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बाबा बैद्यनाथ के पूजन से पूर्ण होती है मनोकामनाएं
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क्लैट 2019 : सोशल मीडिया से दूरी बनाकर की तैयारी, पाई 26वीं रैंक, दिए कारगर टिप्स

क्लैट में ऑल इंडिया 26वीं रैंक हासिल करने वाली अदिति सेठ ने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर तैयारी की।

16 जून 2019

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Digital Edition

अपने घर-गांव की कीमत समझ आ गई साहब अब मर जाएंगे पर बाहर नहीं जाएंगे

गुजरात में सबकुछ गंवाकर लौटे मजदूरों ने कहा- अब किस्मत में जो लिखा होगा घर पर ही बर्दाश्त करेंगे
पूरा मेहनताना नहीं दिया और लंबे सफर पर भूखे पेट ही भगा दिया

बरेली। अपना घरबार छोड़कर कामधंधे के लिए देश में प्रति व्यक्ति सबसे ज्यादा कमाई वाले राज्य गुजरात पहुंचे मजदूरों ने यूं तो खुद ही वहां अपनी जिंदगी में बहुत बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं थी लेकिन लॉकडाउन शुरू होने के बाद उन पर जो बीती, उसका दाग उनके चेहरों पर घर लौटने की खुशी के पीछे भी नहीं छिप पाया। ईंट भट्ठों पर काम करने वाले ज्यादातर मजदूरों का काम लॉकडाउन होते ही छिन गया। मालिकों ने रोजी के साथ रोटी भी बंद कर दी। घर आने का कोई जरिया न होने के बावजूद उन पर दबाव बनाते रहे कि वे फौरन ईंट भट्ठे के आसपास बनी झोपड़ियां खाली करके निकल जाएं। कई मजदूरों ने बताया कि लौटते वक्त उनके मालिक ने मजदूरी के पूरे पैसे तक नहीं दिए।
साबरमती एक्सप्रेस में करीब 20 घंटों का सफर करके करीब 11 सौ मजदूर बरेली जंक्शन पर उतरे तो चेहरों पर राहत के भाव दिखने के बावजूद दिल दहला देने वाली कई कहानियां उनकी जुबां पर थीं। अमर उजाला से बातचीत के दौरान आपबीती बताते हुए कई मजदूरों के गले तक रूंध गए। मजदूरों ने बताया कि डेढ़ महीने से वे लोग अपने मालिकों की बदसलूकी झेल रहे थे। सरकार ने उनके लौटने के लिए ट्रेन का बंदोबस्त किया तो उन्हे उम्मीद थी कि वे वापस आते वक्त उनके राशन-खाने का इंतजाम करेंगे लेकिन उन्होंने एक वक्त का खाना तक नहीं दिया। मजदूरों ने कहा कि वे अपने घर पर अब चाहे जिस हाल में रहें लेकिन कभी लौटकर गुजरात नहीं जाएंगे।

रेल का किराया माफ फिर भी ठेकेदारों ने कर दीं जेबें साफ

केंद्र सरकार ने तो दूसरे राज्यों से लौटने वाले मजदूरों का रेल किराया माफ कर दिया लेकिन ठेकेदार और एनजीओ फिर भी उनकी जेबें खाली कराने से बाज नहीं आए। जंक्शन पर उतरे मजदूरों ने बताया कि ठेकेदार ने टिकट के नाम पर उनसे एक-एक आदमी के पांच सौ रुपये से लेकर आठ सौ रुपये तक रखवा लिए। बड़े परिवारों के साथ लौटे कई मजदूरों के जेब की पूरी रकम इसी में निकल गई। मजदूरों ने बताया कि जिस एनजीओ को उन्हें सूची बनाकर ट्रेन में बैठाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसके लोगों ने यह काम ठेकेदारों के ही सुपुर्द कर दिया। ठेकेदारों ने उन्हें बताया कि एनजीओ ने उनसे पैसे मांगे हैं। कुछ ठेकेदारों ने टिकट के पूरे 525 रुपये लिए तो कुछ ने वहां ट्रेन में सवाल होने से पहले हुई थर्मल स्क्रीनिंग को मेडिकल परीक्षण बताकर आठ सौ रुपये तक ले लिए। हालांकि पश्चिम रेलवे के एक अधिकारी ने आधिकारिक बयान देने से इनकार करते हुए बताया कि किसी भी श्रमिक से रेलवे ने कोई किराया नहीं वसूला है। रेलवे के पास मजदूरों की संख्या के हिसाब से केंद्र सरकार ने पहले ही पैसा भेज दिया था। अगर किसी और ने मजदूरों से वसूली की है तो उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।

लॉकडाउन के बाद एक-एक दिन मुश्किल से कटा

हम जिस ईंट भट्ठे पर काम करते थे, उसका मालिक लॉकडाउन के बाद लगातार हम लोगों पर यूपी वापस लौटने का दबाव बना रहा था। एक-एक दिन बहुत मुश्किल से कटा। अब यहां आकर काफी सुकून महसूस हो रहा है। - मुन्नी, बल्लिया बरेली
मैं गुजरात में एक धागा बनाने वाली फैक्टरी में काम कर रहा था। कई दिन से पूरा परिवार भूखा था। आते वक्त भी मालिक ने भूखे पेट ही भेज दिया। कुछ पैसा भी मालिक पर बकाया था लेकिन उसने देने से साफ इनकार कर दिया। -हरीश चंद्र, प्रयागराज
गुजरात में काफी समय से मेहनत मजदूरी कर रहा था। लॉकडाउन हुआ तो ऐसी मुसीबतें झेलीं जो पूरी जिंदगी याद रहेंगी। परिवार को खाना खिलाने लायक तक पैसे पास में नहीं बचे। अब अपने घर लौटते हुए जो सुकुन मिला है, उसे बयां नहीं कर सकता।- सूरज पटेल, बनारस
कई हफ्तों से प्रयागराज में अपने घर लौटने के लिए परेशान था। धागा मिल मालिक ने काम बंद करा दिया था और खाने तक को पैसा नहीं दे रहा था। सरकार ने ट्रेन चलाकर बहुत उपकार किया है। - विजयचंद्र, प्रयागराज
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जिसने किराया नहीं दिया, उसे बस से ही उतार दिया

बरेली। साबरमती स्टेशन तक श्रमिकों को लेकर गुजरात स्टेट ट्रांसपोर्ट की बस पहुंची। गोरखपुर के महेश ने बताया कि वह सूरत की धागा मिल में काम करते थे। साबरमती स्टेशन से पहले ही बस में घुसे कुछ लोगों ने उनसे बरेली तक का किराया वसूलना शुरू कर दिया। श्रमिकों से 525 रुपये लेकर बरेली का टिकट दिया गया। एक मजदूर ने कहा कि बरेली का किराया 320 रुपये बताकर विरोध किया तो उसे हड़का दिया। महाराजगंज के केदारनाथ ने बताया कि एक हजार रुपये उनके पास थे जो सारे किराये में चले गए। उन्होंने बताया कि एक मजदूर ने पैसे नहीं दिए तो उसे स्टेशन से पहले ही बस से उतार दिया गया। प्लेटफार्म से भी अंदर नहीं घुसने दिया गया।
स्टेशन से एक लंच पैकेट और पानी की बोतल दी, फिर न पूछा
श्रमिकों की जेबें तो किराया देने में ही खाली हो गईं। साबरमती से सोमवार रात 11 बजे के बाद जब ट्रेन चली तो स्टेशन पर एक लंच पैकेट और पानी की बोतल उन्हें दी गईं। फिर रास्ते भर खाने को नहीं पूछा गया। महिला और बच्चों का भूख से बुरा हाल हो गया। यहां जंक्शन पर भी खाना नहीं मिला।

अंग्रेजी में थी लिस्ट.. अटके लेखपाल

साबरमती स्टेशन से आने वाले यात्रियों की लिस्ट साबरमती प्रशासन ने बरेली के डीएम को भेज दी थी। सुबह 11 बजे यह लिस्ट लेखपालों को दे दी गईं लेकिन इसमें सारे नाम अंग्रेजी में थे जिसे समझने में लेखपालों को काफी दिक्कत हुई।
ट्रेन में मथुरा, कासगंज और बदायूं के भी यात्री थे
साबरमती से आने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन में आगरा, मथुरा, हाथरस, कासगंज आदि शहरों के यात्री थे। ट्रेन भी अधिकांश इन्हीं स्टेशनों से होते हुए आई थी, लेकिन किसी भी यात्री को रास्ते में नहीं उतारा गया। सूत्रों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन ने इन स्टेशनों पर यात्रियों की स्क्रीनिंग की व्यवस्था ही नहीं की थी। न ही वहां बसों का ही इंतजाम था, जिससे यात्रियों को सीधे बरेली लाया गया। इनमें आजमगढ़, मेरठ, रामपुर, मुरादाबाद, कुशीनगर समेत प्रदेश के सभी शहरों के लोग थे जिनको बसों से उनके शहर भेजा गया।
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35 जिलों के 1200 मजूदरों को लेकर आज प्रतापगढ़ पहुंचेगी श्रमिक स्पेशल ट्रेन 

लॉकडाउन में गुजरात प्रांत के सूरत में फंसे 1200 मजदूरों को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन बुधवार को प्रतापगढ़ आ रही है। 35 जिलों के प्रवासी मजदूरों को लेकर आने वाली ट्रेन दोपहर लगभग 2.15 बजे प्रतापगढ़ जंक्शन पहुंचेगी। इस ट्रेन में जिले के महज 65 लोग ही हैं। 35 जिलों के मजदूरों को लेकर आने वाली ट्रेन मंगलवार को साबरमती से रवाना हो चुकी है।

अन्य जनपदों के  मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए रोडवेज की 40 बसों को लगाया गया है। जिले में मजदूरों को लेकर आने वाली यह पहली ट्रेन है। डीएम डा. रुपेश कुमार ने मंगलवार को स्टेशन का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया। 

रेलवे स्टेशन का 42 दिन का सन्नाटा बुधवार को टूट जाएगा। गुजरात से आने वाली ट्रेन में सवार सूरत में फंसे बेल्हा के 65 मजदूरों सहित 1200 श्रमिकों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। साबरमती से आने वाली ट्रेन के 22 डिब्बों में 35 जिलों के मजदूर शामिल हैं। इसमें इटावा, फर्रुखाबाद, फैजाबाद, गोंडा, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर के मजदूर हैं, जिनकी स्टेशन पर थर्मल स्क्रीनिंग होने के बाद गृह जनपद के लिए भेजा जाएगा।

बुधवार दोपहर 2.15 बजे रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली ट्रेन में सवार मजदूरों की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की 20 टीमें तैनात की गई हैं। प्रतापगढ़ के 65 मजदूरों को जयमंगल सिंह शिक्षण प्र्रशिक्षण संस्थान ले जाकर स्वास्थ्य की जांच होगी, जबकि गैर जनपद के प्रवासी मजदूरों को स्टेशन पर ही जांच करके बाहर खड़ी उनके जिलों की बसों में बैठाकर भेज दिया जाएगा।

डीएम ने रोडवेज की 40 बसों को स्टेशन पर लगाया है। डीएम डा. रुपेश कुमार ने मंगलवार को पहले कैंप कार्यालय पर अफसरों के साथ बैठक कर मजदूरों को सही सलामत घर पहुंचाने की रणनीति बनाई और बाद में रेलवे स्टेशन का निरीक्षण कर सभी को जिम्मेदारी सौंपी। डीएम ने बताया कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आने वाले मजदूरों को घर तक पहुंचाने के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। थर्मल स्क्रीनिंग करने के बाद ही सभी को रवाना किया जाएगा।
 
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कांग्रेस ने गुजरात के चर्चित वेंटिलेटर पर उठाए सवाल, कहा- बिना ट्रायल के राज्य सरकार ने अपनाया

कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सनसनीखेज मामला उठाया है। उन्होंने गुजरात सरकार पर एक ऐसी कंपनी को प्रमोट करने का आरोप लगाया है, जिसकी एक बड़ी हिस्सेदारी रमेश भाई विरानी के पास है।

कांग्रेस का कहना है क़ि रमेश भाई विरानी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सूट तोहफे में दिया था। दिलचस्प बात यह है कि इस कंपनी के प्रोडक्ट धमन-1 को मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने शानदार वेंटिलेटर कहा, जबकि यह एक आर्टिफिशियल मैनुअल ब्रीदिंग यूनिट (बैग) है। बताते हैं इस प्रोडक्ट के नतीजे सही नहीं पाए गए।

इतना ही नहीं बिना सही ट्रायल और परिणाम और अनुमोदन प्रक्रिया के पूरा हुए गुजरात सरकार ने इसे अपना भी लिया।

मुख्यमंत्री बोले, दस दिन में बनाया वेंटिलेटर

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के मुताबिक यह भी घटना एक घोटाले की तरफ इशारा कर रही है। खेड़ा के अनुसार चार अप्रैल को गुजरात के मुख्यमंत्री धमन-1 मशीन के उद्घाटन और सिविल अस्पताल को इसकी 1000 यूनिट देने के लिए गांधीनगर से अहमदाबाद आए।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री इस वेंटिलेटर को दस दिन से कम समय में तैयार करने के लिए अपने करीबी मित्र पराक्रम सिंह जडेजा और ज्योति सीएनसी नामक कंपनी की जमकर तारीफ करते हैं। खेड़ा का कहना है कि जबकि यह वैंटिलेटर है ही नहीं।

गुजरात के प्रचार से प्रभावित हुई कई राज्य सरकारें

खेड़ा के मुताबिक अहमदाबाद के सिविल अस्पताल ने अपने एनेस्थेसिया विभाग की रिपोर्ट पर उसे अनुपयोगी बताकर वेंटिलेटर देने की मांग की है। लेकिन गुजरात सरकार ने इसे वेंटिलेटर के तौर पर प्रचारित करने के कारण कई राज्यों की सरकार ने इसमें रुचि दिखाई।

इतना ही नहीं भारत सरकार की कंपनी एचएलएल लाइफ केयर ने भी ज्योति सीएनसी को 5000 धमन-1 मशीन देने का ऑर्डर कर दिया है। यह सभी ऑर्डर कोविड-19 के संक्रमण को लेकर हुए और मशीन कोविड-19 संक्रमितों के इलाज में बिल्कुल कारगर नहीं है।

जब यह सच्चाई सामने आनी शुरू हुई तो राज्य सरकारों ने आर्डर कैंसिल करना आरंभ कर दिया। अब राज्य की प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) जयंती रवि को इसके बचाव में प्रेसवार्ता करनी पड़ रही है।

चौंकाने वाली बात

ज्योति सीएनसी के सीएमडी मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के मित्र पराक्रम सिंह जडेजा हैं। इस कंपनी का 74,02,750 शेयर एकनाथ इंफ्राकॉन एलएलपी के पास है। जबकि 60 लाख आठ हजार (46.76 फीसदी) शेयर रमेश भाई विरानी के पास है।

धमन-1 को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से मंजूरी नहीं मिली है। इतना ही नहीं अब यह भी खुलासा हो रहा है कि इसे केवल मरीज पर परीक्षण करके ही मुख्यमंत्री के स्तर से मान्यता दे दी गई।
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Vijay Rupani Inaugrate low cost ventilator Vijay Rupani Inaugrate low cost ventilator

Lockdown 3.0 : सूरत से उत्तराखंडियों को लेकर आज तड़के चली ट्रेन, 12 मई को भी वापस आएंगे राज्य के लोग

pratapgarh

बड़ौदा से प्रयागराज पहुंचे 1301श्रमिक, प्रत्येक से लिए गए 575 रुपये

दूसरे राज्यों से श्रमिकों के आने का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा। गुजरात के बड़ौदा से विशेष ट्रेन 1301 श्रमिकों व उनके परिवार को लेकर जंक्शन पहुंची। श्रमिकों ने बताया कि उनसे सबसे 575 रुपये किराया लिया गया है। बताया, बड़ौदा में रजिस्ट्रेशन के समय ही यह राशि ले ली गई थी, जबकि रेलवे व प्रशासन लगातार कोई किराया नहीं लेने की बात कह रहा है। 

वहीं जंक्शन पर शनिवार को उतरे श्रमिकों को 41 बसों से उनके गृह जनपद भेजा गया। इससे पहले सभी का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। रविवार को भी दो ट्रेनों से श्रमिक आएंगे। बता दें कि अब तक कुल आठ ट्रेनों से श्रमिक आ चुके हैं। इनमें सात गुजरात से आईं हैं। इसी क्रम में बड़ौदा से चली ट्रेन शनिवार सुबह 7.22 बजे जंक्शन पर पहुंची।
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समझ से परे है रेलवे का 85 फीसदी से किराया छोड़ने का गणित 

एक मई से चलाई गईतमाम श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सफर करने वाले मजदूरों के लिए रेलवे द्वारा 85 फीसदी  एवं राज्य सरकार द्वारा 15 फीसदी किराया वहन करने करने की बात की जा रही है।लेकिन इन ट्रेनों से सफर करके पहुंचे सैकड़ों मजदूरों के पास उपलब्ध टिकट कुछ औरही बयां कर रहे हैं। इन श्रमिकों को कहना है कि वह जिस स्थान से ट्रेन पकड़कर चढ़ेथे, वहां संबंधित राज्य सरकार नेटिकट की एवज में उनसे किराया लिया। प्रयागराज पहुंचे श्रमिकों ने अपने टिकट भीदिखाए। 

प्रयागराजमें अब तक सात श्रमिक स्पेशल आ चुकी हैं। आठवीं श्रमिक स्पेशल गुजरात के वडोदरा सेशनिवार की सुबह आ रही है। इसके पूर्व सात में से छह श्रमिक स्पेशल गुजरात से हीआई। इसमें भी चार स्पेशल सूरत से आई। इस ट्रेन से आए श्रमिकों के पास जो टिकट रहेउसमें सूरत से प्रयागराज तक किराया 595 रुपये अंकित था।  कुछ श्रमिकों का आरोप था कि सूरत में इस टिकट केलिए ठेकेदारों एवं कुछ अन्य लोगों ने 700 से एक हजार रुपये तक वसूले। वहीं रेलवे अफसरों काकहना है कि रेलवे बोर्ड की गाइड लाइन है कि वह टिकटों को प्रशासन के हवाले करेगाऔर प्रशासन ही वह टिकट श्रमिकों को उपलब्ध कराएगा।

डीआरएम प्रयागराज अमिताभ भीइसकी पुष्टि दो दिन पहले कर चुके हैं। उधर रेलवे द्वारा किराये में जो 85 फीसदी की छूट देने की बात कही गई है उसका गणित कुछओर ही है। दरअसल रेलवे आमतौर पर जो किराया यात्रियों से लेती है उसमें 40 से 43 फीसदी की सब्सिडी शामिल होती है। अभी श्रमिकस्पेशल जो चल रही हैं उसमें सामाजिक दूरी यात्रियों के बीच बनी रहे तो सभी सीटेंबुक नहीं की जा रही है। यानी कि अगर किसी स्लीपर कोच में 80 बर्थ है तो उसमें 50 बर्थ ही यात्रियों को आवंटित की जा रही हैं।

इसमें दोनों मिडिल बर्थ और एक साइड अपर बर्थ बुक नहीं की जा रही। इतना ही नहीं ट्रेनखाली होने के बाद वापस अपने गंतव्य स्टेशन तक जाती है। इस दौरान ऑपरेटिंग का जोखर्चा आ रहा है वह भी इसमें जोड़ा जा रहा है। इसी कुल खर्च को जोड़कर 85 फीसदी दिखाने का प्रयास किया गया है। हालांकिरेलवे अफसर इस बारे में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। हालांकि किराये में छूट कारेलवे की ओर से कोई सर्कुलर भी जारी नहीं किया गया है। ऐसे में इस बात के कयासलगाए जा रहे हैं कि किराये में 85 फीसदी की छूट किसी भ्रामक जानकारी से कम नहीं है।
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Prayagraj News: गुजरात से विशेष ट्रेन में आए 3674 श्रमिक, सभी को कराया गया होम क्वारंटीन

गुजरात से तीन विशेष ट्रेनों की मदद से बृहस्पतिवार को भी 3674 श्रमिक तथा अन्य लोग आए। सूरत से आई तीसरी ट्रेन में छात्र-छात्रा तथा अन्य लोग भी शामिल रहे। चिकित्सीय परीक्षण और भोजन बाद इन्हें करीब 114 बसाें से गृह जनपद भेजा गया। प्रयागराज के श्रमिकों को भी बसों से उनके गांव भेजा गया। सभी को होम क्वारंटीन कराया गया है। इस तरह से दो दिनों में गुजरात और पंजाब से यहां सात ट्रेनों में 8164 श्रमिक तथा अन्य लोग आ चुके हैं। इनमें प्रयागराज के श्रमिकों की संख्य करीब एक हजार हैं।

गुजरात के भुज से चलने वाली विशेष ट्रेन सुबह 7.22 बजे ही जंक्शन पर पहुंच गई। इनमें कुल 1217 श्रमिक रहे। प्लेटफार्म पर ही चिकित्सीय परीक्षण किया गया। फिर उन्हें स्टेशन परिसर में बने आश्रय स्थल में ठहराया गया। वहां भोजन तथा अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने के बाद 36 बसों से गृह जनपद भेजा गया। सूरत से दूसरी ट्रेन भी दिन में करीब डेढ़ बजे आई। इनमें 1230 श्रमिक आए।

आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन्हें 39 बसों से भेजा गया। तीसरी ट्रेन भी सूरत से करीब सात बजे यहां आई। इसमें 1227 लोग आए। इसमें श्रमिकों के अलावा छात्र-छात्राओं तथा अन्य लोगाें की भी बड़ी संख्या रही। इन्हें 39 बसों की मदद से गृह जनपद भेजा गया। इससे पहले बुधवार को गुजरात से तीन तथा पंजाब से एक ट्रेन में 4490 श्रमिक आए थे। 
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Pratapgarh: गुजरात से आए मजदूरों को नहीं देना पड़ा बस का किराया 

गुजरात के साबरमती से आने वाले मजदूरों को बस का किराया नहीं देना पड़ा। प्रदेश सरकार बसों को किराये के रूप में 45,000-45,000 रुपये का भुगतान करेगी। ट्रेन का किराया चुकता करने वाले मजदूरों को जब यह जानकारी हुई कि उन्हें बस का किराया नहीं देना है तो उन्होंने राहत की सांस ली। 

गुजरात से आने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन में हमीरपुर, चित्रकूट, बलरामपुर, गोरखपुर, मऊ, गाजीपुर, बलिया, कुशीनगर, सिध्दार्थनगर, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, अयोध्या, वाराणसी, सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर, ज्ञानपुर, आगरा, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, मथुरा, अलीगढ़, हाथरथ, बुलंदशहर, कानपुर, इटावा, मैनपुरी, उन्नाव, कन्नौज, फेतहपुर, कौशांबी, सीतापुर, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, लखनऊ, झांसी आदि जिलों के 1172 मजदूर सवार थे।

इन लोगों को घरों तक छोड़ने के लिए परिवहन निगम की 40 बसें लगाई गई थीं। ट्रेन से उतरने वाले मजदूरों को सीधे बसों में बैठाया गया। मजदूरों को जब यह जानकारी हुई कि बस का किराया नहीं देना है तो वह बेहद खुश हुए। एआरएम एमआर भारती ने बताया कि शासन ने प्रति बस के लिए 45,000-45,000 रुपये का भुगतान करने को कहा है।
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