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पंजाब यूनिवर्सिटी समेत 196 कॉलेजों में 60 हजार सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में, जानिए क्यों

अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Updated Thu, 27 Feb 2020 12:09 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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पिछले साल शुरू हुआ गरीब सर्वण आरक्षण इस साल भी पीयू और उससे संबद्ध 196 कॉलेजों में लागू होता नहीं दिख रहा है। अब तक इसको लागू करने के लिए कोई निर्णायक बैठक नहीं हुई है, जिससे विद्यार्थियों को आरक्षण की खुशखबरी मिल सके। इस आरक्षण के लागू होने पर 62 हजार सीटें शिक्षण संस्थानों में बढ़नी थीं। यदि आरक्षण लागू नहीं हुआ तो फिर से तमाम विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बाहर जाना पड़ेगा। बताया जा रहा है कि कॉलेजों के पास पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। इस कारण यह सीटें बढ़ती नहीं दिख रहीं।
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केंद्र सरकार ने गरीब सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान पिछले साल किया था। उसी के मुताबिक शिक्षण संस्थानों में भी इन विद्यार्थियों के लिए सीटें बढ़ाई जानी थीं। यूजीसी का भी फरमान पीयू के पास पहुंचा। पीयू ने आगे की तैयारी शुरू की और बैठक की। कहा कि विश्वविद्यालय 10 फीसदी व कालेज 25 फीसदी सीटें बढ़ाएंगे। सीटें बढ़ाने के लिए सभी संस्थान तैयार थे लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर न होने के कारण यह प्रस्ताव परवान नहीं चढ़ सका। प्रस्ताव रखा गया कि शिक्षकों की काफी कमी है।

यदि सीटें बढ़ा दी गईं तो शिक्षकों पर अतिरिक्त भार आएगा और शिक्षण कार्य प्रभावित होगा। इसके लिए शिक्षकों की व्यवस्था पहले की जाए और विद्यार्थियों के बैठने के लिए भी अलग से व्यवस्था होनी चाहिए। इस प्रस्ताव पर सभी ने मुहर लगा दी। इस नए शैक्षिक सत्र में यह प्लान लागू होना था, लेकिन दिक्कतें वहीं की वहीं हैं। उनका समाधान एक साल बाद भी नहीं हुआ है। इस कारण सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव खटाई में पड़ गया।

1500 से अधिक शिक्षकों की जरूरत होगी
ल में गरीब सर्वण आरक्षण लागू करने के लिए पीयू ने शुरू में तो तैयारी की थी लेकिन अब मामला ढीला पड़ गया गया। सूत्रों का कहना है कि पीयू व कॉलेजों में सीटें 62 हजार बढ़ेंगी तो इन्हें पढ़ाने के लिए 1500 से 2000 शिक्षकों की जरूरत पड़ेगी। इसी तरह कर्मचारियों का भार भी बढ़ेगा। ऐसे में 950 से अधिक कर्मचारियों की जरूरत महसूस होगी।

साथ ही विद्यार्थियों के बैठने के लिए फर्नीचर व भवनों की व्यवस्था की जानी है। स्वीकृत पदों की संख्या को भी बढ़ाना पड़ेगा। इतनी बड़ी संख्या में तो एक साथ व्यवस्था करना संभव नहीं दिख रहा लेकिन धीरे-धीरे व्यवस्था दुरुस्त किए जाने के वादे किए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रथम चरण में पीयू व कुछ कॉलेजों में सीटें बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि इस शैक्षिक सत्र में यह होता नहीं दिखता।

सीटें बढ़ाने को लेकर अभी बैठक तो कोई की नहीं गई है लेकिन इस पर चर्चा की जाएगी। जल्द ही कुछ न कुछ इस पर निर्णय होगा।
- प्रो. शंकरजी झा, डीयूआई
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