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इश्क़ से बढ़ कर कौन हमें दुनियादार बनाता है - शारिक़ कैफ़ी

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इश्क़ से बढ़ कर कौन हमें दुनियादार बनाता है - शारिक़ कैफ़ी

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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मशहूर उर्दू साहित्यकार शारिक कैफी को 'जश्न-ए-अदब-2019' साहित्योत्सव में जश्न-ए-अदब उर्दू' अवार्ड से नवाज़ा गया। वह उर्दू के बड़े शायर हैं उनका जन्म बरेली में 1 जून 1961 को हुआ था। 'जश्न-ए-अदब-2019' में उनके सम्मान के साथ ही उनकी 'पुस्तक- 'देखा क्या भूल गए हम' का विमोचन किया गया।

यह चंद लाइनें मशहूर हैं शारिक़ कैफ़ी की... 

हमीं तक रह गया क़िस्सा हमारा
किसी ने ख़त नहीं खोला हमारा

पढ़ाई चल रही है ज़िंदगी की
अभी उतरा नहीं बस्ता हमारा

मुआ'फ़ी और इतनी सी ख़ता पर
सज़ा से काम चल जाता हमारा

किसी को फिर भी महँगे लग रहे थे
फ़क़त साँसों का ख़र्चा था हमारा
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