प्रधानमंत्री मोदी ने की रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से बात, अंतरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय, द्विपक्षीय हितों पर की चर्चा

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 02 Jul 2020 08:00 PM IST
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नरेंद्र मोदी- व्लादीमीर पुतिन
नरेंद्र मोदी- व्लादीमीर पुतिन - फोटो : For Refernce Only

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सार

  • रूस से सुखोई-30 एमकेआई, मिग समेत अन्य सैन्य साजोसामान लेगा भारत
  • चीन के मुद्दे पर भी हुई बात, शिखर बैठक में शामिल होने का दिया न्यौता

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन को फोन करके बधाई दी है। उन्हें साल के अंत में भारत में होने वाली भारत-रूस शिखर बैठक के लिए आमंत्रित किया है। प्रधानमंत्री ने रूस के राष्ट्रपति को यह फोन परोक्ष रूप से दो कारणों से किया था।
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पहला तो यह कि रूस द्वितीय विश्वयुद्ध में मिली जीत का 75वां साल मना रहा है। दूसरा कारण रूस में संविधान संशोधन का सफल मतदान रहा है। इसमें पुतिन के संवैधानिक सुधारों को रूस में भारी समर्थन मिला है। वह पांच-पांच साल के अंतराल में होने वाले मतदान के जरिए आगे राष्ट्रपति बने रह सकते हैं।

क्या हुई है बात?

दो शिखर नेताओं के बीच में हुई बातचीत का ब्यौरा जारी नहीं किया गया है, लेकिन समझा जा रहा है कि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय तथा द्विपक्षीय मुद्दों पर संक्षिप्त चर्चा हुई होगी।
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने चीन के साथ लद्दखा क्षेत्र में तनाव पर भी चर्चा की होगी। रूस, भारत का पुराना विश्वसनीय सामरिक साझेदार देश है।
भारतीय सैन्य बल आज भी रूस से आयातित हथियारों पर ही सबसे अधिक निर्भर हैं। भारत रूस से एस-400 ट्रायंफ मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली, 12 सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान, 21 मिग-29 फाइटर जेट खरीद रहा है।

मौजूदा 59 मिग-29 फाइटर जेट को अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान में अपग्रेड कराने की प्रक्रिया चल रही है। इस क्रम में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति से रक्षा साजो सामान की आपूर्ति में रूस की एजेंसियों से अधिक सक्रिय होने का आग्रह किया होगा।

बधाई देना तो एक बहाना था, असल मकसद संतुलन बनाना था

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री का रूस के राष्ट्रपति को फोन करना बहुत अच्छा रहा है। हालांकि प्रधानमंत्री ने रूस के राष्ट्रपति को जिस संविधान संशोधन के लिए बधाई दी है, वह केवल अभी एक औपचारिक प्रक्रिया पर भर है।

अभी राष्ट्रपति पुतिन का कार्यकाल चल रहा है और अगले कार्यकाल के लिए उन्हें चुनाव प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। विदेश मंत्रालय के एक पूर्व राजनयिक का कहना है कि रूस के द्वितीय विश्वयुद्ध की 75वीं साल के जश्न में रक्षा मंत्री राजनाथ शामिल हुए थे।

भारतीय सुरक्षा बल के जवानों ने भी वहां भाग लिया था। माना यह जा रहा है कि जिस तरह से चीन सैन्य तैयारी कर रहा है और वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति को एकतरफा स्तर पर बदलना चाह रहा है, उसे देखते हुए भारत बेहद सतर्क तरीके से आगे बढ़ रहा है।

राष्ट्रपति पुतिन से फोन वार्ता को भी इससे जोड़ते हुए संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इसी क्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने फ्रांस के अपने समकक्ष को फोन करके उन्हें ब्रीफ किया था। इसके सामानांतर भारत अपने कुछ विश्वसनीय देशों के संपर्क में भी है।
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