सुप्रीम कोर्ट से की सुरक्षा बलों के पेंशन लाभों में असमानता को दूर करने की मांग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 22 Oct 2020 02:13 AM IST
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supreme court - फोटो : ANI

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सुप्रीम कोर्ट से केंद्रीय गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले सुरक्षा बलों के जवानों के पेंशन लाभों में असमानता को दूर करने की मांग की गई।
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शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल करते हुए कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले सुरक्षा बलों के जवानों को पुरानी पेंशन व्यवस्था का लाभ मिल रहा है, जबकि गृह मंत्रालय के तहत घोषित किए गए सुरक्षा बलों के जवान 2004 में लागू की गई नई पेंशन योजना के तहत लाभ हासिल करते हैं।
याचिकाकर्ता ने इसे भेदभाव मानते हुए गृह मंत्रालय के तहत आने वाले बलों को भी पुरानी पेंशन नीति का ही लाभ दिए जाने की मांग की है।

एडवोकेट अजय अग्रवाल के जरिये हमारा देश हमारे जवान ट्रस्ट की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है कि 1 जनवरी, 2004 को नई पेंशन योजना लागू की गई थी। इसमें पेंशन को अनिवार्य नहीं मानते हुए कर्मचारी की इच्छा के आधार पर उसके वेतन से ही काटने का प्रावधान किया गया है।

यह नियम 2004 में केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत घोषित किए गए बीएसएफ, सीआईएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एनएसजी, एसएसबी और असम राइफल के जवानों पर लागू होता है। लेकिन रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली भारतीय सेना के जवानों के वेतन पर यह योजना लागू नहीं है।

याचिका में कहा गया है कि गृह मंत्रालय के तहत आने वाले सभी सुरक्षा बलों का हर जवान पुरानी पेंशन योजना के तहत ही लाभ दिए जाने की मांग कर रहा है, लेकिन केंद्र सरकार इससे इनकार कर रही है। यह जवानों के साथ आपस में भेदभाव है।
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