कानों देखी : तेजस्वी-नीतीश की तू-तू मैं-मैं में भाजपा की पौ बारह

शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Sat, 28 Nov 2020 05:14 AM IST
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नीतीश कुमार एवं तेजस्वी यादव
नीतीश कुमार एवं तेजस्वी यादव - फोटो : Amar Ujala

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बिहार में नई सरकार के गठन के साथ ही राजद नेता तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हिसाब चुकाने में जुट गए हैं। राज्यपाल अभिभाषण के जवाब में बोलते हुए तेजस्वी ने जहां महागठबंधन के काम का तंज कस दिया, वहीं एनडीए पर जनादेश की चोरी का आरोप जड़ दिया। नीतीश कुमार की विश्वसनीयता, चार साल में चार सरकार बनाने को लेकर करारा हमला करने से भी नहीं चूके। तेजस्वी यहीं नहीं रुके, मुख्यमंत्री पर निजी आरोप लगाते हुए लड़की पैदा होने से डरने पर भी तंज कस दिया। हत्या के आरोप और 20 हजार रुपये का जुर्माना भरने का आरोप जड़ दिया। लगे हाथ ये भी पूछ भी लिया कि जुर्माना चेक से भरा या आरटीजीएस से किया।
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तेजस्वी के जहरबुझे तीर से छलनी नीतीश विधानसभा में ही तमतमा गए। मामले की जांच और तेजस्वी पर कार्रवाई की मांग करने लगे। लगे हाथ तेजस्वी और लालू पर एहसान गिना डाला। कहते हैं कि इतिहास अपने आप को दोहराता है। बालक सयाना होकर पिता हो जाता है। चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश ने लालू पर नौ बच्चे पैदा करने का आरोप लगाया था, कई निजी हमले बोले थे। बताते हैं इससे खिसियाए तेजस्वी अब उन्हें उन्हीं की नैतिकता याद दिलाने में जुटे हैं। इस नजारे का मजा भाजपा लूट रही है।



अमित शाह से क्यों घबरा रही हैं दीदी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तो अपने निराले अंदाज के लिए जानी जाती हैं, लेकिन आजकल ममता को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साये से भी घबराहट हो रही है। मां, माटी और मानुष वाली ममता ने तृणमूल कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर भी शाह के एक-एक आरोप का जवाब दिया है। बताते हैं कि ममता को अमित शाह के आरोपों से डर नहीं लगता। असली डर भाजपा नेताओं की तोड़-फोड़ की पॉलिटिक्स कश्मीर, राष्ट्रवाद, सीएए, एनआरसी, राम मंदिर के नाम पर ध्रुवीकरण को लेकर है।

बताते हैं जब अमित शाह भाजपा अध्यक्ष थे, तो इसी डिजाइन पर बंगाल में 2019 के लोकसभा चुनाव में 18 सीटें झटक ली थी। इसके पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में सीटों की संख्या और वोट प्रतिशत भी बढ़ाने में सफल हो गए थे। इस बार फिर अमित शाह की बनाई डिजाइन पर ही भाजपा अध्यक्ष नड्डा पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने का रोडमैप बना रहे हैं। लिहाजा ममता का घबराना भी स्वाभाविक है।

हैदराबाद में भाजपा नेताओं के जमघट ने चौंकाया
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव चौकन्ने हो गए हैं। उन्हें हैदराबाद में भाजपा नेताओं की इतनी बड़ी जमघट का रहस्य समझ में आने लगा है। वृहद हैदराबाद निगम चुनाव में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। इसमें प्रचार के लिए जहां भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा जुट गए हैं, वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जाने की योजना है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, स्मृति ईरानी और युवा मोर्चा के अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या प्रचार करके लौट आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोविड-19 वैक्सीन का जायजा लेने के लिए कल हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद में होंगे। टीआरएस के सूत्र बताते हैं कि उनके नेता इसे कड़ी में जोड़कर देख रहे हैं। उन्हें पता है कि भाजपा की महत्वाकांक्षा अब आकार लेने लगी है।

आगे-आगे राहुल और पीछे-पीछे प्रियंका गांधी, लाइन में हैं सारे कांग्रेसी
कांग्रेस का अब क्या होगा? सवाल इसलिए मौजूं है कि पार्टी के वफादार संकटमोचक अहमद पटेल नहीं रहे। महीने भर से अधिक समय तक संक्रमण और उसके बाद के असर को झेलते हुए एनसीआर के मेदांता अस्पताल में उनका निधन हो गया। इस सवाल को कांग्रेस के एक महासचिव ने बहुत जल्दबाजी भरा बताया। उन्होंने कहा कि अब तो संगठन के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। आप चिंता न कीजिए। सब ठीक हो जाएगा। सूत्र का कहना है कि मुझे केवल तीन बातें पता है। पहला यह कि पार्टी की कमान राहुल गांधी के निर्देश पर चल रही है। वह आने वाले समय में कमांडर-इन-चीफ बनेंगे। राहुल के बाद उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी ने बड़ा राजनीतिक अभियान चला रखा है। वह सबसे प्रभावी महासचिव बनी रहेंगी। शेष सभी कांग्रेसी पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता हैं और अपना काम करते रहेंगे। भाजपा का दुष्प्रचार भी चलता रहेगा।

अखिलेश यादव को विटामिन बी काम्पलेक्स मिल गया
अखिलेश यादव 2022 में मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। अखिलेश के इस सपने का एक आधार भी है। सबसे बड़ा आधार है कि चाचा शिवपाल ने पूरी तरह से हथियार डालने का मन बना लिया है। दूसरे वह बसपा प्रमुख मायावती की सिमट रही ताकत का आकलन करके भी खुश हो रहे हैं। अखिलेश के करीबी संजय लाठर समेत तमाम नेताओं को लग रहा है कि मुख्यमंत्री योगी की गाय-बछड़ा समेत तमाम अव्यावहारिक नीतियां ही भाजपा को ले डूबेंगी। लाठर कहते हैं कि प्रियंका गांधी तो केवल लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी खड़ी करेंगी, इसे भुना नहीं पाएंगी। यानी टीम अखिलेश मानकर चल रही है कि अल्पसंख्यक, यादव, कुछ अन्य पिछड़ी जातियां और नाराज ब्राह्मण 2022 में समाजवादी पार्टी को विकल्प के रूप में देख सकते हैं। यानी साइकिल 2012 की तरफ फुल स्पीड में दौड़ सकती है।

लगे हाथ गहलोत ने भी साफ किया सिब्बल से हिसाब
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बारे में आम है कि वह मौका पाकर विरोधी पर बिच्छू की तरह धीमे से डंक मारकर आगे बढ़ जाते हैं। हाल ही में अशोक गहलोत ने वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के साथ भी हिसाब बराबर कर लिया। दरअसल, सचिन पायलट ने जब नाराज होकर एनसीआर में डेरा डाल रखा था तो कपिल सिब्बल ने जले पर नमक छिड़कने वाला बयान दे दिया था। यह बयान सचिन पायलट को ताकत देने वाला था। इससे पहले भी कपिल सिब्बल ने एकाध मौके पर गहलोत को राजनीतिक छौंका लगाया था। लिहाजा गहलोत भी मौके की तलाश में थे। जैसे ही कपिल सिब्बल ने एक बार पार्टी में संगठनात्मक सुधार की फिर आवाज उठाई, गहलोत ने डंक मार दिया। मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने पूछ लिया कि कपिल सिब्बल अपना योगदान बता दें।

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