बीएसएफ में सुरक्षा सहायकों को लेकर नहीं चलेगी अफसरों की मनमर्जी, तबादला होने पर नहीं ले जा सकेंगे साथ

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 29 Jul 2020 01:29 PM IST
विज्ञापन
कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान।
कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान। - फोटो : PTI (File)

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

सार

बीएसएफ के महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे आईटीबीपी डीजी की ओर से यह आदेश जारी किया गया है कि कोई भी अधिकारी सुरक्षा सहायक के लिए मुख्यालय को अपना केस न भेजे...

विस्तार

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) मुख्यालय ने अपने अफसरों के लिए खास आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत अधिकारियों को सुरक्षा सहायक के लिए मुख्यालय को अपना केस न भेजने के लिए कहा गया है। बीएसएफ ने यह आदेश उन अफसरों के लिए आदेश जारी किया है, जो अपनी सुविधा अनुसार और मनमर्जी से सुरक्षा सहायक रखते थे।
विज्ञापन

ये अधिकारी जहां भी जाते थे, ये सहायक उनके साथ ही रहते थे। बीएसएफ के सूत्रों का कहना है, बहुत से अफसर तो ऐसे रहे हैं जो दस-बारह साल से सुरक्षा सहायकों को अपने पास रखे हुए हैं।
बीएसएफ में अगर किसी अफसर का तबादला हो जाता है, तो वह मुख्यालय में पैरवी लगा कर उसे अपने साथ ले जाता था। सुरक्षा सहायकों में ड्राइवर, गार्ड या घर पर काम करने वाले कर्मचारी शामिल होते हैं।
बीएसएफ के महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे आईटीबीपी डीजी की ओर से यह आदेश जारी किया गया है कि कोई भी अधिकारी सुरक्षा सहायक के लिए मुख्यालय को अपना केस न भेजे। वह जिस भी नई पोस्टिंग पर जाता है, वहां से सुरक्षा सहायक ले सकता है। बीएसएफ में हर जगह काबिल जवान हैं।

यह भी पढ़ेंः सीमा पर चौकसी की बजाय अफसरों के घरों में हाजिरी लगा रहे हैं बीएसएफ जवान, दिल्ली में ले रहे हैं हार्डशिप अलाउंस!

बता दें कि बीएसएफ में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। दिल्ली मुख्यालय में तैनात बल के एक अधिकारी बताते हैं कि इससे सरकार को भी आर्थिक नुकसान होता है। अब कोई अधिकारी अपनी नई पोस्टिंग पर जाता है और वह अपने सुरक्षा सहायक का तबादला भी वहीं करा लेता है तो ऐसे में करीब 75 हजार रुपये, जिसमें ट्रैवलिंग अलाउंस, सामान ढोने के लिए गाड़ी का किराया व दूसरे भत्ते शामिल है, खर्च हो जाते हैं।

कई अफसर तो ऐसे बताए गए हैं, जिनके पास घर व कार्यालय के लिए अलग अलग सुरक्षा सहायक होता है। सातवें वित्त आयोग की सिफारिशों में सिपाही को अफसरों के घर या उनके दूसरे निजी कार्य में लगाने पर बैन लगाया गया है।

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के सभी डीजी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखित में यह आश्वासन दे चुके हैं कि वे अपने सरकारी आवास या कार्यालय में बल की मैनपावर का दुरुपयोग नहीं करेंगे। डीजी के आदेशों की कॉपी अमर उजाला डॉट कॉम के पास है।

बल के  के जनसंपर्क अधिकारी से संपर्क करने पर उन्होंने लिखित में सवाल मांगे। अमर उजाला द्वारा सवाल भेजे जाने पर उनका उत्तर नहीं मिल पाया। 
 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X