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मध्यप्रदेश : महाराष्ट्र और कर्नाटक मामले में कठोर रुख अपना चुके कोर्ट से भाजपा को भी उम्मीद

हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Updated Tue, 17 Mar 2020 05:42 AM IST
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मध्यप्रदेश विधानसभा
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सार

मध्यप्रदेश में जारी सियासी उठापटक के बीच भाजपा की रणनीति सुप्रीम कोर्ट के भावी रुख पर टिक गई है। पार्टी रणनीतिकारों को लगता है कि लोकतंत्र से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले में शीर्ष अदालत कोरोना के बहाने बहुमत परीक्षण टालने की कमलनाथ सरकार की रणनीति पर पानी फेर देगा। 

विस्तार

हाल ही में महाराष्ट्र और कर्नाटक में ऐसे में मामलों में शीर्ष अदालत ने देवेंद्र फडणवीस और एचडी कुमारस्वामी को 24 घंटे में बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था। इससे पहले कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा को भी एक दिन में बहुमत साबित करने को कहा था। सोमवार को बहुमत साबित करने के बदले कोरोना के बहाने विधानसभा स्थगित करने के कमलनाथ सरकार के फैसले के बाद भाजपा ने अपने विधायकों को एकजुट रखने और कानूनी विकल्प आजमाने की रणनीति बनाई। 
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सोमवार को केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, धर्मेंद्र प्रधान और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चर्चा की। इसके बाद विधायकों को दोबारा मानेसर लाने की योजना बनी। मध्यप्रदेश भाजपा की रणनीति से जुड़े वरिष्ठ नेता के मुताबिक कमलनाथ सरकार को दो तरफ से घेरा जा रहा है। न्यायिक घेरे में लाने के साथ ही राज्यपाल का रुख भी सख्त है। खुद सुप्रीम कोर्ट ने हालिया दो फैसले में तत्काल बहुमत साबित करने को कहा है ऐसे में कोरोना के बहाने शक्ति परीक्षण टालने की कांग्रेस की योजना पूरी होती नहीं दिख रही। वह भी तब जब कोरोना के बावजूद संसद सत्र चल रहा है और सुप्रीम कोर्ट ने अदालत पूरी तरह से बंद नहीं करने का निर्णय लिया है।
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पहले सुप्रीम कोर्ट फिर राज्यपाल

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