208 शिक्षाविदों ने पीएम को लिखा पत्र, देश में बिगड़ते शिक्षा के माहौल के लिए लेफ्ट विंग जिम्मेदार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 12 Jan 2020 05:14 PM IST
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पीएम मोदी (फाइल फोटो)
पीएम मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

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विश्वविद्यालयों के कुलपतियों सहित देश के 200 से ज्यादा शिक्षाविदों ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश में बिगड़ते शैक्षणिक माहौल के लिए लेफ्ट विचारधारा से जुड़े लोगों को जिम्मेदार ठहराया है।
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पत्र में कहा गया है कि लेफ्ट विंग के ऐक्टिविस्ट्स मंडली देश में शैक्षणिक माहौल को खराब करने में जुटी है। हम इस बात से निराश हैं कि छात्र राजनीति के नाम पर, एक विघटनकारी वामपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाया जा रहा है। हाल ही में जेएनयू से लेकर जामिया तक, एएमयू से लेकर जादवपुर तक के परिसरों में हुए घटनाओं ने को लेकर हो रही बदनामी के कारण हमें बिगड़ते शैक्षणिक माहौल के प्रति सचेत किया है। इसके पीछे लेफ्ट विंग के ऐक्टिविस्ट्स मंडली का हाथ है।
पत्र में कई यूनिवर्सिटीज के वीसी के हस्ताक्षर
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पत्र में दिए गए बयान के लिए हस्ताक्षरकर्ताओं में हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलपति आर पी तिवारी, दक्षिण बिहार के केंद्रीय विश्वविद्यालय के वीसी एचसीएस राठौर और सरदार पटेल विश्वविद्यालय के वीसी शिरीष कुलकर्णी शामिल हैं। 'शिक्षण संस्थानों में लेफ्ट विंग की अराजकता के खिलाफ बयान' शीर्षक से लिखे गए पत्र में इन कुलपतियों समेत कुल 208 शिक्षाविदों के हस्ताक्षर हैं।

208 शिक्षाविदों के बयान को शिक्षाविदों के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। नागरिकता संशोधन अधिनियम सहित कई मुद्दों पर कुछ विश्वविद्यालयों में विरोध प्रदर्शनों के बाद लिखे गए इस पत्र को सरकार की ओर से बुद्धिजीवियों के एक वर्ग का समर्थन जुटाने की कोशिश माना जा रहा है। पत्र में वामपंथी झुकाव वाले समूहों पर कटाक्ष करते हुए कहा गया है कि वामपंथी राजनीति द्वारा लगाए गए सेंसरशिप के कारण सार्वजनिक रूप से कुछ भी बोलना और कोई सार्वजनिक कार्यक्रम करना मुश्किल हो गया है।

शिक्षाविदों ने पीएम को लिखा कि वामपंथी द्वारा अपनी मांगें मनवाने के लिए हड़ताल, धरना और बंद करना वामपंथी गढ़ों में समान्य बात है। कुछ लोगों को व्यक्तिगत निशाना बनाया जा रहा है, सार्वजनिक बदनामी की जा रही है और वाम विचारधारा के अनुरूप नहीं होने की वजह से उत्पीड़न किया जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि इस तरह की राजनीति से सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब छात्र और हाशिए पर मौजूद समुदाय के लोग हो रहे हैं।

ये छात्र सीखने और खुद के लिए एक बेहतर भविष्य बनाने के अवसरों को खो रहे हैं। वे अपने विचारों और वैकल्पिक राजनीति को स्पष्ट करने की स्वतंत्रता से भी चूक जाते हैं। वे खुद को बहुसंख्यक वाम राजनीति के अनुरूप ढालने के लिए विवश हो जाते हैं। पत्र में सभी लोकतांत्रिक ताकतों से एक साथ आने और अकादमिक स्वतंत्रता, भाषण की स्वतंत्रता और विचारों की बहुलता के लिए खड़े होने की अपील की गई है।
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