कोविड-19 की दूसरी लहर, समुदाय में फैला संक्रमण, कृपया बचकर रहेंः डा. आनंद कृष्णन

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 21 Sep 2020 07:47 PM IST
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लोगों को सैंपल लेते स्वास्थ्यकर्मी
लोगों को सैंपल लेते स्वास्थ्यकर्मी - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

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सार

  • अब दूसरा लॉकडाउन संभव नहीं
  • पहले दौर में कई गलतियां हुईं, अब सबक लेने की जरूरत
  • इम्यूनिटी बूस्टर से कुछ खास नहीं होने वाला, सावधानी बरतें

विस्तार

अमेरिका जैसे देश कोविड-19 की दूसरी लहर की आशंका से सिहर रहे हैं। इसने भारतीय चिकित्सा विज्ञान के विशेषज्ञों को भी हैरान कर रखा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों पर यकीन करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इससे चिंतित हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बारे में 23 सितंबर को प्रधानमंत्री सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा में तैयारी और सावधानी पर विमर्श कर सकते हैं। इस क्रम में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के वरिष्ठ चिकित्सक डा. आनंद कृष्णन ने देश के लोगों को अधिक सतर्कता बरतने, सावधान रहने की सलाह दी है।

क्या है कोविड-19 की दूसरी लहर

डा. आनंद कृष्णन के अनुसार कोविड-19 का संक्रमण देश में आया। इसके बाद लोगों ने सावधानियां बरतनी शुरू की। इस दौरान एक बड़ी आबादी में हर्ड इम्यूनिटी आदि डेवलप हुई। 40-50 फीसदी आबादी में हर्ड इम्यूनिटी डेवलप होने का अनुमान किया गया। इसी आधार पर अनुमान है कि पहली लहर में संक्रमण फैलने के बाद इसकी तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगेगी। ऐसा हुआ भी है। इसके बाद लोगों ने घूमना-फिरना, मिलना-जुलना शुरू कर दिया है। लेकिन वायरस तो खत्म नहीं हुआ है। इसलिए संक्रमण एक बार फिर कुछ समयान्तराल के बाद तेजी से बढ़ सकता है। इसी को कोविड-19 की दूसरी लहर कहा जा रहा है। दूसरे अब इस वायरस का सामुदायिक प्रसार हो चुका है। अभी यह नहीं कहा जा सकता कि देश में कोविड-19 की पहली लहर खत्म हो गई या नहीं। दूसरी लहर कब शुरू होगी?  इसलिए पहले की तुलना में कहीं अधिक सावधान और सतर्क रहने की आवश्यकता है।

पहले से बड़ी हो सकती है कोविड-19 की दूसरी लहर

डा. आनंद कृष्णन के अनुसार अभी यह नहीं बताया जा सकता कि कोविड-19 की पहली लहर कितनी बड़ी थी। सोसायटी की कितनी फीसदी आबादी को प्रभावित किया है। लेकिन इतना जरूर कह सकते हैं कि पहली लहर के छोटा होने पर दूसरी लहर के काफी बड़ा होने की संभावना जरूर है। दूसरी लहर काफी लोगों को अपनी चपेट में ले सकती है। दूसरी लहर में वायरस का लक्षण भी बदल सकता है। हालांकि अभी यह सब केवल अनुमान ही है। 

वैक्सीन को लेकर भी अनिश्चितता बनी है?

वैक्सीन को लेकर भी अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। हम इसके प्रभावों को लेकर भी कुछ नहीं कह सकते। अभी तक वैक्सीन विकसित करने को लेकर जो नतीजे आ रहे हैं वे आशा के अनुरूप ही हैं, लेकिन हम यह नहीं कह सकते कि व्यवहारिक जीवन में ये कितने प्रभावी होंगे। वैक्सीन से 50-60 फीसदी की भी सुरक्षा मिले तो काफी अच्छा रहेगा। 90-95 फीसदी की सुरक्षा मिल जाए तो बहुत ही बढिय़ा है।

समुदाय में फैल गया है संक्रमण, सावधानी बढ़ाइए

डा. आनंद कृष्णन ने कहा कि अब संक्रमण का स्तर समुदाय में फैल गया है। इसलिए पहले से ज्यादा सावधानी और सतर्कता बरते जाने की जरूरत है। इसलिए अब बार-बार साबुन से हाथ धोने, सैनिटाइज करने, मास्क आदि का उपयोग करने, भीड-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने की आवश्यकता है। इस समय जरा सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है।

'इम्युनिटी बूस्टर' कोई संजीवनी नहीं है

डा. आनंद कृष्णन ने कहा कि कोई 'इम्यूनिटी बूस्टर' के नाम पर बाजार में चल रही दवाओं को लेना चाहता है तो उसे मना नहीं कर सकते, लेकिन जहां तक चिकित्सा विज्ञान का सवाल है तो वह इसके बहुत पक्ष में नहीं है। लोगों को थोड़ी-बहुत इम्युनिटी बढ़ने से लाभ मिल सकता है, लेकिन यह कोई संजीवनी नहीं है। इसलिए मेरी लोगों को सलाह है कि वह दी जा रही सलाह का पालन करें। शारीरिक दूरी बनाएं रखे। अधिक भीड़-भाड़ के स्थान पर जाने से बचें। खुद को संक्रमण से बचाने के लिए बताई जा रही सलाह का पालन करें।

सरकार और सलाहकार पिछली गलतियों से सबक लें

डा. कृष्णन का कहना है कि सरकार के पास कोई जानकारी नहीं होती। वह अपने सलाहकारों के बल पर चलती है। कोविड-19 संक्रमण की पहली लहर को लेकर सलाहकारों ने गलत अनुमान लगाए, सलाह देने और निर्णय लेने, लॉकडाउन का कदम उठाने में कुछ गलतियां हो गईं। हालांकि डा. कृष्णन का कहना है कि कोविड-19 का संक्रमण नया है, बहुत कुछ चीजों की जानकारी नहीं थी। इसलिए किसी को दोष देना सही नहीं है। अच्छा होगा कि केंद्र सरकार के सलाहकार पहले दौर की गलतियों से सबक लें। रहा सवाल दोबारा लॉकडाउन लगाने का तो बीमारी और देश की अर्थव्यवस्था दोनों को जोड़कर देखना होगा। अर्थव्यवस्था की हालत काफी खराब हो चुकी है। इसलिए अब दोबारा लॉकडाउन लगाना कोई सही उपाय नहीं होगा। इस समय सावधानी और सतर्कता ही सबसे अच्छा उपाय है।
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