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मन की बात में बोले पीएम मोदी- दुनिया की प्राचीन भाषा तमिल न सीख पाना मेरी सबसे बड़ी कमी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्नेहा बलूनी Updated Sun, 28 Feb 2021 12:14 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

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खास बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के जरिए देश को संबोधित किया। अपने संबोधन की शुरुआत प्रधानमंत्री ने माघ पूर्णिमा के पर्व से की। उन्होंने कहा कि माघ का महीना विशेष रूप से नदियों, सरोवरों और जलस्रोतों से जुड़ा हुआ माना जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पानी का स्पर्श, जीवन और विकास के लिए जरूरी है। संत रविदास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मैं संत रविदास जी की जन्मस्थली वाराणसी से जुड़ा हुआ हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं को कोई भी काम करने के लिये, खुद को, पुराने तौर तरीकों में बांधना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा तमिल सीखने के लिए बहुत प्रयास नहीं कर पाया। मैं तमिल नहीं सीख पाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये एक सुंदर भाषा है। यहां पढ़ें इससे जुड़े अपडेट्स-
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लाइव अपडेट

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11:39 AM, 28-Feb-2021

जिन खेलों में कमेंट्री समृद्ध है उनका प्रचार-प्रसारतेजी से होता है

  • आप सभी को त्योहारों की अग्रिम शुभकामनाएं, साथ-साथ कोरोना के संबंध में जो भी नियमों का पालन करना उसमें कोई ढिलाई नहीं आनी चाहिए।
  • मार्च का महीना हमारे फाइनेंशियर ईयर का आखिरी महीना भी होता है, इसलिए, आप में से बहुत से लोगों के लिए काफी व्यस्तता भी रहेगी।
  • मेरे प्यारे युवा साथियो, आने वाले कुछ महीने आप सब के जीवन में विशेष महत्व रखते हैं। मार्च में होने वाली ‘परीक्षा पे चर्चा’ से पहले मेरी आप सभी एग्जाम वॉरियर्स से, पैरेंट्स से, और टीचर्स से, रिक्वेस्ट है कि अपने अनुभव, अपने टिप्स जरूर शेयर करें। आप मायगोव और नरेंद्र मोदी एप पर शेयर कर सकते हैं।
  • हमने देखा है कि जिन खेलों में कमेंट्री समृद्ध है, उनका प्रचार-प्रसार बहुत तेजी से होता है। हमारे यहां भी बहुत से खेल हैं लेकिन उनमें कमेंट्री कल्चर नहीं आया है और इस वजह से वो लुप्त होने की स्थिति में हैं।
11:32 AM, 28-Feb-2021

पीएम से हैदराबाद की एक महिला ने पूछा सवाल

  • यह एक ऐसी सुंदर भाषा है, जो दुनिया भर में लोकप्रिय है। बहुत से लोगों ने मुझे तमिल लिटरेचर की क्वालिटी और इसमें लिखी गई कविताओं की गहराई के बारे में बहुत कुछ बताया है। दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा तमिल सीखने के लिए बहुत प्रयास नहीं कर पाया, मैं तमिल नहीं सीख पाया।
  • मैंने इस सवाल पर विचार किया और खुद से कहा मेरी एक कमी ये रही कि मैं दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा– तमिल सीखने के लिए बहुत प्रयास नहीं कर पाया, मैं तमिल नहीं सीख पाया। 
  • कुछ दिन पहले हैदराबाद की अपर्णा रेड्डी जी ने मुझसे ऐसा ही एक सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि– आप इतने साल से पीएम हैं, इतने साल सीएम रहे, क्या आपको कभी लगता है कि कुछ कमी रह गई। अपर्णा जी का सवाल बहुत सहज है लेकिन उतना ही मुश्किल भी।
11:28 AM, 28-Feb-2021

असम में हमारे मंदिर प्रकृति के संरक्षण में निभा रहे हैं अहम भूमिका

  • साथियो, कभी-कभी बहुत छोटा और साधारण सा सवाल भी मन को झकझोर जाता है। ये सवाल लंबे नहीं होते हैं, बहुत सिंपल होते हैं, फिर भी वे हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं।
  • कुछ लोग समझते हैं कि इनोवेशन करने के लिए आपका साइंटिस्ट होना जरूरी है, कुछ सोचते हैं कि दूसरों को कुछ सिखाने के लिए आपका टीचर होना जरूरी है। इस सोच को चुनौती देने वाले व्यक्ति हमेशा सराहनीय होते हैं।
  • असम में हमारे मंदिर भी, प्रकृति के संरक्षण में, अपनी अलग ही भूमिका निभा रहे हैं, यदि आप, हमारे मंदिरों को देखेंगे, तो पाएंगे कि हर मंदिर के पास तालाब होता है। हजो में हयाग्रीव मधेब मंदिर, सोनितपुर के नागशंकर मंदिर और गुवाहाटी में उग्रतारा मंदिर के पास इस प्रकार के तालाब हैं। इनका उपयोग विलुप्त होते कछुओं की प्रजातियों को बचाने के लिए किया जा रहा है।
11:26 AM, 28-Feb-2021

कई लोग आत्मनिर्भर भारत अभियान में दे रहे हैं योगदान

  • असम के श्री जादव पायेन्ग को ही देख लीजिए। आप में से कुछ लोग उनके बारे में जरूर जानते होंगे अपने कार्यों के लिए उन्हें पद्म सम्मान मिला है।
  • काजीरंगा नेशनल पार्क एंड टाइगर रिजर्व अथॉरिटी कुछ समय से एनुअल वाटरफॉल सेंसस करती आ रही है। इस सेंसस से जल पक्षियों की संख्या का पता चलता है और उनके पसंदीदा हैबिटैट की जानकारी मिलती है।
  • साथियो, देशभर में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां लोग, ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ में, इसी तरह, अपना योगदान दे रहे हैं। आज यह एक भाव बन चुका है, जो आम जनों के दिलों में प्रवाहित हो रहा है।
11:22 AM, 28-Feb-2021

जब प्रत्येक देशवासी गर्व करता है तो बनता है आथ्मनिर्भर भारत

  • जब हम इसी सोच के साथ आगे बढ़ेंगे, तभी सही मायने में आत्मनिर्भर बन पाएंगे और साथियो, मुझे खुशी है कि आत्मनिर्भर भारत का ये मंत्र, देश के गांव-गांव में पहुंच रहा है।
  • जब प्रत्येक देशवासी गर्व करता है, प्रत्येक देशवासी जुड़ता है, तो आत्मनिर्भर भारत, सिर्फ एक आर्थिक अभियान न रहकर एक नेशनल स्पिरिट बन जाता है।
  • ऐसे ही बहुत इनोवेटिव तरीके से लद्दाख के उरगेन फुत्सौग भी काम कर रहे हैं। उरगेन जी इतनी ऊंचाई पर ऑर्गेनिक तरीके से खेती करके करीब 20 फसलें उगा रहे हैं वो भी साइक्लिक तरीके से, यानी वो, एक फसल के वेस्ट को, दूसरी फसल में, खाद के तौर पर, इस्तेमाल कर लेते हैं।
11:18 AM, 28-Feb-2021

अपने सपनों के लिए किसी दूसरे पर निर्भर न रहें

  • जब हम साइंस की बात करते हैं तो कई बार इसे लोग फिजिक्स-केमिस्ट्री या फिर लैब्स तक ही सीमित कर देते हैं, लेकिन साइंस का विस्तार इससे कहीं ज्यादा है और ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ में साइंस की शक्ति का बहुत योगदान है।
  • हम अपने सपनों के लिए किसी दूसरे पर निर्भर रहें, ये बिलकुल ठीक नहीं है। जो जैसा है वो वैसा चलता रहे, रविदास जी कभी भी इसके पक्ष में नहीं थे। आज हम देखते हैं कि देश का युवा भी इस सोच के पक्ष में बिलकुल नहीं है।
  • संत रविदास जी ने समाज में व्याप्त विकृतियों पर हमेशा खुलकर अपनी बात कही। उन्होंने इन विकृतियों को समाज के सामने रखा। उसे सुधारने की राह दिखाई। तभी तो मीरा जी ने कहा था- 'गुरु मिलिया रैदास, दीन्हीं ज्ञान की गुटकी।'
11:15 AM, 28-Feb-2021

जो जैसा है वो वैसा चलता रहे, संत रविदास जी इसके पक्ष में नहीं थे

  • आज ‘नेशनल साइंस डे’ भी है। आज का दिन भारत के महान वैज्ञानिक, डॉक्टर सी.वी. रमन जी द्वारा की गई ‘रमन इफेक्ट’ खोज को समर्पित है। केरल से योगेश्वरन जी ने नमो एप पर लिखा है कि रमन इफेक्ट की खोज ने पूरी विज्ञान की दिशा को बदल दिया था। इससे जुड़ा हुआ एक बहुत अच्छा सन्देश मुझे नासिक के स्नेहिल जी ने भी भेजा है।
  • इसी तरह, संत रविदास जी ने एक और महत्वपूर्ण सन्देश दिया है। ये संदेश है 'अपने पैरों पर खड़ा होना।' हम अफने सपनों के लिए किसी दजूसरे पर निर्भर रहें ये बिलकुल ठीक नहीं है। जो जैसा है वो वैसा चलता रहे, संत रविदास जी इसके पक्ष में नहीं थे।
  • संत रविदास जी के जीवन की आध्यात्मिक ऊंचाई को और उनकी ऊर्जा को मैंने उस तीर्थ स्थल में अनुभव किया है। हमारे युवाओं को एक और बात संत रविदास जी से जरुर सीखनी चाहिए। युवाओं को कोई भी काम करने के लिए खुद को पुराने तौर-तरीकों में नहीं बांधना चाहिए। आफ अफने जीवन को खुद ही तय कीजिए।
11:10 AM, 28-Feb-2021

संत रविदास के बिना पूरी नहीं होती माघ महीने की चर्चा

  • मेरे प्यारे देशवासियो, जब भी माघ महीने और इसके आध्यात्मिक सामाजिक महत्त्व की चर्चा होती है तो ये चर्चा एक नाम के बिना पूरी नहीं होती। ये नाम है संत रविदास जी का। ये मेरा सौभाग्य है कि मैं संत रविदास जी की जन्मस्थली वाराणसी से जुड़ा हुआ हूं। 
  • कुछ दिनों बाद मार्च महीने में ही 22 तारीख को ‘वर्ल्ड वाटर डे’ भी है।
  • कल माघ पूर्णिमा का पर्व था। माघ महीना विशेष रूप से नदियों, सरोवरों और जलस्रोत्रों से जुड़ा हुआ माना जाता है। माघ महीने में किसी भी पवित्र जलाशय में स्नान को पवित्र माना जाता है।
11:07 AM, 28-Feb-2021

नदी तट पर अनेक सभ्यताएं विकसित हुई हैं

  • माघ महीने को जल से जोड़ने का संभवतः एक और भी कारण है, इसके बाद से ही, सर्दियां खत्म हो जाती हैं, और, गर्मियों की दस्तक होने लगती है, इसलिए पानी के संरक्षण के लिए, हमें, अभी से ही प्रयास शुरू कर देने चाहिए।
  • माघ के दिनों में तो लोग अपना घर-परिवार, सुख-सुविधा छोड़कर पूरे महीने नदियों के किनारे कल्पवास करने जाते हैं।
  • दुनिया के हर समाज में नदी के साथ जुड़ी हुई कोई-न-कोई परंपरा होती ही है। नदी तट पर अनेक सभ्यताएं भी विकसित हुई हैं। हमारी संस्कृति क्योंकि हजारों वर्ष पुरानी है, इसलिए, इसका विस्तार हमारे यहाँ और ज्यादा मिलता है।
11:05 AM, 28-Feb-2021

इंसानी विकास के लिए जरूरी है पानी

  • हमारी संस्कृति हजारों साल पुरानी है।
  • इंसानी विकास के लिए पानी बहुत जरूरी है।
  • जल हमारे लिए जीवन और आस्था दोनों हैं।
  • माघ महीने में स्नान को पवित्र माना जाता है।
11:03 AM, 28-Feb-2021

नदियों, सरोवरों से जुड़ा है माघ का महीना

मेरे प्यारे देशवासियों नमस्कार। कल माघ पूर्णिमा का पर्व था। माघ का महीना विशेष रूप से नदियों, सरोवरों और जलस्रोतों से जुड़ा हुआ माना जाता है। 
10:45 AM, 28-Feb-2021

मन की बात में बोले पीएम मोदी- दुनिया की प्राचीन भाषा तमिल न सीख पाना मेरी सबसे बड़ी कमी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के जरिए देश को संबोधित कर रहे हैं। 
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