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Coronavirus: जानिए केरल ने कैसे संक्रमण पर पाया काबू, अब अनुपात में घटने लगे हैं मामले

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 09 Apr 2020 06:10 PM IST
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पिनाराई विजयन
पिनाराई विजयन - फोटो : ANI (File)
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सार

  • बार-बार हाथ धोने का फार्मूला भी केरल का, व्यावहारिक मॉडल अपनाया
  • हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन या बस अड्डे से अस्पताल को जोड़ा
  • बड़े पैमाने पर की संक्रमितों, संदेह में आए लोगों की जांच, इलाज करके किया ठीक

विस्तार

कोविड-19 से मुकाबले में केरल ने रोशनी दिखाई है। 345 संक्रमण की पुष्टि वाले मरीज हैं, 83 ठीक हुए हैं और अब तक केवल दो लोगों की मृत्यु हुई है। केरल से वी जार्ज बताते हैं कि वहां अब नए मामले सामने आने की रफ्तार बहुत कम हो गई है।
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आईएएस अधिकारी सुनील कुमार का कहना है कि जिस तरीके से केरल ने निपाह वायरस पर काबू पाया था, उससे भी अच्छा मॉडल उसने कोविड-19 का संक्रमण रोकने में अपनाया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अफसर और भारत सरकार के रणनीतिकार भी लगातार केरल के प्रयासों पर नजर रख रहे हैं। वी.जार्ज इसके लिए मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, मुख्यसचिव टॉम जोस और केरल में टीचर अम्मा के नाम से मशहूर स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा को धन्यवाद देते हैं।
        
बताते हैं केरल ने कोविड-19 के चीन में संक्रमण को देखकर राज्य में इससे निबटने का प्रयास तेज कर दिया था। जनवरी महीने में राज्य योजना बनाने लगा। 24 जनवरी को मुख्यमंत्री ने संक्रमण पर चर्चा करके केरल के सभी जिलों में कंट्रोल रूम बनाने का निर्णय ले लिया।




केके शैलजा के सचिवालय सूत्र का कहना है कि स्वास्थ्यमंत्री ने स्वास्थ्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा और विशेषज्ञों ने इबोला, सार्स वायरस पर हुए शोध की फाइलों का अध्ययन शुरू कर दिया था। केरल में कोविड-19 का पहला मामला 30 जनवरी को आया।

वुहान से लौटे छात्र में इसके लक्षण पॉजिटिव आए। तीन दिन के भीतर दो मामले और आ गए। बताते हैं 4 फरवरी तक केरल ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कोविड-19 को  राज्य आपदा घोषित कर दिया।

केन्द्र सरकार से मसूरी में चल रही ट्रेनिंग को रद्द करने का आग्रह किया और राज्य में लोगों को सोशल डिस्टेसिंग, सहयोग पर अमल, यात्रा की डिटेल को साझा करने की अपील शुरू कर दी गई। पुणे की निजी लैब से पीसीआर आधारित रैपिड टेस्ट किट का भी सबसे पहले आर्डर कर दिया।

ट्रेसिंग, प्लानिंग और ट्रेनिंग के मंत्र ने दिलाई जीत

केके शैलजा खुद बताती हैं कि कोविड-19 हो या कोई अन्य बीमारी, हम अच्छी योजना बनाकर और उस पर अमर करके ही उसका मुकाबला कर सकते हैं। यही फार्मूला केरल ने निपाह और इबोला वायरस के मामले में भी अपनाया था।

केरल वैसे भी जितना छोटा राज्य है, वहां साक्षरता दर उतना ही अच्छी है। मेडिकल और पैरा मेडिकल, विज्ञान, साइंस तकनीकी से जुड़े लोगों की अच्छी तादाद है। केरल मुख्यमंत्री सचिवालय सूत्र के अनुसार केरल के लोग बड़ी संख्या में चीन, खाड़ी देश समेत दुनिया के देशों में हैं।

कोविड-19 का संक्रमण फैलते देख लोग तेजी से केरल की तरफ आने लगे। लिहाजा राज्य सरकार ने पुराने अनुभव के आधार पर संक्रमितों की पहचान, उनके इलाज के लिए योजना और इलाज के लिए चिकित्सा विभाग तथा अन्य की ट्रेनिंग पर काफी जोर दिया।

बताते हैं इसी रणनीति के कारण केरल एक बड़ी महामारी से खुद को बचा ले जाने की तरफ बढ़ रहा है।
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