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कोटा में 103 बच्चों की मौत पर राजनीति, बुरी तरह घिरे गहलोत, प्रियंका पर बरसे योगी-मायावती 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 02 Jan 2020 08:14 PM IST
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कोटा में बच्चों की मौत पर राजनीति
कोटा में बच्चों की मौत पर राजनीति - फोटो : सोशल मीडिया
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राजस्थान में कोटा के जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। दिसंबर में 100 और नए साल के पहले दो दिन हुई बच्चों की मौत का आंकड़ा 103 तक पहुंच गया है। इसे लेकर राजनीति का दौर भी बदस्तूर जारी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बुरी तरह घिरे हुए हैं। बसपा प्रमुख मायावती से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनपर जोरदार हमला बोला। मायावती ने प्रियंका गांधी को भी निशाने पर लिया।
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बच्चों की मौतों पर सफाई देते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोटा में हुई बीमार शिशुओं की मृत्यु पर सरकार संवेदनशील है। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। कोटा के इस अस्पताल में शिशुओं की मृत्यु दर लगातार कम हो रही है। हम आगे इसे और भी कम करने के लिए प्रयास करेंगे। मां और बच्चे स्वस्थ रहें यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही उन्होंने कहा की स्वास्थ्य सेवाओं में और सुधार के लिए भारत सरकार के विशेषज्ञ दल का भी स्वागत है। निरोगी राजस्थान हमारी प्राथमिकता है। 

साथ ही गहलोत ने आज फिर दावा किया कि सरकार पूरी तरह मुस्तैद है। पिछले 5-6 सालों में यहां हो रहीं मौतों का आंकड़ा इस बार कम है। 



गौरतलब है कि इससे पहले शिशुओं की मौत पर मुख्यमंत्री गहलोत ने ऐसा बयान दिया था जिससे कि वे विरोधियों के निशाने पर आ गए। उन्होंने कहा कि बीते सालों के मुकाबले इस साल बच्चों की मौतें कम हुई हैं। ये कोई नई बात नहीं है। 

मायावती का प्रियंका और गहलोत पर निशाना

वहीं, बसपा प्रमुख मायावती ने प्रियंका गांधी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को निशाने पर लिया है। मायावती ने ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस शासित राजस्थान के कोटा जिले में मासूम बच्चों की मौत से मांओं की गोद उजड़ना बहुत दु:खद व दर्दनाक है। सीएम गहलोत स्वयं व उनकी सरकार इसके प्रति अभी भी असंवेदनशील व गैर-जिम्मेदार बने हुए हैं, जो अति-निंदनीय है। लेकिन उससे भी ज्यादा दुख की बात तो यह है कि कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व व खासकर महिला महासचिव की इस मामले में चुप्पी साधे रखना।

न किसी की चिंता न संवेदना : योगी

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी कांग्रेस महासचिव और गहलोत सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने ट्वीट किया- प्रियंका यूपी में राजनीतिक नौटंकी की जगह राजस्थान में उन गरीब माताओं से मिलतीं, जिनकी गोद उनकी पार्टी की सरकार की लापरवाही से सूनी हो गई तो उन परिवारों को सांत्वना मिलती। इनको न किसी की चिंता है, न संवेदना। सिर्फ राजनीति करनी है।
  
स्वास्थ मंत्रालय भी हरकत में आया 

कोटा मामले में स्वास्थ मंत्रालय भी हरकत में आ गया है। स्वास्थ मंत्रालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री से बात की है। मंत्रालय शुक्रवार को एक टीम भी मौके पर पहुंचेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि विभाग राज्य की किसी भी मदद के लिए तैयार है। डॉ. हर्षवर्धन ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर बच्चों की मौत के मामले में चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय राज्य सरकार को हर तरह की सहायता उपलब्ध कराने को तैयार है।

स्पीकर ने फिर लिखा सीएम को पत्र

स्पीकर ओम बिरला ने राजस्थान के सीएम को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि सीएम को दोबारा पत्र भेजकर संवेदनशीलता के साथ चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए आग्रह किया है। 

सोनिया ने किया प्रदेश प्रभारी को तलब

इस बीच पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बृहस्पतिवार को राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडेय को तलब कर उनसे इस बारे में रिपोर्ट मांगी। मुलाकात के बाद पांडेय ने बताया कि कोटा को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष बेहद चिंतित हैं।

ट्विटर पर भी टॉप ट्रेंड में

कोटा का मामला सोशल मीडिया पर भी छाया हुआ है। बृहस्पतिवार को ट्विटर के टॉप पांच ट्रेंड में तीन कोटा से जुड़े थे। यूजर्स ने इसे लेकर कांग्रेस, पार्टी आलाकमान और राज्य सरकार के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी है।

कोटा के सीएमएचओ तलब 

उधर, राष्ट्रीय बाल आयोग (एनसीपीसीआर) ने शुक्रवार को कोटा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. भूपेन्द्र सिंह तंवर को तलब किया है। बृहस्पतिवार को आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सख्त कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट को सचिव चिकित्सा और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भेज दिया है।    

अस्पताल में गंदगी और बदहाली 

राजस्थान के कोटा के एक अस्पताल में दो जनवरी तक 103 बच्चों की मौत हो चुकी है। इसे लेकर एनसीपीसीआर की टीम कोटा गई थी। जहां उसने पाया था कि अस्पताल बदहाल है। ज्यादातर बच्चों की मौत सीसीयू में हुई है। एनसीपीसीआर की रिपोर्ट में कहा गया कि अस्पताल में ज्यादातर खिड़कियों के शीशे टूटे हुए थे। बच्चों के इलाज के लिहाज से इंतजाम नाकाफी थे। सीसीयू में जगह के अभाव में एक इंक्यूबेटर में दो बच्चों को रखा गया था। अस्पताल परिसर में गंदगी और बदहाली का आलम था। परिसर में सुअर निर्बाध टहल रहे थे। तमाम खबरों के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने फौरी तौर पर कोई इंतजाम नहीं किया था।  

आयोग के चैयरमैन प्रियांक कानूनगो ने अमर उजाला को बताया कि साफ तौर पर सिस्टम की लापरवाही के चलते 100 से ज्यादा शिशुओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब शुक्रवार को कोटा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी की रिपोर्ट के बाद ही आगे ही कार्रवाई पर फैसला होगा।

कम वजन के कारण मौत 

दरअसल, 30-31 दिसंबर को नौ नवजातों की मौत के साथ अस्पताल में मरने वाले शिशुओं की संख्या 100 पहुंच गई थी। पिछले दो दिनों में चार और बच्चों की मौत हो गई। दूसरी ओर, अस्पताल के शिशु रोग विभाग के प्रभारी डॉ. एएल बैरवा ने कहा, यहां 2018 में 1,005 शिशुओं की मौत हुई थी। 2019 में आंकड़ा घटा है। ज्यादातर मौत जन्म के समय कम वजन के कारण हो रही है।
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