विज्ञापन

जींद के वकीलों की हड़ताल को खत्म करवाने में जब पूर्व पीएम राजीव गांधी को करना पड़ा हस्तक्षेप

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Fri, 21 Feb 2020 12:09 AM IST
विज्ञापन
36 साल पुरानी वकीलों और पुलिस के बीच हुए विवाद की जानकारी देते वकील दया सिंह।
36 साल पुरानी वकीलों और पुलिस के बीच हुए विवाद की जानकारी देते वकील दया सिंह। - फोटो : Jind
ख़बर सुनें
पुलिस कर्मचारी द्वारा वकील को थप्पड़ मारने के आरोप के मामले में वीरवार को दूसरे दिन भी हड़ताल रही। यह विवाद लंबा खिंचता दिखाई दे रहा है। जिला बार में 36 साल पहले भी इसी प्रकार का विवाद हुआ था। 36 साल पहले 1984 में दो महीने तक जींद में वकीलों ने हड़ताल की थी। इसके चलते पूरे प्रदेश में हड़ताल हुई और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन तक ने हड़ताल की। बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हस्तक्षेप के बाद जींद के तत्कालीन एसपी का तबादला करने पर विवाद शांत हुआ था।
विज्ञापन
36 साल पहले की हड़ताल बार के वरिष्ठ वकील दया सिंह के साथ एक महिला के विवाद के चलते हुई थी। दया सिंह को आज भी यह पूरा प्रकरण याद है। उन्होंने बताया कि रोहतक रोड स्थित सुभाष नगर में गली का निर्माण कार्य चल रहा था, जिसकी वजह से पानी रुका हुआ था। उन्होंने सेवादार को रास्ता बनाकर पानी निकालने के लिए कहा तो वह पानी निकालने लगा। इस दौरान पड़ोस की एक महिला ने उसके साथ मारपीट की। इससे विवाद गहरा गया। यह मामला 15 दिसंबर 1984 का है। उसी दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल जींद आए हुए थे। महिला उनके समक्ष पेश हुई तो पुलिस को कार्रवाई के आदेश दिए गए। दया सिंह के अनुसार उन पर केस हुआ और 16 दिसंबर को अदालत से अग्रिम जमानत मांगी, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते अग्रिम जमान रद्द करवा दी गई। 17 दिसंबर को उन्हें अदालत में पेश किया गया। महिला ने कानों की बालियां व गले की चेन तोड़ने का आरोप लगाया। ऐसे में पुलिस ने यह सामान बरामद करने के नाम पर एक दिन का रिमांड भी लिया, लेकिन घर से कुछ भी नहीं मिला। 18 दिसंबर को जमानत मिल गई।
पुलिस अधिकारी के बयान से भड़का विवाद
वकील दया सिंह बताते हैं कि विवाद होने पर कुछ वरिष्ठ वकील एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से मिले और कहा कि दया सिंह चोरी नहीं कर सकते। इस पर अधिकारी ने कहा कि तभी तो चोरी का केस बनाया है, नहीं तो डकैती का बनाते। इससे पुलिस की भावना साफ हो गई थी। इस बयान के बाद वकील भड़क गए थे।
अदालत कक्ष में हुआ विवाद
18 दिसंबर की घटना बताते हुए वकील दया सिंह ने कहा कि पहली बार उस दिन कोर्ट रूम के अंदर लाठियां चलीं। जिस समय उन्हें अदालत में पेश किया जा रहा था, काफी वकील एकत्रित हो गए थे। तलाशी में कुछ नहीं मिला था और साफ था कि पुलिस दुर्भावना से काम कर रही है। काफी संख्या में पुलिस भी तैनात की गई थी। यहां सादे कपड़ों में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों ने वकीलों को घूंसे मारे। इसके बाद विवाद हो गया। पुलिस ने कोर्ट रूम में भी वकीलों को लाठियों से पीटा। इस दौरान बलबीर ढुल, दया सिंह, जगफूल, जीडी गोस्वामी सहित आठ-दस वकीलों को चोटें आई। यह लोग मेडिकल करवा रहे थे तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। एक रात लॉकअप में बिताई और अगले दिन पेश किया गया। यहां से बलबीर ढुल, विरेंद्र, जीडी गोस्वामी ने जमानत ले ली, लेकिन दया सिंह और जगफूल ने जमानत नहीं ली। इस पर एक सप्ताह तक जेल में रहना पड़ा।
पूरे हरियाणा में फैला आंदोलन
यह आंदोलन इस घटना के बाद पूरे हरियाणा में फैल गया। 10 जनवरी को जींद में प्रदेश स्तरीय मीटिंग हुई, जिसमें रोहतक के वरिष्ठ वकील रण सिंह कादयान को प्रधान बनाया। 12 जनवरी से सुप्रीम कोर्ट के बाहर धरना शुरू कर दिया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में एक दिन की हड़ताल रखी। 25 फरवरी को कांग्रेस कानूनी सैल के एक नेता के माध्यम से तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ मीटिंग हुई और उन्होंने एसएसपी का तबादला करवाया। इसके बाद 28 फरवरी को यह विवाद शांत हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Disclaimer


हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Agree
Election
  • Downloads

Follow Us