पीएम नरेंद्र मोदी को संकटमोचक दोस्त अरुण जेटली की बेहद कमी खल रही है!

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 04 Mar 2020 08:24 PM IST
विज्ञापन
अरुण जेटली (फाइल फोटो)
अरुण जेटली (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

सार

  • पार्टी में सभी दलों के नेताओं में पैठ रखने वाले नेताओं की कमी
  • अनंत कुमार, सुषमा स्वराज सरीखे नेताओं की कमी महसूस कर रही है सरकार
  • विपक्ष से गतिरोध खत्म कराने वाले नेताओं का नितांत अभाव

विस्तार

संसद में अवकाश के बाद आरंभ हुआ बजट सत्र विपक्ष के हंगामे, दिल्ली की सांप्रदायिक हिंसा पर चर्चा की मांग की भेंट चढ़ रहा है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संकट मोचक मित्र रहे पूर्व वित्त मंत्री स्व. अरुण जेटली को बहुत मिस कर रहे हैं। भाजपा के एक बड़े नेता ने स्वीकार किया कि अरुण जेटली की क्षति अपूरणीय है।
विज्ञापन

सूत्र का कहना है कि न केवल अरुण जेटली, पार्टी और केंद्र सरकार में सुषमा स्वराज, अनंत कुमार जैसे संसदीय राजनीति को गहराई से समझने वाले नेताओं की भी कमी है। यह कमी खल रही है।
 
भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि आज हमारे बीच में अरुण जेटली होते, तो इस तरह की स्थिति न होती। सूत्र का कहना है कि संसदीय राजनीति में फ्लोर मैनेजमेंट महत्वपूर्ण होता है। कई नेताओं की छवि और हैसियत ऐसी होती जिन पर विपक्ष के नेता भी विश्वास करते हैं।
ऐसे नेताओं के पास विपक्ष के नेता आते रहते हैं। सरकार और विपक्ष के बीच में टकराव की स्थिति आने पर इस तरह के लोग संकटमोचक की भूमिका निभाते हैं। बताते हैं कांग्रेस के पास भी ऐसे तमाम नेता रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, कमल नाथ, प्रियरंजन दास मुंशी समेत अन्य। अब इस तरह के नेता सदन में बहुत कम हैं।

इसके कारण राजनीतिक दलों और सरकार के बीच में संवाद, राजनीतिक प्रक्रिया समेत तमाम मामलों में गतिरोध सा आ गया है। लोकसभा में पिछले कुछ दशक से सदन की कार्यवाही की रिपोर्टिंग करने वाले सूत्र का कहना है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच में पिछले कुछ सालों से जिस तरह की स्थिति देखने को मिल रही है, वह चिंताजनक है।

कई बार महसूस होता है कि जैसे सत्ता पक्ष और विपक्ष में संवादहीनता की स्थिति बढ़ रही है। लोकसभा के जनसंपर्क विभाग से जुड़े सूत्र का कहना है कि उन्होंने कई लोकसभा देखी हैं। उन्हें पिछली लोकसभा में इस तरह की कमी नहीं दिखाई दे रही थी।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली समेत कई नेता केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच के टकराव को संभाल लेते थे। अब लग रहा है कि सर्वदलीय तालमेल में उतनी संवेदनशीलता नहीं रह गई है।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय से बढ़ी दूरी

प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव के जमाने से संसदीय राजनीति को देख रहे एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पहले प्रधानमंत्री खुद गतिरोध खत्म करने की पहल करते थे। विपक्ष के नेताओं से चर्चा करते थे। संवाद बना रहता था। बताते हैं सत्ता पक्ष और विपक्ष में तमाम नेता इसमें अहम भूमिका निभाते थे।

विपक्ष अपनी और सत्ता पक्ष अपनी ताल पर चलता दिखाई दे रहा है। बताते हैं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दौर तक सही मायने में संसद भवन में लोकतंंत्र का प्रभाव दिखाई पड़ता था। वाजपेयी का सांसदों, नेताओं से मिलने-जुलने का एक अंदाज भी था। कम बोलते थे और दूसरे की इज्जत करते थे।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह लोगों से मिलने जुलने में कम रुचि लेते थे। यह कमी पार्टी के दूसरे नेता पूरी करते थे। सूत्र का कहना है कि मौजूदा समय में अब एक बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। सरकार भी अकड़ में है और विपक्ष भी।

कौन किसके चैंबर में मिलने जाता है, बड़ी बात

संसद भवन के कुछ पुराने अधिकारियों ने कई दौर देखे हैं। उनका कहना है कि पहले वह सत्ता पक्ष के मंत्रियों को विपक्षी नेताओं के पास आत्मीयता से मिलते देखते थे। कई विपक्ष के अच्छे नेता सत्ता पक्ष के संसद भवन में मौजूद चैंबर (कक्ष) में दिखते थे। सेंट्रल हॉल का माहौल भी अलग होता था। बताते हैं, अब उस तरह का हाव भाव नहीं दिखाई देता।

कुछ बड़े नेता इस स्वभाव के दिखाई पड़ते हैं, जो विपक्ष के नेताओं से भेंट न करने के मूड में दिखाई देते हैं। नेताओं के बीच में एक दूसरे के कक्ष में जाना, भेट मुलाकात, चर्चा का रिवाज कम हो रहा है।

बताते हैं अरुण जेटली के चैंबर में हमेशा कोई न कोई रहता था। वह केंद्र सरकार में मंत्री थे, तब भी और जब राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष थे, उस समय भी। शरद पवार सरीखे कई नेता कई दलों में अपना अच्छा जन संपर्क रखते हैं। अब इस तरह की छवि वाले लोग अंगुली पर गिनने के बराबर हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X