जेएनयू का बवाल ही क्यों बनती हैं सुर्खियां, विश्वविद्यालय तो और भी हैं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 13 Jan 2020 06:11 PM IST
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jnu violence - फोटो : अमर उजाला

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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय जेएनयू एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार कारण अज्ञात हमलावरों द्वारा छात्रों पर किया गया हमला है। हर बार की तरह इस बार भी मुद्दे पर खूब राजनीति हो रही है। विपक्ष के तमाम बड़े नेता एक-एक करके जेएनयू का रुख कर चुके हैं। 
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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, कम्युनिस्ट नेता वृंदा करात, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, पूर्व विधायक आसिफ अहमद खान, अल्का लंबा और स्वराज पार्टी के नेता योगेंद्र यादव जैसे तमाम विपक्ष के नेता छात्रों के समर्थन में जेएनयू पहुंच गए। यही नहीं बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण भी जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष के साथ खड़ी दिखीं। इस पर विवाद भी हुआ। उन्हें और उनकी फिल्म को आलोचना भी झेलनी पड़ी। 
स्टेट, सेंट्रल और डीम्ड यूनिवर्सिटी को मिला लें, तो 500 से ज्यादा विश्वविद्यालय इस देश में हैं। इनमें करीब 46 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं। कई विश्वविद्यालयों में समय-समय पर हमें विवाद या प्रदर्शन भी देखने को मिलते रहते हैं। मगर कभी भी वो देश की अस्मिता पर सवाल बनकर खड़े होते नहीं दिखते। 
मगर जेएनयू में उठी एक छोटी सी चिंगारी भी भीषण आग का रूप ले लेती है। सत्ता पक्ष और विपक्ष ही नहीं आमजन को भी इसकी तपिश महसूस होती है। 

जेएनयू का सियासी इतिहास 

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