जानिए क्या है निमाटोड, जिससे संकट में है जम्मू-कश्मीर के नत्थाटॉप का आलू

रोहित गुप्ता, जम्मू Updated Fri, 26 Jun 2020 03:06 PM IST
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आलू की फसल
आलू की फसल - फोटो : अमर उजाला

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जम्मू-संभाग का सबसे बड़ा नत्थाटॉप स्थित आलू फार्म दोहरी समस्या से जूझ रहा है। पहले निमाटोड बीमारी और उसके बाद लॉकडाउन ने बीजाई पर भारी असर डाला है। पूरे फार्म पर 45 की जगह मात्र नौ एकड़ में ही आलू की बीजाई हो पाई। दरअसल, विभाग की फार्म में 25 से 30 एकड़ भूमि पर आलू की बीजाई करने की योजना थी, लेकिन कोरोना के चलते बीज की आपूर्ति नहीं हो पाने से नौ एकड़ में ही बीजाई हो पाई है।
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नत्थाटॉप में 2017 में करीब 45 एकड़ भूमि पर आलू लगाया गया था। निमाटोड बीमारी और बीज की उपलब्धता नहीं हो पाने के कारण इसमें लगातार कमी होती जा रही है। बाद के वर्ष में आलू को 25, 12 और अब इस बार सिर्फ नौ एकड़ भूमि में लगाया गया है। निमाटोड बीमारी के बढ़ने के कारण हर साल आलू की फसल को अलग-अलग जगह लगाया जाता है। 
जम्मू संभाग के इन तीनों फार्म से पैदा होने वाला आलू बिश्नाह के कोल्ड स्टोर में रखा जाता है। जम्मू संभाग में साल में दो बार फसल लगाई जाती है। इसमें मैदानी इलाकों में सितंबर-अक्टूबर और पहाड़ी इलाकों में अप्रैल-मई माह में आलू की फसल लगाई जाती है। फार्मों से उत्पादित आलू को किसानों को सब्सिडी पर दिया जाता है।
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यह है निमाटोड

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