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जम्मू और कश्मीर

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

जम्मू-कश्मीरः सुरक्षाबलों को मिली बड़ी कामयाबी, पकड़ा गया एक आतंकी

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों को एक आतंकी को पकड़ने में कामयाबी मिली है। जवानों ने इस आतंकी को बुधवार रात को पकड़ने में सफलता पाई। आतंकी के पास से एक एके-47 और दो मैगजीन मिली हैं। बता दें कि सुरक्षाबलों को बारामुला जिले के चंदौसा इलाके में आतंकियों के मौजूद होने की सूचना मिली। आनन-फानन में सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। इसी दौरान एक आंतकी को पकड़ने में सफलता मिली।

उधर, उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के सोपोर में बुधवार को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद का एक कमांडर ढेर कर दिया। मारे गए आतंकी की पहचान सज्जाद अहमद डार निवासी सैदपुरा सोपोर के तौर पर हुई है। सज्जाद जैश का उत्तरी कश्मीर का कमांडर था। वह वर्ष 2018 से इलाके में सक्रिय था। उसे संगठन में स्थानीय युवाओं की भर्ती का काम सौंपा गया था। उस पर कई अन्य मामले भी दर्ज थे।
 
सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि इलाके में तीन से चार आतंकी छिपे हुए हैं। इस पर सेना की 22 राष्ट्रीय राइफल्स, सीआरपीएफ की 179वीं बटालियन और एसओजी के जवानों ने सोपोर, आरमपुरा के गुलबड़ इलाके की घेराबंदी कर संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। करीब 14 घंटे तक इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान के बाद आतंकियों के साथ सुरक्षाबलों की मुठभेड़ शुरू हो गई। इसमें आतंकी सज्जाद को मार गिराने में सफलता मिली।
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कोरोना से जंग में डटे ये योद्धा, बोले- हम घर नहीं जाते ताकि देश जीते, आप भी अपना कर्तव्य करें

किसी भी जंग को जीतने में पूरी सेना का संयुक्त योगदान महत्वपूर्ण होता है। चाहे वह मैदान में मोर्चे पर हो या उसकी रणनीति बनाने में शामिल हो। वैश्विक बीमारी कोरोना को हराने में जनता के योगदान को कोई नकार नहीं सकता। इस संक्रमण के खतरे को नियंत्रित करने में जुटे योद्धाओं की वजह से ही हम यह सोच सकते हैं कि आने वाले दिनों में हम और हमारा परिवार पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। कोरोना योद्धाओं का ही जज्बा है कि वह बिना किसी डर के लगातार जम्मू-कश्मीर को सुरक्षित बनाने के मोर्चे पर डटे हुए हैं। ऐसे कुछ योद्धाओं के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं....

इन योद्धाओं में श्रीनगर के सीडी अस्पताल में चेस्ट डिजीज के एचओडी डॉ नवीद नजीर शाह और श्रीनगर के जिला उपायुक्त डॉ शाहिद इकबाल चौधरी शामिल हैं। दोनों ने अमर उजाला से कई अहम बातें साझा की। साथ ही इस युद्ध में आने वाली चुनौतियों के बारे में भी बताया।

डॉ नवीद नजीर शाह ने कहा कि इस दौर में दिन-रात जैसी कोई बात ही नहीं रही है। पहले सुबह 10 से शाम 4 बजे तक काम करने का शेड्यूल रहता था लेकिन इस समय ऐसा कोई शेड्यूल नहीं है। सुबह होते ही और देर रात तक अस्पताल में मरीजों की देख-रेख में समय बीत जाता है। कुछ घंटे ही आराम करने के लिए मिल पाते हैं। युद्ध स्तर पर इस जंग को जीतने का काम चल रहा है। हमारे सभी साथी इस जंग को जीतने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं।

दो-तीन दिन में थोड़ी देर के लिए ही घर जाता हूं, इस दौरान पूरा ध्यान रखता हूं कि घरवालों के संपर्क में ज्यादा न आऊं। डॉ नवीद ने कहा कि इस महामारी के दौरान काफी चुनौतियां सामने आ रही हैं। जिसमें सबसे बड़ी चुनौती है कि मरीज को अस्पताल में भर्ती होने के लिए समझाना।    

 
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना के तीसरे चरण से लड़ने की तैयारी, बढ़ते मामलों की वजह से उठाया जा रहा ये कदम

जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में पिछले एक सप्ताह के दौरान हुई वृद्धि के मद्देनजर कोरोना संक्रमण के तीसरे चरण से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। अस्पतालों में संसाधनों को तीसरे चरण की स्थितियों के लिए अपडेट किया जा रहा है।

मरीजों को बेहतर उपचार देने के लिए यह कदम उठा रहा है। जम्मू में तीन निजी अस्पतालों सहित 11, जबकि कश्मीर में 15 निजी नर्सिंग होम सहित 26 आईसोलेशन सुविधा युक्त अस्पतालों को इसके लिए चिन्हित किया गया है। जम्मू के लिए प्रशासन ने जम्मू कश्मीर में 16 अस्पतालों को कोरोना अस्पताल में बदला गया है।

वित्त आयुक्त स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, अटल ढुल्लू ने कहा कि कोरोना अस्पताल में दी जा रही सेवाओं के बारे में हमें और सावधानी बरतनी की जरूरत है। इसके अलावा अस्पतालों में मूल-सुविधाओं के साथ मैनपॉवर को भी बढ़ाना है।
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जम्मू-कश्मीर में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, इस गति से बढ़ रहे मरीज, जंग में डटे जांबाज

जम्मू कश्मीर में कोरोना वायरस जम्मू कश्मीर में कोरोना वायरस

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संघ ने की 12 हजार परिवारों की सहायता, जानवरों तक खाना पहुंचा रहा नगर निगम

भारतीय सेना, फाइल फोटो
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लखनपुर से लेकर लेह तक कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन में विगत 15 दिनों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 12 हजार से अधिक प्रभावित परिवारों को राशन समेत अन्य राहत सामग्री मुहैया कराई है।

जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए सेवा भारती की ओर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक हेल्पलाइन भी शुरू की गई है। इस हेल्पलाइन के जरिये लोग निर्धारित समय पर विशेषज्ञ डॉक्टरों से स्वास्थ्य संबंधी सलाह ले सकते हैं। आरएसएस जम्मू-कश्मीर प्रांत के संघचालक ब्रिगेडियर सुचेत सिंह, सह संघचालक डॉ. गौतम मैंगी और सेवा भारती के उत्तर क्षेत्रीय संगठन मंत्री जयदेव दादा ने यह जानकारी दी।

ब्रिगेडियर सुचेत सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि इस संकट से निपटने के लिए समय रहते केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के साथ अहम फैसले ले लिए थे।

संकट की घड़ी में आरएसएस के स्वयंसेवक जाति, पंथ, समाज से ऊपर उठते हुए लॉकडाउन से प्रभावित गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों के अलावा प्रवासी मजदूरों की मदद में भी जुटे हैं। इसमें सेवा भारती के संकटमोचन रिलीफ दल ने समूचे जम्मू कश्मीर में अहम भूमिका अदा की है।
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जम्मू में 100 बेड का कोविड अस्पताल बनाने की तैयारी, बढ़ते मामलों को देखते हुए युद्धस्तर पर तैयारियां

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए युद्धस्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। इसके लिए अधिक से अधिक क्वारंटीन, आइसोलेशन केंद्रों के साथ अस्थायी अस्पताल स्थापित करने पर काम शुरू कर दिया गया है। इस कड़ी में सेना के साथ मिलकर एमए स्टेडियम जम्मू के नए इंडोर कांप्लेक्स में 100 बेड अस्थायी कोविड अस्पताल स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। इसमें सेना और स्वास्थ्य विभाग मिलकर सभी संसाधन जुटाएंगे।

गुरुवार को मेडिकल कॉलेज के समन्वय निदेशक डॉ. यशपाल शर्मा और सेना के अधिकारियों ने एमए स्टेडियम के इंडोर कांप्लेक्स का जायजा लिया। इसमें अस्पताल को स्थापित करने के लिए जगह के चयन पर चर्चा की गई। इसको लेकर शनिवार को सचिवालय में बैठक बुलाई गई है।

इसके बाद अस्पताल बनाने के फैसले को अंतिम रूप दिया जाएगा। सिविल सचिवालय में स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के वित्तीय आयुक्त अटल डुल्लू के चैंबर में हुई बैठक में अस्थायी अस्पताल को बनाने पर चर्चा की गई।

ईएसआईसी का अस्पताल भी कोविड 19 घोषित
देश में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में इंप्लाइज स्टेट इंशोरेंस कारपोरेशन (ईएसआईसी) ने देश के विभिन्न हिस्सों में अपने 1042 आइसोलेशन बेड वाले आठ अस्पतालों को कोविड 19 (कोरोना) घोषित किया है। इसमें जम्मू का 50 बेड वाला ईएसआईसी अस्पताल भी शामिल किया गया है। 
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तस्वीरेंः कोई भूखा न रहे इसलिए सीआरपीएफ ने संभाला मोर्चा, श्रीनगर में जरूरतमंदों को मुहैया कराया राशन

जम्मू-कश्मीरः उपराज्यपाल ने बताया, प्रदेश में दो हजार से ज्यादा जमाती, सभी की हो चुकी पहचान

उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू ने कहा है कि प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने के बावजूद घबराने की जरूरत नहीं है। इस स्थिति का सामना करने के लिए सरकार ने पर्याप्त इंतजाम कर लिए हैं। जम्मू-कश्मीर में निजामुद्दीन से लौटे तब्लीगी जमात के दो हजार से ज्यादा लोगों के आने से समस्या बढ़ी है लेकिन सभी की पहचान और उनके संपर्क पता कर लिए गए हैं। अब सिर्फ इन लोगों को क्वारंटीन पर रखने और टेस्टिंग की जा रही है जिससे संक्रमितों का ग्राफ अचानक बढ़ता हुआ नजर आ रहा है।

मुर्मू ने एक निजी चैनल में दिए इंटरव्यू में कहा कि प्रदेश में कोरोना से चार मौतें हुई हैं। सभी मामले आखिरी वक्त पर प्रशासन के ध्यान में लाए गए। इस समय प्रदेश में सक्रिय मामलों में से एक भी मरीज वेंटिलेटर पर नहीं है। जबकि 200 वेंटिलेटर बेड मौजूद हैं। 300 और वेंटिलेटर मंगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही 80 हजार रैपिड टेस्टिंग किट उपलब्ध हो जाएंगी। सेना और अन्य सुरक्षा बलों की मदद लेने के लिए योजना तैयार है लेकिन अभी ऐसे हालात नहीं बने हैं। 

एलजी ने कहा कि क्वारंटीन सुविधाएं बढ़ाने को रोड मैप तैयार कर लिया गया है। अस्पतालों में दो-दो हजार बेड की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में क्वारंटीन के लिए 25 हजार बेड की व्यवस्था कर ली गई है। 40 हजार लोग सर्विलांस पर हैं। 550 अस्पतालों में, 23 हजार घरों में क्वारंटीन हैं। 7500 लोग घरों को लौट चुके हैं।

बच्चों की परीक्षाओं से ज्यादा जान बचना जरूरी 
एलजी ने कहा कि कोरोना वायरस की चुनौती में सबसे पहले जान बचाना जरूरी है। केंद्र की गाइडलाइन के तहत यूनिट अथवा अन्य परीक्षाओं में बच्चों को पास किया जाएगा। बच्चों को शिक्षा सामग्री हर हाल में उपलब्ध कराई जाएगी। लॉकडाउन खत्म होने पर हॉस्टल को खोलने के लिए भी रोडमैप तैयार हो चुका है। 

सभी अस्पतालों में बनेगी टनल
कश्मीर के दस और जम्मू संभाग के पांच कोविड अस्पतालों समेत सभी अस्पतालों में संक्रमण रोधी टनल स्थापित होंगी। अस्पताल में आने वालों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षा दी जाएगी। घाटी में 24 और जम्मू में 10 जोन चिह्नित किए गए हैं जहां विशेष ध्यान देने की जरूरत है। स्वास्थ्य विईएभाग में छह आईएएस अफसर तैनात किए गए हैं। प्रत्येक जिले के लिए एक-एक आईएएस अफसर को तैनात किया गया है। गांव-गांव में कमेटी का गठन किया गया है। 

कोई नहीं रहेगा भूखा
उपराज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में 3.50 लाख पंजीकृत श्रमिक हैं। इनमें से 1.25 लाख प्रदेश में अब भी मौजूद हैं। इनके अलावा बड़ी संख्या में बेसहारा लोगों की पहचान की गई है जिन्हें राशन पहुंचाया जा रहा है। किसी को भूखा नहीं रहने दिया जाएगा।
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कश्मीर में मिले 24 और संक्रमित, प्रदेश में मरीजों की संख्या पहुंची 184, अबतक चार की मौत

जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमण का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आज यानी कि गुरुवार को कश्मीर संभाग में 24 नए संक्रमित मिले हैं। इसके साथ ही अब प्रदेश में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 184 हो गई है। इनमें से 32 मामले जम्मू संभाग के और 152 मामले कश्मीर संभाग के हैं। इससे पहले बुधवार को पहली बार एक ही दिन में सर्वाधिक 33 नए मामले सामने आए थे।

वहीं उधमपुर निवासी कोरोना संक्रमित महिला की मौत भी हुई। 62 वर्षीय महिला को बुधवार सुबह जीएमसी, जम्मू में भर्ती कराया गया था। जहां देर शाम महिला ने दम तोड़ दिया। जम्मू संभाग में कोरोना से यह पहली मौत है। अब तक प्रदेश में मरने वालों की कुल संख्या चार हो गई है।

बुधवार को मिले नए संक्रमितों में तीन जम्मू संभाग के सुजवां के हैं। पीड़ितों में सबसे ज्यादा संख्या तब्लीगी जमात से जुड़े लोगों की बताई जा रही है। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल ने नए मामलों की पुष्टि की है। अधिकारियों ने बताया कि अब तक कश्मीर संभाग में कोरोना संक्रमित तीन मरीजों की मौत हो गई है, जबकि छह मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। इस बीच बुधवार को स्किम्स, सौरा से दो संक्रमित मरीजों को स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
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कश्मीरी विस्थापित कर्मचारियों के लिए ट्रांजिट आवास को मंजूरी, डल-नगीन झील के लिए हाउसबोट नीति भी स्वीकृत

उपराज्यपाल की प्रशासनिक परिषद ने कश्मीर संभाग के शोपियां जिले में कश्मीरी विस्थापित मुलाजिमों के पारगमन आवास (ट्रांजिट एकोमोडेशन) को मंजूरी दे दी है। उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू की अध्यक्षता में आयोजित परिषद की बैठक में ट्रांजिट आवास के लिए 40 कनाल भूमि हस्तांतरण के लिए स्वीकृति भी दे दी गई।

प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कश्मीरी विस्थापित सरकारी कर्मचारियों के लिए आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण विभाग को यह भूमि दी जाएगी। इसके अलावा  एक अन्य फैसले में प्रशासनिक परिषद की बैठक में डल और नगीन झील में हाउस बोट पंजीकरण/ नवीनीकरण/संचालन के लिए नीति को भी मंजूरी दी गई।

प्रशासनिक परिषद ने फैसला लिया कि झीलों और जलमार्ग विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार किए गए डल संरक्षण के रोडमैप को लागू करने के लिए नीति लागू की जाएगी। यह निर्णय दोनों जल निकायों में हाउस बोट के कामकाज, संचालन और टिकाऊ पर्यटन के लिए अनुकूल माहौल तैयार करेगा। उच्च न्यायालय के निर्देशों और डल/नगीन झील पर विशेषज्ञों की समिति (सीओई) द्वारा दिए गए सुझावों का अनुपालन करते हुए सरकार ने दोनों झीलों के संरक्षण के लिए यह कदम उठाया है।

नीति बनने से निदेशक पर्यटन कश्मीर के नेतृत्व वाली सलाहकार समिति का भी गठन किया गया है। अब किसी भी नई हाउसबोट को डल/नगीन झील में निर्माण करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दिशानिर्देशों में सुविधाओं के आधार पर हाउसबोटों को वर्गीकृत करने का प्रावधान किया गया है।
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