मुझसे भारत के मुसलमान नहीं मौलवी चिढ़ते हैं: तारेक फतह

बीबीसी हिंदी Updated Fri, 24 Feb 2017 08:37 PM IST
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No Indian Muslim cleric hates me: Tarek Fatah

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पाकिस्तान में पैदा हुए कनाडा के लेखक और मुस्लिम कनेडियन कांग्रेस के संस्थापक तारेक फतह ने इस्लाम, मुसलमान और भारत पाकिस्तान से संबंधित कई मुद्दों पर बीबीसी से बात की है। अपने बयानों के लिए चर्चा में बने रहने वाले तारेक फतेह ने बीबीसी से फेसबुक लाइव के दौरान कहा कि इस्लाम का बुनियादी मकसद अल्लाह को एक मानना है। पैगंबर मोहम्मद के साथ जो लोग सबसे पहले आए उनका मकसद तौहीद था, यानी इंसान को अल्लाह के सिवाय किसी के सामने सर नहीं झुकाना चाहिए।
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वो बातें जो तारेक फतेह ने कहीं -
  • पैगंबर मोहम्मद की मौत के बाद जो फसाद शुरू हुए थे वो आज तक चल रहे हैं। उनकी मौत के बाद 18 घंटे तक उनका शव पड़ा रहा किसी ने उन्हें दफनाया नहीं। मुस्लिम शायद ये नहीं  जानते हैं या फिर जानना नहीं चाहते कि हमारी आज की मुसीबतें उसी दिन से शुरू हुईं। ये तय हो गया कि जो कुरैशी हैं वो खलीफा बन सकते हैं और अंसार जो हैं वो सिर्फ कुरैशी की खिदमत कर सकते हैं।
  • शिया-सुन्नी तो कभी मसला था ही नहीं। अंसार बहुसंख्यक थे उन्होंने अपना नेता चुन लिया। जो मक्का-मदीना में रहने वाले अल्पसंख्यक थे। उन्होंने शोर मचाया था कि जो कुरैश नहीं है वो खलीफा नहीं हो सकता। इस्लाम का ये संदेश कि हर कोई बराबर है वो उसी दिन खत्म हो गया था।
  • दोगलापन हमारी पहचान बन गई है। इतिहास में लिखी बातें हम जानना नहीं चाहते और कोई सवाल करता है तो घुमा-फिरा कर जवाब देते हैं। 
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गज्वा-ए-हिंद मैंने तो नहीं लिखी, फिर मुझ पर लोगों को क्यों ऐतराज है मुझे नहीं पता।

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