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है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है: बशीर बद्र

इरशाद

है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है: बशीर बद्र

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है 
कहीं कारोबार सी दोपहर कहीं बद-मिज़ाज सी शाम है 

यूँही रोज़ मिलने की आरज़ू बड़ी रख-रखाव की गुफ़्तुगू 
ये शराफ़तें नहीं बे-ग़रज़ इसे आप से कोई काम है  आगे पढ़ें

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