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गन्ने के रेट 400 रुपये करने की मांग लेकर किसानों ने मिल में गन्ना तौल वाले कांटे पर धरना दे बंद कर दी तुलाई

Amar Ujala Bureauअमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 20 Jan 2020 11:39 PM IST
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former protest
former protest - फोटो : Kaithal
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गन्ने के रेट में बढ़ोतरी की मांग को लेकर किसान सभा के बैनर तले किसानों ने सोमवार को शुगर मिल के धर्मकांटे पर चूड़ियां टांग कर तोल बंद करा धरना दिया। दिन भर चले धरने के दौरान एमडी शुगर मिल से लेकर डीसी तक ने किसानों को मनाने का प्रयास किया। लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े हैं और सांय तक भी मिल में तोल शुरू नहीं हो पाया।
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धरने के दौरान कुछ किसान गन्ने की तुलाई करवाने के लिए तैयार थे, लेकिन गन्ना संघर्ष समिति के सदस्यों ने तोल करवाने से रोकने के लिए कांटों के सामने रस्सियां बांधकर उन पर चूड़ियां टांग दी और कहा कि अगर कोई किसान समिति से ऊपर होकर उनकी सहमति के बिना गन्ना तुलवाना चाहता है तो वह पहले चूड़ियां पहन ले। जो किसान गन्ने की तुलाई करवाने को तैयार थे, उनकी गन्ना संघर्ष समिति के सदस्यों से तोल को लेकर तू-तड़ाक भी हुई।
किसानों को समझाने के प्रयास करते रहे अधिकारी : किसानों के धरने की सूचना पाकर एमडी शुगर मिल और जिला प्रशासन व पुलिस के अधिकारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया। धरनारत किसानों ने अधिकारियों की एक न सुनीं और रेट बढ़ाने की मांग करते रहे। किसानों ने यह भी कहा कि जब तक रेटों में बढ़ोतरी नहीं होगी वे गन्ने का तोल नहीं होने देंगे। उन्होंने धरने को लगातार चलाने के लिए टेंट तक मंगवा लिए। केवल बाहर से आने वाले गन्ने के दो-तीन ट्रकों का ही तोल हो सका।
किसान बोले- उनसे ऊपर न तो सीएम है, न एमडी है और न ही कोई डायरेक्टर :
धरने पर बैठे किसान रणदीप सिंह, गुलतान नैन, महेंद्र सिंह, कृष्ण कुमार, दीपक, कुलदीप सिंह, अरुण, सतीश ग्योंग, महावीर धौंस, पाला राम, मियां सिंह, जरनैल व माला राम ने कहा कि किसानों से ऊपर न तो सीएम है, न एमडी है और न ही कोई डायरेक्टर है। किसानों द्वारा ही गन्ना उगाया जाता है और उनके गन्ने से ही मिल चलता है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में गन्ने के रेट में 30 रुपये बढ़ोतरी हुई है, जबकि इसकी फसल तैयार करने पर लागत 60 से 70 रुपये तक बढ़ गई है। किसानों को उनकी मेहनत और लागत के अनुसार गन्ने के रेट नहीं मिल रहे। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द गन्ने के रेट 400 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा देने की मांग की।
तीन-चार बार समझाने गए एमडी, नहीं माने किसान: किसानों को समझाने के लिए तीन बार एमडी शुगर मिल जगदीप सिंह उनके बीच गए और उन्हें कांटे से दूर हटकर धरना देने की बात कही, लेकिन किसानों ने उनके हर सुझाव को अनदेखा कर दिया। इसके बाद दो बार डीएसी रविंद्र सांगवान ने किसानों को समझाने के प्रयास किए, लेकिन किसानों ने उनकी बात भी नहीं सुनी। जब उन्हें धरना समाप्त करने को कहने के लिए मिल के डायरेक्टर मंडल के सदस्य गए तो किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांग के बारे में सरकार कोई पक्का जवाब नहीं देगी, वे वहीं बैठे रहेंगे। डायरेक्टरों ने कहा कि इस संबंध में वे जिला प्रशासन से भी बात करेंगे तो किसान बोले कि ऐसा पहले भी किया जा सकता था। जब उन्होंने सरकार के मंत्रियों और बड़े अधिकारियों के सामने अपनी मांग रखने का प्रयास किया था।
एसडीएम का प्रयास भी रहा असफल: सूचना पर एसडीएम कैथल कमलप्रीत कौर किसानों के बीच पहुंची। एसडीएम ने कहा कि भले ही किसान धरना देते रहे, लेकिन उसे इस तरह से मैनेज करें कि किसी भी किसान को धरने से परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि किसानों ने पहले भी धरने दिए हैं और प्रशासन द्वारा उनकी मांगों और समस्याओं के समाधान का प्रयास भी किया गया। इस पर किसान बोले कि पिछले एक वर्ष में मिल में हुए चिप घोटाले का अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। ऐसे में किसान दोबारा कैसे मान लें कि उनकी मांग पूरी होगी।
दोपहर बाद उन्हें समझाने के लिए डीसी सुजान सिंह भी पहुंचे। उन्होंने किसानों की समस्या का सरकार से बातचीत कर हल निकलवाने की बात कही, लेकिन किसान फिर भी नहीं माने। वे धरने पर बैठे रहे। किसानों ने कहा कि मांग पूरी होने तक वे धरने पर रहेंगे। सरकार जल्द से जल्द उनकी मांग पर प्रतिक्रिया दे।
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