केंद्रीय सूचना आयोग बोला, सीवीसी समेत 35 फीसदी विभाग कर रहे आरटीआई कानून की अनदेखी

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 21 Nov 2018 05:43 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
केंद्रीय सूचना आयोग का कहना है कि देश के 35 प्रतिशत सरकारी विभाग सूचना के अधिकार का कानून के तहत जनता को सूचना उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। इनमें केंद्रीय सतर्कता आयोग, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, पर्यटन मंत्रालय, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, एसबीआई समेत कई बड़े विभाग भी शामिल हैं।
विज्ञापन

केंद्रीय सूचना आयोग की तरफ से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के 838 विभागों में से 292 विभाग ऐसे हैं, जिन्हें ‘ई’ श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि ये अनिवार्य रूप से सूचना के अधिकार की धारा 4 के तहत सक्रिय तौर पर अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं। इस रिपोर्ट को पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त एएन तिवारी और पूर्व सूचना आयुक्त एमएम अंसारी ने मिल कर तैयार किया है। आयोग के समक्ष 2092 सरकारी विभाग पंजीकृत हैं, लेकिन प्रतिक्रिया केवल 838 विभागों से ही मिली।
आयोग के मुताबिक आरटीआई एक्ट की धारा चार के तहत सभी सरकारी विभागों को यह स्पष्ट निर्देश है कि कामकाज में पारर्दशिता और जिम्मेदारी को बढ़ावा देने के लिए आमजन के लिए आधिकारिक वेबसाइट्स पर सूचनाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। आयोग की ऑडिट रिपोर्ट में कई सरकारी विभागों को न्यूनतम जरूरतों को साझा नहीं करने के चलते 60 फीसदी से कम अंक मिले हैं। इनमें वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू एंड इकोनॉमिक अफेयर्स, चुनाव आयोग, कई विश्वविद्यालय और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो समेत कई बड़े मंत्रालय और कई देशों में स्थित भारतीय दूतावास शामिल हैं।
रिपोर्ट में प्रधानमंत्री कार्यालय को 93 प्रतिशत अंकों के साथ ‘ए’ ग्रेड दिया गया है। 838 विभागों में से 19 प्रतिशत यानी 158 विभाग ‘ए’ ग्रेड में, ‘बी’ ग्रेड में 157 विभाग (19 प्रतिशत), ‘सी’ ग्रेड में 118 (14 प्रतिशत), ‘डी’ ग्रेड में 113 (13 प्रतिशत) विभागों को रखा गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रेडिंग तय करने में बजट और कार्यक्रम, ई-गवर्नेंस, प्रचार और सूचना देने का तरीका जैसे बुनियादी मानदंडों को शामिल किया गया था।

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि सरकारी विभागों की वेबसाइट्स का नियमित ऑडिट के साथ वेबसाइट का कंटेंट और डिजाइनिंग में भी बदलाव होने चाहिए। साथ ही, डीओपीटी से वेब बेस्ड मैकेनिज्म बनाने और वेबसाइट्स की निगरानी और ऑडिटिंग के लिए अलग से यूनिट बनाने की भी अनुसंशा की है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X