बड़ा फैसला: चीनी उपकरणों पर नजर रखने के लिए सरकार ने हर मंत्रालय में बनाईं खास टीमें

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 28 Jul 2020 04:59 PM IST
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग विरोध करते लोग।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग विरोध करते लोग। - फोटो : Amar Ujala (File)

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सार

केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, चीन से आयात किए जाने वाले तकनीकी उपकरणों की सूची तैयार हो रही है। हर विभाग से कहा गया है कि वह चीन से आने वाले सामान पर अंकुश लगाए। इनमें सरकारी क्षेत्र के अधिकांश मंत्रालय, जैसे ट्रांसपोर्ट, उद्योग, पावर, जल, कृषि एवं दूसरे विभाग शामिल हैं...

विस्तार

दोनों देशों के बीच शुरू हुए सीमा विवाद में भारत ने चीन में निर्मित उपकरणों पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों या उद्योगों को चीन के उत्पादों से दूर रहने की हिदायत जारी करने के बाद अब निजी क्षेत्र में भी वैसे ही नियम लागू करने का प्रस्ताव तैयार हो रहा है।
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प्राइवेट कंपनियों में खासतौर पर सैन्य उत्पाद, दूरसंचार उपकरण (मिलिट्री एवं सिविल), एविएशन एवं रेलवे पावर सप्लाई सेक्टर में भी अब चीनी उत्पादों का विकल्प तलाशने के लिए कहा गया है। शुरुआती तौर पर पहला कदम इन उपकरणों की खरीद के लिए सरकारी मंजूरी लेना रहेगा।
अगर कोई कंपनी अपने स्तर पर ये उपकरण खरीद लेती है तो उसे सरकारी अथॉरिटी की अनिवार्य जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। पहले चरण में सुरक्षा उपकरणों पर फोकस रहेगा। इनमें निजी क्षेत्र की कम्युनिकेशन प्रणाली भी शामिल है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, चीन से आयात किए जाने वाले तकनीकी उपकरणों की सूची तैयार हो रही है। हर विभाग से कहा गया है कि वह चीन से आने वाले सामान पर अंकुश लगाए। इनमें सरकारी क्षेत्र के अधिकांश मंत्रालय, जैसे ट्रांसपोर्ट, उद्योग, पावर, जल, कृषि एवं दूसरे विभाग शामिल हैं।

इन मंत्रालयों में चीन से संबंधित कोई बड़ा निवेश या उपकरणों की खरीद होती है तो उसके लिए गृह मंत्रालय की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। अब यह मंजूरी केवल फाइलों के स्तर पर नहीं मिलेगी, बल्कि उपकरण या दूसरे सामान का सैंपल जांच एजेंसी के सामने प्रस्तुत करना होगा।

जो प्रस्ताव तैयार हो रहा है, उसमें चीन से आने वाले उपकरणों की जांच रिपोर्ट दो-तीन सप्ताह में आएगी। हर मंत्रालय में चीनी उपकरणों पर नजर रखने के लिए अलग से एक टीम का गठन किया गया है। इस टीम में वे सदस्य शामिल किए गए हैं, जो पहले से किसी बड़ी खरीद प्रक्रिया का हिस्सा रहे हों।

एक अधिकारी के अनुसार, चीन में निर्मित बहुत से उपकरण दूरसंचार प्रणाली में इस्तेमाल होते हैं। इनमें सैन्य एवं सिविल क्षेत्र, दोनों शामिल हैं। सेना एवं इंटेलिजेंस के लिए इन उपकरणों का विकल्प तलाशा जा रहा है। इसके लिए अब पश्चिमी देशों से उपकरण आयात किए जाएंगे।

दूरसंचार कंपनियों, जिन पर एकाएक ये प्रतिबंध नहीं लगाए जा सकते, इसलिए शुरुआती कदम के तहत इनके उपकरणों की जांच के मापदंड तैयार किए जा रहे हैं।
 
चीन में बने दूरसंचार उपकरण खरीदने वाली कंपनियों को अनिवार्य जांच से गुजरना होगा। इसके बाद उन्हें दूरसंचार उपकरण प्रमाणन पत्र जारी होगा। यदि किसी कंपनी से पहले से कोई ऑर्डर दे रखा है तो स्वदेश में आते ही उन उपकरणों की जांच होगी।
 
सौदा तय करते समय तय हुए उनके तकनीकी मापदंडों को जांचा जाएगा। उसके बाद उपकरणों की सुरक्षा जांच की जाएगी। अगर गृह मंत्रालय की मंजूरी मिलती है, तो ही उनके इस्तेमाल की इजाजत मिलेगी। बीआईएस जैसे संस्थान इन उपकरणों की जांच टीम में शामिल रहेंगे।

भविष्य में यदि किसी कंपनी को चीन से इन उपकरणों का आयात करना है तो उसे पहले से ही केंद्र सरकार के पास फाइल जमा करानी होगी। अगर यहां से मंजूरी मिलती है तो ही उपकरणों की खरीद सुनिश्चित होगी।

यह अलग बात है कि भारतीय दूरसंचार कंपनियां अभी केंद्र सरकार के इस निर्णय से खुश नहीं हैं। वजह, उनके सामान की त्वरित डिलीवरी एवं कम दाम वाले उपकरण किसी दूसरे देश से एकाएक मिलना संभव नहीं है।

अगर यह प्रयास होता है कि उसमें समय पर डिलीवरी और महंगे रेट, ये दोनों समस्या आगे आएंगी। केंद्र सरकार के ये आदेश 5जी तकनीक को लेकर निजी क्षेत्र के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।
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