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विवाह संबंधी दोषों को दूर करने के लिए शिवरात्रि पर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में कराएं रुद्राभिषेक : 21-फरवरी-2020
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विवाह संबंधी दोषों को दूर करने के लिए शिवरात्रि पर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में कराएं रुद्राभिषेक : 21-फरवरी-2020

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श्रीनगर की डल झील में आग ने मचाया तांडव, तीन हाउस बोट जलकर हुईं राख

श्रीनगर की डल झील में तीन हाउस बोट जलकर राख हो गईं। इससे हाउस बोट मालिकों को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि किसी के नागरिक या पर्यटक के हताहत होने की खबर नहीं है। आग लगने की वजह की जांच की जा रही है।

17 फरवरी 2020

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उधमपुर

सोमवार, 17 फरवरी 2020

राजमार्ग दिन भर रोक कर रखे गए घाटी जाने वाले ट्रक

उधमपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात को सुचारु रूप से चलाने के लिए हर रोज वाहनों की आवाजाही एक तरफा रखी जा रही है। रविवार को वाहनों की आवाजाही श्रीनगर से जम्मू की तरफ रखी गई थी। इसलिए पुलिस ने शनिवार रात को ही ट्रकों के घाटी की तरफ जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। दिन भर चालक आगे अनुमति मिलने का इंतजार करते रहे, लेकिन पुलिस ने शाम तक ट्रकों को घाटी की तरफ नहीं जाने दिया।
गौरतलब है कि पिछले कुछ माह से राजमार्ग पर यातायात बुरी तरह से प्रभावित है। जब वाहनों की संख्या बढ़ रही है तो जाम की स्थिति बन रही है, इसलिए पुलिस एक तरफा वाहनों की आवाजाही को रख कर यातायात को दुरुस्त रखने का प्रयास कर रही है। रविवार को वाहनों की आवाजाही श्रीनगर से जम्मू की तरफ रखने का शनिवार को ही एलान कर दिया था। पुलिस ने शनिवार को ही ट्रकों के घाटी की तरफ जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। रोके जाने के बाद उधमपुर के जखैनी, भारत नगर, संगूर, रठियान, गरनई, बट्टलबालियां, मांड व अन्य कई इलाकों में ट्रकों की लंबी कतार लग चुकी थी। सुबह होने पर जब छोटे यात्री वाहन जम्मू से उधमपुर पहुंचे तो उनको पुलिस ने घाटी की तरफ जाने की अनुमति दे दी, लेकिन ट्रकों को नहीं जाने दिया गया। दिन भर ट्रकों के चालक व सह चालक पुलिस से आगे जाने की अनुमित मिलने का इंतजार करते नजर आए, लेकिन किसी को भी घाटी की तरफ नहीं जाने दिया। चालकों का कहना है कि उनको कई दिनों से राजमार्ग पर रोक कर रखा गया है। पहले उनको जम्मू जिले के विभिन्न स्थानों पर रोका गया था तो अब उनको उधमपुर में फिर से रोक दिया गया है। उनको कब आगे जाने की अनुमति मिलेगी पता नहीं है।
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महादेव के रंग में रंगने को देविकानगरी हो रही तैयार

उधमपुर। महापर्व महाशिवरात्रि को लेकर देविका नगरी व आसपास के ग्रामीण इलाकों तैयारियां जोरों शोरों से चल रही हैं। मंदिरों को सजाया जा रहा है। भगवान शिव की मूर्तियों को रंग रोगन करके नया रूप दिया जा रहा है और इसके साथ ही सनातन धर्म सभा की शोभा यात्रा में हिस्सा लेने के लिए शिक्षण संस्थानों व धार्मिक संस्थानों ने झांकियां तैयार करना शुरू कर दिया है।
देविका नगरी में देविका तट पर प्राचीन कामेश्वर महाकालेश्वर मंदिर स्थित है। यह मंदिर शहर के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। महाशविरात्रि के पर्व पर इस मंदिर में हजारों की संख्या श्रद्धालु पूजा अर्चना करने व माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं। इस मंदिर में अपनी बारी के इंतजार में श्रद्धालुओं को घंटों लंबी कतार में लगना पड़ता है, तब जाकर भगवान के दर्शनों का मौका मिल मिलता है। महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर में तैयारियां से जोरों चल रही हैं। मंदिर को सजाया जा रहा है। मंदिर में रंग रोगन किया जा रहा है। इसके अलावा देविका नदी के तट पर भगवान शंकर की मूर्तियों को साफ करने व पेंट किया जा रहा है। मंदिर व मूर्तियों को साफ करने के लिए काफी संख्या में शहरवासी भी सेवा के रूप में सहयोग दे रहे हैं। ज्यादातर लोग सुबह के समय सेवा करते हुए नजर आ रहे हैं। शहर के आस पास के इलाकों में स्थित मंदिरों के भी सजावट का काम जोरों से जारी है। हर कोई महादेव के रंग में रंगने को बेताब नजर आ रहा है। महाशिवरात्रि को लेकर शहर के अंदर सुरक्षा के भी कड़े प्रबंध किए गए हैं। शहर के ज्यादातर सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं।
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झांकी के लिए तैयार किए जा रहे शिवलिंग
महाशिवरात्रि के पर्व उपलक्ष्य पर प्रत्येक वर्ष सनातन धर्म सभा की तरफ से भव्य शोभा यात्रा निकाली जाती है। इस शोभा यात्रा में 25 से ज्यादा शिक्षण संस्थान व धार्मिक संस्थान हिस्सा लेकर भगवान शंकर की झांकी निकालेंगे। बच्चे व युवा भगवान शंकर का रूप बनाते हैं और विशेष तौर शिवलिंग भी तैयार किए जाते हैं। इस बार यह शोभा यात्रा शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर वीरवार शाम को निकाली जा रही है।
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जम्मू-कश्मीरः 5276 कनाल भूमि पर अवैध नामांतरण रद्द, कई सफेदपोशों पर गिर सकती है गाज

वन भूमि, राज्य और काह चराई की भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सुंजवां में 4,945 और चौआदी में 331 कनाल भूमि का नामांतरण रद्द कर दिया है। इस भूमि पर लोगों ने राजस्व रिकॉर्ड में अपने नाम चढ़वा लिए थे। जिला उपायुक्त सुषमा चौहान की ओर से शनिवार को इस आशय का आदेश जारी किया। प्रशासन की इस कार्रवाई से कई सफेदपोशों और प्रभावी व्यक्तियों पर गाज गिर सकती है।
 
जिला उपायुक्त ने जम्मू-कश्मीर लैंड रैवेन्यू एक्ट 1996 और जम्मू व कश्मीर फारेस्ट (कंजरवेशन) एक्ट 1997 का हवाला देते हुए सभी अवैध नामांतरण रद्द करने के आदेश जारी किए हैं। बताया कि सुंजवां में वन विभाग की 4,945 कनाल व 12 मरला भूमि पर किया गया नामांतरण अवैध है। चौआदी में भी 331 कनाल व 03 मरला राज्य भूमि पर भी अवैध नामांतरण को राजस्व रिकॉर्ड से रद्द करने के आदेश दिए हैं।

उन्होंने जिले के सभी तहसीलदारों को संबंधित क्षेत्रों में वन, राज्य और काह चराई भूमि पर अवैध नामांतरण का एक हफ्ते के भीतर ब्योरा इकट्ठा करने को कहा है। इसके बाद राजस्व रिकॉर्ड से अवैध नामांतरण को खत्म करने का काम शुरू किया जाएगा।

राजस्व रिकॉर्ड से खत्म किया जाएगा कब्जा
वित्तीय आयुक्त राजस्व ने सभी जिला उपायुक्तों को राजस्व रिकॉर्ड का ऑडिट करने के साथ वन, राज्य और काह चराई भूमि पर अवैध ढंग से किए गए नामांतरण के मामलों की शिनाख्त करने को कहा है। इसमें गैरमुमकिन खड के तहत नामांतरण को राजस्व रिकॉर्ड से खत्म किया जाएगा।
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जम्मू-कश्मीरः पंचायत उपचुनाव में नेशनल कांफ्रेंस सशर्त भाग लेने को तैयार

पंचायत उपचुनाव में नेशनल कांफ्रेंस सशर्त भाग लेने को तैयार है। उपचुनाव में भागीदारी की इच्छा जताते हुए उसने मुख्य चुनाव अधिकारी शैलेंद्र कुमार को पत्र लिखकर चुनाव प्रचार अभियान में आने वाली बाधाओं को दूर करने की अपील की है।
 
नेकां(नेशनल कांफ्रेंस) के केंद्रीय सचिव रतन लाल गुप्ता ने पत्र में कहा है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व नजरबंद है। ऐसे में उम्मीदवार के चयन के अलावा चुनाव प्रचार अभियान में पार्टी को भारी समस्या आएगी। नेकां लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास रखती है और पांच मार्च से शुरू हो रहे आठ चरण वाले पंचायत उपचुनाव में हिस्सा लेना चाहती है।

लेकिन पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला और महासचिव अली मोहम्मद सागर की नजरबंदी से वास्तव में पार्टी के लिए चुनाव में भागीदारी संभव नहीं है। नियमों के तहत उम्मीदवारों के नामांकन पर पार्टी के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। ऐसे में मुख्यधारा के नेताओं को अपनी विचारधारा का खुलकर लोगों के बीच प्रचार-प्रसार करने की अनुमति होनी चाहिए।
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फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला

दविंदर मामले में एनआईए को मिले कई अहम सुराग, कई लोगों से हो सकती है पूछताछ

आतंकियों के साथ पकड़े गए डीएसपी दविंदर सिंह मामले में जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) क्रॉस एलओसी ट्रेड के जरिए होने वाली टेरर फंडिंग के भी सूत्र तलाशेगी और अभी कुछ और लोगों को पूछताछ के लिए उठाएगी। जांच एजेंसी डीएसपी और नवीद से भी पूछताछ कर सकती है।

अधिकारियों ने रविवार को बताया कि कश्मीर घाटी से आतंकियों को बाहर निकालने की कोशिश में गिरफ्तार किए गए डीएसपी के साथ प्रतिबंधित हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी  सैयद नावेद मुश्ताक अहमद उर्फ नावेद बाबू को गिरफ्तार किया था। जिसने पूछताछ में बताया कि कैसे उसके संगठन को फंडिंग मिलती है और वह पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से किस तरह संपर्क में रहता है।
 
एनआईए ने 2016 में जम्मू और कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार व्यापार के संबंध में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और कश्मीर के बारामुला जिले के सलामाबाद और पुंछ जिले के चक्कां-दा-बाग में व्यापार सुविधा केंद्रों पर छापे मारे थे। इसके बावजूद पिछले चार वर्षों के दौरान जांच एजेंसी व्यापारियों से प्राप्त धन के अंतिम लाभार्थी को खोजने में असमर्थ रही। अधिकारियों ने कहा कि नावेद से पूछताछ के दौरान एजेंसी को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला है।

अधिकारियों ने कहा कि अब इस मामले में पूछताछ के लिए कुछ और लोगों को उठाए जाने की संभावना है, क्योंकि डीएसपी के मामले में चल रही जांच से चार साल पुराना मामला फिर से चर्चा में आ गया है। हाल ही में पुलिस ने क्रॉस एलओसी व्यापार संगठन के अध्यक्ष तनवीर अहमद वानी को  गिरफ्तार किया था।
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जम्मू-कश्मीरः सियासी रण के लिए तैयार हो रही रैना की युवा सेना!, कुछ ऐसी हो सकती है नई टीम

निलंबित डीएसपी दविंदर सिंह
प्रदेश भाजपा की नई टीम संतुलित होगी। नई टीम में अध्यक्ष समेत पदाधिकारियों की संख्या 21 हो सकती है। टीम में युवाओं और महिलाओं को तरजीह मिलेगी। कुछ पुराने चेहरों को बदलकर नए चेहरों को प्रदेश टीम में मौका दिया जा सकता है। एक पद पर पांच साल तक रहने वाले पदाधिकारियों की छुट्टी भी हो सकती है।

प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना की ओर से प्रदेश पदाधिकारियों की संभावित सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी गई है। कुल 50 नाम भेजे गए हैं, जिस पर विचार-विमर्श के बाद 20 पदाधिकारियों के नामों को केंद्रीय नेतृत्व मंजूरी देगा। नई टीम में महासचिव-तीन, उपाध्यक्ष और सचिव आठ-आठ तथा कोषाध्यक्ष होंगे।

पुरानी टीम में 12-12 उपाध्यक्ष और सचिव थे। नई टीम में पांच महिलाओं को स्थान दिया जा सकता है, जबकि पुरानी टीम में तीन महिलाएं थीं। महिला, युवा, किसान मोर्चा समेत सात मोर्चों के अध्यक्ष पद के लिए तीन-तीन नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजा गया है। इनमें से एक नाम को मंजूरी दी जाएगी।

सूत्रों का कहना है कि उपाध्यक्ष और सचिव पद पर एडजस्टमेंट करने में दिक्कतें आ सकती हैं। ऐसे में इनकी संख्या आठ-आठ से बढ़ाई जा सकती है। प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना ने बताया कि संभावित नामों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी गई है। संविधान के अनुसार अध्यक्ष को लेकर 21 पदाधिकारी होंगे।
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कश्मीर में सख्ती तो जम्मू का रुख करने लगे आतंकवादी, इस तरह जगह तलाश रहे आतंकी संगठन

पिछले पांच सालों में कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को यहां काफी हद तक मार गिराया, तो दूसरी तरफ उनको हथियार, पैसे की सप्लाई करने वालों पर भी शिकंजा कसा। आतंकियों के लिए काम करने वालों पर कार्रवाई हुई और इनका समर्थन करने वालों को जेल के अंदर किया गया। शायद यही एक कारण है कि आतंकी गतिविधियों को जारी रखने के लिए आतंकी कश्मीर की जगह जम्मू का रुख कर रहे हैं। संभाग में आतंकियों का बड़ा नेटवर्क है, जिसको ध्वस्त करने के लिए नई रणनीति के तहत काम शुरू किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि नगरोटा आतंकी हमले की जांच इस नेटवर्क को ध्वस्त करने में कारगार साबित होगी। इस जांच में जम्मू संभाग में आतंकियों के नेटवर्क का बड़ा पर्दाफाश होने की संभावना है। इसमें कश्मीर, जम्मू और पंजाब का नाम शामिल है। तीनों ही जगहों पर आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद, हिजबुल का नेटवर्क सक्रिय है। पिछले तीन सालों से कश्मीर में आतंकियों के पहुंचने और उनको हथियार भेजने का सिलसिला जम्मू से ही चल रहा है, जो एक बड़ी चुनौती है।

जांच से जुड़े एक अफसर ने बताया कि जम्मू संभाग में किश्तवाड़, सांबा, कठुआ, जम्मू का एरिया आतंकियों की ओर से इस्तेमाल हो रहा है। आतंकी भी जा रहे हैं और हथियारों की सप्लाई भी हो रही है। कश्मीर में आतंकियों की फंडिंग पर शिकंजा कसा तो जम्मू की तरफ रुख कर रहे हैं। जम्मू के जरिए फंडिंग कराने की कोशिश है। एक बड़ा नेटवर्क है, जिसका पर्दाफाश किया जाएगा।
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अमित शाह और डोभाल से मिले उपराज्यपाल मुर्मू, आज प्रधानमंत्री से कर सकते हैं मुलाकात

उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से दिल्ली में मिलकर सुरक्षा परिदृश्य व जम्मू कश्मीर के हालात की जानकारी दी। आज यानी कि सोमवार को वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल सकते हैं।

सूत्रों ने बताया कि मुलाकात के दौरान उन्होंने रोजगार और जमीन की सुरक्षा के लिए डोमिसाइल व्यवस्था बहाली पर भी बात की। जम्मू-कश्मीर में गर्मी में पर्यटन के विकास की संभावनाओं पर चर्चा की। इस दौरान अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा और अन्य मुद्दों पर भी बात हुई।

अप्रैल में होने वाले निवेशक सम्मेलन, पंचायत उपचुनाव तथा अन्य मुद्दों पर भी उन्होंने जानकारी दी। उम्मीद जताई कि निवेशक सम्मेलन से राज्य में न केवल देश की बल्कि विदेशी कंपनियां भी जम्मू-कश्मीर में निवेश के लिए आगे आएंगी।
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गिलानी की मौत की अफवाह पर सुरक्षा कड़ी, जगह-जगह सुरक्षाबलों का पहरा

अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत की अफवाहों पर रविवार को उनके हैदरपोरा स्थित आवास और शहर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई। इस बीच चिकित्सकों ने बताया कि उनके सेहत में सुधार हो रहा है। चिकित्सकों ने बताया कि अब भी उनकी छाती में संक्रमण है, लेकिन हालत में सुधार हो रहा है।

जीएमसी के चेस्ट विभाग के डाक्टर नवीद की सलाह पर वह तरल पदार्थ और दवाइयों पर हैं। रविवार को डाउनटाउन व लाल चौक समेत संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त फोर्स की तैनाती की गई। लाल चौक इलाके में संडे मार्केट भी नहीं लगने दी गई।

जगह-जगह सुरक्षा बलों का पहरा रहा। पुलिस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि यदि कहीं कोई अनहोनी होती है तो उससे निपटने के लिए भी प्लान तैयार कर लिया गया है। कुल मिलाकर स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है। ज्ञात हो कि अलगाववादी नेता गिलानी की सेहत के संबंध में अफ वाहों को रोकने के लिए अधिकारियों ने इस सप्ताह की शुरुआत में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया था।
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जम्मू-कश्मीरः ’डैडीज गर्ल्स’ नहीं 12 अन्य आधारों पर महबूबा पर लगा पीएसए

पीडीपी अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के खिलाफ सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत जो कार्रवाई की गई उसका आधार पुलिस रिकॉर्ड में डैडीज गर्ल्स के रूप में निरूपण करना नहीं है। बल्कि 12 अन्य आधार हैं जिसके तहत कार्रवाई की गई। यह बात पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट की है। महबूबा के खिलाफ सात पेज की जो रिपोर्ट दाखिल की गई है उसमें पीएसए के तहत उनकी नजरबंदी के लिए 12 आधार बताए गए हैं। यह चालान पुलिस ने छह फरवरी को पेश किया था। उसके खिलाफ 6 फरवरी को चालान किया गया।

इस पूरी प्रक्रिया में शामिल जम्मू-कश्मीर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि किसी भी व्यक्ति पर पीएसए की कार्रवाई के लिए पुलिस, जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करती है फिर मजिस्ट्रेट कार्रवाई का आधार तय करता है।

पीएसए की धारा 13 का हवाला देते हुएए अधिकारियों ने कहा कि जब किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाता है, तो संबंधित अधिकारी को कार्रवाई का आधार पेश करना होता है। पुलिस ने अपने दस्तावेजों में महबूबा के खिलाफ कार्रवाई के लिए उन्हें खतरनाक, डैडीज गर्ल और कोटा रानी के रूप में निरूपित किया था।
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पीएचई कर्मचारियों ने धरना देकर किया प्रदर्शन

उधमपुर। अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी बनाने व अन्य लंबित मांगों केे पूरा करने की मांग को लेकर पीएचई विभाग के अस्थायी कर्मचारियों ने रविवार को छुट्टी के दिन भी हड़ताल को जारी रख पीएचई स्टेशन बाड़यां के बाहर धरना देकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार ने हर बार उनको झूठे आश्वासन दिए हैं, लेकिन इस बार वह सरकार के झूठे आश्वासनों में नहीं आने वाले हैं। वहीं हड़ताल के कारण पानी की सप्लाई न मिलने पर दूर दराज ग्रामीण इलाकों के साथ ही शहर के साथ लगते ग्रामीण इलाकों में जन जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो चुका है।
रविवार को छुट्टी के दिन भी पीएचई विभाग के अस्थायी कर्मचारियों ने पीएचई इंप्लाइज यूनाइटेड फ्रंट के बैनर तले पीएचई स्टेशन बाड़यां के बाहर धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने विभिन्न प्रकार के स्लोगन लिखी तख्तियां थाम रखी थीं। प्रदर्शन के दौरान अजय समैलिया व अन्य कर्मचारियों ने बताया कि हड़ताल के दस दिन के करीब पहुंचने के बावजूद सरकार की तरफ से मांगों को पूरा करने को लेकर कुछ नहीं किया जा रहा है। सात वर्ष का अस्थायी कार्यकाल पूरा करने के बाद भी कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी नहीं बनाया जा रहा है। स्थायी कर्मचारी बनाए जाने की उम्मीद में सैकड़ों कर्मचारी पीएचई विभाग में कम वेतन पर काम कर रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से उनको स्थायी कर्मचारी बनाने को लेकर कोई योजना तैयार नहीं की जा रही है। अस्थायी कर्मचारियों को कभी समय पर वेतन नहीं जारी किया जाता है। वेतन न मिलने के कारण सभी आर्थिक परेशानियों से जूझने को मजबूर रहते हैं। अस्थायी कर्मचारियों ने पिछले कई वर्षों से सभी त्योहार भी बिना वेतन के ही मनाए हैं। कभी कभार किसी त्योहार मे दो महीने का वेतन देकर राहत की बात की जाती है। लेकिन उनकेे चार वर्ष का वेतन आज तक नहीं दिया जा रहा है।
कई अस्थायी कर्मचारियों की ड्यूटी के दौरान मौत हो चुकी है और उनकेे परिवार को किसी तरह से भी राहत नहीं प्रदान की गई है। फ्रंट की मांग है कि इन कर्मचारियों के परिवार के किसी सदस्य को पीएचई विभाग में ही सरकारी नौकरी प्रदान की जाए। स्थायी कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर विभाग की तरफ से डीपीसी तैयार नहीं की जा रही है। जिन स्टेशनों पर पीएचई कर्मचारी काम कर रहे हैं, वहां कर्मचारियं शौचालय सहित कई तरह की सुविधाओं से महरूम रखा गया है। इसको लेकर भी सरकार को प्रयास करने चाहिए। हड़ताल के दसवें दिन भी ग्रामीण इलाकों पानी की सप्लाई प्रभावित बुरी तरह से प्रभावित रही। लोग हर रो दिन भर पानी की सप्लाई मिलने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन घरों में पानी की सप्लाई नहीं पहुंच रही है। इतना ही लोग लगातार पीएचई विभाग के कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई भी उनकी परेशानी की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए लोग बावलियों व अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी भर कर गुजारा करने को मजबूर हैं। चिनैनी, रामनगर, पंचैरी, मोंगरी, लाटी, बसंतगढ़ व अन्य कई इलाकों में पानी की सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित है।
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