धनतेरस पर आभूषणों और गाड़ियों की मांग बढ़ी

ब्यूरो, सोलन Updated Thu, 27 Oct 2016 09:21 PM IST
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दीपावली से दो दिन पूर्व मनाए जाने वाले धनतेरस के लिए लोगों की खरीददारी चरम पर है।
दीपावली से दो दिन पूर्व मनाए जाने वाले धनतेरस के लिए लोगों की खरीददारी चरम पर है। - फोटो : अमर उजाला

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दीपावली से दो दिन पूर्व मनाए जाने वाले धनतेरस के लिए लोगों की खरीददारी चरम पर है। प्रथा के मुताबिक धनतेरस के दिन ली गई सोने, चांदी, तांबे और स्टील आदि की वस्तुएं खरीदने पर धनवंतरि देवता 13 गुणा वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इसके चलते वीरवार को शहर में खचाखच भीड़ उमड़ी।
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कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धनवंतरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है। दीपावली से दो दिन पूर्व मनाए जाने वाले धनतेरस से ही दीप मालाएं सजने लगती हैं।
 धनतेरस के अवसर पर बाजार में बर्तन, सोना, चांदी और गाड़ियों आदि की खरीद पर आकर्षक आफर दिए जा रहे हैं। सोने और चांदी में निश्चित राशि तक की खरीद पर कूपन मुफ्त दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही नई गाड़ियों की खरीद पर भी आकर्षक उपहारों के साथ स्पेशल हॉलिडे पैकेज दिए जा रहे हैं।
धनतेरस पर सजे बाजार
धनतेरस के मौके पर शहर में लोगों ने जमकर खरीदारी की। विशेष कर ज्वेलरी शॉप्स और सुनारों तथा बर्तनों की दुकानों पर दिनभर लोगों का तांता लगा रहा। सुनियारों के अनुसार उनके पास इस दौरान अधिकांश लोगों गणेश जी और महालक्ष्मी अंकित सिक्कों को दुकानों में सजाया गया। दुकानदारों ने स्वर्ण आभूषण के साथ घर की सजावट के लिए सोने-चांदी के बर्तन और आकर्षक उपहार भी रखे हैं। इस बार मिठाइयों से ज्यादा ड्राई फ्रूट्स खरीदने को तरजीह दे रहे हैं। लोगों का मानना है कि मिलवाटी मिठाइयों से बचने के लिए ड्राई फ्रूट्स से अच्छा कुछ नहीं है। इसके साथ ही फूलों का कारोबार भी फल फूल रहा है। बाजार में गेंदा 150 से 200, पत्ता माला 20, फूल माला 35 से 40 और कमल का फूल 50 से 60 रुपये में बिक रहा है।

ऐसे शुरू हुआ धनतेरस पर्व
देवी लक्ष्मी सागर मंथन से पैदा हुई थी, उसी तरह भगवान धनवंतरि भी अमृत कलश के साथ सागर मंथन से पैदा हुए। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धनवंतरि का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को धनतेरस के नाम से जाना जाता है। धनवंतरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। भगवान धनवंतरि  कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परंपरा है।

बर्तन बाजार की स्थिति
धनतेरस में स्टील के बर्तन खरीदे जाते हैं। लेकिन इस बार बाजार में मिट्टी के बर्तन भी लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। इसमें मिट्टी के तवे और कढ़ाई आदि लोग हाथोंहाथ खरीद रहे हैं। इन बर्तनों की कीमत भी कम है। इसके साथ ही नान स्टिक बर्तनों में भी भारी रेंज बाजार में उपलब्ध है।

धनतेरस पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
पंडित हेतराम शर्मा ने बताया कि धनतेरस पूजा के लिए शाम 5:35 से 6:20 बजे तक का मुहूर्त है। यह मुहूर्त 45 मिनट का है। इस दिन प्रदोष काल 5:35 बजे से 8:11 बजे तक हैं। त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 27 अक्टूबर 2016 को शाम 4:15 बजे से हो जाएगी। लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल के दौरान होना चाहिए। प्रदोष काल की अवधि 2 घंटे 24 बजे की है।
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