सुप्रीम कोर्ट की चिंता के बाद दिल्ली को कोरोना से बचाने के लिए खुद मैदान में उतरे अमित शाह

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली। Updated Sun, 14 Jun 2020 05:34 AM IST
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह - फोटो : एएनआई

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दिल्ली में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। यह संक्रमण सामुदायिक रूप ले चुका है या नहीं, इस बाबत केंद्र और राज्य सरकार की अलग राय है। अस्पतालों में लोगों को बेड नहीं मिलने की खबरें रोजाना आ रही हैं। इन सबके बीच अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दिल्ली को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए खुद मैदान में उतर गए हैं। कोरोना की स्थिति को लेकर रविवार को उन्होंने दो बैठक बुलाई हैं। 
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अमित शाह के साथ पहली बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, एलजी अनिल बैजल और सीएम अरविंद केजरीवाल रहेंगे। दूसरी बैठक में उक्त सभी के अलावा एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया व तीनाें नगर निगमों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में कोरोना संक्रमण से पीड़ित मरीजों के इलाज में लापरवाही और इसके कारण मारे गए लोगों के शवों की स्थिति पर गहरी चिंता जाहिर की थी। अदालत ने इसे भयावह, दहलाने वाली व दयनीय घटना बताया था। दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार भी लगाई गई थी। इस मामले में अगली सुनवाई 17 जून को होगी।
बता दें कि दिल्ली में कोरोना के केस जिस तेजी से आ रहे हैं, उससे इसके फैलाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। अप्रैल में कोरोना संक्रमण की दर पांच फीसदी से कम रही थी। मई में कोरोना संक्रमण इतने बड़े पैमाने पर फैला है कि इसकी दर 20 फीसदी के आंकड़े को छू गई।

अब जून में यह दर 36 फीसदी के पार पहुंच गई है। इसका मतलब है कि यदि किसी इलाके में सौ लोगों की जांच की जाती है तो वहां पर 36 लोगों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव मिलती है। यही वो स्थिति है, जिसने डॉक्टरों और मेडिकल क्षेत्र के दूसरे विशेषज्ञों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि यह मान लिया जाए, कोरोना अब सामुदायिक प्रसार की राह पकड़ गया है।

इसी सप्ताह दिल्ली के एलजी ने अलग से कई बैठकें बुलाई थीं। उन्होंने स्थिति का आकलन करने के बाद दिल्ली सरकार को यह सलाह दे दी थी कि दिल्ली के सभी स्टेडियम को अस्पताल में बदलने की तैयारी करें। वजह यह रही कि दिल्ली में कोरोना के इतने अधिक मरीज हो गए हैं कि संक्रमित लोगों को बेड तक नहीं मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री केजरीवाल भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने पहुंच गए। बैठक के बाद उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि गृहमंत्री ने सहयोग का आश्वासन दिया है। इससे पहले उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया कह चुके थे कि दिल्ली में कोरोना के मामले ऐसे ही आते रहे तो 31 जुलाई तक इनकी संख्या साढ़े पांच लाख हो सकती है।

उस स्थिति में 80 हजार बेड की जरूरत होगी। ये सभी ऐसी बातें थीं, जिनके चलते केजरीवाल सरकार को अमित शाह के पास पहुंचना पड़ा। रविवार को होने वाली बैठक में एम्स और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य भी मौजूद रहेंगे। इस बैठक में कोई भी सख्त फैसला लिया जा सकता है।

सूत्र बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के कंटेनमेंट जोन के मौजूदा दायरे को बदलने पर चर्चा की जाएगी। जिन जगहों पर केस तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां कर्फ्यू लगाने जैसा कोई सख्त कदम उठाया जा सकता है। सबसे अहम बात है कि दिल्ली के बॉर्डर, ये अभी खुले हुए हैं, लेकिन हो सकता है कि बैठक के बाद इन्हें दोबारा से सील करने के आदेश दे दिए जाएं।

वजह यह है कि हरियाणा के सीएम लगातार यह बात कह रहे हैं कि उनके यहां पर केस बढ़ने का कारण दिल्ली से आने वाले लोग हैं। कोरोना के अधिकांश मरीजों की केस हिस्ट्री दिल्ली मिल रही है। अमित शाह की दूसरी बैठक अहम रहेगी, जिसमें एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया और तीनाें नगर निगमों के अधिकारी मौजूद रहेंगे।

दुकानें और दूसरे व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद करने को लेकर इस बैठक में फैसला लिया जा सकता है। बता दें कि देश की राजधानी में शुक्रवार को कोरोना वायरस के 2,137 मामले सामने आए थे। कुल मरीजों की संख्या 37 हजार के पार हो चुकी है।
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