संसद से सड़क तक सबको चुप कराने की कोशिश कर रही सरकारः सीताराम येचुरी

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 07 Jan 2020 06:23 PM IST
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Left's Protest on JNU Violence
Left's Protest on JNU Violence - फोटो : AmarUjala

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्रों पर हुई हिंसा के खिलाफ मंगलवार को संस्थान के पूर्व छात्र सड़कों पर उतरे। उन्होंने छात्रों पर हुई हिंसा के खिलाफ एक मार्च निकाला और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पूर्व छात्रों के मार्च को लीड कर रहे सीताराम येचुरी ने कहा कि जेएनयू छात्रों पर हुई हिंसा ने यह साबित कर दिया है कि इस देश में ऐसी व्यवस्था स्थापित करने की कोशिश की जा रही है, जहां एक विचारधारा को न मानने वालों को डंडे के बल से हांका जाएगा।
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उन्होंने कहा कि जेएनयू देश-दुनिया को स्वतंत्र विचार देने के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब उसकी इसी पहचान को नष्ट करने की कोशिश की जा रही है।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (एम) के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि लोगों को संसद से सड़क तक हर जगह चुप कराने की कोशिश हो रही है। केंद्र सरकार लोगों की जुबान पर ताले लगाने की कोशिश कर रही है। मॉब लिंचिंग से लेकर हॉस्टल में छात्रों के ऊपर हो रही हिंसा में एक ही कोशिश की जा रही है कि जो एक विशेष विचारधारा को नहीं मानेगा, उसके लिए यहां कोई जगह नहीं है।
येचुरी ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम भी इसी सोच को प्रमाणित करने के लिए लाया गया है कि जो उनकी विचारधारा को नहीं मानता है उसे यहां (हिंदुस्तान में) नहीं रहने दिया जाएगा।

जेएनयू पूर्व छात्र मार्च में भाग ले रहे अखिल भट्टाचार्य ने कहा कि उन्होंने 1980 में यहां से पीएचडी की थी। उन्होंने अपने समय में दक्षिणपंथी विचारधारा के छात्रों के भी साथ बेहतरीन समय गुजारा था। वैचारिक दूरी कभी छात्रों के व्यक्तिगत रिश्तों पर भारी नहीं पड़ती थी। वहीं जेएनयू से हिंदी में एमए कर चुकीं संगीता आडवाणी ने कहा कि देश के दूसरे संस्थाओं में छात्रों की खूनी रंजिश की खबरें उनके समय में भी आती थीं, लेकिन जेएनयू इस तरह की सोच से हमेशा दूर रहता था।

उन्होंने कहा, लेकिन यह पहली बार देखने में आ रहा है कि जेएनयू के छात्रों ने दूसरे छात्रों के हॉस्टल में घुसकर मारपीट की। उन्होंने कहा कि जेएनयू से जुड़े होने के नाते उनके लिए यह बेहद तकलीफदेह है।
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