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सावन माह में कराएं बाबा बैद्यनाथ का रुद्राभिषेक , होगी मनवांछित फल की प्राप्ति
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कारगिल युद्धः जब विक्रम बत्रा से पाकिस्तानी घुसपैठिया बोला- हमें माधुरी दीक्षित दे दो, ऐसा मिला जवाब

kargil hero Vikram Batra kargil hero Vikram Batra

जम्मू-कश्मीर सरकार ने खोला नौकरी का पिटारा, युवाओं के लिए 1889 पदों का तोहफा, ऐसे करें आवेदन

बेरोजगार युवाओं के लिए नौकरी का पिटारा खोलते हुए प्रदेश सरकार ने 1889 पदों पर भर्ती की अधिसूचना जारी की है। यह पद ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग में अकाउंट असिस्टेंट के हैं। सभी पद जिला स्तरीय हैं। इससे पहले साढ़े आठ हजार चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती की अधिसूचना जारी की गई थी।

जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड की ओर से ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग में अकाउंट असिस्टेंट (पंचायत) की 1889 पोस्ट जारी की गई है। इसके लिए 20 जुलाई से 31 अगस्त तक आवेदन किए जा सकते हैं। इन पदों के लिए 120 अंकों की लिखित परीक्षा होगी। सभी प्रश्न बहुविकल्प के होंगे। आवेदनकर्ताओं के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट को अनिवार्य किया गया है। युवाओं को फार्म के लिए 350 रुपये जमा करवाने होंगे।

बारामुला में सबसे ज्यादा और श्रीनगर में सबसे कम पोस्ट
जम्मू संभाग में किश्तवाड़ 69, डोडा 103, रामबन 71, उधमपुर 103, रियासी 75, कठुआ 109, सांबा 56, जम्मू 124, राजोरी 128 और पुंछ जिले में 100 सीटें जारी की गई हैं। कश्मीर संभाग के कुपवाड़ा के लिए 153, बारामुला 158, बांदीपोरा 74, गांदरबल 66, श्रीनगर 7, बडगाम में 123, पुलवामा 86, शोपियां 55, कुलगाम 83, अंनतनाग के लिए 146 सीटें हैं।

यह होगी आरक्षण व्यवस्था
जनरल वर्ग के लिए 946, आरबीए वर्ग के लिए 196 , एससी वर्ग के लिए 160, एसटी वर्ग के लिए 188, ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 180, एएलसी वर्ग के लिए 73, पीएसपी वर्ग के लिए 73, ओएससी वर्ग के लिए 72 पोस्ट आरक्षित की गई हैं।

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अनुच्छेद 370 हटने से बंद हुई पत्थरबाजी, गिलानी पहले हुर्रियत छोड़ देते तो इतना रक्तपात न होताः कौल

प्रदेश भाजपा के महासचिव अशोक कौल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 स्थायी नहीं था। इसके हटने के बाद घाटी में पत्थरबाजी बंद हो चुकी है। मुठभेड़ स्थलों पर प्रदर्शन नहीं देखने को मिल रहे और न ही नागरिकों की हत्या हो रही है।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर श्रीनगर में उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भी कहा था कि अनुच्छेद 370 अस्थायी है। तत्कालीन कानून मंत्री बीआर आंबेडकर ने भी अनुच्छेद 370 को शामिल नहीं किया था, जिसका अर्थ है कि यह एक अस्थायी अनुच्छेद था। फिर 35-ए कहां से आया। इसे एक राष्ट्रपति अधिसूचना के माध्यम से शामिल किया गया था जो गलत था।

उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रीय दलों ने चाहे वो नेशनल कांफ्रेंस हो या फिर पीडीपी सभी ने सत्ता में रहने के लिए अनुच्छेद 370 और 35-ए को लेकर सियासत ही की। प्रदेश की जनता को बेवकूफ बनाया गया। 70 वर्षों तक अंधकार में रखा गया। सैयद अली शाह गिलानी पर उन्होंने कहा कि अगर पहले हुर्रियत छोड़ने का फैसला लिया होता तो कश्मीर घाटी में शायद ही इतना खून खराबा होता।

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अपनी गाड़ी से आतंकियों को पहुंचाता था दविंदर सिंह, इस तरह पाकिस्तानी अधिकारी ले रहे थे सूचनाएं

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को निलंबित डीएसपी दविंदर सिंह और हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर सैयद नवीद मुश्ताक उर्फ नवीद बाबू समेत छह लोगों के खिलाफ आतंक फैलाने के मामले में आरोपपत्र दाखिल किया।

इसमें कहा गया है कि दविंदर सिंह दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास के चुनिंदा अधिकारियों से सोशल मीडिया के जरिये संपर्क में था। पाकिस्तानी अधिकारी संवेदनशील सूचनाएं लेने में उसका इस्तेमाल करते थे।

जम्मू स्थित एनआईए की स्पेशल कोर्ट में दाखिल आरोपपत्र में ओवर ग्राउंड वर्कर इरफान शफी मीर व रफी अहमद राथर, कारोबारी तनवीर अहमद वानी और नवीद बाबू के भाई सैयद इरफान अहमद का नाम भी शामिल है। कुलगाम जिले के काजीगुंड इलाके में 11 जनवरी को हिजबुल के कमांडर नवीद बाबू, रफी अहमद राथर, डिप्टी एसपी दविंदर सिंह व इरफान शफी मीर उर्फ एडवोकेट को गिरफ्तार किया गया था। 

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जम्मू-कश्मीर: पुलवामा मुठभेड़ में एक आतंकी ढेर, एक जवान शहीद

Suspended DSP Davinder Singh
दक्षिणी कश्मीर में पुलवामा जिले के गोसू इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ चल रही है। मुठभेड़ में एक आतंकी मार गिराया गया है। अभी दो और आतंकियों के घिरे होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, इस मुठभेड़ में सेना का एक जवान भी शहीद हो गया है। फिलहाल मुठभेड़ जारी है।

इससे पहले अज्ञात आतंकियों ने डेलिना पुलिस पोस्ट पर सोमवार शाम को ग्रेनेड फेंका था। इस संबंध में एसएसपी अब्दुल कयूम ने बताया था कि आतंकियों ने जो ग्रेनेड फेंका था, वह बाहर ही फट गया था और कोई नुकसान नहीं हुआ।

ग्रेनेड और कारतूसों के साथ एक गिरफ्तार

वहीं दूसरी ओर, बारामुला में नाका चेकिंग के दौरान पुलिस ने सोमवार को ही एक ओवर ग्राउंड वर्कर को गिरफ्तार किया था। उसके पास से एक ग्रेनेड व असाल्ट राइफल के कारतूस मिले थे। पकड़े गए व्यक्ति की पहचान ताहिर अहमद खेश निवासी बडगाम के रूप में हुई थी। वह हिजबुल मुजाहिदीन के लिए काम कर रहा था।

रविवार को भी किया गया था संघर्ष विराम का उल्लंघन
इससे पहले रविवार रात को हीरानगर सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान ने एक बार फिर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया था। रात करीब 11 बजे से लेकर सोमवार सुबह करीब 4:45 बजे तक गोलाबारी कर सैन्य चौकियों को निशाना बनाया था। 

पाकिस्तान की 25 चिनाब रेंजर्स ने पप्पु चक और जगुवाल पोस्ट से रात भर गोलाबारी करते हुए बीएसएफ की कोठा, चांदवा पोस्ट को निशाना बनाया था। मशीन गन और मोर्टार दोनों का इस्तेमाल कर रात भर गोलाबारी की गई थी। 

हालांकि, गोलाबारी में किसी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था। सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने भी इस ओर से पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देकर गोलाबारी बंद करने पर मजबूर कर दिया था।
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दविंदर सिंह मामले में बड़ा खुलासा, पाकिस्तानी दूतावास लोगों को भड़काने के लिए एडवोकेट को देता था पैसे

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को निलंबित डीएसपी दविंदर सिंह और हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर सैयद नवीद मुश्ताक उर्फ नवीद बाबू समेत छह लोगों के खिलाफ आतंक फैलाने के मामले में आरोपपत्र दाखिल किया। दाखिल आरोपपत्र में ओवर ग्राउंड वर्कर इरफान शफी मीर व रफी अहमद राथर, कारोबारी तनवीर अहमद वानी और नवीद बाबू के भाई सैयद इरफान अहमद का नाम भी शामिल है। कुलगाम जिले के काजीगुंड इलाके में 11 जनवरी को हिजबुल के कमांडर नवीद बाबू, रफी अहमद राथर, डिप्टी एसपी दविंदर सिंह व इरफान शफी मीर उर्फ एडवोकेट को गिरफ्तार किया गया था। 

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जांच में यह बात भी सामने आई कि एडवोकेट ने पाकिस्तान में न केवल हिजबुल के आकाओं से मुलाकात की बल्कि आईएसआई के उमर चीमा, अहसान चौधरी, सोहैल अब्बास व अन्य लोगों से भी मिला। उसे कश्मीर घाटी में आतंकी घटनाओं को बढ़ावा देने के लिए नए हवाला चैनल को शुरू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इतना ही नहीं एडवोकेट दिल्ली में स्थित पाकिस्तानी दूतावास के चुनिंदा अधिकारियों के भी लगातार संपर्क में था।

अधिकारियों की ओर से जम्मू-कश्मीर में सेमिनार कराने के लिए पैसे दिए जाते थे ताकि लोगों को सरकार के खिलाफ भड़काया जा सके। वह पाकिस्तानी दूतावास से निर्देश और पैसे भी प्राप्त करता था। साथ ही पाकिस्तान भेजने के लिए कई कश्मीरियों को वीजा भी दिलवाया था। जांच में यह बात सामने आई कि पाकिस्तान आधारित हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैय्यद सलाहुद्दीन, डिप्टी चीफ आमिर खान, ऑपरेशनल प्रमुख खुर्शीद आलम और वित्त प्रमुख नजर महमूद व अन्य लोग जम्मू-कश्मीर में संगठन के आतंकियों व कमांडर को समर्थन देते रहे हैं।
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