'वोकल फॉर लोकल' के नारे ने डाली जनजातीय उत्पादों की ऑनलाइन मार्केटिंग की नींव

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Updated Sat, 01 Aug 2020 04:14 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीआईबी

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (ट्राइफेड) की कोशिशों से जनजाति के लोग जो अपनी परंपरागत कला और वन उपज को औने-पौने दाम बेच रहे थे, अब मालिक बनकर ऑनलाइन बिक्री कर रहे हैं।
विज्ञापन


इसके माध्यम से वे अपने उत्पाद का सर्वोच्च मूल्य हासिल कर रहे हैं। इतना ही नहीं ओडिशा से लेकर नागालैंड और छत्तीसगढ़ से लेकर हिमाचल प्रदेश तक के छोटे छोटे इलाकों में रहने वाले यह लोग अब मजदूर के बजाए व्यापारी बन गए हैं। 


इसमें ट्राइफेड के 14 क्षेत्रीय कार्यालय 100 से ज्यादा रिटेल स्टोर और 28 राज्य अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात कार्यक्रम में वोकल फॉर लोकल का नारा देते हुए बांस की बोतल और खाने के टिफिन का जिक्र करने से यह संभव हो पाया है।

इसके बाद जनजातीय मंत्रालय ने रिकॉर्ड समय में ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफार्म विकसित कर जनजातीय लोगों को मजदूर से मालिक बना दिया। ऑनलाइन मार्केट के तहत ई-मार्केट प्लस योजना के तहत पांच लाख आदिवासियों को डिजीटल प्लेटफार्म पर लाया गया है।

इससे वह एक समूह में अपने उत्पादों को ई-मार्केट की मदद से देश ही नहीं विदेशों में भी बेच पाएंगे। फिलहाल इनकी 50 लाख सामग्रियों को पोर्टल के लिंक में डाला गया है। जहां यह बिक्री लिए उपलब्ध हैं। जनजातीय मंत्रालय के मुताबिक इस समय लगभग सौ करोड़ रुपये का सामान गोदाम में है, जिसे जल्द ही इस पोर्टल से लिंक कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं देशभर में ट्राइफेड के सभी शोरूम को भी इससे लिंक कर दिया जाएगा। इससे लगभग 5 लाख लोग सीधे ऑनलाइन इस मार्केटिंग प्लेटफार्म से जुड़ सकेंगे।

ऑनलाइन मार्केटिंग पोर्टल में फिलहाल देश के 28 राज्यों में 15 हजार स्वयं सहायता समूहों के समर्थन मूल्य पर खरीदने वाले सामानों की संख्या अधिकतम है। इसकी वजह है मंत्रालय ने लॉकडाउन से अनलॉक तक की प्रक्रिया के दौरान चरणबद्ध तरीके से वन उपज और इनके आर्थिक हालातों को मजबूत करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया था। इससे सामान की बिक्री में 191 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इतना ही नहीं उन लोगों को बिचौलिए से बचाने के लिए पारदर्शी व्यवस्था के तहत मंत्रालय ने जगह-जगह विपणन केंद्रों की स्थापना की है। 

इन केंद्रों से सरकार ने तकरीबन 12 हफ्ते में डेढ़ हजार करोड़ की खरीददारी की। इसके अलावा निजी स्तर पर भी  दो हजार करोड़ की खरीदी हुई। इसका परिणाम यह रहा कि अभी तक साढ़े तीन हजार करोड़ रुपया जनजातीय अर्थव्यवस्था तक अपनी पहुंच बना चुका है।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X