लाल पोटली से बजट पैकेज तक और पेट्रोल-डीजल कीमतों से अर्थव्यवस्था तक, निर्मला सीतारमण से विशेष बातचीत

शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 07 Jul 2019 05:40 AM IST
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : पीटीआई
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ब्रिटिश हैंगओवर से निजात पाकर किसी सूटकेस या ब्रीफकेस के बदले लाल कपड़े की पोटली में बजट के कागजात संसद ले जाने का फैसला केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक झटके में नहीं लिया। इसके लिए उन्होंने बाकायदा अपने परिवार के सदस्यों के साथ विचार-विमर्श किया। इस काम में मदद की उनके मामा और मामी ने। उन्होंने ही लाल कपड़े में बजट कागजात लपेटने का सुझाव दिया और उन्होंने ही लाल कपड़े को लिफाफे की तरह मोड़ कर सिल दिया ताकि बजट कागजात बाहर नहीं गिरे। देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री के रूप में बजट पेश करने के बाद अमर उजाला ने निर्मला सीतारमण से इस बारे में विस्तृत बातचीत की। पेश है इस बातचीत के संपादित अंश :-
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प्रश्न: आपने ब्रिटिश जमाने से चले आ रहे ब्रीफकेस में बजट कागजात संसद ले जाने के चलन को छोड़ कर देशी अंदाज अपनाया। यह विचार आपके मन में कैसे आया?
उत्तर: सूटकेस कहें या ब्रीफकेस, मुझे यह पहले से ही पसंद नहीं है। (मुस्कुराते हुए) आपको तो पता है कि भारतीय राजनीतिक तंत्र में सूटकेस किसलिए विख्यात रहा है। मुझे यह भी लगता है कि ब्रीफकेस में बजट के कागजात ले जाना हमारा सिस्टम नहीं है। यह तो फिरंगी सिस्टम है। मैंने सोचा, ब्रीफकेस इसलिए रखा जाता है कि बजट के कागजात उससे गिरे नहीं। फिर सोचा कि इसे कपड़े में लपेटा जाए तो भी यह नहीं गिरेगा।
ठीक उसी तरह, जैसे हमारे कारोबारी कपड़े में लपेट कर अपना बही-खाता रखते हैं। भारत के किसी भी हिस्से में चले जाइए, वहां लाल कपड़े में ही अपनी बही-खाता रखने की परंपरा है। दक्षिण भारत की बात करें या पश्चिमी भारत या उत्तरी या पूर्वी भारत की, हर इलाके में किसी न किसी शुभ अवसर पर लाल कपड़े में हिसाब किताब लपेट कर भगवान के पास रखा जाता है। उसकी पूजा अर्चना की जाती है। उस पर हल्दी, पान, फूल आदि चढ़ाया जाता है।

प्रश्न : फिर यह लाल पोटली के रूप में कैसे तैयार हुआ?

उत्तर : मेरे मन में ऐसा विचार आया तो इसकी चर्चा मैंने अपने घर पर की। हमारे साथ मेरे मामा और मामी भी रहते हैं। मेरी मामी ने तुरंत सुझाव दिया कि लाल कपड़े को लिफाफे की तरह मोड़ कर उसे सिल दिया जाए तो उससे कागजात नहीं गिरेंगे। फिर उन्होंने लाल कपड़े को एक लेजर की तरह फोल्डर में कागजात रखकर दिखाया कि यह सही है या नहीं। उसके ऊपर फिर लाल कपड़े का बस्ता सा सिल दिया। यह मुझे पसंद आया।

इसी बीच इस पर भी चर्चा हुई कि यह मेरा पहला बजट है। बजट पेश करते समय पूरे देश की नजरें मेरे ऊपर होंगी। इसलिए सभी गौर करेंगे कि मैं पहली महिला पूर्णकालिक वित्त मंत्री हूं। मेरे मामा मामी काफी दिन मुंबई में रहे हैं, इसलिए सिद्धि विनायक और महालक्ष्मी मंदिर से गहरा जुड़ाव है। उन्होंने लेजर और ऊपर की पोटली को मुंबई में सिद्धिविनायक और महालक्ष्मी मंदिर के दर्शन करवाए। वहां से यह वापस आया तो इस पर मैंने सत्यमेव जयते और भारत का राज चिह्न चिपकवा दिया ताकि यह ऑफिशियल लगे।

प्रश्न : आपने ब्रीफकेस की परंपरा तोड़ी है। बजट भाषण में भी आपने कुछ परंपराएं तोड़ी हैं। कुछ महत्वपूर्ण आंकड़ों को बजट भाषण में क्यों नहीं शामिल किया?

उत्तर:
मैं समझ रही हूं कि आप किन आंकड़ों का जिक्र कर रहे हैं। आप देखिए, मुझे दो घंटे में बजट भाषण पूरा करना था। वित्त मंत्री पूरे देश का बजट पेश करता है, उसमें ढेर सारे आंकड़े होते हैं। सभी तरह के आंकड़ों को बजट में शामिल नहीं कर सकते। ऐसा करें तो वित्त मंत्री को भाषण पढ़ने के लिए कई घंटे चाहिए। इतना समय संसद में होता नहीं है। इसलिए मैंने उन्हीं बातों को इसमें शामिल किया, जो हो सकता था। बाकी बातेें मैंने बजट दस्तावेज में शामिल कीं। वह बजट का हिस्सा है, भले ही भाषण का हिस्सा नहीं हो।
 
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