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नई रेल लाइन से करनाल जाना होगा आसान, इंडस्ट्री और कृषि क्षेत्र को भी मिलेगा फायदा

Amar Ujala Bureauअमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 22 Feb 2020 12:15 AM IST
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going to karnal will be easy
going to karnal will be easy - फोटो : Yamuna Nagar
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बजट सत्र में यमुनानगर-करनाल नई रेल लाइन पर चर्चा किए जाने से इस प्रोजेक्ट के निर्माण का रास्ता खुल गया है। प्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट में इस प्रोजेक्ट के लिए धनराशि का आवंटन कर सकती है। हरियाणा रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा 61 किलोमीटर लंबी इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट और विस्तृत सर्वेक्षण पहले ही मंजूरी के लिए केंद्र के पास भेजा जा चुका है। इसके निर्माण से करनाल और यमुनानगर के बीच सीधी कनेक्टिविटी होगी और यात्रा की दूरी भी करीब 20 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। इसके अलावा यह हरिद्वार से भी सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा जो इस क्षेत्र की लंबे समय से मांग थी।
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प्रस्तावित नई लाइन जगाधरी वर्कशॉप से शुरू होगी और करनाल के पास दिल्ली-अंबाला रेलवे लाइन पर भैणी-खुर्द स्टेशन से कनेक्ट होगी। इस लाइन पर 5 नए रेलवे स्टेशन बनाएं जाने का प्रस्ताव है। इनमें यमुनानगर जिले में दामला, रादौर, कुरुक्षेत्र में लाडवा, करनाल के इंद्री और रंभा में स्टेशन होंगे।
यमुनानगर व जगाधरी औद्योगिक शहर हैं। यमुनानगर में जहां प्लाईवुड है, वहीं जगाधरी में मेटल की सैकड़ों फैक्ट्रियां हैं।बर्तनों के लिए मेटल, एल्यूमिनियम समेत अन्य धातु का कच्चा माल दिल्ली, राजस्थान, मुंबई से आता है। अगर करनाल-यमुनानगर लाइन बन जाती है तो यमुनानगर सीधे दिल्ली रेल लाइन से जुड़ जाएगा। वहीं यमुनानगर के उद्यमियों को प्लाइवुड के लिए भी कच्चा माल ट्रकों में लेकर आना पड़ता है। करनाल रेल लाइन बनने से माल दिल्ली पहुंचाना आसान हो जाएगा। इससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम होगा।
इस रेलवे ट्रैक के शुरू होने से किसानों को भी काफी फायदा होगा। खासकर सब्जी और फलों के छोटे उत्पादक किसानों को अपनी फसल बड़े शहरों तक ले जाना आसान होगा। अभी थोड़ी फसल ले जाने के लिए उन्हें काफी खर्च करना पड़ता था। अब वे मामूली किराये में करनाल और दिल्ली तक अपनी फसल ले जा सकेंगे।
इस रेल लाइन के तैयार होने से यमुनानगर सीधा दिल्ली रेल रूट से जुड़ जाएगा। अभी अगर ट्रेन से दिल्ली जाना हो तो या तो वाया अंबाला या फिर सहारनपुर होकर जाना पड़ता है। इसके अलावा पानीपत, रोहतक, हिसार, झज्जर की तरफ जाना भी आसान हो जाएगा। प्रथम चरण में इस लाइन पर पांच से दस हजार यात्रियों के आवागमन का अनुमान लगाया गया है।
इस रेल लाइन की घोषणा साल 1998 में संसद में पेश किए गए रेल बजट में हुई थी। तब से यह अटका पड़ा है। साल 2015 के बजट में इसके सर्वे की घोषणा की गई। सर्वे के लिए कुछ बजट भी जारी किया गया था। अब जाकर प्रदेश सरकार इस पर गंभीर हुई है।
करनाल रेलवे लाइन का मुद्दा मैंने लगातार संसद में उठाया है। इसके बनने से तीन जिलों के लोगों को सीधा फायदा होगा। साथ ही यमुनानगर की कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी। औद्योगिक शहर होने के कारण उद्यमियों को काफी फायदा होगा।- रतन लाल कटारिया, केंद्रीय मंत्री
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