पैंगोंग में भारतीय सेना की कार्रवाई से घबराया चीन, लद्दाख के कई इलाकों में बिछाई बारूदी सुरंगें

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 07 Sep 2020 06:46 PM IST
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SFF Commando Nyima Tenzin Funeral - फोटो : Amar Ujala

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सार

पीएलए जो बारूदी सुरंगें लद्दाख में बिछा रहा है, वही तकनीक रूस और वियतनाम की सेनाओं को अपने रणनीतिक लक्ष्यों तक पहुंचने से रोकने के लिए उपयोग में लाई गई थीं...

विस्तार

चीन, लद्दाख में अपनी आक्रामक नीति से बाज नहीं आ रहा है। अब उसने लद्दाख के कई इलाकों में एलएसी के आसपास वे बारूदी सुरंग बिछा दी हैं, जिनका इस्तेमाल खाड़ी युद्ध में किया गया था। इसके अलावा भारत-पाकिस्तान, ईरान-इराक और अफगानिस्तान में भी लड़ाई के दौरान ऐसी बारूदी सुरंगें प्रयोग में लाई गई थीं। सैन्य सूत्रों के अनुसार, चीन ने कई तरह की बारूदी सुरंगें बिछाई हैं। इनमें टैंकरोधी और पैदल दस्तों को रोकने के लिए बिछाई जाने वाली बारूदी सुरंगें शामिल हैं।
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बारूदी सुरंगों की तलाश करने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की पकड़ में न आने वाली विशेष धातु से बनी सुरंगों के भी सबूत मिले हैं। भारतीय सैन्य दलों ने भी इसका तोड़ निकाल लिया है। इसमें खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है। पीएलए अपनी पारंपरिक रणनीति के तहत ऐसी सुरंगों का इस्तेमाल दुश्मन की कमान, रसद, परिवहन और संचार लाइन को नुकसान पहुंचाने के लिए करती है।


सूत्र बताते हैं कि पीएलए जो बारूदी सुरंगें लद्दाख में बिछा रहा है, वही तकनीक रूस और वियतनाम की सेनाओं को अपने रणनीतिक लक्ष्यों तक पहुंचने से रोकने के लिए उपयोग में लाई गई थीं। टैक रोधी बारूदी सुरंगों में तीन किलो से लेकर दस किलोग्राम तक की विस्फोटक सामग्री रहती है।

जैसे ही इस पर 120 किलोग्राम से लेकर 300 किलो के वजन वाली वस्तु, उपकरण या टैंक का दबाव पड़ता है, तभी विस्फोट हो जाता है। वहीं पैदल दस्तों को रोकने के लिए बिछाई जाने वाली बारूदी सुरंगों में 15 ग्राम से लेकर 250 ग्राम तक की विस्फोट सामग्री होती है। इस पर जब पांच से साठ किलो के भार वाली कोई वस्तु या व्यक्ति का दबाव आता है तो यह सक्रिय हो जाती है।

चीन ने विस्फोटक सुरंगें भी लगा रखी हैं, जो दबाव पड़ते ही फट जाती हैं। इन सुरंगों के अलावा ट्रिप वायर से संचालित होने वाली बारूदी सुरंगें भी हो सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारत-चीन सीमा पर शहीद हुए स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के कमांडो नाइमा तेनजिंग और उनके दूसरे साथी, जो घायल हो गए थे, वे विशेष धातु से बनी बारूदी सुरंगों की चपेट में आ गए थे। जिन्हें उपकरणों से तलाशना आसान नहीं होता।

बता दें कि सोमवार को लेह में पूरे सैन्य सम्मान के साथ स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के कमांडो नाइमा का अंतिम संस्कार किया गया है। इस दौरान लोगों ने अपने हाथों में तिरंगा थामकर भारत माता के जयकारे लगाए। 29 अगस्त को पीएलए के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान लद्दाख में चुशुल के पास गुरुंग हिल पर 1962 में बिछाई बारूदी सुरंग फटने से नाइमा तेनजिंग शहीद हो गए थे।

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