आला हजरत के मिशन को बढ़ाने में गुजरी अजहरी मियां की पूरी जिंदगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली Updated Fri, 27 Jul 2018 12:05 AM IST
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The whole life of azhari miyan passed away in raising the mission of aala Hazrat

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आला हजरत खानदान में पैदा हुए ताज्जुशरीया हजरत मौलाना अख्तर रजा खां अजहरी मियां की पूरी जिंदगी मसलके आला हजरत को आगे बढ़ाने में गुजरी। आला हजरत खानदान में मजहबी तालीम हासिल करने वाले लोगों में वह बचपन से ही वह अव्वल रहते थे। उनकी शुमारी उर्दू, फारसी और अरबी के बड़े आलिमों में होती थी। आला हजरत मौलाना अहमद रजा खां की अनगिनत किताबों का उन्होंने उर्दू में तर्जुमा किया था। अजहरी मियां की नातिया शायरी तो देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी पसंद की जाती है।
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जांनशीने हिंद मौलाना अख्तर रजा खां उर्फ अजहरी मियां की पैदाइश दो फरवरी 1943 को सौदागरान में हुई थी। उनके वालिद का नाम मौलाना इब्राहीम रजा खां था। वह मुफ्ती आजमे हिंद के नवासों में लगते हैं। अजहरी मियां की शुरूआती तालीम मदरसा दारुल उलूम मंजरे इस्लाम में हुई। उन्होंने यहां उर्दू के अलावा फारसी की भी तालीम हासिल की। सन् 1952 में एफआर इस्लामिया इंटर कालेज में दाखिला लेकर हिंदी और अंग्रेजी की भी तालीम हासिल की।
कॉलेज लेवल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अजहरी मियां सन् 1963 में मजहबी तालीम हासिल करने के लिए मिस्त्र के शहर काहिरा की विश्वप्रसिद्ध जामिया अजहरिया यूनिवर्सिटी चले गए। उन्होंने वहां दाखिला लेने के बाद कुल्लिया उसूल दीन यानी एमए की तालीम लेनी शुरू की। अजहरी मियां सन् 1966 में मिस्त्र से तालीम हासिल करके वापस बरेली लौटे, तभी से उनके नाम के आगे अजहरी लग गया और लोग उन्हें अजहरी मियां कहने लगे। सन् 1967 में उन्होंने मदरसा दारुल उलूम मंजरे इस्लाम में तालीम देना शुरू किया।
अजहरी मियां ने पहला फतवा सन् 1966 में लिखा और फिर उसे मुफ्ती आजमे हिंद मौलाना मुस्तफा रजा खां को दिखाया। इस फतवे को देखकर मुफ्ती आजमे हिंद मौलाना मुस्तफा रजा खां इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने अजहरी मियां से दारुल इफ्ता में आकर फतवा लिखने को कहा।

तीन नवंबर 1968 को उनका निकाह कांकरटोला स्थित हजरत हसनैन मियां की साहबजादी से हुआ। उनके एक बेटे मौलाना असजद रजा खां के अलावा पांच बेटियां हैं। सन् 1982 में उन्होंने मरकजी दारुल इफ्ता की स्थापना की। इसके बाद सन् 2000 में मदरसा जामिया तुर्र रजा की भी स्थापना की।
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