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कांग्रेस छोड़ चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया के बारे में जानिए 10 बातें

बीबीसी Updated Wed, 11 Mar 2020 01:42 PM IST
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ज्योतिरादित्य सिंधिया
ज्योतिरादित्य सिंधिया - फोटो : PTI
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सार

कांग्रेस पार्टी महासचिव और युवा नेताओं में एक ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ठीक होली के दिन पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया, जिसके बाद मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल गहरा गए हैं। उनके साथ कांग्रेस के करीब 19 विधायकों ने भी अपने इस्तीफे दे दिए हैं।

विस्तार

इधर कांग्रेस ने तुरंत प्रभाव से ज्योतिरादित्य को पार्टी से निकालने का ऐलान कर दिया है। इसके बाद अब उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। इससे पहले मंगलवार को ज्योतिरादित्य ने दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। ज्योतिरादित्य बीते 18 सालों से कांग्रेस के साथ रहे हैं। उनके पिता माधवराव सिंधिया भी पार्टी के आला नेताओं में शुमार किए जाते थे।
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ज्योतिरादित्य सिंधिया के बारे में 10 बातें
पारिवारिक विरासत
  • 30 सितंबर 2001 को ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया की उत्तर प्रदेश में एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई। वे मध्य प्रदेश की गुना सीट से सांसद थे।
  • 1971 के बाद होने वाला कोई भी चुनाव माधवराव नहीं हारे। वे गुना से नौ बार सांसद चुने गए।
  • 1971 में माधवराव ने जन संघ के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इसके बाद इमर्जेंसी के बाद साल 1977 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।
  • ज्योतिरादित्य की मां किरण राज्य लक्ष्मी देवी नेपाल राजपरिवार की सदस्य थीं।
  • ज्योतिरादित्य की शादी मराठा वंश के गायकवाड़ घराने में हुई है।
राजनीति में शुरुआत
  • 2001 में पिता माधवराव के निधन के तीन महीने बाद ज्योतिरादित्य कांग्रेस में शामिल हो गए और इसके अगले साल उन्होंने गुना से चुनाव लड़ा जहां की सीट उनके पिता के निधन से खाली हो गई थी। वो भारी बहुमत से जीते।
  • 2002 की जीत के बाद वो 2004, 2009 और 2014 में भी सांसद निर्वाचित हुए।
  • मगर 2019 के चुनाव में वे अपने ही एक पूर्व निजी सचिव केपीएस यादव से हार गए। केपीएस यादव ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
  • राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस हार से वो काफ़ी व्यथित हुए।
अमीर राजनेता
  • सिंधिया परिवार मध्य प्रदेश के शाही ग्वालियर घराने से आता है और उनके दादा जीवाजी राव सिंधिया इस राजघराने के अंतिम राजा थे।
  • ज्योतिरादित्य केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकारों (2004-2014) में मंत्री रहे। 2007 में उन्हें संचार और सूचना तकनीक मामलों का मंत्री बनाया गया, 2009 में वे वाणिज्य व उद्योग मामलों के राज्य मंत्री बने और 2014 में वे ऊर्जा मंत्री बने।
  • उनकी छवि एक ऐसे मंत्री की थी जो सख्त फ़ैसले लेता था। वे यूपीए सरकार में एक युवा चेहरा भी थे।
  • सिंधिया देश के सबसे अमीर राजनेताओं में गिने जाते हैं जिनकी संपत्ति 25,000 करोड़ रुपए आंकी जाती है जो उन्हें विरासत में मिली। उन्होंने इस संपत्ति का स्रोत क़ानूनी उत्तराधिकार बताया है जिसे उनके परिवार के दूसरे सदस्यों ने अदालत में चुनौती दी है।
विवाद
  • 2012 में सिंधिया एक विवाद में फँसे जब वो ऊर्जा राज्य मंत्री थे।
  • उस साल पावर ग्रिड ठप्प हो जाने से देश भर में बिजली की अभूतपूर्व क़िल्लत हो गई।
  • इसके अलावा उनके मंत्रालय में कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ, मगर पूरे देश में बिजली व्यवस्था के चरमराने से यूपीए की सहयोगी पार्टियों ने उनकी आलोचना की और अंतरराष्ट्रीय जगत में भी भारत की स्थिति को लेकर चिंता जताई जाने लगी।
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