सा भी बदलाव दिखे तो तत्काल डॉक्टरों से संपर्क करें।

जिला प्रशासन की ओर से जारी सूची के मुताबिक पिछले चार दिनों में  6291 लोग अलग-अलग शहरों और राज्यों से लौटे हैं। प्रशासन का दावा है कि शुरुआती जांच में यह लोग स्वस्थ पाए गए है। फिर भी एहतियात के तौर पर 14 दिनों तक इन्हें घर पर ही रहने को कहा गया है।

होम क्वारंटीन में सबसे ज्यादा लोग भटहट के 737 है। जबकि कैंपरियगंज में 562, और खजनी में 546 लोग आए हैं। इन लोगों को विशेष सतर्कता बरतने के साथ घर से न निकलने की सलाह दी गई है। साथ ही इसकी जानकारी रैपिड रिस्पांस टीम को दी गई है कि वह लोग इनकी समय-समय पर देखभाल करें।

सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि बाहर से आने वाले लोगों को होम क्वारंटीन की सलाह दी गई है। तबीयत खराब होने पर डॉक्टरों से संपर्क करने को भी कहा गया है।
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लॉकडाउन के दौरान परिवार हो रहा 'केबिन फीवर' का शिकार, जानें क्या है ये बीमारी

कोरोना वायरस की वजह से हुआ लॉकडाउन अब गोरखपुरियों में तनाव बढ़ा रहा है। बच्चे घर से निकलना चाहते हैं, बड़े भी परेशानी का जिक्र सोशल मीडिया पर कर रहे हैं। ज्यादातर लोगों के लिए लॉकडाउन केबिन फीवर (एक ही जगह पर फंस जाने से होने वाला तनाव) में बदल गया है।

रुस्तमपुर के रहने वाले रोशन कुमार दुबई में इंजीनियर हैं। करीब 25 दिन पूर्व वह घर लौटे हैं। परिवार में मां-बाप, पत्नी और दो बेटे हैं। घर में बेटों की हालत अब ऐसी हो गई है कि वे अपनी मां को टीचर मैम बोलने लगे हैं।

पत्नी सुशीला कहती हैं कि अभी एक हफ्ता बीता है, आगे क्या होगा पता नहीं। यही हाल ज्यादातर घरों में है। इतना ही नहीं परिवार में तनाव भी बढ़ रहा है। राजेंद्र नगर की रहने वाले मोहन शर्मा और उनकी पत्नी रीता शर्मा दोनों प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं। घर में मां-बाप, एक बेटा और एक बेटी है। बेटा दिल्ली से हाल में ही लौटा है। वह घर से नहीं निकल पा रहा है।
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रात में छिपकर नेपाल सीमा में घुसे 200 नेपाली नागरिक, लाठीचार्ज

रात में छिपकर नेपाल में घुसे 200 नेपाली नागरिक, लाठीचार्ज
पिछले तीन दिन से सोनौली सीमा पर फंसे थे
नेपाल की पुलिस ने सभी को नो मैंस लैंड तक खदेड़ा, सोनौली पुलिस ने किया बैरियर बंद
धरने पर बैठे नेपाली नागरिक, लगा रहे नेपाल मुर्दाबाद के नारे
सोनौली (महराजगंज। भारत नेपाल सीमा सोनौली पर तीन दिनों से फंसे 200 से अधिक नेपाली नागरिक सोमवार देर रात अपने घर जाने के लिए छिपकर नेपाल में प्रवेश कर गए। इसकी भनक लगते ही नेपाल की बेलहिया पुलिस मौके पर पहुंची और बगैर वजह जाने अपने नागरिकों पर लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने उन्हें नो मैंस लैंड तक खदेड़ दिया और दोबारा बिना इजाजत नेपाल में न घुसने की चेतावनी दी। इससे नाराज नेपाली नागरिक नो मैंस लैंड में धरने पर बैठ गए और नेपाल मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सोनौली पुलिस ने अपनी ओर का बैरियर बंद कर दिया।
सूत्रों के अनुसार दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम से 200 से अधिक नेपाली नागरिक तीन दिन पूर्व सोनौली पहुंचे थे। नेपाली नागरिक होने के बावजूद इन्हें नेपाल में प्रवेश की इजाजत नहीं मिली। तीन दिन से ये सीमा पर अपने घर जाने की इजाजत के इंतजार में बैठे थे। महराजगंज प्रशासन की ओर से इनके खाने की व्यवस्था की जा रही थी। सोमवार देर रात इनका धैर्य जवाब दे गया और वे छिपकर नेपाल में प्रवेश कर गए। अभी ये सीमा से कुछ ही दूर गए थे कि बेलहिया पुलिस को इसकी भनक लग गई। पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और लाठीचार्ज कर दिया। क्षेत्राधिकारी नौतनवा राजू कुमार साव भी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गए और बैरियर बंद करा दिया।
मामला गंभीर, पुलिस तैनात
- इंस्पेक्टर बेलहिया ईश्वरी अधिकारी ने बताया कि नेपाली नागरिक बिना इजाजत नेपाल में प्रवेश कर रहे थे। वहां की पुलिस ने लाठीचार्ज कर खदेड़ दिया। क्षेत्राधिकारी नौतनवा राजू कुमार साव ने बताया कि नेपाली नागरिकों को महराजगंज प्रशासन की ओर से रैन बसेरा में सभी सुविधाएं दी गई थीं, लेकिन वे अपने घर पहुंचने की चाहत लिए नेपाल में प्रवेश कर गए।
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