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अजन्में बच्चों को हमेशा के लिए लाचार बना सकता है मच्छरों से फैलने वाला जीका वायरस

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 17 Oct 2018 12:32 PM IST
Know all about Zika virus, how it affects unborn babies
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जयपुर में जीका वायरस संक्रमण थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब तक मरीजों की संख्या 80 तक पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने इसपर मंगलवार को दिल्ली में समीक्षा बैठक भी की। वहीं राजस्थान सरकार भी निगरानी और सभी प्रकार के निवारक उपाय कर रही है। यह बीमारी गर्भवती महिलाओं को भी हुई है। चलिए आपको बताते हैं कि ये बीमारी किस तरह से फैलती है और पैदा होने वाले बच्चों को कैसे प्रभावित कर सकती है-
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क्या है जीका वायरस?
जीका मच्छरों द्वारा फैलने वाला एक वायरल इन्फेक्शन है। इसका वायरस एडीज मच्छर से फैलता है। जो डेंगू और चिकनगुनिया भी फैलाता है। यह सेक्सुअली भी ट्रांसमिट हो सकता है। जीका का पहला मामला साल 1947 में युगांडा से सामने आया था। वहां एक बंदर को ये बीमारी हुई थी। इसके पांच साल बाद मनुष्यों में भी जीका के मामले सामने आए। इसके बाद साल 1960 तक दुनियाभर से इसके मामले सामने आने लगे। इसका सबसे अधिक प्रकोप साल 2007 में प्रशांत के याप महाद्वीप में देखा गया। इसके बाद 2017 में ब्राजील में भी देखा गया। इसे माइक्रोसेफली से जोड़ा गया। जिसमें बच्चे छोटे और अविकसित दिमाग के साथ पैदा होते हैं।  
कितना घातक है जीका?

माना जाता है कि जीका में माइक्रोसेफली भी शामिल होता है। अगर जीका वायरस गर्भवती महिलाओं को हो जाए तो पैदा होने वाले बच्चे के लिए यह काफी घातक हो सकता है। माइक्रोसेफली जो जीका वायरस के साथ जुड़ी होता है, एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें पैदा होने वाले बच्चे का सिर सामान्य से आकार में अलग होता है और दिमाग भी अविकसित और छोटा होता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक जिन देशों में जीका का संक्रमण फैला है वहां की कई रिपोर्ट में भी ये बात सामने आई है कि इससे गुलियन बेरी सिंड्रोंम बढ़ता है। यह एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है, जिससे लकुवा हो सकता है और अगर अधिक घातक हो जाए तो मौत भी हो सकती है। इसलिए यह बीमारी जितनी घातक गर्भवती महिलाओं के लिए है, उतनी ही घातक अन्य लोगों के लिए भी है। साल 2017 में ब्राजील में जीका के मामलों पर शोध अध्ययन किया गया। इस अध्ययन पर अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ का कहना है कि इसके संक्रमण से मृत्यु दर 8.3 फीसदी रही थी।
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