बांग्लादेश बॉर्डर पर दिमागी तौर से कमजोर व्यक्ति के पकड़े जाने पर मानवीय आधार पर निपटेगा मामला

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 19 Sep 2020 05:23 PM IST
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DG Level Border Conference - फोटो : AmarUjala

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सार

बीएसएफ के डीजी राकेश अस्थाना, जो कि 50वीं बॉर्डर कोआर्डिनेशन कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के लिए ढाका गए थे, उन्होंने वहां बीजीबी के डीजी मेजर जनरल शफीनुल इस्लाम से आग्रह किया है कि दिमागी तौर से विकलांग लोगों के साथ मानवता का व्यवहार होना चाहिए...

विस्तार

भारत और बांग्लादेश बॉर्डर पर कई ऐसे लोग पकड़े जाते हैं, जो दिमागी तौर से कमजोर होते हैं। ऐसे केस सामने आए थे कि बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश 'बीजीबी' उनके साथ भी घुसपैठियों की तरह सलूक करती है। बीएसएफ के डीजी राकेश अस्थाना, जो कि 50वीं बॉर्डर कोआर्डिनेशन कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के लिए ढाका गए थे, उन्होंने वहां बीजीबी के डीजी मेजर जनरल शफीनुल इस्लाम से आग्रह किया है कि दिमागी तौर से विकलांग लोगों के साथ मानवता का व्यवहार होना चाहिए।
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इस तरह के मामलों का निपटारा शांतिपूर्वक तरीके से हो, ताकि उन लोगों को बड़ी पीड़ा न पहुंचे। बीएसएफ की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष इस मुद्दे पर सहमत हुए हैं कि ऐसे मामले में पकड़े गए व्यक्ति को मानवीय आधार पर एक पीड़ित समझकर कार्रवाई की जाएगी। बाद में मानसिक तौर पर विकलांग व्यक्ति की नागरिकता की जांच पड़ताल कर उसे एक-दूसरे के मध्य सहयोग की भावना के साथ संबंधित फोर्स को सौंपने की प्रक्रिया शुरू होगी।
यह कांफ्रेंस ढाका में 16 सितंबर से 19 सितंबर तक आयोजित की गई है। इसमें बीएसएफ का प्रतिनिधित्व डीजी राकेश अस्थाना ने किया है। पिछले साल दिसंबर के दौरान नई दिल्ली में 49वीं कान्फ्रेंस आयोजित की गई थी। दोनों देशों के बीच 1975 से यह कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाती रही है। इसमें सीमा पर अपराध, घुसपैठ, तस्करी और इनसर्जेंट ग्रुप सहित कई मुद्दों पर चर्चा होती है।
इस बार दोनों देशों के महानिदेशकों ने आपसी बैठक के बाद कई मुद्दों पर सहमति जताई है। इनमें औपचारिक या अनौपचारिक चैनल द्वारा ड्रग की तस्करी, नारकोटिक्स, मानव तस्करी, नकली करेंसी, पशु तस्करी, हथियार, गोला बारुद, असामाजिक तत्व, इंडियन इनसर्जेंट ग्रुप की गतिविधियां, अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा पर लगी बाड़ को नुकसान पहुंचाना, आदि मामलों की रीयल टाइम इंर्फोमेशन का आदान प्रदान किया जाएगा।

डीजी बीएसएफ राकेश अस्थाना ने कहा, बीएसएफ ने बॉर्डर पर नॉन लेथल वेपन का इस्तेमाल करने के नियम का बड़े स्तर पर पालन किया है। हमारे जवान केवल उसी स्थिति में घातक हथियार का इस्तेमाल करते हैं, जब वे हथियारों सहित वहां आए अपराधियों से घिर जाते हैं। ऐसे लोगों ने बीएसएफ जवानों को बुरी तरह घायल किया है। इसके बावजूद अस्थाना ने विश्वास दिलाया कि भविष्य में बॉर्डर पर मौत की घटनाएं कम की जाएंगी। इसके लिए दोनों देश सीमावर्ती क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी शुरू करेंगे।
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