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रोहतकः एसटीएफ ने भारी मात्रा में चरस की बरामद, एक आरोपी गिरफ्तार, दो फरार

एसटीएफ द्वारा नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत कार्य करते हुए प्राप्त मुखबरी के आधार पर यह कार्रवाई की गई।

27 जनवरी 2020

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फतेहाबाद

सोमवार, 27 जनवरी 2020

भवन निर्माण सामग्री के दाम 15 से 25 फीसदी बढ़े, घर बनाना मुश्किल

फतेहाबाद। पिछले 10 दिनों से भवन निर्माण सामग्री के दामों में 15 से 25 फीसदी की वृद्धि होने से लोगों का घर बनाना मुश्किल हो गया है। वहीं दाम बढ़ने से कंस्ट्रक्शन ठेकेदारों को भी दिक्कतें आनी शुरू हो गई है। दाम बढ़ने का कारण सीमेंट कंपनियों का पूल, ट्रकों की ओवर लोड बंद होना तथा ईंट भट्ठों की चिमनियों को हाई-ड्राफ्ट करने के आदेशों को कारण बताया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले दिनों सीमेंट के भाव 330 रुपये प्रति बैग चल रहे थे, जिसके दाम अब बढ़कर 350 से 370 रुपये प्रति बैग पहुंच गए है। ऐसे ही सरिया के दाम 4500 रुपये क्विंटल था, जो अब बढ़कर 5 हजार तक पहुंच गया है। रेता के भाव 25 रुपये से बढ़कर 30 रुपये फुट, बजरी के भाव 30 से बढ़कर 38 रुपये फुट, क्रेशर के भाव 32 से बढ़कर 40 रुपये फुट तक पहुंच गए है, जबकि ईंट के भाव 4500 रुपये प्रति हजार से 5 हजार रुपये प्रति हजार हो गया है।
इस कारण बढ़े सीमेंट के दाम
सीमेंट कंपनियों द्वारा हर वर्ष इन दिनों एकजुट होकर पूल कर लिया जाता है। इसके बाद कंपनियां सीमेंट की अपनी ही मर्जी से दरें तय करती है। इस बार भी कंपनियों ने सीमेंट के भाव 330 रुपये से बढ़ाकर 350 से 370 तक कर दिए हैं।
इस कारण बढ़े रेता, बजरी व सरिया के दाम
सरिया, रेता, बजरी, क्रेशर के दाम बढ़ने के कारण सरकार स्वयं है। बताया जा रहा है कि पहले जो ट्रक 10 टन पास होता था वह 20 से 25 टन लादकर अपने गंतव्य को जाता था। ऐसे में उसको डीजल के दाम तथा ट्रक के खर्च तथा ड्राइवर के खर्चे मार नहीं करते थे, लेकिन सरकार ने अब ओवरलोड को बंद करके ट्रकों को आदेश दिए हैं कि वह अंडर लोड चले। जिससे ट्रक की माल लोड करने की क्षमता अढ़ाई गुणा कम हो गई। उसके बाद उसने दाम बढ़ा दिए। इसके अलावा खानक में कई दिनों बाद खनन होने से माल की डिमांड बढ़ गई, जिस कारण कै्रशर मालिकों ने दाम बढ़ा दिए।
इस कारण बढ़े ईंटों के दाम
सुप्रीम कोर्ट व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने ईंट भट्ठा संचालकों को आदेश दिए थे कि ईंट भट्ठा अत्यधिक मात्रा में प्रदूषण फैला रहे हैं, अगर ईंट भट्ठे चलाने है तो इनकी चिमनियों को निर्माण हाइ ड्राफ्ट तरीके से किया जाए। कोर्ट के इस आदेशों पर जिले के 40 फीसदी भट्ठे बंद हो गए, जबकि अन्य ने 50 लाख रुपये की लागत से हाइ-ड्राफ्ट चिमनियों का निर्माण करवाया। जिस कारण उनकी ईंट भट्ठे की दर बढ़ गई। जिस कारण ईंट भट्ठा संचालकों ने ईंटों के दाम बढ़ा दिए है।
वर्जन
बिल्डिंग मैटेरियल के दामों में वृद्धि से कंस्ट्रक्शन कोस्ट बढ़ जाएगी। जिस कारण ठेकेदार निर्माण के लिए बढ़े हुए रेट डालेंगे। ऐसे में किसी भी प्रोजेक्ट की लागत बढ़ जाएगी। इसके अलावा आम लोगों को मकान बनाने के लिए भी ज्यादा पैसे देने होंगे। दोनों ही दिशा में बोझ आम उपभोक्ता पर पड़ेगा।
- आरके मेहता, एसडीओ, लोकनिर्माण विभाग
पिछले दिनों से रेता, बजरी, सीमेंट व ईंटों के दामों में खासी वृद्धि हो गई है। जिस कारण कई मकानों का निर्माण बीच में रुक गया है। वजह है जिस व्यक्ति का मकान बनाने का बजट 20 लाख का था अब वह 24 से 25 लाख तक हो गया है।
- राकेश मेहता, बिल्डिंग मैटेरियल व्यवसायी देवी लाल मार्केट, फतेहाबाद।
भवन निर्माण सामग्री के दाम अनाप-शनाप बढ़ते जा रहे हैं। चाहे ईंट भट्ठे वाला हो या क्रैशर मालिक सरकार पर किसी का दबाव नहीं है। यह लोग मनमर्जी से रेट बढ़ा देते हैं।
- दीपक मेहता, हुडा सेक्टर में कोठी का निर्माण कर रहे शहरवासी।
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सड़कों पर बेलगाम दौड़ रहीं कंडम स्कूल बसें, नौनिहालों की जान खतरे में

फतेहाबाद। बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने के लिए कंडम बसों का इस्तेमाल हो रहा है लेकिन प्रशासन चैन की नींद सो रहा है। सड़क सुरक्षा सप्ताह के नाम पर प्रशासन सिर्फ औपचारिकताएं पूरी कर रहा है। एक साल से शिक्षा विभाग, आरटीए और ट्रैफिक पुलिस ने फतेहाबाद की सड़कों पर दौड़ रही स्कूल बसों की जांच ही नहीं की है। जबकि सड़क पर कंडम स्कूल बसें धड़ल्ले दौड़ रही हैं, यहां तक इन बसों को ऐसे ड्राइवर चला रहे हैं जो कि अप्रशिक्षित हैं। इसका खुलासा दो साल पहले हुई जांच के दौरान हो चुका है। लेकिन इसके बावजूद प्रशासन स्कूल बसों के प्रति नरमी बरत रहा है।
फतेहाबाद में इस सप्ताह में स्कूल बसों के कारण तीन हादसे भी हो गए हैं। चार दिन पहले रतिया के पास एक हादसे में बस पलट गई और 22 बच्चे बाल-बाल बचे। बस के हादसे का कारण तकनीकी कमी बताई जा रही है। हांसपुर रोड पर हुए दूसरे हादसे में तेज गति होने के कारण बस अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराने से बच गई। बुधवार सुबह भी गांव बीसला के पास एक निजी स्कूल की बस ने कार में टक्कर मार दी। इस हादसे में बस स्टैंड पर खड़ा एक युवक घायल हो गया। बताया गया है कि उक्त स्कूल बस को एक नाबालिग ड्राइवर चला रहा था।
रतिया में 13 और टोहाना में 20 बसों में मिलीं खामियां
आरटीए कार्यालय के अधिकारी खुद मान रहे हैं कि फतेहाबाद में बसों की जांच नहीं हुई है जबकि रतिया और टोहाना में जांच हुई है। रतिया में 40 बसों की जांच में 13 बसों में खामियां पाई गई तो टोहाना में 80 बसों की जांच में 20 बसों में खामियां पाई गई हैं।
कौन करे जांच, जिले में एमवीआई नहीं
आरटीए कार्यालय में मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर ही नहीं है। अधिकारी खुद कह रहे हैं कि बसों की जांच करने के लिए एमवीआई ही नहीं है। गाड़ियों की पासिंग करवाने के लिए एक एमवीआई एक दिन के लिए चंडीगढ़ से फतेहाबाद आता है। अब उस दिन गाड़ियों की पासिंग का इतना प्रेशर होता है कि गाड़ियों की जांच पड़ताल का समय ही नहीं मिल पाता।
जिले में प्राइवेट स्कूल बसों की स्थिति
प्राइवेट स्कूल : 175
स्कूल बस : 1410
स्कूल बसों में ये नियम जरूरी
हाईकोर्ट के आदेश पर स्कूल बसों में 22 नियम है, जिन्हें अपनाना जरूरी है। जिसमें मुख्य तौर पर स्कूल बस में महिला सहायक, सीसीटीवी कैमरे, फायर सेफ्टी यंत्र, फर्स्ट एड किट, स्पीड गर्वनर, जीपीएस, बस का कलर पीला, वाहन पर चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर, वाहन पर स्कूल का नाम, स्कूल बस के मालिक का नाम और फोन नंबर, ड्राइवर को पांच साल का अनुभव, ड्राइवर का मेडिकल फिट होना आदि शामिल हैं।
वर्जन
स्कूल बसों की सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान जांच की गई थी। समय-समय पर की जाती है और स्कूलों को चेतावनी दी जा रही है। अगर फिर भी कहीं कमी है तो चेकिंग की जाएगी।
- महाबीर प्रसाद, अतिरिक्त उपायुक्त
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बाबा राणाधीर कॉलोनी में प्रशासन ने 25 से अधिक अवैध निर्माण गिराए

भूना। उकलाना रोड पर बाबा राणाधीर कॉलोनी में जिला नगर योजनाकार विभाग की टीम ने अवैध निर्माणों पर पीला पंजा चलाया। इस दौरान कॉलोनी में लगभग 25 लकड़ी के कोयला प्लांट, रिहायशी मकान की चहारदीवारी व कोठी के लिए तैयार की गई नीव एवं डीपीसी को जेसीबी मशीन के द्वारा ध्वस्त कर दिया गया। कॉलोनी में लोग इसका विरोध करना चाहते थे, मगर पुलिसकर्मियों ने उन्हें नजदीक नहीं फटकने दिया।
उपायुक्त फतेहाबाद ने अवैध निर्माण गिरवाने के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार मनोहर लाल को नियुक्त किया गया था। जबकि जिला नगर योजनाकार जेपी खासा के नेतृत्व में अवैध निर्माण कार्यों पर कार्रवाई की गई। डीटीपी ने बताया कि उकलाना रोड पर लगभग 18 एकड़ में बाबा राणाधीर कॉलोनी को अवैध रूप से काटकर प्लाट बनाकर बेचा गया है। जिसमें लोगों द्वारा अवैध रूप से निर्माण किए जाने की शिकायत मिली थी। जिसका दो सप्ताह पहले मौके पर जाकर निरीक्षण भी किया गया था। निरीक्षण के दौरान कई लकड़ी के कोयला प्लांट, चहारदीवारी व कई प्लाटों की नीव भरी हुई थी। अवैध निर्माण करने वाले लोगों को नोटिस देकर रोकने के लिए निवेदन किया गया था। मगर अवैध निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगी तो बुधवार को टीम का गठन किया गया। इस मौके पर जिला नगर योजनाकार विभाग की लिपिक पुष्पा, सुरेश कुमार, पटवारी शीशपाल वर्मा, पुलिस टीम इंचार्ज खेताराम, कमल सुरालिया, विजय बसेरा आदि मौजूद थे।
पहले भी 15 नवंबर को निर्माण गिराने आई टीम पर हुआ था हमला
जिला नगर योजनाकार विभाग की टीम गत 15 नवंबर 2019 को भी बाबा राणाधीर कॉलोनी में अवैध निर्माण रोकने के लिए आई थी। मगर पुलिस साथ में होने के कारण कॉलोनी के लोगों ने टीम पर हमला कर दिया था। जिसमे डीटीपी जेपी खासा के हाथ पर ईंट लग गई थी और गाड़ी के शीशे टूट गए थे।
शांति पूर्वक कार्रवाई हुई : डीटीपी
जिला टाउन प्लानिंग आफिसर जेपी खासा ने बताया कि बुधवार को बाबा राणाधीर कॉलोनी में अवैध निर्माण गिराए गए है। जिनमें कई लकड़ी कोयला बनाने के प्लांट भी शामिल थे। मगर चार घंटों की कार्रवाई के दौरान पूरी तरह शांति बनी रही। कॉलोनी में अवैध बनाए गए निर्माण हटा दिए गए हैं।
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फतेहाबाद में स्वच्छता सर्वेक्षण पूरा, टोहाना-भूना में पहुंची टीम

फतेहाबाद/टोहाना। फतेहाबाद शहर में दिल्ली से पहुंची टीम ने स्वच्छता सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। टीम ने शुक्रवार को देर शाम तक सफाई व्यवस्था का जायजा लिया और इसके बाद शनिवार सुबह भूना और टोहाना पहुंच गए। शनिवार को दो-दो सदस्यों ने शहर की सफाई व्यवस्था का निरीक्षण कर लोगों से फीडबैक लिया। हालांकि अभी तक सर्वेक्षण टीम रतिया नहीं पहुंची है और सर्वेक्षण का समय पूरा होने में पांच दिन रह गए हैं।
टोहाना में सफाई व्यवस्था का जायजा लेने पहुंची दो सदस्यीय टीम ने जब फीडबैक लिया तो वार्डों के लोग बोले कि सफाई कर्मी कभी-कभी आते हैं और लेकिन कूड़ा लेने वाली गाड़ी को लेकर संतुष्ट है। सप्ताह में चार से पांच दिन कूड़ा लेने वाली गाड़ी जरूर आती है लेकिन सफाई कर्मी नहीं आते हैं। टीम ने टोहाना में 10 शौचालयों की जांच की और 55 लोगों का देर शाम तक फीडबैक लिया। इसके अलावा भूना में टीम ने दो शौचालयों की जांच कर 50 लोगों का फीडबैक लिया।
टोहाना सब्जी मंडी और अनाजमंडी में कचरा के ढेर मिले
सर्वेक्षण टीम ने टोहाना में टिब्बा कॉलोनी, राजनगर, मॉडल टाउन, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अनाजमंडी, सब्जी मंडी, टाउन पार्क और स्लम बस्ती व 10 शौचालयों की जांच की। टीम जब सब्जी मंडी और अनाजमंडी पहुंची तो यहां पर कचरा के ढेर मिले। इसके अलावा यहां के शौचालय भी गंदे मिले। सब्जी मंडी में टीम को प्लास्टिक का प्रयोग होता हुआ मिला। लोगों से फीडबैक लिया तो बोले कि यहां पर प्लास्टिक प्रयोग हो रहा है। सब्जी मंडी में लोग बोले कि यहां पर सफाई कर्मी कई-कई दिन तक नहीं आते।
भूना में बस स्टैंड का शौचालय मिला गंदा
टीम ने भूना में वार्डों का निरीक्षण किया। मुख्य मार्गों पर टीम को कचरा के ढेर मिले। टीम ने टेबलेट में फोटो ली। आसपास के लोगों से फीडबैक लिया तो लोग बोले कि यहां पर सफाई कर्मी कभी कभी आते हैं, गीला-सूखा को लेकर अलग-अलग करने के लिए नहीं कहा जाता है। टीम ने बस स्टैंड के शौचालय का निरीक्षण किया, यहां पर टीम को गंदगी मिली।
फतेहाबाद के डंपिंग प्वाइंट का नहीं हुआ निरीक्षण
टीम ने फतेहाबाद शहर में औपचारिकता पूरी की है। एक दिन में ही टीम ने सर्वेक्षण पूरा कर दिया। जबकि पहले टीम यहां पर चार से पांच दिन तक रुकती है। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि सर्वेक्षण का काम 31 जनवरी तक पूरा होना है। इसके चलते टीम जल्द से जल्द सर्वेक्षण और फीडबैक लेकर काम पूरा कर रही है। अहम बात यह है टीम ने डंपिंग प्वाइंट का निरीक्षण किया। यहां पर न तो कंपोस्ट खाद बनाने की व्यवस्था है और न ही कूड़ा को इकट्ठा करने की पर्याप्त जगह है।
ये हैं स्वच्छता सर्वेक्षण के अंक
कुल अंक : 6000
शहरवासियों से फीडबैक : 1500
कागजात की जांच : 1500
प्रत्यक्ष अवलोकन : 1500
सेवा स्तर की प्रगति :1500
पिछले दो सालों की रैंकिंग पर एक नजर
शहर 2019 रैंकिंग 2018 रैंकिंग
फतेहाबाद 177 191
भूना 399 172
टोहाना 329 289
रतिया 9840 572
वर्जन
स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर विभाग की टीम ने टोहाना में सार्वजनिक शौचालयों, कॉलोनियों का सर्वे किया है तथा लोगों से फीडबैक लिया है। राजनगर व टिब्बा कलोनी में लोगों ने सफाई कर्मियों के कम आने की बात कही है लेकिन 60 प्रतिशत से अधिक लोग संतुष्ट नजर आए है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था ठीक मिली है। सब्जी मंडी व अनाज मंडी में व्यवस्था ठीक नही पाई गई।
- कुमार सौरभ जिला संयोजक स्वच्छ भारत मिशन।
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टोहाना में सब्जी मंडी का निरीक्षण करती टीम टोहाना में सब्जी मंडी का निरीक्षण करती टीम

टेस्ट कूपन नहीं आने से तीन माह से रुका हेपेटाइटिस सी का इलाज, अब फीजिशियन का तबादला

फतेहाबाद। हेपेटाइटिस सी के मरीजों को स्वास्थ्य विभाग ने दोहरा झटका दिया है। एक तरफ तो पिछले तीन महीने से टेस्ट कूपन खत्म होने से इलाज रुका हुआ है वहीं नागरिक अस्पताल के फीजिशियन और हेपेटाइटिस सी के नोडल अधिकारी डॉ. अजय चुघ का हिसार तबादला हो गया है। टेस्ट कूपन न होने के कारण करीब 150 मरीजों का उपचार रुका हुआ था और 200 मरीजों का उपचार चल रहा था। फीजिशियन के तबादले के बाद फिलहाल मरीजों का उपचार पूरी तरह से प्रभावित होगा, जब तक दूसरे फीजिशियन की नियुक्ति यहां पर नहीं होती है। हालांकि एक फीजिशियन पहले है लेकिन उसके पास टीबी का चार्ज है। वहीं अधिकारियों की माने तो अभी टेस्ट कूपन आने में समय लग सकता है, हालांकि एजेंसी को टेंडर हो चुका है।
इसलिए जरूरी है फीजिशियन और टेस्ट कूपन
जिला में हेपेटाइटिस सी के करीब पांच हजार लोग प्रभावित हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास 4200 मरीज रजिस्टर्ड भी हैं, इसमें से 3500 मरीजों का उपचार हो चुका है। काला पीलिया के प्रभाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने करीब तीन साल पहले फीजिशियन की नियुक्ति यहां पर की थी। फरवरी 2017 में विभाग ने प्रोजेक्ट शुरू करके जिला अस्पताल में काला पीलिया का उपचार शुरू किया था। पहले मरीजों को रोहतक पीजीआई भेजा जाता था। विभाग मरीज को कूपन उपलब्ध करवाता है जिससे मरीज के टेस्ट निशुल्क होते हैं और दवाईयां मिलती है। लेकिन पिछली एजेंसी का टेंडर खत्म होने के कारण टेस्ट कूपन खत्म थे और मरीज का उपचार शुरू नहीं हो पा रहा है। अब स्पेशलिस्ट डॉ. अजय चुघ का भी तबादला हो गया है।
इसलिए जरूरी है टेस्ट
स्वास्थ्य विभाग उपचार शुरू करने से पहले वायरस लोड व जिनोटाइप टेस्ट करवाता है। जांच रिपोर्ट में पुष्टि के बाद मरीज का उपचार शुरू किया जाता। मरीज का तीन माह तक उपचार चलता है, अगर लीवर खराब है तो मरीज को छह माह तक दवाई खानी पड़ती है। मुख्यालय ने टेस्ट के लिए कंपनी के साथ अनुबंध कर रखा है, ये कंपनी मरीज का टेस्ट निशुल्क करती है।
वर्जन
काला पीलिया के टेस्ट कूपन को लेकर एजेंसी को टेंडर जारी हो गया है। जल्द ही कूपन अस्पताल में पहुंच जाएंगे। जहां तक फीजिशियन की बात है, इसकी भी व्यवस्था की जाएगी।
- डॉ. सूरजभान कंबोज, स्वास्थ्य महानिदेशक, पंचकूला
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एमबीबीएस में दाखिला दिलवाने के नाम पर साढ़े 6 लाख रुपये की धोखाधड़ी

फतेहाबाद। एमबीबीएस में दाखिला दिलवाने के नाम पर साढ़े 6 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। दिल्ली के इंस्टीट्यूट ने साढ़े 6 लाख रुपये लेकर बंगलुरु के कॉलेज में काउंसलिंग के लिए भेज दिया, लेकिन न तो कॉलेज ने दाखिला नहीं दिया और न ही रुपये वापस लौटाए। शहर पुलिस ने हुडा सेक्टर तीन निवासी राकेश कुमार की शिकायत पर दिल्ली के एचीवर्स कैरियर वर्ड लिमिटेड के एचआर मैनेजर विकास अग्रवाल, डायरेक्टर सरदार राकेश कुमार तथा बीजीएस इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस बंगलुरु के प्रिंसिपल के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस को दी शिकायत में राकेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2017 में बेटा का एमबीबीएस में दाखिला करवाने के लिए विज्ञापन देखा था। विज्ञापन देखने के बाद दिल्ली के एचीवर्स कैरियर वर्ड लिमिटेड के एचआर मैनेजर विकास अग्रवाल और डायरेक्टर राकेश कुमार ने कहा कि वह बंगलुरु के बीजीएस इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस में दाखिला करवा देंगे। इसके लिए कॉलेज के नाम का साढ़े 6 लाख रुपये का डीडी देना होगा। आरोप है कि कॉलेज के नाम का डीडी दे दिया। इसके बाद बंगलुरु बुलाया गया। यहां पर काउंसलिंग के दौरान एडमिशन नहीं हुआ। लेकिन इसके बाद साढ़े 6 लाख रुपये का डीडी कैश हो गया। जब इंस्टीट्यूट के संचालक से रुपये वापस मांगे तो उन्होंने लटकाना शुरू कर दिया। लेकिन रुपये वापस नहीं दिए।
पुलिस ने पहले लटकाया मामला, भूना थाना में दर्ज की एफआईआर
इस मामले में राकेश कुमार ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दी थी। इसके बाद 19 अगस्त 2019 को पुलिस ने भूना थाना में मामला दर्ज कर दिया। जबकि डीडी फतेहाबाद के बैंक से तैयार किया गया था। इसके बाद पुलिस ने मामले को फतेहाबाद के थाना में ट्रांसफर करने की बजाए लटकाए रखा। शिकायतकर्ता के मुताबिक एफआईआर ट्रांसफर करवाने के लिए वह भूना थाना के चक्कर काटता रहा लेकिन ट्रांसफर नहीं की गई, इसके बाद पुलिस ने रद कर दिया। अब शहर थाना में ये एफआईआर दर्ज की गई है।
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ईरान पर प्रतिबंध के बाद नहीं बढ़ रहे धान के भाव, बीते साल थे 3600 रुपये क्विंटल अब है 2900 रुपये प्रति क्विंटल

ईरान पर अमेरिका द्वारा लगाए प्रतिबंध के कारण यहां से निर्यात की गई बासमती किस्म के चावल की पेमेंट का भुगतान न होने से निर्यातकों ने वहां चावल भेजने से हाथ पीछे खींच लिए है। इसके अलावा चावल की मांग भी नहीं आ रही है। जिस कारण 1121 व 1401 किस्म के धान के दाम 2600 व 2900 रुपये प्रति क्विंटल के बीच स्थिर होकर रह गए हैं जबकि बीते वर्ष इसके दाम 3200 व 3600 रुपये प्रति क्विंटल थे। पिछले चार महीने से किसान तेजी के इंतजार में धान की फसल अपने घरों में रखकर बैठे थे जिनको अब जनवरी बीत जाने के बाद भी निराशा हो रही है। वजह है दो महीने बाद किसान गेहूं की फसल में व्यस्त हो जाएगा ऐसे में उसके पास न तो समय होगा और ना ही भंडारण की जगह।
अक्तूबर मास में जब मंडियों में धान की फसल की आवक हुई थी इसके दाम 2400 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच घूमते रहे। किसानों व व्यापारियों दोनों को उम्मीद थी कि जनवरी आते-आते इसके दाम पिछले साल की तरह 3600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच जाएंगे लेकिन इस बीच अमेरिका व ईरान के बीच हुए विवाद से यहां की पेमेंट ईरान में फंस गई। इसके अलावा ईरान से चावल की डिमांड नहीं आ रही। निर्यातकों का मानना है भारत से करीब 40-42 लाख एमटी बासमती किस्म का चावल निर्यात होता है। इसमें से 14 लाख एमटी अकेले ईरान जाता है। प्रतिबंध के कारण तथा पेमेंट न आने से दोनों देशों के बीच निर्यात बंद हो गया है। अक्तूबर मास में 1121 व 1401 किस्म के धान के भाव 2400 से 2600 रुपये प्रति क्विंटल थे जो धीरे-धीरे बढ़ रहे थे। दिसंबर के पहले सप्ताह तक इनके दाम 2600 से 2800 रुपये तक पहुंच गए। किसानों ने इस उम्मीद के साथ धान का अपने घरों में भंडारण कर लिया कि इसके दाम ओर बढ़ेंगे। पिछले साल इसके दाम 2900 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल थे। भंडारण करने से किसान के पास अभी 30 से 35 फीसदी धान पड़ा हुआ है।
दोहरा नुकसान हुआ किसानों को
इस बार धान उत्पादन में किसानों को पिछले साल की बजाय दोहरा नुकसान हुआ है। पिछले साल 1121 धान का 18 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन हुआ ओर दाम 3600 रुपये क्विंटल था। इस बार 1121 का उत्पादन घटकर 15 क्विंटल रह गया है और रेट 2900 रुपये प्रति क्विंटल है। ऐसे ही 1401 का उत्पादन बीते वर्ष 20 क्विंटल था और रेट 3200 रुपये प्रति क्विंटल तो इस बार उत्पादन 18 क्विंटल तो रेट 2600 रुपये प्रति क्विंटल है।
ईरान पर प्रतिबंध के कारण वहां से पेमेंट नहीं आ रही और ना ही ईरान से चावल की डिमांड आ रही है। जिस कारण चावल के दाम नहीं बढ़ रहे।’ अजय जिंदल, एक्सपोर्टर, जिंदल राइस मिल, फतेहाबाद।
पिछली बार मंडी में 12 लाख 95 हजार क्विंटल धान मंडी में आया था जो कि इस बार कम होकर 11 लाख क्विंटल रह गया है। इस कारण किसानों भाव बढ़ने के इंतजार में अभी भी धान का स्टॉक कर रखा है।
संजीव सचदेवा, सचिव मार्केट कमेटी, फतेहाबाद।
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पुलवामा पुलिस प्रशासन ने फतेहाबाद एसडीएम दफ्तर से मांगी वाहन नंबर की डिटेल

मंडी में पड़ा धान।
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के पुलिस प्रशासन ने फतेहाबाद एसडीएम दफ्तर से एक वाहन नंबर के बारे में डिटेल मांगी है और इस संदर्भ में पत्राचार किया है। आशंका जताई जा रही है कि पुलवामा एसएसपी ने पिछले साल हुए पुलवामा अटैक के संदर्भ में ये जानकारी मांगी है। हालांकि मीडिया में इस पत्राचार से जुड़ी जानकारी लीक होने से फतेहाबाद के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप की स्थिति है। उधर इस बारे में बात करने पर एसडीएम फतेहाबाद संजय बिश्रोई ने इस मामले से ये कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि वे इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।
एक वाहन नंबर के बारे में मांगी है जानकारी, 13 जनवरी को भेजा गया है जवाब
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार पुलवामा पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से भेजे गए पत्र में एक वाहन नंबर की जानकारी मांगी गई थी। जिसके बाद एसडीएम दफ्तर ने उस नंबर से जुड़ी गाड़ी एवं उसके मालिक के बारे में जानकारी उपलब्ध करवा दी। सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट में ये बताया है कि जिस वाहन नंबर की जानकारी मांगी गई है उसके मालिक ने ये गाड़ी सिरसा में आगे एक व्यक्ति को बेच दी थी और ये नंबर वापिस जमा करवा दिया था। इसके बाद पुलवामा पुलिस की ओर से दोबारा एक इंजन एवं चैसीज नंबर के बारे में एसडीएम कार्यालय से विस्तृत जानकारी मांगी गई। एसडीएम दफ्तर के सूत्रों की मानें तो इस संदर्भ में एक पत्र 13 जनवरी को पुलवामा पुलिस अधीक्षक के नाम भेजा है जिसमें कहा गया है कि जिस इंजन नंबर एवं चैसीज नंबर के बारे में जानकारी मांगी गई है उसकी कोई जानकारी एसडीएम कार्यालय के रिकार्ड में उपलब्ध नहीं है।
‘वैसे ये डिटेल किस संदर्भ में मांगी गई है इसके बारे में मुझे मौखिक रूप से तो याद नहीं है। संभव है कि मेरे दफ्तर ने किसी केस के सिलसिले में किसी वाहन की डिटेल आपके यहां से मांगी हो लेकिन अगर ये टेरर अटैक के संदर्भ में होता तो मुझे ध्यान होता। पुलवामा इतना भी खतरनाक नहीं है जितना इसे बना दिया गया है।’ -चंदन कोहली, पुलिस अधीक्षक, पुलवामा।
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अपराजिता कार्यक्रम : बेटियां बोली, समाज कमतर ना समझे हमको, हर पग पर लाएंगी खुशियां

समाज अक्सर बेटियों को बेटों से कमतर समझता आया है लेकिन अब समाज को भी ये समझना होगा कि बेटी है तो कल है, बेटियां हैं तो समाज में निरतंरता है। ये सार है बालिका दिवस पर ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ द्वारा अपराजिकता कार्यक्रम के तहत आर्य भट्ट पब्लिक स्कूल में करवाए संवाद कार्यक्रम का। संवाद कार्यक्रम में शिरकत करने वाली बेटियों ने साफ तौर पर कहा कि समाज बेटियों को कमतर ना समझे, हम बेटियां अब हर कदम पर अपने आप को साबित करती आई हैं और हमारे हर पग पर खुशियां आती हैं।
‘हम खुशकिस्मत हैं कि हमारे अभिभावकों ने हमें बेहतर शिक्षा के लिए स्कूल भेजा, लेकिन दुख होता है जब ये सामने आता है कि कुछ बेटियां अभी भी लिंग भेदभाव के चलते शिक्षा तो दूर, जीने तक का अधिकार हासिल नहीं कर पाती और कोख में ही दम तोड़ देती हैं।’ वर्षा, छात्रा।
‘शिक्षा ग्रहण करने के बाद कुछ ऐसा करना चाहती हूं कि समाज के लिए एक उदाहरण बनकर सामने आऊं कि बेटियां ही हमारी खुशियों का सार हैं।’ दिव्या, छात्रा।
‘बेटी दिवस पर मेरी तो बस यही इच्छा है कि बेटा-बेटी में कोई भेदभाव नहीं रहे। ना जन्म से पहले और ना ही जन्म के बाद। अगर ऐसा होता है तो समाज सही मायनों में एक आदर्श समाज के रूप में स्थापित होगा। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर से शुरूआत करनी होगी। तभी सही मायनों में इसे एक स्वच्छ आंदोलन के रूप में खड़ा किया जा सकेगा।’ -अरू, छात्रा।
‘बेटियां हमेशा कम से कम दो घरों के बीच में सेतु का काम करती हैं। ऐसे में ये सेतु इतना मजबूत तभी हो सकेगा, जब बेटियां शिक्षित एवं अपने पैरों पर खड़े होने लायक होंगी। बेटियां समाज की निरंतरता का प्रतीक हैं।’ -पूनम, छात्रा।
‘बालिका दिवस मनाने की जरूरत ही इसलिए आन पड़ी है कि समाज के एक हिस्से में आज भी बेटियों को बोझ समझा जाता रहा है। ऐसे में सबसे पहले तो इस सोच को ठीक करने की आवश्यकता है। जब समाज के एक तबके की सोच सकारात्मक हो जाएगी, बेटियों को निर्बल कहने या समझने की जरूरत भी समाप्त हो जाएगी।’ -गुंजन, छात्रा।
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बेसहारा पशुओं को रतिया शहर में छोडने को लेकर किसानो में चली लाठियां, तीन घायल

शुक्रवार सुबह बुढ़लाडा रोड पर स्थित घग्गर पुल के ऊपर बेसहारा पशुओं को रतिया शहर में छोड़ने को लेकर रतनगढ़ -भूंदड़वास के किसानों के साथ रतिया शहर के किसान आपस में भिड़ गए। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के किसानों में लाठियां और डंडे चल पड़े जिसमें रतिया शहर के तीन किसान घायल हो गए। घायलों को अन्य किसानों ने रतिया के नागरिक अस्पताल में दाखिल कराया। वहीं भारी संख्या में पशु घग्घर नदी के पुल पर जमा हो गए जिस कारण काफी देर तक पुल पर जाम लगा रहा। पुलिस को सूचना देने के काफी देर बाद रतिया पुलिस मौके पर पहुंची। रतिया शहर के किसानों ने रोष स्वरूप रतिया शहरी थाने का घेराव कर लिया। डीएसपी के आश्वासन के बाद शनिवार दोपहर तक कार्यवाही न होने पर रतिया शहर के किसानों ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने हमलावर किसानों पर कार्रवाई नहीं की तो वह शहर थाना के बाहर धरना देने पर मजबूर होंगे।
जानकारी अनुसार पिछले कुछ दिनों से कुछ गांवों के किसान अपने क्षेत्र में बेसहारा पशुओं को ट्रैक्टर ट्रालियों में भरकर शहरी क्षेत्र में छोड़ जाते हैं और इस मामले को लेकर सप्ताह भर पहले ही किसान सभा प्रधान गुरबचन सिंह, मलकीत सिंह व अन्य किसानों ने शहर थाना में शिकायत पत्र भी दिया था और बाहरी पशुओं को रतिया शहर में छोड़ने पर पाबंदी की मांग की थी लेकिन पुलिस ने शहरी किसानों की उक्त शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। शुक्रवार सुबह शहरी क्षेत्र के किसानों को सूचना मिली कि सुबह रतनगढ़ और भूंदड़वास के काफी किसान सैकड़ों की संख्या में बेसहारा पशुओं को लेकर रतिया की तरफ आ रहे हैं। शहर के किसानों ने बुढ़लाडा रोड पर घग्गर पुल के ऊपर ग्रामीण किसानों द्वारा शहरी क्षेत्रों में छोड़ने को लेकर आए पशुओं को रोकने की कोशिश की तो वह नहीं माने। इस दौरान काफी संख्या में शहरी किसान घग्घर पुल पर एकत्रित हो गए और पशुओं को गुजरने नहीं दिया जिस कारण स्टेट हाइवे पर कुछ समय के लिए जाम लग गया। इसी दौरान शहरी किसानों ने पशुओं को खदेड़ कर गांव रतनगढ़ की ओर वापस ले जाने लगे तो कुछ दूरी पर दोनों पक्षों में झगड़ा हो गया और लाठियां व डंडे चलने लगे, जिससे रतिया निवासी घनवंत सिंह, बुद्व सिंह व अन्य एक किसान घायल हो गए। किसानों ने आरोप लगाया की जब पुलिस को सूचना दी गई तो पुलिस काफी देर बाद मौके पर पहुंची। घायलों को किसानों ने नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया। किसानों का आरोप है कि झगड़ा रतिया पुलिस की लापरवाही से हुआ। पुलिस अगर सप्ताह पहले दी शिकायत पर कार्रवाई करती तो यह स्थिति न बनती। उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह भी उन्होंने पुलिस को फोन किए, लेकिन पुलिस अधिकारी गणतंत्र दिवस की तैयारियों की बात करते हुए डेढ़ घंटे तक नहीं आए और जिस कारण झगड़ा बढ़ गया। गुस्साए किसानों ने दोपहर बाद शहर थाने का घेराव कर लिया, जिसके बाद सूचना मिलने पर डीएसपी धर्मवीर सिंह मौके पर पहुंचे। शहरी किसानों ने हमलावरों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की जिस पर डीएसपी ने किसानों को आश्वासन दिया की शाम तक मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। डीएसपी के आश्वासन के बाद शनिवार दोपहर तक कार्यवाही न होने पर रतिया शहर के किसानों ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने हमलावर किसानों पर कार्रवाई न की तो वे शहर थाना के बाहर धरना देने पर मजबूर होंगे।
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टेबलेट में दर्ज होगा मरीज का आनलाइन डाटा

स्वास्थ्य विभाग में तैनात एएनएम और आशा वर्कर अब मरीज के डाटा में फर्जीवाड़ा नहीं कर पाएंगी। मरीजों का डाटा अब आनलाइन पोर्टल पर दर्ज होगा। ये डाटा भी आशा वर्कर और एएनएम को मरीज के घर जाकर दर्ज करना होगा। अगर खुद के घर बैठकर मरीज का डाटा दर्ज करेंगी तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी फर्जीवाड़ा पकड़ लेंगे। मरीज के घर जाने की लोकेशन भी आनलाइन दर्ज होगी। स्वास्थ्य विभाग ने इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफार्मेशन प्लेटफार्म यानि की आईएचआईपी नाम से पार्टल जारी किया है। इस पोर्टल पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को डाटा आनलाइन दर्ज करना होगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग जिला भर की आशा वर्कर, एएनएम और एमपीएचडब्ल्यू को टेबलेट देने जा रहा है। इससे पहले विभाग इन्हें ट्रेनिंग दे रहा है जो कि शुरू हो चुकी है। स्वास्थ्य कर्मचारियों को जिला महामारी अधिकारी डा.विष्णु मितल ट्रेनिंग दे रहे हैं जिन्हें पहले पंचकूला में ट्रेनिंग दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग के करीब 25 प्रोग्राम चल रहे है। इन कार्यक्रमों से संबंधित आशा वर्करों, एएनएम को मरीजों का डाटा इकट्ठा करना होता है। यानि की जिस बीमारी से संबंधित मरीज पीड़ित है उसका डाटा विभाग को देना होता है। ये डाटा आशा वर्कर और एएनएम अब तक मैनुअल तैयार कर रही है। जिसमें आशंका रहती है कि डाटा घर बैठकर फर्जी तरीके से तैयार किया है और केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के पास ये डाटा पहुंचने में समय भी लग जाता है और फिर भी वास्तविक डाटा नहीं मिल पाता है। इसे रोकने के लिए विभाग ने आईएचआईपी पोर्टल तैयार किया है। जिसमें आशा वर्कर और एएनएम को आनलाइन डाटा फीड करना होगा।
लोकेशन बताएगी मरीज के घर गए या नहीं
इस पोर्टल का फायदा यह होगा कि स्वास्थ्य कर्मचारी फर्जी रिपोर्ट नहीं दे सकेंगे। अगर खुद के घर बैठकर रिपोर्ट तैयार करते हैं तो लोकेशन बता देगी कि कर्मचारी ने खुद के घर बैठकर रिपोर्ट तैयार की है। फील्ड में जाने की मैपिंग भी तैयार होगी।
अधिकारियों के पास सीधी जाएगी रिपोर्ट
आनलाइन रिपोर्ट से फायदा यह होगा कि केंद्र और प्रदेश स्तर पर रिपोर्ट सीधी अधिकारियों को मिलेगी। पहले रिपोर्ट मिलने में काफी समय लगता था। अब मरीजों का डाटा सीधा आनलाइन दर्ज होगा और अधिकारी अपडेट रहेंगे।
ये है जिला में स्थिति
आशा वर्कर : 850
एएनएम : 250
इन्हें दी जाएगी ट्रेनिंग :
स्वास्थ्य विभाग इस पोर्टल के बारे में आशा वर्कर, एएनएम, एलटी, एमओ, फार्मासिस्ट, एमपीएचडब्ल्यू, आईओ को ट्रेनिंग देगा।
स्वास्थ्य विभाग ने आईएचआईपी पोर्टल जारी किया है। इस पर मरीजों का आनलाइन डाटा दर्ज होगा। कर्मचारी फर्जी डाटा तैयार नहीं कर सकेंगे। केंद्र और राज्य स्तर पर अधिकारियों के पास हर बीमारी अब रोजाना डाटा पहुंच सकेगा। इस संबंध में कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। - डॉ.विष्णु मितल, जिला महामारी अधिकारी।
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स्वामी सदानंद ट्रस्ट बाईपास पर बनाएगा गोसेवा रिसर्च सेंटर और गो अस्पताल

फतेहाबाद। स्वामी सदानंद प्रणामी गोसेवा चैरिटेबल ट्रस्ट सिरसा-हिसार बाईपास पर गांव दौलतपुर के समीप गोसेवा रिसर्च सेंटर, गो अस्पताल, रैनबसेरा और सतगुरु अपना घर का निर्माण करेगा। फरवरी तक इस सेंटर की आधारशिला रखी जा सकती है। इस सेंटर में जहां देसी गायों की नस्ल तैयार की जाएगी वहीं गोवंश के दूध, मूत्र व अन्य अवशेष से उत्पाद बनाए जाएंगे। इसके अलावा अन्य गोशालाओं से सेवकों को लाकर प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वह अपनी गोशालाओं में इन उत्पादकों को बनाकर बाजार में बेचे और गोशाला को स्वावलंबी बना सके।
गोसवा रिसर्च सेंटर बनाने के लिए जमीन की रजिस्ट्री व सीएलयू की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सेंटर में चहारदीवारी बनाने के बाद अंदर हॉल आदि बनेंगे। वहीं तीन बड़े शेड लगाए जाएंगे। जिनके नीचे गोवंश को रखा जाएगा। इस रिसर्च सेंटर में हरियाणवीं नस्ल के गोवंश की नस्लों को तैयार व सुधार किया जाएगा। जिससे इस नस्ल के गोवंश के प्रति लोगों में जागरूकता लाई जा सके। इसमें साहीवाल, गिर नस्ल समेत काफी देसी नस्ल शामिल रहेंगी।
गोवंश का होगा उपचार
इस सेंटर में अस्पताल भी बनाया जाएगा। जिसमेें क्षेत्र में हादसों में घायल होने व अन्य तरह की बीमारियों के ग्रस्त गोवंश का उपचार किया जाएगा। ट्रस्ट के सदस्यों के मुताबिक सेंटर के 20-25 किलोमीटर के दायरे में इस तरह के घायल व बीमार गोवंश के यहां पर उपचार की सुविधा की जाएगी। इसके लिए एंबुलेंस सुविधा भी शुरू करने की योजना है। इस सेंटर में गोवंश के दूध, गोबर, मूत्र आदि से उत्पादों को तैयार करके लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसमें धूप, अगरबत्ती, घी, गोअरक, फिनायल जैसी चीजें बनाई जाएगी। इन चीजों के काफी फायदे होते हैं। वहीं सेंटर में ही एक हर्बल पार्क भी बनाया जाएगा। जिसमें देसी दवा बनने वाले पौधे लगाए जाएंगे। इसे सुंदर बनाया जाएगा, ताकि लोग इसे देखने भी आएं।
मंदबुद्धि लोगों के लिए अपना घर स्थापित किया जाएगा
स्वामी सदानंद ने बताया कि इस भूमि पर मंदबुद्धि लोगों के लिए अपना घर स्थापित किया जाएगा, ताकि शहर में घूम रहे मंदबुद्धियों को अच्छे से रहने के लिए जगह मिले। इसके अलावा रैनबसेरा का निर्माण भी प्रस्तावित है, ताकि ठंड में लोगों को छत मिल सके। उन्होंने बताया कि उनका प्रयास होगा कि इस अस्पताल व सेंटर में पूरा दिन लंगर की व्यवस्था हो। स्वामी सदानंद प्रणामी गोसेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रधान जुड़े विनोद तायल व सचिव अशोक भुक्कर ने बताया कि स्वामी सदानंद महाराज के दिशा निर्देश पर फतेहाबाद में गोसवा रिसर्च सेंटर व आधुनिक अस्पताल का निर्माण करने का निर्णय लिया गया है। जमीन खरीद ली गई है। बाकी सरकारी नियमों को पूरा किया जा रहा है। जल्द ही इसके शिलान्यास का कार्यक्रम किया जाएगा।
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आंगनबाड़ी केंद्र में शरारती तत्वों ने लगाई आग

भूना। गांव गोरखपुर में बीती रात अनुसूचित जाति की चौपाल में आंगनबाड़ी केंद्र नंबर 302 में अज्ञात ने आग लगा दी। जिसमें हजारों रुपये का सामान व वर्षों पुराना रिकॉर्ड जलकर राख हो गया है। आंगनबाड़ी केंद्र मंजू देवी को केंद्र के पास पड़ोसी ने फोन पर सूचना दी। मगर जब आंगनबाड़ी इंचार्ज मौके पर पहुंची तो केंद्र का पूरा सामान जलकर खाक हो चुका था। मामले की सूचना पुलिस में दी गई है। घटना की सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी सुमन लता कठपाल व सुपरवाइजर सुनीता गोगिया तथा मंगलेश नेहरा मौके पर पहुंची। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आंगनबाड़ी केंद्र इंचार्ज मंजू देवी ने बताया कि बीती रात को अज्ञात लोगों ने अनुसूचित जाति चौपाल में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के अंदर रखे हुए समान में आग लगा दी। आगजनी के दौरान गैस के दो सिलेंडर भी आंगनबाड़ी केंद्र में रखे थे, ऐसे में एक बड़ा हादसा भी टल गया। क्योंकि मौके पर लोगों ने आग को काबू कर लिया था। आगजनी से आंगनबाड़ी केंद्र में 60 किलो चीनी, 60 किलो दलिया, मूंगफली, 23 लीटर तेल, 9 किलो सोयाबीन, गैस चूल्हा तथा 30 वर्षों से लकड़ी के तीन बक्सो में रखा हुआ पुराना रिकॉर्ड भी जलकर नष्ट हो गया है। मंजू ने बताया कि यह आग किसी शरारती तत्व ने लगाई है। उन्होंने पुलिस में शिकायत देकर मामले की जांच करके आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने व सामान की भरपाई करवाने की गुहार लगाई है। इस संबंध में एडिशनल एसएचओ रमेश कुमार ने बताया कि मंजू ने आंगनबाड़ी केंद्र पर आग लगने की रिपोर्ट दी है जिस पर जांच की जा रही है। ... और पढ़ें
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