आम बजट 2020 में दिखी विचारधारा की छाप, वित्तमंत्री बोलीं- वतन डल झील में खिलते कमल जैसा

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Updated Sun, 02 Feb 2020 06:08 AM IST
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Nirmala Sitharaman
Nirmala Sitharaman - फोटो : PTI

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सार

  • कश्मीर के कौल से शुरू कर तमिल कवि  तिरुवल्लुवर की कविताओं का किया जिक्र
  • पूरा-स्मारकों के जरिए हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा

विस्तार

आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कश्मीरी कवि पंडित दीनानाथ कौल की कविता के जरिए डल झील में कमल खिलाने की बात की। इसी दौरान पीएम मोदी के नेतृत्व में कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए तमिल कवि तिरुवल्लुवर के 5 मंत्रों स्वास्थ्य, संपन्नता, खुशी, उपज और सुरक्षा का सहारा लिया। माना जा रहा है कि वित्त मंत्री ने इसके जरिए सरकार की वैचारिक प्रतिबद्धता का स्पष्ट संदेश दिया।
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चाहे बजट भाषण हो या फिर अहम घोषणाएं, सभी में सरकार की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता साफ तौर पर झलकी। उन्होंने कश्मीर और देश की एकता-अखंडता पर स्पष्ट संदेश देने के लिए कवि कौल की इन पंक्तियों का सहारा लिया-हमारा वतन खिलते हुए शालीमार जैसा, हमारा वतन डल झील में खिलते हुए कमल जैसा, हमारा वतन नौजवानों के गर्म खून जैसा, मेरा वतन, तेरा वतन, हमारा वतन, दुनिया का सबसे प्यारा वतन।
सांस्कृतिक विचारधारा को जोड़ा
  • वित्त मंत्री ने सांस्कृतिक विचारधारा के प्रति दृढ़ता का भी संदेश दिया।
  • पुरातात्विक महत्व के स्थलों को विकसित करने के लिए उन्होंने राखीगढ़ी (हरियाणा), हस्तिानापुर (यूपी), शिवसागर (असम), धोलावीरा (गुजरात) और आदिचनाल्लुर (तमिलनाडु) का चयन किया। 
  • इन सभी महत्वपूर्ण स्थलों के तार वैदिक हिंदुत्व के साथ देश के सभी राज्यों का हजारों वर्षों से सांस्कृतिक रूप से एक होने का भी संदेश देते हैं। मसलन राखीगढ़ी सिंधुघाटी सभ्यता, धोलावीरा हड़प्पा संस्कृति, हस्तिानापुर सम्राट भरत और महाभारत काल के भारत, शिवसागर अहोम साम्राज्य के दौरान शिव की अराधना तो आदिचनाल्लुर के 2500 से 2200 ईसापूर्व की सभ्यता के सुबूत हैं।
जानिये कवि दीनानाथ कौल को 
कश्मीरी कवि दीनानाथ कौल नदीम ने कश्मीरी के साथ-साथ उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी में भी कविताएं लिखी हैं। नदीम की, आजादी के बाद से उभरे प्रमुख प्रगतिशील साहित्यकारों में गिनती की जाती है। कौल का जन्म 18 मार्च 1916 को श्रीनगर में कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। उन्होंने कई सालों तक श्रीनगर के हिंदू हाईस्कूल में पढ़ाया। इस वजह से लोग उन्हें मास्टरजी भी पुकारते थे।

उन्हें नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख अब्दुल्ला का करीबी माना जाता था। कौल को 1971 में सोवियत लैंड नेहरू अवॉर्ड से नवाजा गया। 1986 में उन्हें अपने कविता संग्रह ‘शिहिल कुल’ के लिए प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उन्होंने ‘बमबीर ती येमबिरजल’ नाम से कश्मीरी भाषा में पहला ऑपेरा भी लिखा। उनकी कविता ‘मे छुम आश पागीच’ युद्ध के खिलाफ सबसे प्रभावशाली कश्मीरी कविताओं में गिनी जाती है। 
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