जिस माता-पिता को बच्चा न मिले, उसे बच्चे से रोज बात करने का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 22 Jan 2020 02:45 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

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अमेरिका में काम करने वाले युवक और भारत में रह रही उसकी पत्नी के बीच बच्चे की कस्टडी (अभिरक्षा) को लेकर चल रहे मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक नसीहत दी है। कोर्ट ने कहा, माता या पिता में जिसके पास बच्चा न रहे उसे बच्चे से रोज बात करने या मिलने का हक है। कोर्ट ने कहा, मां-बाप के बीच झगड़े का सबसे बुरा असर बच्चे पर पड़ता है। बात दंपती के अलगाव तक पहुंचे तब भी मासूम बच्चों को माता-पिता दोनों का प्रेम, और संरक्षण चाहिए होता है। माता-पिता की लड़ाई के चलते उन्हें इससे वंचित नहीं कर सकते। बच्चे निर्जीव वस्तु नहीं है, जिन्हें इधर-उधर उछाला जाए।
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जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच ने कहा, बच्चे का हित सर्वोपरि है जो किसी एक अभिभावक के साथ पूरा नहीं हो सकता। बेंच ने कहा कि कई बार अदालतें भी बच्चे की कस्टडी पर निर्णय देते समय इन तथ्यों की अनदेखी करती हैं। कोर्ट इस मामले में पत्नी की अपील पर विचार कर रहा था। दरअसल, पति द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका पर हाईकोर्ट ने पत्नी को निर्देश दिया था कि वह अपनी बेटी के साथ अमेरिका जाए ताकि वहां की अदालत इस संबंध में पहले से लंबित कार्यवाही में आदेश दे सके।
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बेटी पैदा होने के बाद शुरू हुआ विवाद

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